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मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय – Maithili Sharan Gupt Biography in Hindi Pdf Download

भारत के साहित्य इतिहास की चर्चा की जाए तो बहुत से ऐसे लेखकार या हिंदी साहित्य के अनभवी कवियों के नाम आइए जिन्होंने भारत के गौरव को और ऊचा कर दिया| ऐसे ही एक कवी है जिन्होंने अपने सकारात्मक काव्य गधो और अपनी रचनाओं से समूचे भारत में अपनी एक अलग पहचान बनाई| मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के जाने माने कवी कहलाए जाते है| उन्होंने अपनी बहुत सी रचनाओं से सभी का दिल जीता था| वे हिंदी साहित्य के कड़ी बोली के बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रथम कवी माने जाते है| आज के इस पोस्ट में हम आपको मैथिलीशरण गुप्त का जन्म, मैथिलीशरण गुप्त जी का जीवन परिचय, कवि मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय, मैथिलीशरण गुप्त की जीवन परिचय आदि की जानकारी देंगे जो की खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों व प्रशंसकों के लिए दिए गए है|

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय हिंदी में

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मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1986 में भारत के उत्तरप्रदेश के जासी में चिरंगाव में हुआ था| बचपन से ही उन्हें हिंदी कविताओं और साहित्य संदर्ब में रूचि थी| उनके पिता जी का नाम सेठ रामचरण कनकने था और माता का नाम कौशिल्या बाई था| मैथिलीशरण गुप्त उनकी तीसरी संतान थी| उनके माता और पिता दोनों वैष्णव थे जो की विष्णु भगवान् के बहुत बड़े भगत थे| विद्यालय के समय उनका ज्यादातर ध्यान खेल कूद में होता था जिसके कारण उनकी पढ़ाई अधूरी छूट गई| पड़े छूट जाने के बाद उन्होंने घर पर ही हिंदी एवं संस्कृत साहित्य का अध्यन करना प्रारम्भ कर दिया|

Maithili Sharan Gupt Biography in Hindi Language

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मुंशी अजमेरी जी को उन्होंने अपना गुरु माँके उनके मार्गदर्शन में हिंदी साहित्य का ज्ञान प्राप्त किया| जब वे 12 वर्ष के थे तो उन्होंने ब्रज की बी भाषा में साहित्य की शुरुवात की| इसी के बीच में उनका संपर्क आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी से भी हुआ जिनसे उन्हें अधिक मार्गदर्शन मिला| प्रारंभ में उनकी कविता का नाम सरस्वती था जो की ब्रज भाषा में प्रकाशित हुई थी| उनका पहला कविता संग्रह “रंग में भंग” तथा इसके बाद “जयद्रथ वध” नामक साहित्य प्रकाशित हुआ| उन्होंने बंगाली में भी बहुत सी साहित्य रचनाए की जो की “मेघनाथ वध” एवं “ब्रजांगना” का अनुवाद है|

मैथिलीशरण गुप्त जीवन परिचय इन हिंदी

गुप्तजी महात्मा गाँधी से बेहद प्रभावित थे| उनके प्रभावित होकर ही उन्होंने स्वादिनता आंदोलन में बाद चढ़कर भाग लिया था| इसी की वजह से उन्हों कुछ समय कारावास में भी बिताए थे| वे संन 1952 व 1957 में राष्ट्रपति द्वारा भारतीय राज्य सभा के सदस्य नियुक्त किये गए| उनको आगरा तथा मानक में दी.लिट् की उपअधी से सम्मानित किया गया था| गाँधी जी उनकी कविताओं से बहुत प्रभावित थे| उन्होंने ही गुप्तजी को राष्ट्रीय कवी की उपाधि नियुक्त की| राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पदमविभूषण से भी सम्मानित किया गया था| 12 दिसम्बर 1964 को मैथिलीशरण गुप्त जी स्वास्थय बिगड़ने के कारण इस संसार को त्याग गए|

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