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आरक्षण एक समस्या पर निबंध – आरक्षण विरोधी लेख- Aarakshan Virodhi Nibandh in Hindi

अगर आज के समय में भारत कोई ऐसी चीज़ है जिसकी वजह से भारत विभिन्न जातियों में बट कर रह गया है तो वो आरक्षण है| आरक्षण जिसे हम रिजर्वेशन भी कहते है अजा के समय में भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य साबित हो गया है| इसके कारण भारत में आई बार दंगे या आंदोलन हुए है जिसकी वजह से भारत की अर्थव्यवस्ता ठप हो गई थी| यह भारत की आज के समय की सबसे बड़ी समस्या है जिसकी वजह से बहुत सी सरकारी वस्तुओ को नुक्सान पहुँचता है| आज के इस पोस्ट में हम आपके लिए आरक्षण हटाओ पर निबंध, आरक्षण के खिलाफ निबंध, आरक्षण विरोध हिंदी निबंध, आदि की जानकारी देंगे|

आरक्षण एक समस्या पर निबंध हिंदी में

भारत में आरक्षण की समस्या बहुत बड़ी है जिसमे कई सामान्य वर्ग व अन्य पिछड़ा वर्ग को काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है| ऐसा लगता हैं आरक्षण की वजह से देश के अन्य जाती प्रमुख लोग पिछड़ रहे हैं| हमारे भारत के लोगों को आगे बढ़ना चाहिए परन्तु यहाँ तो पिछड़ने के लिए लोग लाइन लगाए खड़े मिलते हैं| इस आरक्षण के विरोध में आप आरक्षण विरोधी स्टेटसआरक्षण विरोधी शायरी भी देख सकते हैं |

उच्चतम न्यायालया ने पूछा है कि क्या आरक्षण को अनंतकाल तक जारी रखा जा सकता है अतवा उसकी कोई समय सीमा है? हम सब जानते है कि संविधान निर्माताऔं ने पिछड़ों को अगड़ों के समकक्ष लाने के लिए दस वर्ष तक आरक्षण का प्रावधान किया था, जिसे दस-दस वर्ष तक बढ़ाने के बाद अब उसे अनंत कल तक बनाए रखने की व्यवस्था चल रही है ।
जो आरक्षण प्रारम्भ में संरक्षण की भावना से प्रदान किया गया था, वह अब अधिकार समझा जाने लगा है । इस समझ के कारण कि आरक्षण एक स्थायी व्यवस्था है, उसकी परिधि में शामिल होने का दबाव निरंतर बढ़ता जा रहा है । ऐसे में, न्यायालय के सवाल को एक महत्त्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए ।
आरक्षण के विरोधियों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी करते हुए उनके वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मंडल आयोग की संस्कृति के अनुरूप 1992 में न्यायालय को अपने उस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिसमें कहा गया था कि पिछड़ेपन के लिए जाति को आधार माना जाये । न्यायालय ने उन्हें टोकते हुए कहा कि यह विचार तथ्यात्मक नहीं है ।
न्यायालय के फैसले को उचित ठहराते हुए न्यायाधीश ने मुकुल रोहतगी की बात को सुधारा । न्यायाधीश ने कहा कि उस फैसले में पिछड़ेपन के लिए जाति को एकमात्र आधार नहीं, बल्कि एक आधार के रूप में स्वीकार किया गया था ।

आरक्षण विरोधी निबंध 2018

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आरक्षण विरोधीलेख

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर उच्चतम न्यायालय के इस आदेश ने चौंका दिया कि आरक्षण को किसी न किसी दिन बंद तो होना ही है……अगर यह स्थायी हो गया तो पूरा उद्देश्य ही खत्म हो जायेगा । संविधान लागू होने के बाद से राजनीति, नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जातियों एससी के लिए 15 फीसदी और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए 7.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान जारी है ।
अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार लोकसभा और विधानसभा की सीटें आरक्षित हैं । आरक्षण केवल दस वर्ष के लिए लागू किया गया था । शुरू से ही यह शत – प्रतिशत लागू है । इसके तहत कोई पद रिक्त नहीं छोड़े गए । भारत के विशिष्ट राजनेताओं ने हर दस साल बाद संविधान में संशोधन कर आरक्षण को आगे बढ़ाया ।
सरकारी नौकरियों में दलितों को आरक्षण अनुच्छेद 335 के तहत दिया गया है । केन्द्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों में एससी और एसटी के लिए क्रमश: 15 फीसदी व 75 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है । राज्य सरकारों को दलितों की आबादी के अनुपात में आरक्षण निर्धारित करना था । समस्या यह है कि सरकार ने दलितों का आरक्षण का कोटा कभी नहीं भरा ।
केन्द्रीय सरकार, सार्वजनिक उपक्रम, राष्ट्रीयकृत बैंक और सार्वजनिक बीमा कंपनियों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों में से क्रमश: 11, 10.35, 12.51 और 13.67 प्रतिशत सीटें ही भरी गई । शिक्षण संस्थानों में आरक्षण 1954 में शुरू हुआ । एससी और एसटी के लिए 20 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया, साथ ही संस्थान में प्रवेश के लिए इन वर्गों के लिए विद्यार्थियों को अंकों में पाच फीसदी छूट भी दी गई ।

आरक्षण वास्तव में समाज के उन्हीं लोगों के लिए हितकर (Beneficial) हो सकता है जो अपंग (Phisycally disabled) हैं किंतु शिक्षा और गुण (Quality) होते हुए भी अन्य लोगों से जीवन में पीछे रह जाते हैं । उन गरीब लोगों के लिए भी आरक्षण आवश्यक है जो गुणी होते हुए भी गरीबी में जीवन बिता रहे हैं ।
केवल जाति, धर्म और धन के आधार पर आरक्षण से गुणी व्यक्तियों को पीछे धकेल (Push) कर हम देश को नुकसान ही पहुँचा रहे हैं । यह देश जाति-धर्म, धनी-गरीब आदि आधारों पर और अधिक विभाजित (Divided) होता जा रहा है ।
आज यदि हम देश को उन्नति (Progress) की ओर ले जाना चाहते हैं और देश की एकता बनाये रखना चाहते हैं, तो जरूरी है कि आरक्षणों को हटाकर हम सबको एक समान रूप से शिक्षा दें और अपनी उन्नति का अवसर (Opportunity) पाने का मौका दें ।

आरक्षण पर निबंध इन हिंदी

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आरक्षण एक समस्या पर निबंध

आरक्षण (Reservation) का अर्थ है सुरक्षित करना । हर स्थान पर अपनी जगह सुरक्षित करने या रखने की इच्छा प्रत्येक व्यक्ति को होती है, चाहे वह रेल के डिब्बे में यात्रा करने के लिए हो या किसी अस्पताल में अपनी चिकित्सा कराने के लिए विधानसभा या लोकसभा का चुनाव लड़ने की बात हो तो या किसी सरकारी विभाग में नौकरी पाने की । लोग अनेक तरह की दलीलें (Arguments) देकर अपनी जगह सुनिश्चित करवाने और सामान्य प्रतियोगिता (Common Competition) से अलग रहना चाहते हैं ।
आरक्षण पाने का कोई आधार होना आवश्यक है । रेल, बस आदि में सफर करना हो, तो आरक्षण के लिए किराये म्र छ द्व8 के अलावा कुछ अतिरिक्त राशि (Extra Amount) देना आवश्यक होता है, अन्यथा (Otherwise) आपको भीड़ में या पंक्ति (Queue) में रहना पड़ेगा ।
गारंटी नहीं कि आप यात्रा कर पायेंगे अथवा नहीं । यदि कहीं अस्पताल में आपको चिकित्सा करवानी हो या किसी डॉक्टर से इलाज कराना हो, तो अतिरिक्त राशि दीजिए नहीं तो आपको अच्छी सुविधा या अच्छी चिकित्सा नहीं मिल सकती ।
यदि आप चुनाव में जीतना चाहते हैं तो किसी बड़ी जनसंख्या (Population) वाली जाति या धर्म का होना जरूरी है अथवा किसी आरक्षित जाति का होना जरूरी है । किसी सरकारी विभाग में नौकरी कम अंकों पर (Lower Marks) मिल जाए, इसके लिए भी किसी खास जाति का होना आवश्यक होता है ।

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