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विजय दिवस पर कविता 2018 – Vijay Diwas Poem in Hindi Pdf Download

विजय दिवस हर साल 16 दिसंबर को मनाया जाता है | विजय दिवस 1971 में बांग्लादेश को आज़ादी दिलाने वाली जंग के लिए मनाया जाता है | यह जंग 16 दिसंबर को खत्म हुई थी जिसमे भारत को विजय प्राप्त हुई थी, इसीलिए इस दिन को विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है | इस जंग में पाकिस्तानी फौज गैर-मुस्लिम लोगों को निशाना बना रही थी जिसके चलते भारत इस जंग में कूद पड़ा और पाकिस्तानी फौज को करारी हार दी |

Vijay diwas poem in hindi

हरी भरी धरती हो
नीला आसमान रहे
फहराता तिरँगा,
चाँद तारों के समान रहे।
त्याग शूर वीरता
महानता का मंत्र है
मेरा यह देश
एक अभिनव गणतंत्र है
शांति अमन चैन रहे,
खुशहाली छाये
बच्चों को बूढों को
सबको हर्षाये
हम सबके चेहरो पर
फैली मुस्कान रहे
फहराता तिरँगा चाँद
तारों के समान रहे।

विजय दिवस कविता

आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।
लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।

Vijay diwas poem

Vijay diwas poem in english

In the capital city of our nation, we see a flame,
On India gate where it burns,
With an army hat on a rifle’s frame,
And everybody thinks that he earns,
If he bends his head in privilege,
To salute the soldiers on their martyrdom,
Some from the cities and most from the villages,
There names are carved on the wall of the dome,
Fifteen inches long, fifteen inches wide
This holiest light takes up the place,
And Mrs. Indra Gandhi founded this guide,
For the sake of those hero’s grace,
So what ! If they were not buried or burnt,
But their majestic valour can be learnt..!

Vijay diwas short poem in english

With Himalayas in the north
Indian ocean in the south
Arabian sea in the west
Bay of Bengal in the east.
I love my nation
With developed culture
And beautiful sculpture
The people have no rest
To do their work best.
I love my nation
They give us rice in ration
They dress in latest fashion
They do many inventions
Which are about fiction.
I love my nation
With number of hill station
Which are God’s creation
It give us protection
And save us from tension.

Vijay diwas poem in marathi

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भारत, माझे भारत, जिथे प्रथम मानवी

डोळे स्वर्गीय प्रकाश जागृत झाले!
आशियातील सर्व पवित्र तीर्थस्थान,

महान मातृभूमीचे सामर्थ्य!
जागतिक माता, प्रथम तत्वज्ञान आणि

पवित्र देवता मानवजातीला देणारा,
ज्ञान, माणूस, प्रेम, कार्य, कला,

धर्म उघडलेला दरवाजा.
हे सर्व भव्यतेने अगदी दुःखद झाले

किंवा कडू हानी आणि माईमकडे वळले,
आम्ही तुझ्या मुलांचे नाव दु: खा कसे ठेऊ शकतो?
आमच्या आधीही त्या सोन्याच्या त्या सुंदर दिवसांचे आदर्श तिथेच होते;
आपल्या दृष्टीक्षेपात एक नवीन जग जागृत होते,

प्रेम भारताचे आपण ढासळले पाहिजे.
भारत, माझ्या भारत, आज तुझ्यावर दयाळूपणा

करण्यासाठी काहीतरी सांगण्याची हिम्मत कोणी केली?
आत्म्याच्या आतल्या किरणांची बुद्धी, उपासना, कार्य, आईची आई

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