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Swami Vivekananda Biography – Swami Vivekananda Jayanti

Swami Vivekananda Biography

Swami Vivekananda in hindi : स्वामी विवेकानंद जी साहित्य, दर्शन व इतिहास के प्रकांड विद्वान् थे और इनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकता में हुआ था | स्वामी विवेकानंद जी द्वारा ही राजयोग, योग व ज्ञानयोग जैसे ग्रंथों की रचना की गयी थी | स्वामी जी ने शिकागो में एक बहुत ही चर्चित भाषण दिया था | स्वामी जी द्वारा लिखे गए ग्रंथों ने युवा जगत को नई राह दिखाई है | आइये अब हम आपको स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के बारे में जानकारी प्रदान कराएंगे |

स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म कोलकता में हुआ था | स्वामी विवेकानंद जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त व माता का भुवनेश्वरी देवी था | स्वामी विवेकानंद जी का परिवार कुलीन, धनि व विद्वता के लिए मशहूर था | स्वामी जी के पिता पाश्चात्य सभ्यता में विशवास रखते थे और इसी कारण वह विवेकानंद जी को भी पाश्चात्य सभ्यता के मार्ग पर चलना चाहते थे परन्तु स्वामी विवेकानंद जी का ध्यान परमात्मा व अध्यात्म में बचपन से ही रहा था और इसीलिए वह पहले “ब्रह्म समाज” में गए परन्तु वहां उनका मन संतुष्ट न हुआ | उन्होंने इसी बीच कोलकता यूनिवर्सिटी से अपनी बी.ए पास की व कानून की परीक्षा की तैयारी में लग गए व इसी बीच वह अपने एक संबंधी द्वारा रामकृष्ण परमहंस से मिले और कुछ समय बाद स्वामी जी रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बन गए व वेदांत मत के अनुयायी बन गए | स्वामी जी 1887 से 1892 के बीच भारत-भर्मण पर रहे थे |

Swami Vivekananda Biography hindi

Swami Vivekananda birth

स्वामी विवेकानंद जी का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकता में हुआ था | स्वामी विवेकानंद जी के पिता का नाम विश्वनाथ दत्त तथा माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था | स्वामी विवेकानंद जी के पिता कोलकता हाई कोर्ट में अटोर्नी एट लॉ थे व वकालत भी करते थे | स्वामी जी के पिता एक बेहद ही उदार व गरीब के लिए सहानुभूति रखने वाले व्यक्ति थे | वह धार्मिक व सामाजिक विषयों के लिए व्यहवारिक व रचनात्मिक नजरिया रखते थे | स्वामी जी की माता एक धार्मिक महिला थी | स्वामी विवेकानंद जी बचपन से ही तीव्र बुद्धि के रहे थे व उनका ध्यान परमात्मा व अध्यात्म में बचपन से ही रहा था |

Swami Vivekananda story in hindi

स्वामी विवेकानंद जी का वास्तविक नाम नरेंद्र दत्त था | स्वामी विवेकानंद जी योग व वेदांत को पश्चिम संस्कृति में प्रचलित करने के लिए अपना योगदान देना चाहते थे | स्वामी विवेकानंद जी ने अमेरिका के शिकागो में 1893 में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। स्वामी विवेकानन्द के कारण ही भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में पहुंच पाया। स्वामी विवेकानंद जी 4 जुलाई, 1902 को हमारे बीच से चले गए थे | स्वामी विवेकानंद जी एक ऐसे महापुरूष थे जिनके विचार, अध्यात्मिक ज्ञान, सांस्कृतिक अनुभव हर किसी को प्रभावित करते है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा भरता है और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है | स्वामी जी हमेशा भाईचारे व प्रेम की शिक्षा देते थे और उनका भी यही मानना था की इन्ही सिद्धांतों पर चलकर मनुष्य अपने जीवन को सरल बना सकता है |

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