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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबंध 2018 – Essay on Netaji Subhas Chandra Bose in Hindi- सुभाष चंद्र बोस एस्से

इस साल नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की 121वीं जन्म वर्षगांठ हैं यानी की जयंती है| इस साल नेताजी की जयंती 23 जनवरी 2018 (मंगलवार) को मनाई जाएगी| अक्सर स्कूल के बच्चो को कहा जाता है की नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबंध व सुभाष चंद्र बोस जीवनी के ऊपर कुछ लाइन लिखें यानी की few sentences on Netaji Subash Chanra Bose in Hindi & English. आज हम आपके सामने नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर निबंध (निबन्ध) पेश करने जा रहे हैं जिसे आप पीडीऍफ़ में डाउनलोड कर सकते हैं| आइये देखें कुछ subhash chandra bose ke upar nibandh jo की hindi language, composition, short paragraph, hindi font यानी की हिंदी भाषा में होगी|नेताजी को हमारा शत-शत नमन, जय हिन्द! जय भारत! भारत माता की जय!

सुभाष चन्द्र बोस निबंध 100 शब्द  (100 words)

Essay on Netaji Subhas Chandra Bose in Hindi- सुभाष चंद्र बोस एस्से


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ और इनका निधन 18 अगस्त 1945 में हुआ था। जब इनकी मृत्यु हुयी तो ये केवल 48 वर्ष के थे। वो एक महान भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की आजादी के लिये द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बड़ी हिम्मत से लड़ा था। नेताजी 1920 और 1930 के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्वच्छंदभाव, युवा और कोर नेता थे। वो 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष बने हालांकि 1939 में उन्हें हटा दिया गया था। नेताजी भारत के एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने बहुत संघर्ष किया और एक बड़ी भारतीय आबादी को स्वतंत्रता संघर्ष के लिये प्रेरित किया।
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का व्यक्तित्व और कृतित्व

नेताजी की जयंती के उपलक्ष में हमने सुभाष चंद्र बोस के बारे में जानकारी दी हुई है| सुभाष चन्द्र बोस जयंती की जानकारी में आप उनके जीवन परिचय को जान सकते हैं| नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का आहवान – तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा!


नेताजी सुभाष चन्द्र का जन्म 23 जनवरी, 1897 में कटक ( उड़ीसा ) में हुआ । वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखते थे । 1920 में वह उन गिने – चुने भारतीयों में से एक थे, जिन्होंने आई.सी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण की । 1921 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने । पुन: 1939 त्रिपुरा सेशन कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये ।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारतीय राष्ट्रीय संग्राम में सबसे अधिक प्रेरणा के स्रोत रहे हैं । यह वह व्यक्ति हैं जिन्होने कहा था, ” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” और इस नारे के तुरन्त बाद सभी जाति और धर्मों के लोग खून बहाने के लिए आ खड़े हो गए । इतना अधिक वह लोग अपने नेता से प्रेम रखते थे और उनके मन में नेताजी के लिए श्रद्धा थी ।
उनके पिता जानकीनाथ एक प्रसिद्ध वकील थे और ऊनकी माता प्रभा देवी धार्मिक थीं। सुभाष चन्द्र बोस बचपन से ही मेधावी छात्र थे । उन्होंने कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया । कॉलेज में रहते हुए भी वह स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेते रहे जिसके कारण उन्हें कॉलेज से निकाल दिया ।
एक बार तो उन्होंने अपने इग्लिश अध्यापक की भारत के विरूद्ध की गयी टिप्पणी का कड़ा विरोध किया । जब उनको कॉलेज से निकाल दिया गया तब आशुतोष मुखजीं ने उनका दाखिला ‘ स्कोटिश चर्च कॉलेज ‘ में कराया । जहाँ से उन्होंने दर्शनशास्त्र में प्रथम श्रेणी में बी.ए. पास किया ।
उसके बाद वह भारतीय नागरिक सेवा की परीक्षा में बैठने के लिए लंदन गए और उस परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया । साथ ही साथ उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में एम.ए. किया । क्योंकि वह एक राष्ट्रवादी थे इसलिए ब्रिटिश अंग्रेजों के राज्य में काम करने से इनकार कर दिया ।
उसके तत्पश्चात् उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय संग्राम में भाग लेना प्रारम्भ कर दिया । उन्होंने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में देशबंधु चितरंजनदास के सहायक के रूप में कई बार स्वयं को गिरफ्तार कराया । कुछ दिनों के बाद उनका स्वास्थ्य भी गिर गया । परन्तु उनकी दृढ इच्छा शक्ति में कोई अन्तर नहीं आया ।
उनके अन्दर राष्ट्रीय भावना इतनी जटिल थी कि दूसरे विश्वयुद्ध में उन्होंने भारत छोड़ने का फैसला किया । वह जर्मन चले गए और वहाँ से फिर 1943 में सिंगापुर गए जहाँ उन्होंने इण्डियन नेशनल आर्मी की कमान संभाली ।
जापान और जर्मनी की सहायता से…
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Short Essay on Subash Chandra Bose (150 words)

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व:


सुभाष चन्द्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी और देशभक्त थे। इनका जन्म एक अमीर हिन्दू कायस्थ परिवार में 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ। ये जानकीनाथ बोस (पिता) और प्रभावती देवी (माता) के पुत्र थे। अपनी माता-पिता के 14 संतानों में से ये 9वीं संतान थे। इन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा कटक से ली जबकि मैट्रिकुलेशन डिग्री कलकत्ता से और बी.ए. की डिग्री कलकत्ता यूनिवर्सिटी (1918 में) से प्राप्त की।
आगे की पढ़ाई के लिये 1919 में बोस इंग्लैंड चले गये। नेताजी चितरंजन दास (एक बंगाली राजनीतिक नेता) से बहुत ज्यादा प्रभावित थे और जल्द ही भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से जुड़ गये। स्वराज नामक एक समाचार पत्र के माध्यम से उन्होंने लोगों के सामने अपने विचार प्रकट करना शुरु किये। उन्होंने ब्रिटिश शासन की खिलाफ़त की और भारतीय राजनीति में रुचि रखने लगे। सक्रिय भागीदारी के कारण, इन्हें ऑल इंडिया युवा कांग्रेस अध्यक्ष और बंगाल राज्य कांग्रेस के सेक्रेटरी के रुप में चुना गया। इन्होंने अपने जीवन में बहुत सारी कठिनाईयों का सामना किया लेकिन कभी-भी निराश नहीं हुए।
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Subhash Chandra Bose Nibandh in Hindi Pdf Download

सुभाष चन्द्र बोस शिक्षा: आप हमारे द्वारा दर्शाये हुए essay on Netaji Shubas Chandra Bose in Hindi language स्टूडेंट्स के लिए 100, 150, 250, 350, 400 व 450 words (शब्दों) में देख व pdf डाउनलोड कर सकते हैं| ये एस्से छोटे बच्चो Kids को स्कूलों में पढ़ाया जाता है तथा उसमे हर क्लास के बच्चे subhash chandra bose पर निबंध in hindi for class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 और 12 इस तरह से इंटरनेट पर सर्च करते है व स्कूलों ले प्रोग्राम में भाग लेते है, आइये देखे कुछ निबंध|आप चाहे तो सुभाष चंद्र बोस पर कविता भी देख सकते हैं|


सुभाष चन्द्र बोस देश के एक महान और बहादुर नेता थे जो अपने कड़े संघर्षों की वजह से नेताजी के नाम से प्रसिद्ध हुए। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 में एक हिन्दू परिवार में कटक में हुआ था। वो अपने बचपन से ही बहुत बहादुर और प्रतिभाशाली थे साथ ही शारीरिक रुप से भी वो बहुत मजबूत थे। वो हमेशा हिंसा में भरोसा करते थे और एक बार तो उन्होंने अपने यूरोपियन स्कूल प्रोफेसर की पिटाई कर दी थी। बाद में सजा के रुप में उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। 1918 में इन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से प्रथम स्थान में बी.ए. की परीक्षा पास की और आगे की पढ़ाई के लिये इंग्लैंड के कैंब्रिज़ यूनिवर्सिटी चले गये। वो हमेशा एक उच्च अधिकारी के रुप में अपने देश की सेवा करना चाहते थे।
ब्रिटिश शासन से आजादी के लिये अपने देश की सेवा करने के लिये, ये कांग्रेस के आंदोलन से जुड़ गये। 1939 में उन्हें कांग्रेस के अध्यक्ष के रुप में चुना गया लेकिन बाद में कांग्रेस नीतियों के साथ भिन्नता होने के कारण हटा दिये गये। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वो भारत से फरार हो गये और जर्मनी से मदद के लिये कहा, जहाँ हिटलर के द्वारा दो वर्ष के लिये उन्हें मिलिट्री ट्रेनिंग दी गयी। वहाँ उन्होंने जर्मनी, इटली और जापान से युद्ध के कैदियों और भारतीय रहवासियों को प्रशिक्षण के द्वारा अपनी भारतीय राष्ट्रीय सेना बनायी। अच्छे मनोबल और अनुशासन के साथ एक सच्ची भारतीय राष्ट्रीय सेना (अर्थात् आजाद हिन्द फौज) बनाने में वो सफल हुए।
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Subhash Chandra Bose Marathi Nibandh – सुभाष चंद्र बोस पर मराठी निबंध

नेताजी सुभाष चंद्र बोस मराठी माहितीलिखें:

Subhash Chandra Nose par Nibandh In Hindi Language

आप Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9 तक के निबंधों को यहाँ से जान सकते है| साथ ही आप  सुभाष चन्द्र बोस के अनमोल वचन व सुभाष चंद्र बोस पर शायरी 2018 भी देख सकते हैं |

भारतीय इतिहास में सुभाष चन्द्र बोस एक सबसे महान व्यक्ति और बहादुर स्वतंत्रता सेनानी थे। भारत के इतिहास में स्वतंत्रता संघर्ष के लिये दिया गया उनका महान योगदान अविस्मरणीय हैं। वो वास्तव में भारत के एक सच्चे बहादुर हीरो थे जिसने अपनी मातृभूमि की खातिर अपना घर और आराम त्याग दिया था। वो हमेशा हिंसा में भरोसा करते थे और ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाने के लिये सैन्य विद्रोह का रास्ता चुना।


उनका जन्म एक समृद्ध हिन्दू परिवार में 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। उनके पिता जानकी नाथ बोस थे जो एक सफल बैरिस्टर थे और माँ प्रभावती देवी एक गृहिणी थी। एक बार उन्हें ब्रिटिश प्रिसिंपल के ऊपर हमले में शामिल होने के कारण कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज से निकाल दिया गया था। उन्होंने प्रतिभाशाली ढंग से आई.सी.एस की परीक्षा को पास किया था लेकिन उसको छोड़कर भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ने के लिये 1921 में असहयोग आंदोलन से जुड़ गये।
नेताजी ने चितरंजन दास के साथ काम किया जो बंगाल के एक राजनीतिक नेता, शिक्षक और बंगलार कथा नाम के बंगाल सप्ताहिक में पत्रकार थे। बाद में वो बंगाल कांग्रेस के वालंटियर कमांडेंट, नेशनल कॉलेज के प्रिंसीपल, कलकत्ता के मेयर और उसके बाद निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रुप में नियुक्त किये गये। अपनी राष्ट्रवादी क्रियाकलापों के लिये उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा लेकिन वो इससे न कभी थके और ना ही निराश हुए। नेताजी कांग्रेस के अध्यक्ष के रुप में चुने गये थे लेकिन कुछ राजनीतिक मतभेदों के चलते गांधी जी के द्वारा उनका विरोध किया गया था। वो पूर्वी एशिया की तरफ चले गये जहाँ भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिये उन्होंने अपनी “आजाद हिन्द फौज” को तैयार किया।
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सुभाष चंद्र बोस निबंध – Long Essay


नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को कटक, ओडिशा, भारत में हुआ था। उनकी माता का नाम प्रभावती देवी था। उनके पिता जानकीनाथ एक वकील थे। सुभाष चन्द्र बोस एक सच्चे सेनानी थे। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में उनका विशेष योगदान रहा। उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए आज़ाद हिन्द फ़ौज़ का गठन किया। उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी का नेतृत्व किया। सुभाष चन्द्र बोस ने महात्मा गांधी के विचारों के विपरीत हिंसक दृष्टिकोण को अपनाया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के लिए क्रन्तिकारी और हिंसक तरीके की वकालत की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर आल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक की स्थापना की।नेता जी सुभाष चन्द्र बोस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्होंने जनता के बीच राष्ट्रीय एकता, बलिदान और सांप्रदायिक सौहार्द की भावना को जागृत किया। उनकी याद में प्रति वर्ष उनके जन्मदिन 23 जनवरी को 'देश प्रेम दिवस' के रूप में मनाया जाता है। देश प्रेम दिवस का दिन फारवर्ड ब्लाक की पार्टी के सदस्यों के बीच एक भव्य तरीके से मनाया जाता है। सभी जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों में भी इस दिन को मनाया जाता है। विभिन्न गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस दिन रक्त शिविरों का आयोजन किया जाता है। इस दिन स्कूल और कालेजों में विभिन्न गतिविधियों जैसे प्रदर्शनी, क्विज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।
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नेताजी सुभाष चन्द्र बोस पर निबंध यूट्यूब वीडियो

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