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Shiva Tandav Stotram | शिव तांडव स्तोत्र हिंदी अर्थ सहित

शिव तांडव स्त्रोतम

Shiv Tandav Strotam या  lord shiva tandav stotram रावण के द्वारा इसका निर्माण हुआ। इस आर्टिकल के माध्यम से आप कई प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जेसे who wrote shiva tandava stotram,shiv tandav stotra in hindi, shiv tandav stotra in sanskrit ओर शिव तांडव स्तोत्र के साथ शिव के तांडव श्लोक के लाभ भी उठा सकते हैं ।

आपके लिए  शिव तांडव स्तोत्र हिंदी अनुवाद में भी उपलब्ध है ओर साथ ही आप शिव तांडव स्तोत्र मराठी में भी पढ़ सकते हैं। shiva tandava stotram lyrics मन को छु लेने वाली हैं इसको सुनने मात्र से ही मन प्रसन्न हो जाता हैं।शिव तांडव स्तोत्रम आप download भी कर सकते हैं ओर साथ ही इसकी  pdf भी  आसानी से पढ़ सकते हैं।आप अपने प्रियों को शिव के ऊपर शायरी और shubhkamnayein भी देख सकते हैं।

What is Shiva Tandava Stotram?

यह स्तोत्रं महान विद्वान ओर शिव के परम भक्त रावण के द्वारा विरचित है।इसकी सुंदर भाषा ओर काव्य शैली के कारण यह स्त्रोत बहुत प्रसिद्ध है। यह शिव भक्तों में बहुत ही प्रचिलित है।यह पंचचामर छन्द में आबद्ध है।इसके अनुप्रास ओर समास भाषा संगीतमय ध्वनि ओर प्रवाह के वजह से फेमस हैं।
शिव तांडव स्त्रोत से शिव को बहुत प्रसन्नता होती है ओर इसी खुशी के कारण उन्होंने सुख,समृद्धि,सिद्धि से परिपूर्ण सोने की लंका को वरदान के रूप में दिया ओर इसके अलावा सम्पूर्ण ज्ञान,विज्ञान तथा अमर होने का भी वरदान दिया।

शिव तांडव स्तोत्र हिंदी मै | Shiva Tandava Stotra Meaning

Shiva Tandava Stotra (Sanskrit: शिवताण्डवस्तोत्र, romanized: śiva-tāṇḍava-stotra) एक ऐसा स्त्रोत है (Hindu hymn) जो  Shiva‘s की शक्ति ओर सुंदरता को दर्शाता हैं।यह लंका पति रावण से जुड़ा हुआ है जिनको असुरों के raja से भी जाना जाता है ओर वो महान शिव भक्त भी थे।Ravan ने इन मंत्र का जाप 1000 वर्ष तक किया था। शिव स्तुति करने से सभी भक्तों की बड़ी से बड़ी परेशानी,दूर हो जाती है। वह धन दौलत से परिपूर्ण हो जाता है ओर साथ ही रचनात्मकता ओर कलतामकता से भी निपुण हो जाता है। शिव के कुछ भक्तों को aghroi भी बोल जाता है ।

शिव  Tandav  Dances:

  1. Rudra Tandav
  2. Ananda Tandav
  3. Tripura Tandav
  4. Sandhya Tandav
  5. Samhara Tandav
  6. Kalika Tandav
  7. Uma Tandav
  8. Gauri Tandav

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रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र | Shiva Tandava Stotram by Ravana


शिव ताण्डव स्तोत्र जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्‌। डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥१॥
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jatatavi gala jjala pravaha pavita sthale gale’ valambya lambitam bhujanga tunga malikam। damaddama ddama ddama ninadavaddamarvayam chakara chanda tandavam tanotu nah shivah shivama ॥1॥
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जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि। धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥२॥
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jata kataha sambhrama bhrama nnilimpa nirjari vilola vichi vallari viraja mana murdhani । dhagaddhagaddhaga jjvalalla lata patta pavake kishora chandra shekhare ratih pratikshanam mamam ॥2॥
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धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे। कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥
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dhara dharendra nandini vilasa bandhu vandhura- sphuradriganta santati pramoda mana manase । kripa kataksha dharani niruddha durdha rapadi kavachidvigambare mano vinodametu vastuni ॥3॥
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जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे। मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥४॥
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jata bhujam gapingala sphuratphana mani prabha- kadamba kunkuma drava pralipta digva dhumukhe । madandha sindhura sphuratvaguttari yamedure mano vinoda dbhutam bimbhartu bhuta bhartari ॥4॥
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सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः। भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥
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भगवान को खुश करने अथवा उनकी आराधना करने के लिए शिव भक्त उनके शिव चालीसा का जाप करते हैं। घरों और मंदिरों में उनकी आरती की जाती हैं ।


sahasra lochana prabhritya shesha lekha shekhara- prasuna dhuli dhorani vidhu saranghri pithabhuh । bhujanga raja malaya nibaddha jata jutakah shriye chiraya jayatam chakora bandhu shekharah ॥5॥
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ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌। सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥
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lalata chatvarajvaladdhananjayasphurigabha- nipitapanchasayakam nimannilimpanayam । sudha mayukha lekhaya virajamanashekharam maha kapali sampade shirojayalamastu nah ॥6॥
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करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके। धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥
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karala bhala pattikadhagaddhagaddhagajjvala- ddhananjaya dharikritaprachandapanchasayake । dharadharendra nandini kuchagrachitrapatraka- prakalpanaikashilpini trilochane matirmama ॥7॥
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नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः। निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥
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navina megha mandali niruddhadurdharasphura- tkuhu nishithinitamah prabandhabandhukandharah । nilimpanirjari dharastanotu kritti sindhurah kalanidhanabandhurah shriyam jaganddhurandharah ॥8॥
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प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌। स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥
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praphulla nila pankaja prapanchakalimachchhata- vidambi kanthakandha raruchi prabandhakandharam smarachchhidam purachchhinda bhavachchhidam makhachchhidam gajachchhidandhakachchhidam tamantakachchhidam bhaje ॥9॥
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अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌। स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥
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agarva sarvamangala kalakadambamanjari- rasapravaha madhuri vijrimbhana madhuvratam । smarantakam puratakam bhavantakam makhantakam gajantakandhakantakam tamantakantakam bhaje ॥10॥
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जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्। धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥
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jayatvadabhravibhrama bhramadbhujangamasphura- ddhagaddhagadvi nirgamatkarala bhala havyavat- dhimiddhimiddhimi nannridangatungamangala- dhvanikramapravartita prachanda tandavah shivah ॥11॥
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दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः। तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥
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शिव के ऊपर बहुत सी प्रसिद्ध कविताएँ लिखी जा चुकी हैं जिससे पढ़कर शिव भक्ति का आनंद उठा सकते हैं । शिवरात्रि के दिन घरों में shiv puja की जाती हैं । स्कूल, कॉलेज में एस्से काम्पिटिशन होता हैं ।


drishadvichitratalpayorbhujanga mauktikamasrajo- rgarishtharatnaloshtayoh suhridvipakshapakshayoh । trinaravindachakshushoh prajamahimahendrayoh samam pravartayanmanah kada sadashivam bhaje ॥12॥
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कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌। विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥
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kada nilimpanirjari nikujakotare vasan vimuktadurmatih sada shirahsthamanjalim vahan। vimuktalolalochano lalamabhalalagnakah shiveti mantramuchcharankada sukhi bhavanyaham॥13॥
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निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः। तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥१४॥
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nilimpa nathanagari kadamba maulamallika- nigumphanirbhaksharanma dhushnikamanoharah । tanotu no manomudam vinodinimmahanisham parishraya param padam tadangajatvisham chayah ॥14॥
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प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना। विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥१५॥
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prachanda vadavanala prabha shubha pracharani mahashtasiddhikamini janavahuta jalpana । vimukta vama lochano vivahakalikadhvanih shiveti mantrabhushago jagajjayaya jayatam ॥15॥
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इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌। हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनांं सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥
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imam hi nityameva muktamuktamottama stavam pathansmaran bruvannaro vishuddhameti santatam। hare gurau subhaktimashu yati nanyatha gatim vimohanam hi dehana tu shankarasya chintanama ॥16॥
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पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे। तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥१७॥
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puja’vasanasamaye dashavakratragitam yah shambhupujanamidam pathati pradoshe । tasya sthiram rathagajendraturangayuktam lakshmi sadaiva sumukhim pradadati shambhuh ॥
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॥ इति रावणकृतं शिव ताण्डवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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Idhi Shiv Tandav Stotram Sampoornam
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शिव_इमेज_3

How to Learn Shiva Tandava Stotram | Powerful

यह स्त्रोत महादेव की शक्तियों का वर्णन करता है ,उनकी सुंदरता,वीरता  के बारे मे बताता हैं।यह मंत्र सभी मंत्रों में सबसे प्रथम श्रेणी पर है।इसमे 16 शब्दांश हैं,जिसमे 16 शब्द प्रति पंक्ति हैं।इसके साथ ही इसमे अनुप्रास भी है जो उच्चारण ओर इससे सुनने वाले के अंदर लहरे गूँजती हैं। यह शिव भक्त रावण के द्वारा गई गई है।इसके छन्द बहुत ही मधुर हैं।   

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