लाल बहादुर शास्त्री पर कविता 2018 – Poem on Lal Bahadur Shastri in Hindi – Lal Bahadur Shastri Ji Par Kavita

Poem_on Lal Bahadur Shastri in Hindi
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लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2018: लाल बहादुर शास्त्री 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, उत्तर प्रदेश में जन्मे थे | वह अपनी शिक्षा समाप्त करने के बाद भारत सेवक संघ से जुड़ गये और देशसेवा का प्रण लेते हुए यहीं से अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत कर दी। शास्त्रीजी ने अपना सारा जीवन सादगी से बिताया और उसे गरीबों की सेवा में लगा दिया। उन्हें 1964 में देश के लिए उनकी प्रतिभा और निष्ठा को देखते हुए प्रधानमंत्री का पद दिया गया | इनका निधन 11 जनवरी, 1966 को हो गया |  आज के इस पोस्ट में हम आपको poems on lal bahadur shastri in hindi व लाल बहादुर शास्त्री पोएम इन हिंदी, आदि की जानकारी हिंदी, इंग्लिश, मराठी, तेलगु, बांग्ला, गुजराती, तमिल आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल में लाल बहादुर शास्त्री जयंती के लिए प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

लाल बहादुर शास्त्री पर कविता

पैदा हुआ उसी दिन,
जिस दिन बापू ने था जन्म लिया
भारत-पाक युद्ध में जिसने
तोड़ दिया दुनिया का भ्रम।

एक रहा है भारत सब दिन,
सदा रहेगा एक।
युगों-युगों से रहे हैं इसमें
भाषा-भाव अनेक।

आस्था और विश्वास अनेकों
होते हैं मानव के।
लेकिन मानवता मानव की
रही सदा ही नेक।
कद से छोटा था लेकिन था
कर्म से बड़ा महान।
हो सकता है कौन, गुनो वह
संस्कृति की संतान।

लाल बहादुर शास्त्री जयंती कविता

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एक थे लाल और एक थे बापू ,
कहाँ हैं अब ऐसे लाल और बापू ,
दोनों ने जीवन ,सर्वस्व किया ,नौछावर ,
अपनी इस जननी की खातिर ,
आओ मिलकर दिया जलाएं ,
जन्मदिन उनका मनाएँ ,
सुख ,समृधि का जो देखा उन्होंने सपना ,
उसको पूरा करने का क्योँ न ले प्रण अपना |
प्यारे बापू प्यारे शास्त्री जी ,
धन्यभाग हमारे ,
जो हम इस धरती पर आए ,
जहां ऐसे कर्णधार हमने हैं पाये |
अपने कर्मठ अमर सपूतों को ,
उनके पसीने की एक एक बूंदों को
क्योँ न याद करे हम दोनों को ,
भावबिह्वलहोकर दोनों को
इस धरा के अमर सपूतों को ,
एक ने बोला जय जवान -जय किसान ,
दूसरे बोले रघुपति राघव राजा राम
दोनों की थी एक ही बोली ,
देश हमारा खेले होली(रंगों की),
क्योँ न बोलें हम ये आज ,
भारत ,बन जाए हम सबकी शान |

लाल बहादुर शास्त्री पर कविता

Lal Bahadur Shastri in Hindi Poem

लालों में वह लाल बहादुर,
भारत माता का वह प्यारा।
कष्ट अनेकों सहकर जिसने,
निज जीवन का रूप संवारा।

तपा तपा श्रम की ज्वाला में,
उस साधक ने अपना जीवन।
बना लिया सच्चे अर्थों में,
निर्मल तथा कांतिमय कुंदन।

सच्चरित्र औ’ त्याग-मूर्ति था,
नहीं चाहता था आडम्बर।
निर्धनता उसने देखी थी,
दया दिखाता था निर्धन पर।

नहीं युद्ध से घबराता था,
विश्व-शांति का वह दीवाना।
इसी शांति की बलवेदी पर,
उसे ज्ञात था मर-मिट जाना।

Lal Bahadur Shastri par Kavita

जीवन के सूखे मरुथल में,
झेले ये झंझावात कई।
जितनी बाधा, कंटक आते,
उनसे वे पाते, शक्ति नई।

विश्वासी, धर्मनिष्ठ, कर्मठ,
निज देशप्रेम से, ओतप्रोत।
सामर्थ्य हिमालय से ऊंची,
मन में जलती थी, ज्ञान-जोत।

थे, कद से, छोटे से, दिखते,
थे, कोटि-कोटि जन के प्यारे।
थे, लाल बहादुर शास्त्री वे,
थे, इस धरती के रखवारे।
उनके ही दृढ़ अनुशासन से,
वह ‘पाक’ हिन्द से हारा था।
‘जय जवान’ और ‘जय किसान’
यह उनका ही तो नारा था।

गए ताशकंद में शांति हेतु,
चिर शांति वहीं पर प्राप्त हुई।
सोया है लाल बहादुर अब,
यह खबर वहीं से प्राप्त हुई।

Lal Bahadur Shastri Poem in Hindi

2 अक्टूबर को जन्म लिया था,
नाम लाल बहादुर शास्त्री था,
कद में भले ही छोटे थे वो,
पर गुणों में बहुत महान थे,
सादा जीवन उच्च विचार,
यही उनकी पहचान थे,
गाँधीवादी विचारधारा के ,
वो सच्चे अनुगामी थे,
आजादी की लड़ाई के
वो सक्रीय योगदानी थे,
अपने श्रेष्ठ कर्मो के कारण,
वो भारत की शान थे,
उनकी देशभक्ति और कर्मनिष्ठा,
पर पूरे देश को अभिमान है,
जन्मदिन के शुभ अवसर,
उनको कोटि कोटि प्रणाम है।।

Short poems on Lal Bahadur Shastri in English

Shastri Lalbahadur,
As soft as butter,
But as hard as steel.
He was/is for peace,
But march forward in war.
He won/win the hearts
Of farmers and also
That of soldiers.

Shastri Lalbahadur,
Knew well we are all
In the theater and
We are to play our parts
To save others.
Individual identity has
Nothing to do,
But to establish the truth.

Truth is our land,
Truth is our sovereignty,
Truth is we are free,
And free to do anything
For all welfare.
Each man is the ambassador
Of peace and each one
Reflects his own eyes.

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