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किसान दिवस 2018 पर निबंध – Kisan Divas Essay in Hindi & English Pdf Download

kisan diwas 2018: भारत किसानों की भूमि है। इसे इसलिए कहा जाता है क्योंकि अधिकांश भारतीय कृषि गतिविधियों में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होते हैं। भारत के पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरण सिंह के सम्मान में राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। राष्ट्रीय उत्साह दिवस देश भर में उत्साह और रुचि के साथ मनाया जाता है। इस दिन, घटना के जश्न मनाने के लिए कृषि के आसपास कई बहस, घटनाएं, सेमिनार, कार्य और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है।

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किसान दिवस कब मनाया जाता है: किसान दिवस हर साल राष्ट्रीय किसान दिवस 23 दिसंबर को मनाया जाता है।

त्याग और तपस्या का दूसरा नाम है किसान । वह जीवन भर मिट्‌टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करता रहता है । तपती धूप, कड़ाके की ठंड तथा मूसलाधार बारिश भी उसकी इस साधना को तोड़ नहीं पाते । हमारे देश की लगभग सत्तर प्रतिशत आबादी आज भी गांवों में निवास करती है । जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि है ।
एक कहावत है कि भारत की आत्मा किसान है जो गांवों में निवास करते हैं । किसान हमें खाद्यान्न देने के अलावा भारतीय संस्कृति और सभ्यता को भी सहेज कर रखे हुए हैं । यही कारण है कि शहरों की अपेक्षा गांवों में भारतीय संस्कृति और सभ्यता अधिक देखने को मिलती है । किसान की कृषि ही शक्ति है और यही उसकी भक्ति है ।
वर्तमान संदर्भ में हमारे देश में किसान आधुनिक विष्णु है । वह देशभर को अन्न, फल, साग, सब्जी आदि दे रहा है लेकिन बदले में उसे उसका पारिश्रमिक तक नहीं मिल पा रहा है । प्राचीन काल से लेकर अब तक किसान का जीवन अभावों में ही गुजरा है । किसान मेहनती होने के साथ-साथ सादा जीवन व्यतीत करने वाला होता है ।
समय अभाव के कारण उसकी आवश्यकतायें भी बहुत सीमित होती हैं । उसकी सबसे बड़ी आवश्यकता पानी है । यदि समय पर वर्षा नहीं होती है तो किसान उदास हो जाता है । इनकी दिनचर्या रोजाना एक सी ही रहती है । किसान ब्रह्ममुहूर्त में सजग प्रहरी की भांति जग उठता है । वह घर में नहीं सोकर वहां सोता है जहां उसका पशुधन होता है ।
उठते ही पशुधन की सेवा, इसके पश्चात अपनी कर्मभूमि खेत की ओर उसके पैर खुद-ब-खुद उठ जाते हैं । उसका स्नान, भोजन तथा विश्राम आदि जो कुछ भी होता है वह एकान्त वनस्थली में होता है । वह दिनभर कठोर परिश्रम करता है । स्नान भोजन आदि अक्सर वह खेतों पर ही करता है । सांझ ढलते समय वह कंधे पर हल रख बैलों को हांकता हुआ घर लौटता है ।
कर्मभूमि में काम करने के दौरान किसान चिलचिलाती धूप के दौरान तनिक भी विचलित नहीं होता । इसी तरह मूसलाधार बारिश या फिर कड़ाके की ठंड की परवाह किये बगैर किसान अपने कृषि कार्य में जुटा रहता है । किसान के जीवन में विश्राम के लिए कोई जगह नहीं है ।
वह निरंतर अपने कार्य में लगा रहता है । कैसी भी बाधा उसे अपने कर्तव्यों से डिगा नहीं सकती । अभाव का जीवन व्यतीत करने के बावजूद वह संतोषी प्रवृत्ति का होता है । इतना सब कुछ करने के बाद भी वह अपने जीवन की आवश्यकतायें पूरी नहीं कर पाता । अभाव में उत्पन्न होने वाला किसान अभाव में जीता है और अभाव में इस संसार से विदा ले लेता है ।
अशिक्षा, अंधविश्वास तथा समाज में व्याप्त कुरीतियां उसके साथी हैं । सरकारी कर्मचारी, बड़े जमीदार, बिचौलिया तथा व्यापारी उसके दुश्मन हैं, जो जीवन भर उसका शोषण करते रहते हैं । आज से पैंतीस वर्ष पहले के किसान और आज के किसान में बहुत अंतर आया है । स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात किसान के चेहरे पर कुछ खुशी देखने को मिली है ।
अब कभी-कभी उसके मलिन-मुख पर भी ताजगी दिखाई देने लगती है । जमीदारों के शोषण से तो उसे मुक्ति मिल ही चुकी है परन्तु वह आज भी पूर्ण रूप से सुखी नहीं है । आज भी 20 या 25 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिनके पास दो समय का भोजन नहीं है । शरीर ढकने के लिए कपड़े नहीं हैं । टूटे-फूटे मकान और टूटी हुई झोपड़ियाँ आज भी उनके महल बने हुए हैं ।
हालांकि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से किसान के जीवन में कुछ खुशियां लौटी हैं । सरकार ने ही किसानों की ओर ध्यान देना शुरू किया है । उनके अभावों को कम करने के प्रयास में कई योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं । किसानों को समय-समय पर गांवों में ही कार्यशाला आयोजित कर कृषि विशेषज्ञों द्वारा कृषि क्षेत्र में हुए नये अनुसंधानों की जानकारी दी जा रही है ।
इसके अलावा उन्हें रियायती दर पर उच्च स्तर के बीज, आधुनिक कृषि यंत्र, खाद आदि उपलब्ध कराये जा रहे हैं । उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने व व्यवसायिक खेती करने के लिए सरकार की ओर से बहुत कम ब्याज दर पर ऋण मुहैया कराया जा रहा है ।
खेतों में सिंचाई के लिए नहरों व नलकूपों का निर्माण कराया जा रहा है । उन्हें शिक्षित करने के लिए गांवों में रात्रिकालीन स्कूल खोले जा रहे हैं । इन सब कारणों के चलते किसान के जीवन स्तर में काफी सुधार आया है । उसकी आर्थिक स्थिति भी काफी हद तक सुदृढ़ हुई है ।

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भारत एक कृषि प्रधान देश है । हमारी सम्पन्नता हमारे कृषि उत्पादन पर निर्भर करती है । इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये भारतीय कृषक की एक बड़ी भूमिका है । वास्तव में भारत कृषकों की भूमि है । हमारी 75% जनता गांवों में रहती है ।
भारतीय किसान का सर्वत्र सम्मान होता है । वह ही सम्पूर्ण भारतवासियों के लिए अन्न एवं सब्जियाँ उत्पन्न करता है । पूरा वर्ष भारतीय कृषक खेत जोतने बीज बोने एव फसल उगाने में व्यस्त रहता है । वास्तव में उसका जीवन अत्यन्त व्यस्त होता है ।
वह प्रात: तड़के उठता है और अपने हल एव बैल लेकर खेतों की ओर चला जाता है । वह घन्टों खेत जोतता है । तत्पश्चात नाश्ता करता है । उसके घर-परिवार के सदस्य उसके लिये खेत में खाना लाते हैं । उसका खाना बहुत साधारण होता है ।
इसमें अधिकतर चपाती (रोटी) अचार एवं लस्सी (छाछ) होती है । खाने के पश्चात् पुन: वह अपने काम में व्यस्त हो जाता है । वह कठिन परिश्रम करता है । किन्तु कठिन परिश्रम के पश्चात भी उसे बहुत कम लाभ होता है । वह अपनी उपज को बाजार में बहुत कम दामों पर बेचता है ।
कृषक बहुत सादा जीवन जीता है । उसका पहनावा ग्रामीण होता है । वह फूस के झोपड़ी में रहता है हालांकि पँजाब हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के बहुत से कृषकों के पक्के मकान भी हैं । उसकी सम्पत्ति कुछ बैल हल एवं कुछ एकड़ धरती ही होती है । वह अधिकतर अभावों का जीवन जीता है ।
एक कृषक राष्ट्र की आत्मा होता है । हमारे दिवंगत राष्ट्रपति श्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया था ‘जय किसान जय जवान’ । उन्होंने कहा था कि कृषक राष्ट्र का अन्नदाता है । उसी पर कृषि उत्पादन निर्भर करता है । उन्हें कृषि के सभी आधुनिकतम यंत्र एव उपयोगी रसायन उपलब्ध कराने चाहिये ताकि वह अधिक उत्पादन कर सके ।

kisan divas farmer’s day essay

National Farmers Day or Kisan Diwas is celebrated in the honor of Chaudhary Charan Singh who was the fifth Prime Minister of India. He served the country as Prime Minister for a very short tenure starting from 28th of July 1979 till 14th January 1980. He was a very simple-minded man and led an extremely simple life. During his tenure as the Prime Minister, he introduced many policies to improve the life of Indian farmers.
The magnetic personality of Chaudhary Charan Singh and various beneficial policies in the favor of farmers united all the farmers of India against the landlords and moneylenders. He followed the famous slogan ‘Jai Jawan Jai Kisan’ given by the 2nd Prime Minister of India. Chaudhary Charan Singh was also a very successful writer and wrote down several books depicting his thoughts on farmers and their problems; he even came out with various solutions to improve the lives of farmers.
Chaudhary Charan belonged to the farmer’s family and thus he led an extremely simple life despite being the honorable Prime Minister of India. India is primarily the land of villages and majority of the population living in villages are farmers and agriculture is the main source of income for them. 70% of the Indian population still today thrives on the income generated through cultivation. India witnesses an interesting farming journey.
The green revolution during the 60s evolved in Punjab and Haryana transformed the agricultural picture of the country. This increased the productivity and thus India became self-sufficient in various agro-commodities.
Farmers are the spine of India. The nation of lands, India celebrates Nationals Farmer’s Day every year on 23rd of December to pay honor to the great work done by the farmers of our country.
Chaudhary Charan Singh was the Jat icon and belonged to a peasant family. This was the reason he could relate himself with the issues of the farmers and therefore, he did the best to support them. When he became the Prime Minister of India in July 1979 he made many changes to improve the lives of the farmers. This is also an interesting fact that as the Prime Minister of India, Chaudhary Charan Singh never visited the Lok Sabha. He also served as the Deputy Prime Minister during the reign of Morarji Desai.
He introduced Budget 1979 which was designed to accomplish the needs of the farmers in all respects. It had several policies in favor of Indian farmers. These initiatives of the great Kisan leader boost the confidence of all the farmers and gave them strength to stand together against the landlords and moneylenders. The Agricultural Produce was the famous Market Bill introduced by Chaudhary Charan Singh in the Assembly. The Bill was meant to safeguard the wellbeing of the farmers against the greediness of the dealers and the landlords. The Zamindari Abolition Act was also introduced and enforced by him.
The famous “Kishan Ghat” in New Delhi is dedicated to Chaudhary Charan Singh due to his involvement with the causes related to farmer’s communities in the North. He was an avid writer too and wrote down his thoughts on farmers and problems related to them along with the solutions. Chaudhary Charan Singh died on 29 May 1987.

किसान दिवस पर लेख

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किसान माटी के समृत होते हैं। वे मिट्‌टी से सोना उपजाते हैं। वे अपने श्रम से संसार का पेट भरते हैं। वे अधिक पढ़े-लिखे नहीं होते परंतु उन्हें खेती की बारीकियों का ज्ञान होता है । वे मौसम के बदलते मिजाज को पहचान कर तदनुसार नीति निर्धारित करने में दक्ष होते हैं । सचमुच प्रकृति के सहचर होते हैं हमारे किसान ।
किसानों का मुख्य पेशा कृषि है । पशुपालन उनका सहायक पेशा है । पशु कृषि कार्य में उनका सहयोग करते हैं । बैल उनका हल और गाड़ी खींचते हैं । गाय उनके लिए दूध, गोबर और बछडे देती है । वे भैंस, बकरी आदि भी पालते हैं जिनसे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है । इन पालतू पशुओं को पालने में उन्हें विशेष कठिनाई नहीं होती क्योंकि ये कृषि उत्पादों यथा पुआल, भूसा, खली, अनाज खाकर जीवित रहते हैं । पशुओं के लिए घास खेतों और बागानों से उपलब्ध हो जाता है ।
किसान बहुत परिश्रमी होते हैं । वे खेतों में जी-तोड़ श्रम करते हैं । वे मेहनत करके अनाज, फल और सब्जियाँ उगाते हैं । खेतों में फसल उगाने के लिए अच्छी तरह जुते हुए खेतों में बीज डाला जाता है । बीजों में अंकुर निकल आता है और धीरे- धीरे ये पौधे का रूप ले लेते हैं । पौधों की सिंचाई की जाती है । पौधों के बीच उग आए खर-पतवार निकालकर खेतों में खाद डाला जाता है । आवश्यकता पड़ने पर किसान कीटनाशकों का प्रयोग भी करते हैं ।
लहलहाती फसलों को देखकर किसान प्रसन्न हो उठते हैं । वे फसलों की लगातार निगरानी करते हैं । फसलों को पशुओं और चोरों से सुरक्षित रखने के लिए वे खेतों में मचान बनाकर वहीं सोते हैं । पकी फसलों की कटाई की जाती है, तत्पश्चात् उनसे अनाज के दाने निकाले जाते हैं । अनाज का भूसा मवेशियों के भोजन के लिए सुरक्षित रख लिया जाता है । जरूरत भर का अनाज और सब्जी घर में रखकर शेष मंडियों में बेच देते हैं । इनसे हुई आमदनी से उनका साल भर का गुजारा होता है ।
हमारे देश के किसानों को कृषि कार्य में विभिन्न प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है । सबसे बड़ी समस्या है कृषि में आने वाली लागत जो दिनों-दिन बढ़ती चली जा रही है । किसानों को अच्छे बीज खरीदने पड़ते हैं जो बहुत महँगे दामों में मिलते हैं । ट्रैक्टरों या हल-बैल से खेत की जुताई भी आसान नहीं होती । खेतों में सिंचाई के लिए बिजली या पंपसैट की आवश्यकता होती है ।
किसानों को कृषि कार्य में अन्य मजदूरों की सेवाएँ लेनी पड़ती है जिसके बदले उन्हें धन व्यय करना पड़ता है । फसल कटाई से लेकर मंडियों में पहुँचाने तक काफी खर्चा आता है । इतना सब कुछ करने के बाद यदि मंडी में फसल की उचित कीमत न मिले तो वे निराश और हताश हो जाते हैं । उन्हें कर्ज लेकर अगली फसल बोने की तैयारी करनी पड़ती है ।
भारतीय किसानों को प्रकृति से लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है । चूंकि हमारे देश में दो-तिहाई कृषि वर्षा और मानसून पर आधारित है इसलिए किसानों को कभी सूखा
तो कभी बाद की स्थिति झेलनी पड़ती है । सूखा होने पर फसल सूख जाती है तो बाद में फसल बह जाती है । यदि इंद्रदेव कृपालु भी बने रहें तो फसलों को ओला, पाला और तूफान से खतरा । पकी फसलों पर ओले पड़ गए तो सब गुड़-गोबर हो गया । दाने खेतों में ही झड़ गए ।
समय पर धूप न निकली तो फसलों पर कीटाणुओं का प्रकोप हो गया । फिर भी प्रकृति से लड़ते-भिड़ते किसान देश भर की आवश्यकताओं के अनुरूप खाद्‌यान्न उत्पादित कर ही लेते हैं । भारतीय किसान कृषि की उन्नत एवं आधुनिक वैज्ञानिक कृषि का अनुसरण करने लगे हैं जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है । बीज, खाद एवं कृषि उपकरण खरीदने में उन्हें सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है । सरकार उनके लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराती है और समय-समय पर ऋण माफ भी कर देती है ।
भारतीय किसान का जीवन सीधा-सादा होता है । वह प्रात : काल उठकर पशुओं को खाना देता है और खेतों में चला जाता है । वह खेतों में डटकर काम करता है । वह खेतों में ही रोटी, छाछ, सलाद आदि नाश्ता करता है । खेतों में उपजी फलियाँ उसे बहुत पसंद हैं । दूध-दही से युक्त भोजन उसे प्रिय है । हरी-ताजी सब्जियाँ उसके तन-मन को संतुष्ट करती हैं । वह गन्ने का रस छक कर पीता है । रोटी, दाल, चावल, साग जिस समय जो मिल जाए उन्हें भूख लगने पर बड़े चाव से खाता है । उसका पहनावा भी सरल होता है । धोती-कुर्ता पायजामा, लुंगी, बनियान आदि पहने, पाँवों में चप्पल धारण किए, सिर पर पगड़ी बाँधे और हाथों में डंडा लिए वह हरित क्रांति का अग्रदूत नजर आता है ।

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