Bal Gangadhar Tilak Speech in Hindi & Marathi – Speech on Lokmanya Tilak in English Pdf Download

Bal gangadhar tilak punyatithi speech: बाल गंगाधर तिलक का जन्म केशव गंगाधर तिलक के नाम से हुआ था| वे हमारे भारत देश के महान राष्ट्रवादी, शिक्षक, सामाजिक सुधारक व स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले नेता के रूप में भी श्रेय दिया जाता है। उन्हें प्यार से ‘लोकमान्य’ भी कहा जाता था जिसका अर्थ है ‘लोगों द्वारा स्वीकारा गया ‘। आज 1 अगस्त को उनकी 98वीं पुण्यतिथि है। बाल गंगाधर तिलक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख और सबसे सक्रिय नेता भी थे और उन्हें महात्मा गांधी और सरदार वल्लभाई पटेल जैसे बाद के नेताओं के लिए मार्ग प्रशस्त करने का श्रेय दिया जाता है।आज उनकी पुण्यतिथि पर आइये देखें bal gangadhar tilak speech, bal gangadhar tilak speech in marathi, bal gangadhar tilak speech video, bal gangadhar tilak speech for school इन मराठी, हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के स्पीच प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये स्पीच कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है

Speech on bal gangadhar tilak

बाल गंगाधर तिलक पहले नेता थे जिन्होंने ‘स्वराज’ या आत्म-शासन की वकालत की थी। अंग्रेजों को भारतीय लोगों को संगठित करने में तिलक की पहुंच से इतनी धमकी दी गई कि उन्होंने उन्हें ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहा। तिलक ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अपने पेपर केसरी में भड़काऊ लेख लिखा जो मराठी में प्रकाशित हुआ था। अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है बाल गंगाधर पर स्पीच लिखें| जो की Lokmanya Tilak Yanchi Mahiti, bal gangadhar tilak small speech, bal gangadhar tilak famous speech, bal gangadhar tilak speech in hindi, Lokmanya Tilak Bhashan, short speech on bal gangadhar tilak, बाल गंगाधर तिलक पर निबंध, lokmanya tilak speech, bal gangadhar tilak death anniversary,  स्पीच कम्पटीशन (speech recitation activity) निश्चित रूप से आयोजन समारोह या बहस प्रतियोगिता (debate competition) यानी स्कूल कार्यक्रम में स्कूल या कॉलेज में भाषण में भाग लेने में छात्रों की सहायता करेंगे। इन बाल गंगाधर पर हिंदी स्पीच हिंदी में 100 words, 150 words, 200 words, 400 words जिसे आप pdf download भी कर सकते हैं|

Bal Gangadhar Tilak/ Lokmanya Tilak / बाल गंगाधर तिलक भारत माता के ऐसे वीर सपूत थे जिन्होंने अपने लेखों के लिये छह वर्षों की जेल की यातना उठाई. जब उन्होंने यह महसूस किया कि भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की रफ़्तार धीमी पर रही है तो जेल से लौटकर उन्होंने 1916 में Home Rule की स्थापना की. प्रस्तुत speech/भाषण उन्होंने 1917 में होम रूल की स्थापना की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर दिया था.

Bal Gangadhar Tilak Speech –  ‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ वाला भाषण

मैं स्वाभाव से जवान हूँ, भले ही शरीर से वृद्ध हो चुका हूँ. मैं युवावस्था के इस विशेषाधिकार को गवाना नहीं चाहता. जो कुछ भी आज मैं कहने जा रहा हूँ, वह सर्वदा तरुण है. शरीर भले ही वृद्ध, जर्जर और नाश हो सकता है लेकिन आत्मा अमर होती है. इसी तरह यदि हमारे स्वराज्य के क्रिया कलापों में स्पष्ट तौर से गति में कमी आ जाती है तब अंतरात्मा की स्वतंत्रता जो कि शाश्वत और अविनाशी है वह पीछे छूट जायेगी और यही हमारी आजादी को सुनिश्चित करेगी. स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है. जबतक यह मुझमें जागृत रहेगा, मैं वृद्ध नहीं हूँ. इस भावना को न कोई हथियार काट सकता है और न ही अग्नि जला सकती है, न जल भिंगो सकता है और न ही हवा सूखा सकती है. हमलोग स्वराज्य की मांग करते हैं और हम लोग इसे अवश्य प्राप्त करेंगे.

राजनीति का विज्ञान वही है जो स्वराज्य से समाप्त होता है न कि बह जो दासता से ख़तम होता है. राजनीति का विज्ञान ही देश का वेद है, आपकी आत्मा है और मैं इसे सिर्फ जागृत करना चाहता हूँ. मैं उस अंधविश्वास को समाप्त करना चाहता हूँ जो अज्ञानी, धूर्त और स्वार्थी लोगों के द्वारा धारण किया गया है.
राजनीति के विज्ञान के दो भाग हैं. प्रथम भाग ईश्वरीय और दूसरा भाग शैतानिक है. किसी राष्ट्र की दासता का निर्माण दूसरा भाग करता है. राजनीति के शैतानिक भाग का कोई औचित्य नहीं हो सकता है. वह राष्ट्र जो इसे उचित करार देता है, ईश्वर की नजर में पाप का भागी है. कुछ लोग साहस करते हैं और कुछ लोग साहस नहीं करते हैं, उन चीजों की घोषणा करने के लिये जो उनके लिये हानिकारक होती है. राजनीतिक और धार्मिक शिक्षण इसी सिद्धांत का ज्ञान देने में शामिल है. धार्मिक और राजनीतिक शिक्षण पृथक नहीं हैं यद्यपि कि वे ऐसा प्रतीत होते हैं विदेशी शासन के कारण. सभी दर्शन राजनीति विज्ञान में शामिल हैं.

स्वराज्य का अर्थ कौन नहीं जानता. कौन नहीं इसे चाहता. क्या आप यह पसंद करेंगे कि मैं आपके घर में प्रवेश कर जाऊं और आपके रसोई घर पर अधिकार जमा लूँ? मुझे घरेलू मामले की व्यवस्था का अधिकार अवश्य है. हम लोग को कहा गया कि हम स्वराज्य के काबिल नहीं हैं. एक शताब्दी के व्यतीत हो जाने के बाद भी अंग्रेजी हुकूमत हम लोगों को स्वराज्य के योग्य नहीं मानती. अब हमलोग खुद को योग्य बनाने के लिये खुद ही प्रयास करेंगे. असंगत बहानेबाजी प्रदान करना, किसी प्रकार के लालच का प्रतिकार करना और दूसरे को ऐसा मौका प्रदान करना अंग्रेजी राजनीति को कलंकित करने के सामान है, इंग्लैंड भारत की मदद से बेल्जियम जैसे छोटे से राज्य को बचाने की कोशिश कर रहा है.
तब यह कैसे कहा जाता है कि हमारे देश में स्वराज्य नहीं है? वे लोग जो हम में दोष ढूंढते हैं, वे लालची लोग हैं. लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो सर्व दयावान ईश्वर में भी दोष ढूंढ़ लेते हैं. हम लोगों को अवश्य ही किसी की चिंता किये बगैर राष्ट्र की आत्मा को बचाने के लिये कठिन परिश्रम करना चाहिए. हमारे देश की भलाई इसी जन्मसिद्ध अधिकार की रक्षा करने में है. कांग्रेस ने इस स्वराज्य को पाने का प्रस्ताव पारित किया है.

व्यवहारिक राजनीति में हमारे स्वराज्य की इच्छा का प्रतिकार करने के लिये कुछ तुच्छ आपत्तियां उठाई जाती हैं. हमारे अधिकांश लोगों की निरक्षरता उन आपत्तियों में से एक है, परन्तु मेरे विचारानुसार उसे अपने मार्ग में बाधा के तौर पर नहीं आने देना चाहिए. हम लोगों के लिये यह कहना पर्याप्त होगा कि हमारे देश के निरक्षर लोगों के पास मात्र स्वराज्य की स्पष्ट विचारधारा है, उसी तरह से जैसे ईश्वर के बारे में उनकी अस्पष्ट धारणा है.
वे लोग जो अपने निजी मामलों को कुशलतापूर्वक निबटा लेते हैं, वे अशिक्षित हो सकते हैं किन्तु मुर्ख नहीं हो सकते. वे उतने ही बुद्धिजीवी होते हैं जितना कि एक शिक्षित व्यक्ति. और अगर वे तत्क्षण मुद्दों को समझ सकते हैं तो उन्हें स्वराज्य के सिद्धांत को समझने में या उसे ग्रहण करने में कोई कठिनाई नहीं होती है. अगर निरक्षरता सभ्य कानून की दृष्टि में अयोग्यता नहीं है तो अकारण प्रकृति के नियम में ऐसा क्यों होना चाहिए?

अशिक्षित लोग भी हमारे भाई हैं और उन्हें भी यही अधिकार हैं और वे भी इसी भावना से प्रेरित हैं. अतएव हमलोग हमने कर्तव्य से आबद्ध हैं कि हम लोगों को जागरूक करें. परिस्थितियाँ बदल गयी हैं और अनुकूल हैं. आवाज उठ रही है कि ‘अभी नहीं तो कभी नहीं.’ ईमानदारी और संवैधानिक आन्दोलन अकेले नहीं हैं जो आप लोगों से उम्मीद की गयी हैं. पीछे नहीं हटें और आत्मविश्वास के साथ अंतिम मुद्दे को प्रभु के हाथों में सौंप दें.

 Bal Gangadhar Tilak Speech in Hindi

Speech on bal gangadhar tilak in hindi

बाल गंगाधर तिलक का जन्म एक सुसंस्कृत मध्यम वर्ग के ब्राह्मण परिवार में 23 जुलाई 1856 में रत्नागिरी, महाराष्ट्र, भारत में हुआ था। क्योंकि उनका जन्म महाराष्ट्र राज्य के तटीय क्षेत्र में हुआ था उन्होंने अपने जीवन के पहले 10 साल वहां रहे थे। बाल गंगाधर तिलक जी के पिता एक शिक्षक और विख्यात व्याकरणकर्ता थे जिन्हें बाद में पूना में नौकरी मिले जिसके कारण उनका परिवार वहां रहने लगे।

बाल गंगाधर तिलक के पिता का नाम श्री गंगाधर तिलक और माता का नाम पार्वतीबाई गंगाधर था। लोकमान्य तिलक जी ने गणित और संस्कृत में अपनी बैचलर डिग्री(BACHELOR DEGREE) पूना(POONA) के डेक्कन कॉलेज(DECCAN COLLEGE) से 1876 में पूरी की थी। उसके बाद उन्होंने 1879 में बंबई यूनिवर्सिटी(UNIVERSITY OF BOMBAY) से अपनी कानून की पढाई पूरी की थी उसके साथ-साथ वह पूना के एक प्राइवेट स्कूल में गणित के अध्यापक के रूप में कार्य करते थे।

इसी स्कूल से उनके जीवन का राजनीतिक करियर शुरू हुआ और उन्होंने 1884 में डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी (DECCAN EDUCATION SOCIETY) को शुरू करने के बाद उस स्कूल को एक यूनिवर्सिटी के रूप में बदल दिया। उन्होंने उस समय के युवाओं को अंग्रेजी शिक्षा देने पर जोर दिया। उनके समाज़ के सभी लोगों से निस्वार्थ सेवा के आदर्श का पालन करने की उम्मीद थी परन्तु जब पता चला कि कुछ सदस्य स्वयं के फायदे के लिए इससे जुड़े हुए हैं तो उन्होंने सोसाइटी को छोड़ दिया।

उसके बाद उन्होंने केसरी (KESARI) और अंग्रेज़ी में दी महरत्ता (THE MAHRATTA) नाम के दो समाचार पत्रों का प्रकाशन कार्य शुरू किया। उन दोनों अख़बारों के कारण से तिलक ब्रिटिश शासन के उन कट्टर आलोचनाओं और उदार राष्ट्रवादियों के लिए व्यापक रूप से जाने जाते थे जिन्होंने पश्चिमी देशों के साथ सामाजिक सुधारों की वकालत की और संवैधानिक सीमाओं के साथ राजनीतिक सुधारों का समर्थन किया।

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लोकमान्य तिलक भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के उन अमर तथा श्रेष्ठ बलिदानियों में गिने जाते हैं, जो अपनी उग्रवादी चेतना, विचारधारा, साहस, बुद्धि व अटूट देशभक्ति के लिए जाने जाते हैं । उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व एक ऐसे संघर्ष की कहानी है, जिसने भारत में एक नये युग का निर्माण किया ।

भारतवासियों को एकता और संघर्ष का ऐसा पाठ सिखाया कि वे स्वराज्य हेतु संगठित हो उठे । वे एक राजनेता ही नहीं, महान् विद्वान, दार्शनिक भी थे । स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है का नारा बुलन्द करने वाले तिलक स्वाधीनता के पुजारी थे ।

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था । उनके दादाजी केशवरावजी पेशवा राज्य में उच्च पद पर आसीन थे । अंग्रेज सरकार द्वारा पेशवा राज्य के विघटन के बाद उनकी पारिवारिक स्थिति अच्छी न थी ।

तिलक के पिता गंगाधर पंत अध्यापक थे । उन्होंने बाल गंगाधर को संस्कृत, मराठी, गणित का अच्छा ज्ञान घर पर ही करा दिया था । वे 1866 में पूना के स्कूल में भर्ती हुए । उनकी स्मरणशक्ति अदभुत थी । संस्कृत के सहस्त्रों श्लोक उन्हें कण्ठस्थ थे । अपनी निर्भीक प्रवृत्ति के कारण वे अध्यापकों से हमेशा उलझ जाया करते थे ।

1871 को 15 वर्ष की आयु में उनका विवाह तापीबाई से हो गया । 1873 में तिलक ने डेकन कॉलेज में प्रवेश ले लिया । दुर्भाग्यवश वे अनुतीर्ण हो गये । 1876 में उन्होंने प्रथम श्रेणी में बी०ए० तथा 1876 में कानून की परीक्षा पास की । एम०ए० की परीक्षा में वे दो बार अनुत्तीर्ण रहे ।

तिलकजी का भारतीय राजनीति में प्रवेश 1880 में हुआ । उन्होंने बलवन्त वासुदेव फडके की सहायता से विद्रोह का झण्डा फहराकर ब्रिटिश शासन के प्रति अपना विरोध प्रकट किया । तिलक ने जनता को लार्ड रिपन के विचारों से अवगत कराया । सन् 1880 में पूना में न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना की । इस तरह शिक्षा के क्षेत्र में अपने कार्य की शुरुआत की ।

1881 में पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश कर मराठा केसरी पत्रिका का संचालन किया । इसके माध्यम से जनजागरण व देशी रियासतों का पक्ष प्रस्तुत किया । ब्रिटिश सरकार की आलोचना के कारण उन्हें चार वर्ष का कारावास भोगना पड़ा । जेल से बाहर आकर उन्होंने डैकन एजूकेशन सोसायटी की स्थापना तथा फग्यूर्सन कॉलेज की स्थापना की । सन् 1888-89 में शराबबन्दी, नशाबन्दी व भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाते हुए पत्रों के माध्यम से कार्रवाई की ।

बाल गंगाधर तिलक स्पीच

बाल गंगाधर तिलक को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का जनक माना जाता है| वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे| वह एक समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, राष्ट्रीय नेता के साथ-साथ भारतीय इतिहास, संस्कृत, हिन्दू धर्म, गणित और खगोल विज्ञानं जैसे विषयों के विद्वान भी थे| बाल गंगाधर तिलक ‘लोकमान्य’ के नाम से भी जाने जाते थे| स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनके नारे ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर रहूँगा’ ने लाखों भारतियों को प्रेरित किया|

बाल गंगाधर तिलक का जन्म २३ जुलाई १८५६ को महाराष्ट्र के रत्नागिरी के एक चित्पवन ब्राह्मण कुल में हुआ था| उनके पिता गंगाधर रामचन्द्र तिलक संस्कृत के विद्वान और एक प्रख्यात शिक्षक थे| तिलक एक प्रतिभाशाली विद्यार्थी थे और गणित विषय से उनको खास लगाव था| बचपन से ही वे अन्याय के घोर विरोधी थे और अपनी बात बिना हिचक के साफ़-साफ कह जाते थे| आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने वाले पहली पीढ़ी के भारतीय युवाओं में से एक तिलक भी थे|

जब बालक तिलक महज १० साल के थे तब उनके पिता का स्थानांतरण रत्नागिरी से पुणे हो गया| इस तबादले से उनके जीवन में भी बहुत परिवर्तन आया| उनका दाखिला पुणे के एंग्लो-वर्नाकुलर स्कूल में हुआ और उन्हें उस समय के कुछ जाने-माने शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त हुई| पुणे आने के तुरंत बाद उनके माँ का देहांत हो गया और जब तिलक १६ साल के थे तब उनके पिता भी चल बसे| तिलक जब मैट्रिकुलेशन में पढ़ रहे थे उसी समय उनका विवाह एक १० वर्षीय कन्या सत्यभामा से करा दिया गया| मैट्रिकुलेशन की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने डेक्कन कॉलेज में दाखिला लिया| सन १८७७ में बाल गंगाधर तिलक ने बी. ए. की परीक्षा गणित विषय में प्रथम श्रेणी के साथ उत्तीर्ण किया। आगे जा कर उन्होंने अपनी पढाई जारी रखते हुए एल. एल. बी. डिग्री भी प्राप्त किया|

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बाळ गंगाधर टिळक पुण्यतिथी

बाळ गंगाधर टिळक हे एक भारतीय स्वातंत्र्यसैनिक होते ज्यांनी स्वातंत्र्य चळवळीत महत्त्वाची भूमिका बजावली.

टिळक यांचा जन्म 23 जुलै 1856 रोजी महाराष्ट्रातील रत्नागिरी गावात झाला. त्यांचे वडील एक सांस्क्रेट शिक्षक होते. टिळक हे भारतातील पहिल्या पिढीतील एक होते ज्यांनी पदवी प्राप्त केली.

1871 मध्ये टिळकांनी सत्यभामाभाईशी लग्न केले. त्यांनी एका खाजगी शाळेत गणित शिकवणे सुरु केले.

टिळक नुसार, अध्यात्म जगिक जीवनापासून घटस्फोट घेतलेला नाही. त्यांनी भगवद्गीतापासून आपले प्रेरणा मिळवली, ज्याला त्यांनी मानवतेसाठी निःस्वार्थ सेवा शिकवण्याचा विश्वास ठेवला.

ते म्हणाले, “मी भारताला माझ्या मातृभूमी आणि माझी देवी म्हणून ओळखतो, भारतातील माझे नातेवाईक आणि त्यांचे राजकीय आणि सामाजिक स्वातंत्र्य माझे सर्वात जास्त धर्म आणि कर्तव्ये म्हणून निष्ठावान व दृढ श्रद्धा ठेवतात.”

नंतर त्यांनी भगवद्गीता रास्यास नावाच्या कामावर एक टिप्पणी लिहिली.

सामाजिक कार्याचा आपल्या जीवनाचा ध्येय बनविणे, टिळक यांनी ‘डेक्कन एज्युकेशन सोसायटी’ ही पुण्यातील महाविद्यालयीन मित्रांसोबत भारतातील शिक्षणाची गुणवत्ता सुधारण्याच्या उद्देशाने स्थापना केली.

1890 मध्ये टिळक भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेसमध्ये सामील झाले आणि ते स्वातंत्र्य चळवळीचा भाग बनले. त्याचा मुख्य उद्देश ब्रिटिशांविरुद्ध संघटित करणे हा होता. त्यांनी गृहशास्त्रीय मोहिमेत मोहम्मद अली जिन्नासोबत काम केले.

त्यांना लवकरच ‘लोकमान्य’, लोक अर्थ, ‘जग’ आणि ‘मनिया’ हे पद स्वीकारण्यात आले. समाजातील सर्व घटकांनी त्यांचे नेते म्हणून स्वीकारले.

स्वातंत्र्यासाठी जनतेला उठवण्यातील यशस्वी प्रयत्नांबद्दल त्यांना ब्रिटिशांनी ‘भारतीय अशांती चळवळीचे जनक’ म्हणून संबोधले.

बिपिन चंद्र पाल आणि लाला लजपत राय यांच्यासह, दोन स्वतंत्र स्वातंत्र्यसेनानी, बाळ गंगाधर टिळक हे त्रिकुटाचे एक भाग झाले, ज्यांनी ‘बाल पाल लाल’ असे एकत्रितपणे नाव दिले.

194 9 साली टिळक यांनी स्थानिक गणेशोत्सव साजरा करण्याचा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित केला. त्यांचा उत्सव पुन्हा उत्सव साजरा करून लोकांना एकत्रित करणे हे होते.

1979 मध्ये टिळक यांनी स्पष्टीकरण केले,

“स्वराज माझे जन्मसिद्ध अधिकार आहे आणि मी ते करेल.”

ही घोषणा आजही भारताच्या चेतनाशी जोडली गेली आहे. या निर्णयासाठी सरकारने एक स्टॅप जारी केला आहे.

इंग्रजांकडून स्वराज्याची तळमळ तीलकांच्या आवाजात वाढली, प्रत्येक सामान्य माणसाच्या मनात आणि एकत्रितपणे संपूर्ण लोकसंख्येत. आमच्या स्वातंत्र्य चळवळीचा ते एक मोलाचा वळला.

1905 मध्ये, बंगालच्या विभाजनानंतर त्यांनी स्वदेशी आणि बहिष्कार आंदोलनास प्रोत्साहन दिले.

या क्षणी त्यांनी केसरीच्या वृत्तपत्राची निर्मिती करून पत्रकारितेची कारकीर्द सुरू केली. टिळकांनी आपल्या लेखात सशक्त शब्दबद्ध लेख प्रकाशित करून ब्रिटिशांच्या बर्याच धोरणाचा विरोध केला.

इंग्रजांच्या कृती अमलात आणण्यासाठी टिळकांना तुरुंगात पाठविण्यात आले. येथे त्यांनी वेळ भगवद गीतावर समालोचना लिहिली. त्यांनी “ओरियन, किंवा पुराणांचा वेद या प्राचीन” नावाचा एक पुस्तक लिहिला जो वेदांच्या पुरातन वास्तूंचा शोध आहे.

या तुरुंगाच्या कक्षेत त्याने लिहिलेल्या या पुस्तकात त्यांनी वेदांमधील आकाशगंगाविषयीचे ज्ञान, गॅक्टिक आर्म, गॅक्टिक आर्म मध्ये आपल्या सूर्याची स्थिती, या हाताने मृगशिष्शाचा नक्षत्र लिहितात. याद्वारे त्यांनी संभाव्य तारखांचा शोध लावण्याचा प्रयत्न केला असता जेव्हा हे ज्ञान पृथ्वीवरील वेद स्वरूपात बनलेले असू शकते.

सर्वच प्रकारे, महात्मा गांधींसाठी तिलक यांनी मार्ग तयार केला, कारण त्यांच्या कार्याची गती गांधींना असहकार चळवळ सुरू करण्यास मदत झाली. या संदर्भात, गांधींनी आपल्या गुरुला टिळक मानले.

1920 मध्ये मुंबई येथे टिळक यांचे निधन झाले. या शब्दाच्या खर्या अर्थाने भरतचे खरे भक्त.

Speech on bal gangadhar tilak in english

THE ONE MAN WHO IS KNOWN AS “THE FATHER OF INDIAN UNREST” IS “LOKMANYA” BAL GANDHAR TILAK. THESE TWO TITLES OF TILAK HAVE THE DIFFERENT MEANINGS. ACCORDING TO BRITISHERS, HE WAS THE FATHER OF INDIAN UNREST BECAUSE HE WAS THE MAN WHO STOOD THE INDIAN PEOPLE FOR THE FIRST TIME AGAINST BRITISH GOVERNMENT AND FROM THAT TIME THE REST OF BRITISH GOVERNMENT IN INDIA WAS GONE AND NEVER CAME BACK.

TILAK WAS THE MAN WHO AWAKEN THE INDIANS ABOUT THEIR RIGHTS AND WORST CONDITION FROM WHERE THEY HAD TO LIVE BECAUSE OF THE BRITISH RAJ. TILAK WAS STRICT AGAINST THE RULE OF ANY OTHER COUNTRY OR PERSON OVER INDIA.

HE DECLARED, SWARAJ (SELF RULE) IS MY BIRTH RIGHT AND 1 MUST TAKE IT” HIS SLOGAN WAS ON THE MOUTH OF EVERY INDIAN AND BEFORE GANDHIJI HE WAS THE FIRST MAN WHICH APPROACH TOWARDS INDIANS WAS SO DEEP, THAT IS WHY HE WAS CALLED ‘THE FATHER OF INDIAN UNREST” ACCORDING TO INDIANS HE WAS “LOKMANYA” IT MEANS THAT HE WAS A MAN WHO WAS HONOURED BY THE PEOPLE OF INDIA.

HIS APPROACH TOWARDS THE PEOPLE WAS TOO DEEP AND HE WAS THE FIRST MAN WHO STOOD THE PEOPLE IN FRONT OF BRITISH RAJ. TILAK WAS BORN ON JULY 23, 1856 AT RATANAGIRI, A SMALL COASTAL TOWN IN A MIDDLE CLASS FAMILY. HE PASSED B.A. IN FIRST CLASS. AFTER GRADUATION IN LAW HE HELPED TO FOUND A SCHOOL WHICH LAID EMPHASIS ON NATIONALISM. HE STARTED NEWSPAPERS “KESARI AND “MARATHA”. BOTH PAPERS TRIED TO TEACH INDIANS OF THEIR GLORIOUS PAST AND REMAINDED THEM TO BE SELF-RELIANT (SWADESHI)-

AFTER CAPTURING POLITICAL POWER IN INDIA THE BRITISH GOVERNMENT DAMAGED THE FINANCIAL STRUCTURE OF INDIA. THE BRITISH GOVERNMENT TOOK THE RAW MATERIAL FROM INDIA AND AFTER MANUFACTURING GOODS OVER THEIR FACTORIES IMPOSED THESE GOODS TO INDIAN PEOPLE AND THEY HAD TO BOUGHT THEM BECAUSE THE INDIAN INDUSTRIES WAS CLOSED BY THE BRITISHERS. FOR BRITISHERS INDIA BECAME SUCH A PLACE FROM WHERE THEY CAN GRASP THE RAW MATERIAL FOR THEIR INDUSTRIES AND THEN SALE THEIR MANUFACTURING GOODS HERE.

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