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Anti Child Labour Day Speech in Hindi – बाल श्रम विरोधी दिवस पर भाषण – world anti child labour day Speech in PDF

Short Speech on anti child labour day

2019 में, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने और सभ्य काम को बढ़ावा देने के 100 साल मना रहा है। फिर भी आज 152 मिलियन बच्चे अभी भी बाल मजदूरी में हैं। बाल श्रम लगभग सभी क्षेत्रों में होता है, फिर भी इनमें से प्रत्येक 10 में से 7 बच्चे कृषि में काम कर रहे हैं। इस विश्व दिवस पर बाल श्रम से निपटने पर देशों को 100 साल की ILO सहायता प्राप्त हुई प्रगति पर फिर से गौर करेंगे। हम 2025 तक अपने सभी रूपों में बाल श्रम को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा बुलाए गए संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य लक्ष्य 8.7 की ओर भी देखेंगे।

World anti child labour day Speech 2019

‘विश्व बाल श्रम निषेध दिवस’ प्रति वर्ष दिनांक 12 जून को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस को मनाने का अभिप्राय पूरे विश्व को बाल श्रम के विरुद्ध जागृत करना एवं बच्चों को बाल मजदूरी से बचाना है। अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन द्वारा सर्वप्रथम 2002 में इस दिवस को सृजित किया गया और तब से यह प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है।

बाल श्रम की धारणा तथा परिभाषा चाहे अंतर्राष्ट्रीय हो या भारतीय ढांचागत कार्य में विद्यमान वैधानिक और नीतिगत दस्तावेजों के अधिकार में बदलाव एवं परिवर्तन है। बाल श्रम समाज की भीषणतम बुराइयों में से एक है तथा किसी भी देश के लिए अभिशाप है।

विश्व के करोड़ों लड़के व लड़कियां समाज की इस बुराई से ग्रसित हैं जिनके प्रति समाज को जागृत करने हेतु विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिन सरकार एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार की संगोष्ठियाँ एवं कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

Anti child labour day speech essay in hindi

भागती दौडती जिन्दगी की कमान शायद ही किसी के हाथो मे हो और बचपन को तो मानो कोई खरीद नही सकता लेकिन फर्क सिर्फ केवल इस बात का है कि किसी के पैरो को चुभे काँटो को चप्पल नसीब हुई भी है कि नही, फटे कपडे, बिखरे बाल शायद ही बचपन को मुस्कुराने से रोक सकते है लेकिन कभी-कभार भीड भी आपको सबसे अलग बना देती है जहाँ फर्क आता है अमीरी और गरीबी का

चाहे हम आज की इस दुनिया में कितनी की ढकोसले बाज़ी क्यूँ ना कर ले हम सब ये चीज़ मानते हैं की अक्सर जो लोग दुनिया के सामने अच्छाई का नकाब पहने रखते हैं वो सिर्फ उनका दिखावा होता हैं. कितनी दिल को चीरने को आती हैं वो खबरे जब हम आये दिन अखबारों में, टीवी की खबरों में पढ़ते हैं की फलाना संस्था के रक्षक बन गए भक्षक.

बचपन इतना मासूम होता है की उसे शुरुवात में इस चीज़ का भी ज्ञान नहीं होता की उसके पेट में दर्द क्यूँ हो रहा हैं ये बात उसे तब समझ में आती हैं जब बड़ा हो जाता हैं और इसी अनुभव में जी कर उसे समझ आता हैं की ज़िन्दगी जीनी हैं तो इसी दर्द से लड़कर कुछ करना होगा जिससे वो अपने साथ वालो का और अपना पेट का दर्द या कहूँ तो भूख को खत्म कर सके.

इनमे से कुछ बदकिस्मत तो वो होते हैं जो इस दर्द के साथ खुद को ही मिटा देते हैं क्यूंकि इतनी गरीबी में लड़ना किसी को शौक तो ज़ाहिर सी बात हैं होगा नहीं और कुछ वो ऐसे भी होते हैं जो लड़ने की हिम्मत तो रखते हैं लेकिन बीमारी का राक्षस उनका हौंसला तोड़ कर उन्हें कमज़ोर बना कर अपने आगोश में लेना चाहता हैं और कभी कभी वो जीत भी जाता हैं.

तेज धूप हो या भारी बरसात इन गरीब बच्चो की सडके परवाह नही करती मौसम के मार की हमको उन सबको देख कर लगता है कि पैसे ने अपनी ताकत से सबकुछ खरीद लिया है बस रह गया है तो वो बचपन जो आज भी अपनी जिन्दगी की कहानी ढूँढ रहा है
जब गन्दगी मे रहना उनकी मजबूरी बन जाती है तो इसे वो जिन्दगी का एक हिस्सा बना लेते है।

Short Speech on anti child labour day

child labour day speech essay in hindi

Anti Child Labour Day 2019 celebrates on the 30th April in Indian and Anti child Labour day is observed across the world on 12th June 2019 every year to bring aware about the important of education by organizing various programme to the prevention of child labour. Himalai IAS Coaching Centre in Bangalore aims is to bring awareness about current affairs for the Civil Services Exam like IAS exam, KAS exam, banking exam and other competitive exams.

  • World day against child labour day observed on April 30th in India and is seen as Anti-Child Labour Day for the future of children.
  • The World Day Against Child Labour globally celebrated on 12th of June every year. According to the a study done by Campaign Against Child Labour (CAC), India has 1,26,66,377 as of 2016 by the UN.
  • The United Nations and International Labour Organization (ILO) took brave steps to launched the World Day Against Child Labour in 2002, anti child lobour day theme in order to bring attention and join efforts to fight against child labour and spread importance of education for the future children.
  • On Anti-Child Labour Day 2019 theme brings together governments, civil society and international, local authorities, workers and employers organizations to spread awareness about the child labour problem and define the guidelines to help child labourers along with free education scheme upto 10th in government schools and foods.
  • In survey UNICEF, India has the largest population of Laboure’s below the age of 14 in the world one who are below poverty.
  • In 2006 Government amended the Child Labour (Prohibition and Regulation) Act 1986, made it illegal to make any child under the age of 14 work in any kind of job for the daily wages to survive.
  • Child labourers are still employed at a high rate in both the urban and rural areas, government provides free education and food for the government school children’s, essay on child labour day 2019 is to bring awareness to avoid it.

Speech in English

In 2019, the International Labour Organization is celebrating 100 years of advancing social justice and promoting decent work.

Yet today, 152 million children are still in child labour. Child labour occurs in almost all sectors, yet 7 out of every 10 of these children are working in agriculture.

On this World Day Against Child Labour will look back on progress achieved over a 100 years of ILO support to countries on tackling child labour. We will also look forward towards the UN Sustainable Development Goal Target 8.7 set by the international community calling for an end to child labour in all its forms by 2025.

This year, the World Day Against Child Labour will look back on progress achieved over a 100 years of ILO support to countries on tackling child labour. Since its founding in 1919, the protection of children has been embedded in the ILO’s Constitution (Preamble) . One of the first Conventions adopted by the ILO was on Minimum Age in Industry (No. 5, 1919).

“It is the exploitation of childhood which constitutes the evil… most unbearable to the human heart. Serious work in social legislation begins always with the protection of children.” Albert Thomas, the first ILO Director

On this World Day, we will also look forward towards the UN Sustainable Development Goal Target 8.7 set by the international community calling for an end to child labour in all its forms by 2025. In support of Alliance 8.7 , we call for immediate action to address the remaining challenges so that the world community can get firmly on track towards eliminating child labour. A newly released ILO report points the way with policy approaches and responses.

2019 marks 20 years since the adoption of the ILO’s Worst Forms of Child Labour Convention, 1999 . With only a few countries still to ratify, this Convention is close to universal ratification. On this World Day we call for full ratification and implementation of Convention No. 182 and of the ILO’s Minimum Age Convention, 1973 . We also encourage ratification of the Protocol of 2014 to the Forced Labour Convention, which protects both adults and children.

The World Day Against Child Labour is widely supported by governments, employers’ and workers’ organizations, UN agencies, and many others who are concerned with tackling child labour. We would like to invite you and your organization to be part of the World Day. Join us and add your voice to the worldwide movement against child labour.

June 12 World anti child labour day speech in punjabi

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2019 ਵਿੱਚ, ਇੰਟਰਨੈਸ਼ਨਲ ਲੇਬਰ ਆਰਗੇਨਾਈਜ਼ੇਸ਼ਨ ਸਮਾਜਕ ਨਿਆਂ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ ਅਤੇ ਚੰਗੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਤ ਕਰਨ ਦੇ 100 ਸਾਲਾਂ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਕਰ ਰਹੀ ਹੈ.

ਅਜੇ ਵੀ ਅੱਜ, 152 ਮਿਲੀਅਨ ਬੱਚੇ ਅਜੇ ਵੀ ਬਾਲ ਕਿਰਤ ਵਿੱਚ ਹਨ ਤਕਰੀਬਨ ਸਾਰੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿਚ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਇਹਨਾਂ ਵਿਚੋਂ ਹਰ 10 ਵਿਚੋਂ 7 ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਵਿਚ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ.

ਚਾਈਲਡ ਲੇਬਰ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਵਾਲੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ਲਈ ਇਕ 100 ਸਾਲ ਦੇ ਆਈ.ਐਲ.ਓ ਸਹਿਯੋਗ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਬਾਲ ਦਿਹਾੜੇ ਵਿਰੁੱਧ ਇਹ ਵਿਸ਼ਵ ਦਿਵਸ ਨਜ਼ਰਅੰਦਾਜ਼ ਕਰੇਗਾ. ਅਸੀਂ 2025 ਤੱਕ ਇੰਟਰਨੈਸ਼ਨਲ ਕਮਿਉਨਿਟੀ ਦੁਆਰਾ ਬਾਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੇ ਸਾਰੇ ਫ਼ਾਇਲਾਂ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਲਈ ਯੂ.ਐਨ. ਸਸਟੇਨੇਬਲ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਗੋਲ ਟਾਰਗੇਟ 8.7 ਵੱਲ ਅੱਗੇ ਵਧਾਂਗੇ.

ਇਸ ਸਾਲ, ਚਾਈਲਡ ਲੇਬਰ ਦੇ ਖਿਲਾਫ ਵਿਸ਼ਵ ਦਿਵਸ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨੂੰ 100 ਸਾਲ ਦੇ ਆਈ.ਐਲ.ਓ. ਸੰਨ 1919 ਵਿਚ ਇਸ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਆਈ.ਐੱਲ.ਓ. ਦੇ ਸੰਵਿਧਾਨ (ਪ੍ਰਸਤਾਵ) ਵਿਚ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨੂੰ ਸ਼ਾਮਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਹੈ. ਆਈ.ਐਲ.ਓ. ਦੁਆਰਾ ਅਪਣਾਏ ਗਏ ਪਹਿਲੇ ਸੰਮੇਲਨਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਉਦਯੋਗ ਵਿੱਚ ਘੱਟੋ ਘੱਟ ਉਮਰ ਸੀ (ਨੰਬਰ 5, 1 9 119).

“ਇਹ ਬਚਪਨ ਦਾ ਸ਼ੋਸ਼ਣ ਹੈ ਜੋ ਬੁਰਾਈ ਦਾ ਸੰਕੇਤ ਹੈ … ਮਨੁੱਖੀ ਦਿਲ ਲਈ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਅਸਹਿਣਸ਼ੀਲ ਹੈ. ਸਮਾਜਿਕ ਕਾਨੂੰਨ ਵਿਚ ਗੰਭੀਰ ਕੰਮ ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ. “ਪਹਿਲੇ ਆਈਐਲਐਸ ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਐਲਬਰਟ ਥਾਮਸ

ਇਸ ਵਿਸ਼ਵ ਦਿਵਸ ‘ਤੇ, ਅਸੀਂ 2025 ਤੱਕ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਦੇ ਅੰਤ ਲਈ ਬੁਲਾਏ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੁਆਰਾ ਸੰਯੁਕਤ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਸਥਾਈ ਵਿਕਾਸ ਉਦੇਸ਼ ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ 8.7 ਵੱਲ ਵੀ ਦੇਖਾਂਗੇ. ਅਲਾਇੰਸ 8.7 ਦੇ ਸਮਰਥਨ ਵਿੱਚ, ਅਸੀਂ ਫੌਰੀ ਕਾਰਵਾਈ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਰੰਤ ਕਾਰਵਾਈ ਦੀ ਮੰਗ ਕਰਦੇ ਹਾਂ. ਬਾਕੀ ਬਚੀਆਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਇਸ ਲਈ ਕਿ ਵਿਸ਼ਵ ਭਾਈਚਾਰਾ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਨੂੰ ਖਤਮ ਕਰਨ ਲਈ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਨਾਲ ਪਕੜ ਸਕਦਾ ਹੈ. ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਰਿਲੀਜ਼ ਕੀਤੀ ILO ਰਿਪੋਰਟ ਵਿੱਚ ਨੀਤੀ ਦੇ ਪਹੁੰਚ ਅਤੇ ਜਵਾਬਾਂ ਦੇ ਢੰਗਾਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ.

ਆਈਐੱਲਓ ਦੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੇ ਬਾਲ ਲੇਬਰ ਕਨਵੈਨਸ਼ਨ, 1999 ਨੂੰ ਅਪਣਾਉਣ ਤੋਂ 20 ਸਾਲ ਬਾਅਦ 2019 ਦੇ ਅੰਕ. ਸਿਰਫ ਕੁੱਝ ਕੁੱਝ ਦੇਸ਼ ਅਜੇ ਵੀ ਪੁਸ਼ਟੀਕਰਨ ਦੇ ਨਾਲ, ਇਹ ਕਨਵੈਨਸ਼ਨ ਯੂਨੀਵਰਸਲ ਦੀ ਪੁਸ਼ਟੀ ਦੇ ਨੇੜੇ ਹੈ. ਇਸ ਵਿਸ਼ਵ ਦਿਵਸ ‘ਤੇ ਅਸੀਂ ਕਨਵੈਨਸ਼ਨ ਨੰ. 182 ਅਤੇ ਆਈ.ਐਲ.ਓ. ਦੇ ਘੱਟੋ ਘੱਟ ਉਮਰ ਕਨਵੈਨਸ਼ਨ, 1973 ਦੇ ਪੂਰੇ ਸਹਿਮਤੀ ਅਤੇ ਲਾਗੂ ਕਰਨ ਦੀ ਅਪੀਲ ਕਰਦੇ ਹਾਂ. ਅਸੀਂ 2014 ਦੇ ਪ੍ਰੋਟੋਕੋਲ ਆਫ਼ ਪ੍ਰੋਟੋਕੋਲ ਦੇ ਮਜਬੂਤੀ ਲੇਬਰ ਕਨਵੈਨਸ਼ਨ ਨੂੰ ਵੀ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰਦੇ ਹਾਂ, ਜੋ ਬਾਲਗਾਂ ਅਤੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੋਨਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਦਾ ਹੈ

ਬਾਲ ਲੇਬਰ ਦੇ ਖਿਲਾਫ ਵਿਸ਼ਵ ਦਿਵਸ ਸਰਕਾਰਾਂ, ਮਾਲਕ ਅਤੇ ਕਾਮਿਆਂ ਦੀ ਸੰਗਠਨਾਂ, ਸੰਯੁਕਤ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦੀਆਂ ਏਜੰਸੀਆਂ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਹੋਰ ਲੋਕਾਂ ਦੁਆਰਾ ਵਿਆਪਕ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸਹਾਇਤਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਜੋ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰੀ ਨਾਲ ਨਜਿੱਠਣ ਲਈ ਚਿੰਤਤ ਹਨ. ਅਸੀਂ ਵਿਸ਼ਵ ਡੇਅ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣਨ ਲਈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਸੰਸਥਾ ਨੂੰ ਸੱਦਾ ਦੇਵਾਂਗੇ. ਸਾਡੇ ਨਾਲ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋ ਜਾਓ ਅਤੇ ਬਾਲ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ਦੇ ਵਿਰੁੱਧ ਵਿਸ਼ਵ ਭਰ ਦੇ ਅੰਦੋਲਨ ਲਈ ਆਪਣੀ ਆਵਾਜ਼ ਜੋੜੋ.

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