kavita

मकर संक्रांति पर कविता – Makar Sankranti par Kavita | Makar Sankranti Poems

Makar Sankranti 2019 : मकर संक्रांति का पर्व पूरे भारत में अलग-अलग नाम व परम्पराओं से मनाया जाता है | यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है | मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है इसलिए लोग गंगा स्नान कर सूर्य देव की पूजा करते हैं | इस दिन लोग गंगा स्नान करते हैं और दान भी करते हैं इसलिए अलग-अलग राज्यों में गंगा नदी के किनारे मेले का आयोजन भी होता है | उत्तर प्रदेश में इसे खिचड़ी का पर्व भी कहा जाता है इसलिए इस दिन लोग चावल और दाल की खिचड़ी खाते हैं व दान भी करते हैं |

Happy makar sankranti poem in hindi

मकर संक्रांति कब है: मकर संक्रांति 14 जनवरी सोमवार को पड़ रही है | आप सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं |

आसमान का मौसम बदला
बिखर गई चहुँओर पतंग।
इंद्रधनुष जैसी सतरंगी
नील गगन की मोर पतंग।

मुक्त भाव से उड़ती ऊपर
लगती है चितचोर पतंग।
बाग तोड़कर, नील गगन में
करती है घुड़दौड़ पतंग।

पटियल, मंगियल और तिरंगा
चप, लट्‍ठा, त्रिकोण पतंग।
दुबली-पतली सी काया पर
लेती सबसे होड़ पतंग।

कटी डोर, उड़ चली गगन में
बंधन सारे तोड़ पतंग।
लहराती-बलखाती जाती
कहाँ न जाने छोर पतंग।

Mankranti poems in english

In mid January comes Makar Sankranti
On the northern roads, Sun makes an entry
And the days start becoming lengthy.

A time when harvests abound in plenty
Culinary expeditions make delicacies dainty
Old and shabby replaced by new and jaunty.

In Tamil Nadu, Pongal predicts prosperity
Gujarat flies Uttarayan kites with dexterity
Bihu revels of Assam ushers Earth’s fecundity.

Sabarimala in Kerala shows one light of Makar Jyothi
Lohri bonfires in Punjab and Himachal burn negativity
Rest of India celebrates Sankranti with great generosity.

To rituals, legends and traditions provide clarity
Pilgrimage and holy dip in sacred rivers, a reality
Amidst gaiety, may the joy of rejoicing last an eternity.

Sankranti par kavita

आज का दिन है अति पावन
मकर संक्रांति का है दिन
आज उड़ेगी आकाश में पतंग
होंगे लाल पिले सब रंग
गंगा में डुबकी लगाओ
करो शीतल तन और मन
दान करो चीनी चावल धान
कमाओ पुण्या बनाओ परमार्थ
जोड़ो हाथ ईशवर से वर माँगो
सब जन जीवन का हो कल्याण

Makar sankranti poetry in hindi

Makar Sankranti Kavita

आसमान में चली पतंग
मन में उठी एक तरंग
लाल, गुलाबी, काली, नीली,
मुझको तो भाती है पीली
डोर ना इसकी करना ढीली
सर-सर सर-सर चल सुरीली
कभी इधर तो कभी उधर
लहराती है फर फर फर

sankranti kavita in marathi

मकर संक्रांती साजरा करूया
तीळ लडु सर्व एकत्र खाणे
आम्ही सर्व सुख घरामध्ये पसरवले
आम्ही पतंग खराब करतो
सर्व एकत्र आम्ही गाणे
मजा करा
मकर संक्रांती साजरा करूया
तीळ लडु सर्व एकत्र खाणे
रस्त्यावर शेअर केलेल्या सर्व रस्त्यावर.
सर्व एकत्र खा
गंगा मध्ये उतरणे
शरीर निरोगी करा.
मकर संक्रांती साजरा करूया
तीळ लडु सर्व एकत्र खातात.

ऊपर हमने आपको makar sankranti kavita in hindi, poems on, मकर संक्रांति मराठी माहिती, मकर संक्रांति कविता marathi, poem in hindi, happy makar sankranti poem, poems in hindi, Makar Sankranti Messages , poem in english, पर छोटा निबंध, संक्रांति का महत्व, संक्रांति के बारे में, पतंग पर शेर, Makar Sankranti In Hindi, पतंग पर वाक्य, मकर संक्रांति पर निबंध, पतंग कविता मराठी, पतंग कविता आलोक धन्वा, poem on sankranti festival in english, sankranti poem in kannada, poem on kite festival in english आदि की जानकारी दी है जिसे आप किसी भी भाषा जैसे Hindi, हिंदी फॉण्ट, मराठी, गुजराती, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language व Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection जिसे आप अपने स्कूल व सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|

Leave a Comment