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World Sleep Day Essay in Hindi & English Pdf Download

International sleep Day Essay

World Sleep Day 2019: वर्ल्ड स्लीप डे 15 मार्च, 2019 को दुनिया भर में मनाया गया, ‘स्वस्थ नींद, स्वस्थ उम्र’ विषय के साथ। यह दिन पृथ्वी पर मार्च विषुव से पहले शुक्रवार को वार्षिक रूप से मनाया जाता है, जब सबसॉइंट बिंदु दक्षिणी छोड़ना प्रतीत होता है गोलार्ध और आकाशीय भूमध्य रेखा को पार करते हुए, उत्तर की ओर बढ़ते हुए जैसा कि पृथ्वी से देखा गया है। इस वर्ष के विश्व नींद दिवस के लिए प्रमुख संदेश समाज में ‘उम्र बढ़ने और नींद का स्वास्थ्य’ है। स्वस्थ उम्र बढ़ने और बेहतर तरीके से सोने की बेहतर समझ के रूप में उम्र बढ़ने के साथ समाज पर खराब स्वास्थ्य के समग्र बोझ को कम करने में मदद मिलती है।

International sleep Day Essay

तनाव, चिंता और भागदौड़ भरी जिंदगी के चलते वो लोग बहुत भाग्यशाली हैं जो 7 से 9 घंटे की नींद लगातार ले पाते हैं। जिस तरह से आजकल लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल हो गया है उसमें भरपूर नींद ले पाना कई लोगों के लिए एक चुनौती साबित हो रहा है। कई लोेग ऐसे भी होते हैं जिन्हें संतुलित नींद पर्याप्त ही नहीं होती है और वो लोग टुकड़ों में नींद लेने के लिए मजबूर हैं। धीरे-धीरे ये मजबूरी उनकी आदत में शुमार हो जाती है। लेकिन इस बात से सावधान हो जाएं की जगह-जगह झपकी लेना और कम से कम 8 घंटे की नींद न लेना जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पर्याप्त मात्रा में नींद ना लेने से शरीर की प्रक्रिया सुचारू रूप काम करने में बाधा उत्पन्न करती है। जिसके कारण तरह-तरह की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है।

17 मार्च का दिन अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर वल्र्ड स्लीप डे के रूप में मनाया जाता है। स्लीप डे को मनाने का मकसद अच्छी नींद लेने के लाभ, नींद की कमी से होने वाले नुकसान आदि जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर इन्हें गंभीरता से लेना है। आज हम आपको इसी मौके पर बता रहे हैं कि भरपूर नींद लेना हर व्यक्ति के लिए क्यों जरूरी है और टुकड़ों में नींद लेना किस तरह से जानलेवा साबित हो सकता है।

मौजूदा दौर में दिनचर्या के नियमित नहीं हो पाने के कारण लोगों में नींद से संबंधित बीमारी ‘स्लीप ऐपनिया’ काफी बढ़ रही है। जिसमें नींद के दौरान सांस में रुकावट पैदा होती है और कई बार यह घातक भी हो सकती है। इससे बचने के लिए जितना संभव हो सके खाने-पीने और सोने की आदतों को नियमित करें और साथ ही डॉक्‍टर की सलाह जरूर लें। नियमित व्यायाम, पोषक एवं नियंत्रित आहार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है

सिर दर्द, डिप्रेशन, आंखों में दर्द, आंखों के नीचे काले घेरे, आंखों का लाल होना, चिड़चिड़ापन, झुर्रियां, रिंकल्स, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, शरीर में कंपन, आँखों में सूजन आना, चक्कर आना, आत्मविश्वास की कमी, किडनी पर प्रतिकूल प्रभाव, मेटाबॉलिक स्ट्रेस का बढ़ना, दिल से संबंधित रोग एवं मोटापा जैसी कई बीमारियां नींद के पूरी ना होने से काफी तेजी से बढ़ती हैं।

वर्ल्ड स्लीप डे पर निबंध

हर साल 15 मार्च को वर्ल्ड स्लीप-डे मनाया जाता है। वर्ल्ड स्लीप डे को वर्ल्ड स्लीप डे कमेटी ऑफ द वर्ल्ड स्लीप सोसाइटी द्वारा आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को नींद की समस्याओं के बोझ से छुटकारा दिलाना और नींद की गड़बडि़यों को लेकर लोगों को जागरूक करना होता है। इस साल वर्ल्ड स्लीप-डे का विषय ‘स्वस्थ नींद, स्वस्थ आयु’ है। वैसे तो नींद सभी को प्यारी होती है और इसके कई फायदे भी हैं। हम वर्ल्ड स्लीप-डे पर इससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं।

लोगों के बीच एक सोच घर कर गई है कि रात को नहीं खाने से कुछ वज़न कम हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। आप कभी खाली पेट न सोएं। खाली पेट सोने की वजह से आपको नींद नहीं आएगी और नींद की कमी से आपका मोटापा बढ़ सकता है।

तुरंत खाकर न सोएं, खाने और सोने के वक्त कुछ गैप रखें। खाना खाकर तुरंत सोने से ब्लड शुगर और इंसुलिन बढ़ता है, इसकी वजह से वजन बढ़ सकता है। रोजाना रात को एक कप हर्बल चाय पीने से तोंद को कम करने में मदद मिलेगी।

आजकल की बदलती जीवनशैली में ज़्यादातर लोगों को नींद ने आने की समस्या है। नींद ने आने की इस समस्या को इन्सोमनिया कहते हैं। यह आमतौर पर लाइफस्टाइल में बदलाव होने की वजह से होता है। यह दो तरह का होता है-ट्रान्जिएंट और क्रॉनिक। इसका मुख्य कारण टेंशन, वातावरण में बदलाव, हॉर्मोंन्स में बदलाव है।

नींद उतनी ही जरूरी है जितना कि खाना और व्यायाम। एक शरीर ठीक से काम करे इसके लिए कम से कम 6-8 घंटे की नींद जरूरी है। जो लोग कम सोते हैं उनके शरीर में लेप्टिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ) का स्तर कम होने की संभावना अधिक होती है, जिससे भूख बढ़ जाती है।

आपको संतुलित और स्वस्थ आहार खाना चाहिए। शराब का सेवन कम से कम करें, विशेष रूप से शाम को। आपका बेडरूम साफ, शांत, अंधेरा और एलर्जी और गंध से मुक्त होना चाहिए। कोशिश करें कि बहुत अधिक मोटे बिस्तर पर सोने की आदत न पड़े। सोने से पहले, हल्की स्ट्रेचिंग कर सकते हैं।

World sleep Day Essay in English

World sleep Day Essay in English

The annual awareness event was started by a group of dedicated healthcare providers and members of the medical community working and studying in the area of sleep medicine and research. The goal of the first World Sleep Day was to bring together sleep healthcare providers to discuss and distribute sleep information around the world. The first co-chairs of World Sleep Day were Liborio Parrino, MD, Associate Professor of Neurology at Parma University, Italy and Antonio Culebras, MD, Professor of Neurology, Upstate Medical University, and Consultant, The Sleep Center, Community General Hospital, Syracuse, New York, USA.

Time and time again, sleep medicine professionals and researchers came up against the belief that sleep was not important enough in personal health and well-being to be a priority. That coupled with society’s 24/7 flow, the founders of this awareness event aim to celebrate the importance of healthy sleep.

World Sleep Day is hosted by World Sleep Society (WSS), a nonprofit based in the United States. Per the organizational bylaws, World Sleep Society does not support, recommend or endorse any products of services. The awareness event does accept corporate sponsorships to help support the cost to host the event, but World Sleep Society, the World Sleep Day Committee, or any person affiliated with WSS does not endorse or recommend commercial products, treatments, or companies.

Event and activities of World Sleep Day are free and open to the public. Companies who sponsor World Sleep Day provide funds to World Sleep Society to reimburse the costs the awareness day, including costs of press releases, website hosting and creation of educational content. Each year only a fraction of World Sleep Day’s cost is recouped through corporate sponsorships. Read more in our Frequently Asked Questions section about local/regional sponsors and local funds raised.

The logo can be used by official delegates in conjunction with an awareness activity. Companies and organizations must receive written consent before using our logo. The use of the words “World Sleep Day” is copyrighted with the United States Patent and Trademark Office serial number 85274932. Written permission is required to use the words “World Sleep Day” and/or logos of World Sleep Day and/or World Sleep Society.

World sleep Day Short Essay

When it comes to sleep, how much is enough? And on World Sleep Day, ask yourself: am I getting enough sleep and should I worried about snoring

How much sleep you get is important for a number of reasons. Sleep affects a number of different health indicators, from healthier ageing to better weight management to improved heart health.

Experts recommend that the optimum level of sleep for adults below 65 years of age is seven to nine hours a night. Poor sleeping patterns are linked to a number of health issues. Sleep deprivation negatively affects mental activity and mental health. It also ups the risk of a number of medical conditions such as hypertension and stroke.

Ahead of World Sleep Day this year, health tech leader Philips conducted international surveys trying to find out the quality of sleep in a number of different countries including India. Promisingly, 55 percent of Indians think they sleep well. However, 73 percent still want to improve the quality of their sleep.

India actually fared well in comparison to other countries. 31 percent of Indians meditate to help them sleep well, higher than the global average of 26 percent. Meanwhile, 34 percent of Indians want to find out about treatments to help improve sleep health. 24 percent use online sources and social media to educate themselves about the importance of sleep health.

The survey did bring some cause for concern, as it suggested low awareness of sleep disorder. As an example, almost half believed snoring to be normal or caused by factors such as genetics or old age.

In fact, snoring excessively can be a symptom of obstructive sleep apnea (OSA), which causes the throat muscles to relax during sleep, blocking your airways and interrupting breathing. Apnea refers to a number of different conditions where breathing stops and starts during sleep. OSA is the most common type, with symptoms other than snoring include restlessness during sleep and tiredness in the daytime.

While OSA is a relatively common condition, it is a risk factor for cardiovascular disease such as stroke and other conditions such as diabetes and hypertension. Because of the tiredness OSA induces, it also makes accidents more likely, such as during driving or in the workplace.

OSA also increases the chance of the sufferer gaining weight and becoming obese, which carries further implications for health. OSA sufferers have a thirty percent higher risk of suffering a heart attack compared to those without the condition. As a result, experts say those with symptoms of OSA should see a doctor.

World Sleep Day is a chance to take stock and explore how healthy your sleeping patterns are. It is important to remember that there are more significant consequences of not getting enough sleep than tiredness. In some cases, the consequences can be life-threatening.

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जेव्हा झोप येते तेव्हा किती पुरेसे असते? आणि वर्ल्ड स्लीप डे वर, स्वतःला विचारा: मला पुरेसे झोप येत आहे आणि मला खरंच स्नोकर करण्याविषयी चिंता करावी

बर्याच कारणांमुळे आपल्याला किती झोप मिळते हे महत्वाचे आहे. निरोगीपणामुळे आरोग्याच्या वृद्धापर्यंत, चांगले वजन व्यवस्थापन आणि सुधारित हृदयाच्या आरोग्यासाठी अनेक आरोग्य संकेतकांना प्रभावित करते.

तज्ञांनी शिफारस केली आहे की 65 वर्षाखालील प्रौढांसाठी रात्रीची सात ते नऊ तासांची सर्वात कमी झोप आहे. गरीब झोपण्याच्या पध्दती अनेक आरोग्य समस्यांशी निगडीत आहेत. झोपेचा अभाव नैसर्गिकरित्या मानसिक क्रियाकलाप आणि मानसिक आरोग्य प्रभावित करतो. यामुळे उच्च रक्तदाब आणि स्ट्रोकसारख्या अनेक वैद्यकीय परिस्थितींचा धोका देखील वाढतो.

यावर्षी जागतिक स्लीप डे च्या पुढाकाराने, आरोग्य तंत्रज्ञानाचे नेते फिलिप्स यांनी भारतासह अनेक देशांमध्ये झोपेची गुणवत्ता शोधण्याचा प्रयत्न करून आंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण केले. 55 टक्के भारतीयांना वाटते की ते ठीक झोपतात. तथापि, 73 टक्के अजूनही त्यांच्या झोपण्याच्या गुणवत्तेत सुधारणा करू इच्छित आहेत.

इतर देशांच्या तुलनेत भारत खरोखरच चांगला आहे. 31 टक्के भारतीयांनी त्यांना 26 टक्के जागतिक सरासरीपेक्षा जास्त चांगले झोपण्यास मदत केली आहे. दरम्यान, 34 टक्के भारतीय झोपडपट्टी सुधारण्यास मदत करण्यासाठी उपचारांचा शोध घेऊ इच्छितात. 24 टक्के झोपड्यांच्या आरोग्याचे महत्त्व जाणून घेण्यासाठी ऑनलाइन स्रोत आणि सोशल मीडियाचा वापर करतात.

या सर्वेक्षणामुळे काही समस्या उद्भवल्या, कारण यामुळे झोप विकार कमी जागरूक झाला आहे. उदाहरणार्थ, जवळपास अर्धा विश्वास होता की खर्या अर्थाने स्नॉन्सर सामान्य आहे किंवा जेनेटिक्स किंवा वृद्ध व्यक्ती यासारख्या घटकांनी कारणीभूत आहे.

किंबहुना, जास्त प्रमाणात नृत्यांगना अवरोधी झोप ऍपने (ओएसए) चे लक्षण असू शकते, ज्यामुळे घशाच्या स्नायूंना झोपण्याच्या दरम्यान आराम करणे, वायुमार्गास अवरोधित करणे आणि श्वास घेण्यास अडथळा येतो. अप्नीया अनेक वेगवेगळ्या परिस्थितींशी संबंधित आहे जेथे श्वासोच्छवासाचा काळ थांबतो आणि झोप घेतो. ओएसए सर्वात सामान्य प्रकार आहे, नृत्याच्या व्यतिरिक्त इतर लक्षणे म्हणजे झोपण्याच्या दरम्यान अस्वस्थता आणि दिवसात थकवा.

ओएसए एक तुलनेने सामान्य स्थिती असून, हृदयरोगासारखे रोग तसेच स्ट्रोक आणि मधुमेह आणि हायपरटेन्शनसारख्या इतर शस्त्रांसारख्या जोखमीचा धोका असतो. ओएसएमुळे थकवा झाल्यामुळे वाहन चालविण्याच्या वेळी किंवा कामाच्या ठिकाणी दुर्घटना अधिक शक्यता निर्माण होते.

ओएसएमुळे पीडित वजन वाढते आणि लठ्ठपणा होण्याची शक्यता वाढते, ज्यामुळे आरोग्यासाठी आणखी काही परिणाम होतात. ओएसए रुग्णांना अट नसलेल्या लोकांच्या तुलनेत हृदयविकाराचा झटका 30 टक्के जास्त असतो. परिणामस्वरूप, तज्ज्ञ म्हणतात ओएसएच्या लक्षणांमुळे डॉक्टरांना भेटावे.

वर्ल्ड स्लीप डे ही स्टॉक घेण्याची आणि आपल्या झोपण्याच्या पद्धती किती स्वस्थ आहेत हे शोधण्याची संधी आहे. हे लक्षात ठेवणे महत्त्वाचे आहे की थकल्यापेक्षा पुरेसे झोप न मिळण्याचे आणखी महत्त्वाचे परिणाम आहेत. काही प्रकरणांमध्ये, परिणाम जीव धोक्यात येऊ शकतात.

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