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World Aids Day Speech 2018 – Speeches On World Aids Day in Hindi & English Pdf Download

World aids day 2018: ज्यादातर हर कोई जनता ही है की एड्स एक गंभीर और संक्रामक बीमारी है | लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करने व इस गंभीर बीमारी से बचने के उपाय और जानकारी बताने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है | इस दिन लोगों को जागरूक किया जाता है वो इस बीमारी से बचने के लिए उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जान सकें की इस बीमारी के क्या लक्षण होते हैं, इससे बचाव किस प्रकार किया जा सकता है और इस बीमारी के क्या-क्या कारण होते हैं | इन्ही सब जानकारियों के लिए अलग-अलग अभियान भी चलाये जाते हैं, जिससे एचआइवी से पीड़ित लोगों की सहायता की जा सके |

World aids day speech in hindi

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एड्‌स’ एक जानलेवा बीमारी है जो धीरे-धीरे समूचे विश्व को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है । दुनियाभर के चिकित्सक व वैज्ञानिक वर्षों से इसकी रोकथाम के लिए औषधि की खोज में लगे हैं परंतु अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी है । पूरे विश्व में ‘एड्‌स’ को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हैं । सभी बेसब्री से उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब वैज्ञानिक इसकी औषधि की खोज में सफल हो सकेंगे । एड्‌स का पूरा नाम ‘ऐक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिन्ड्रोम’ है ।

वैज्ञानिक सन् 1977 ई॰ में ही इसके प्रति सचेत हो गए थे जब विश्व भर के 200 से भी अधिक वैज्ञानिकों का एक सम्मेलन अमेरिका में हुआ था । परंतु वास्तविक रूप में इसे मान्यता सन् 1988 में मिली । तभी से 1 दिसंबर को हम ‘एड्‌स विरोधी दिवस’ के रूप में जानते हैं ।

वे सभी व्यक्ति जो एड्‌स से ग्रसित हैं उनमें एच॰ आई॰ वी॰ वायरस अर्थात् विषाणु पाए जाते हैं । आज विश्वभर में एड्‌स से प्रभावित लोगों की संख्या चार करोड़ से भी ऊपर पहुँच गई है । अकेले दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया में ही लगभग एक करोड़ लोग एच॰ आई॰ वी॰ से संक्रमित हैं ।

अकेले थाईलैंड में ही हर वर्ष लगभग 3 से 4 हजार लोग एड्‌स के कारण काल का ग्रास बन रहे हैं । अधिक गहन अवलोकन करें तो हम पाते हैं कि विश्व भर में प्रति मिनट लगभग 25 लोग एड्‌स के कारण मरते हैं ।

World aids day speech in english

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World AIDS Day is celebrated on December 1 every year since 1988. It is dedicated to raise awareness, educate and improve the understanding of HIV as a global public health problem. It provides an opportunity to understand the interdependence between progress in ending Acquired Immunodeficiency Syndrome (AIDS) and progress towards universal health coverage and the right to health.

Everyone, regardless of who they are or where they live, has a right to health, which is also dependent on adequate sanitation and housing, nutritious food, healthy working conditions and access to justice. This year’s World AIDS Day campaign promotes the concept of “Right to health”.

World AIDS Day 2017 theme is “My health, my right”. The World Health Organization (WHO) highlights the need for all 36.7 million people living with HIV and those who are vulnerable and affected by the epidemic, to reach the goal of universal health coverage.

Remarkable progress is being made on HIV treatment. According to a report from UNAIDS (Joint United Nations Programme on HIV/AIDS) in June 2017, nearly 21 million people living with HIV are now on treatment. In 2000, just 685000 people living with HIV had access to antiretroviral therapy.

In India, there are 2.1 million people living with HIV (2015 report). According to National AIDS Control Programme, the annual AIDS-related deaths have declined by 54 percent and new HIV infections dropped by 32 percent between 2007 and 2015.

Infection caused by the Human Immunodeficiency Virus (HIV) in the human body results into weakening of people’s immune system ( defense system) against infections and some types of cancer. This immunodeficiency results in increased susceptibility to a wide range of infections, cancers and other diseases that people with healthy immune systems can fight off. The most advanced stage of HIV infection is called as Acquired Immunodeficiency Syndrome (AIDS). It is defined by the occurrence of any of more than 20 opportunistic infections or HIV-related cancers.

वर्ल्ड एड्स डे स्पीच

हर साल एक दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करना है। जागरूकता के तहत लोगों को एड्स के लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे में जानकारी दी जाती है और कई अभियान चलाए जाते हैं जिससे इस महामारी को जड़ से खत्म करने के प्रयास किए जा सकें। साथ ही एचआईवी एड्स से ग्रसित लोगों की मदद की जा सकें। 1 दिसंबर 2011 में विश्‍व एड्स दिवस की थीम ‘गैटिंग जीरों’ पर केंद्रित है। जिसके तहत कैंपेन, इंट्रैक्टिव एक्टिविटीज की जाती है जिससे लोगों को एड्स के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दी जा सकें।

दरअसल, ‘गैटिंग टू जीरों’ का उद्देश्य है कि कोई भी एचआईवी एड्स से नया व्यक्ति ना तो पीडि़त हो और ना ही एड्स के कारण किसी की मृत्यु हो। यानी एचआईवी संक्रमण की दर को रोकते हुए शून्‍य स्‍तर तक लाना। ‘गैटिंग टू जीरों’ की थीम को 2015 तक चलाने के लिए कारगार कदम उठाएं जा रहे हैं।

World aids day speech in hindi

भारत में भी एड्स अपने पैर पसारे हुए है लेकिन देश में इसका इलाज होना बहुत मुश्किल होता है। इसके पीछे कई कारण हैं जैसे- एचआईवी पॉजीटिव लोगों के साथ भेदभाव करना, लोगों में जागरूकता की कमी होना, लोगों के मन में एड्स को लेकर तरह-तरह के भ्रम होना, लोगों का असुरक्षित यौन संबंध बनाना इत्‍यादि।

भारत जैसे घने आबादी वाले देश में एड्स ग्रसित मरीजों की अधिक संख्या का कारण है लोगों का लापरवाही युक्त व्यवहार। यानी लोग सबकुछ जानते हुए भी या तो अंजान बनते हैं या फिर असुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देते हैं जो कि एड्स का एक महत्वपूर्ण कारक है। जरूरी नहीं कि सिर्फ असरुक्षित यौन संबंध बल्कि किसी संक्रमित रोग से ग्रसित होने के कारण भी ऐसा होता है और संक्रमण के कारण भी एड्स का खतरा बरकरार रहता है। हालांकि नए आंकड़ों के मुताबिक, एड्स पीडि़तों में कमी आई है। यदि आप एड्स जैसी महामारी से बचना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आप सावधानियां बरतें और एड्स से बचाव के उपायों को अपनाएं। सेक्स संबंध बनाते हुए सुरक्षित सेक्स को प्राथमिकता दें ताकि भविष्य में होने वाले खतरे को टाल सकें।

गौरतलब है कि विश्व एड्स दिवस की शुरूआत 1 दिसंबर 1988 को हुई थी जिसका मकसद, एचआईवी एड्स से ग्रसित लोगों की मदद करने के लिए धन जुटाना, लोगों में एड्स को रोकने के लिए जागरूकता फैलाना और एड्स से जुड़े मिथ को दूर करते हुए लोगों को शिक्षित करना था। दरअसल, विश्‍व एड्स दिवस आपको याद कराता है कि ये बीमारी अभी भी हमारे-आपके बीच है और इसे लगातार खत्म की कोशिशों में आपको भी आगे आना होगा।

World aids day speech in Marathi

1988 पासून दरवर्षी 1 डिसेंबर रोजी जागतिक एड्स दिवस झाला आहे.

हे जगभरातील एचआयव्ही महामारीकडे लक्ष देण्याची संधी देते. बर्याच लोकांनी 1 डिसेंबर रोजी किंवा जवळपास इव्हेंट आयोजित करणे, एचआयव्हीची जागरुकता निर्माण करणे, मरण पावलेल्या प्रिय व्यक्तींना आठवणीत ठेवणे, एचआयव्हीसह राहणा-या लोकांसह एकता दाखवणे, जगण्याची आणि आरोग्याची उत्सव साजरा करणे आणि एचआयव्हीसाठी पैसे मिळवावे कारणे बर्याच लोकांसाठी हा दिवस लाल रिबन, एक त्वरित ओळखता येणारा चिन्ह आहे. आपला आधार दर्शविण्यासाठी एक लाल रिबन वापरणे ही एक सोपा मार्ग आहे आणि आपण त्यात सहभागी होऊ शकता अशा इतर अनेक मार्ग आहेत.

जागतिक एड्स दिवसासाठी प्रत्येक वर्षी एक थीम आहे. या वर्षाची थीम ‘माय हेल्थ, माय राइट’ आहे. या मोहिमेत “प्रत्येकजण, प्रत्येकाद्वारे आरोग्याच्या अधिकारांचे पूर्ण आकलन पूर्ण करण्यासाठी आवश्यकतेनुसार दृश्यमानता वाढविण्याचा हेतू आहे”. वैयक्तिक देश त्यांच्या स्वत: च्या पद्धतीने थीमची व्याख्या देखील करू शकतात.

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