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Shab E Barat Ki Dua 2022 – Shab E Barat Ki Fazilat In Hindi – 15 th Shaban बरकत वाली रात

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shab e barat 2022: भारत में बहुत से धर्म है जिसमे से लगभग हर धर्म के अपने पर्व या त्यौहार होते है| ऐसे ही एक पर्व है शब-ए-बरात| यह मुस्लिम धर्म के लोगो का त्यौहार है| मुस्लिम धर्म में इस त्यौहार का बहुत महत्व है| शब् इ बारात रात शाबान महीने की लगभग 14 तारिक को सूर्यास्त के बाद शुरू होती है| शब् इ बारात की यह रात साल में के बार ही आती है| मुस्लिम धर्म के अनुसार यह रात उनके लिए बहुत महिमा की रात होती है|

shab e barat ki dua in hindi

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बिस्मिल्ला हिर्रहमान निर्रहीम

अलाहुम्मा या जल मन्नि वला यमुत्रु अलैहि ० या जलजलालि वल इकराम 0 या जत्तोलि वल इनआम ० ला इलाहा इला अन्ता ज़हरल्लाजीन ० वजारल मुस्तजिरीन व अमानल खाइफीन 0 अल्लाहुम्मा इन कुन्ता कतब तनी इन्दका फी उम्मिल किताबि शकीय्यन औ महरूमन ओं मतरुदन औ मुक़त्तरन अलय्या फिरिज्क़ 0 फ़म्हु अल्लाहुम्मा बि फ़दलिका शकावती व हिरमानी व तर्दी वक तितारि रिज़्क़ी 0

व सबितनी इन्दका फी उम्मिल किताबि सईदम मरजूकम मुवफ्फक़ल लिलखैरात 0 फ इन्नका कुल्ता व कौलुकल हक़्क़ फी क़िताबिकल मुन्जल 0 अला लिसानि नबीय्यिकल मुरसल 0 यम्हुल्लाहु मा यशाउ वयूस्बितु व इन्दहू उम्मुल किताब 0 इलाही बीतजल्लि यिल अअज़म 0 फी लैलतिन्निस्फे मिन शहरि शअबानुल मुक़र्रमल्लती युफ़ रकु फीहा कुल्लु अमरिन हकीमिंव व युबरम 0 अन तकशिफा अन्ना मिनल बलाइ वल बलवाई मा नअलमु वमाला नअलम वमा अन्ता बिही अअलम 0 इन्नका अन्तल अअज़्ज़ुल अकरम 0 वसल्ललाहो तआला अला सय्यिदिना मुहम्मदिव व अला आलिही व सहबिहीँ व सल्लम 0 वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन 0

shab e barat ki dua in english

Dua-e-Nisf-e-Shabaan in English:

Allaahumma Yaa Zal-manni wa laa yamunnu ‘alayh, yaa Zal-jalaali wal-ikraam, yaa zat-tawli wal-‘in’aam. Laa ilaaha illaaa Anta Zahrullaajiinaa, wa jaarul-mustajiiriina, wa Amaanulkhaa-‘ifiin.

Allaahumma in kunta katabtanii ‘indaka fii ‘ummil-kitaabi shaqiyyan ‘aw mahruuman ‘aw matruudan ‘aw muqattaran ‘alayyna fir-rizqi famhu..

Allaahumma bi-fazlika shaqaawatii wa hirmaanii wa tardii waqtitaara rizqi, wa ‘asbitnii ‘indaka fii ‘ummil-kitaabi sa’iidam-marzuuqammuwaffaqal-lil-khayraati, fa innaka qulta wa quwlukal-haqqu, fii kitaabikal-munzali, ‘alaalisaani Nabiyyikal-Mursali, yamhullaahu maa yashaa-‘u wa yusbitu wa ‘indahuu ‘ummul kitaab ‘Ilaahi bit-tajallyil-‘a-zami, fii laylatinnisfi min shahri sha’baanal-Mukarrami, ‘allatii yufraqu fiihaa kullu ‘amrin hakiiminw-wa yubramu, ‘an takshifa ‘annaa minal-balaaa-‘i wal balwaaa-‘i maa na’lamu wa maa laa na ‘lamu, wa Anta bi-hii ‘a’lam. Innaka Antal-‘a’azzul-Akram. Wa sallalaahu ta’aalaa ‘alaa sayyidinaa Muhammad-dinw-wa ‘alaaa ‘aalihii wa sahbihii wa sallama Wal-Hamdu lillaahi Rabbil-Aalameen.

shaban ki dua in arabic

Dua-e-Nisf-e-Shabaan 

ادب ليلة النصف من شهر شعبان
ادب الطريقة
قراءة يس ثلاث مرات، المرة الاولى بنية طول العمر بالإسلام والإيمان، والمرة الثانية بنية دفع البلاء عنه وعن الامة المحمدية ، والمرة الثلاثة بنية الرزق والإستغناء عن الناس
و بعد كل مرة تدعوا بهذا الدعاء:
اللهم يا ذا المن لا يمن عليه احد يا ذا الجلال والإكرام يا ذا الطول والأنعام، لا إله إلا أنتَ ظهر اللاجئين وجار المستجيرين وامان الخائفين اللهم ان كنت كتبتني عندك في ام الكتاب شقيا أو محروما أو مطرودا أو مقترا عليّ من الرزق فامح اللهم بفضلك شقاوتي وحرماني وطردي واقتار رزقي وثبتني عندك في ام الكتاب سعيدا ومرزوقا للخيرات فانكَ قلت وقولك الحق في كتابك المنزل على لسان نبيك المرسل يمحوا الله ما يشاء ويثبت وعنده ام الكتاب. إلهي بالتجلي الأعظم في ليلة النصف من شهر شعبان المعظم المكرم التي يفرق فيها كل امر حكيم ويبرم ان تكشف عنا من البلاء ما نعلم وما لا نعلم وما أنتَ به اعلم إنكَ أنتَ الأعز الاكرم. وصلى الله على سيدنا محمد وعلى آله وصحبه وسلم.

shab e meraj ki namaz

Nawafil Namaz after Isha Namaz
2. Read 12 rakaat nafl prayer, in each rakaat read:

    • Surah Fatiha (Alhamdu) : once
    • Surah Iklas: 10 times.
Afterward read:
    • 3rd Kalima(Kalima Tamjeed) : 10 times

      SUBHANA-LLAHI, WA-L-HAMDU LI-LLAHI, WA LA ILAHA ILLA-LLAHU, WA-LLAHU AKBAR. WA LA HAWLA WA LA QUWWATA ILLA BI-LLAHI-L-ALIYYI-L-AZIM

    • 4th Kalima (Kalima Tawheed): 10 times

      LA ILAHA ILL-ALLAHU WADAHU LA SHARIKA LAHU LA-HUL-MULKU WA LAHU’L-AMDU YUH-YI WA YUMITU WA HUWA AYYU-LLA YAMUTU ABADAN ABADA, U-L-JALALI WA-L-IKRAM, BIYADIHI-L-KHAYR, WA HUWA ALA KULLI SHAYIN QADIR

    • Darood Sharif : 100 times
3. Read 8 rakaat nafl prayer with four salaam. In each rakaat read
    • Surah Fatiha : once
    • Surah Iklas : 11 times
Hazrat Fatima (May Allah be pleased with her) is reported to have said that whoever will observe this prayer, on Shab-e-Baraat and will present its reward (sawab) to my soul, I will strongly recommend for his/her forgiveness to Allah Almighty before I enter the heavens.

4. The Prophet (Peace Be Upon Him) used to read this dua abundantly on this night, we should do the same:

Allahumma inni al-aloka afwa wal afiyata wal muafatad-daimata fid dunya wal akhirah
5. Read 100 rakaat nafil prayer reciting in each rakaat reciting :
    • Surah Fatiha : Once
    • Surah Iklas : 10 times
The person observing this prayer on Shab-e-Baraat will have tremedous blessings from Allah Almighty and his/her prayers will be answered and will be made free from the fire of hell and will go to paradise.
 
DUA: Allahumma inna-k afuwun karimun tuhibbul aff-va fafu aanni ya gaffuru ya gaffuru ya gaffuru

Shab E Barat Ki Fatiha

ऐ घर वालो ! हमारे ऊपर रहम करो, हम पर मेहरबानी करो !  आज की रात हमारे लिये कुछ सदका व खैरात करो ! क्योकि हम ईसाले सवाब के मोहताज है ! हमारे नाम से आमाल जारी हैं, (फिर फरमाते हैं) अगर घर वाले हस्बे इस्तिताअत सदका व खैरात फातिहा व ईसाले सवाब करते हैं तो यह रूहें खुशी खुशी उसके हक़ मे’दुआएं खैर करती हुई वापस चली जाती हैं ( और फ़रमाते हैं) अगर यह रूहें कुछ नहीं पाती है तो हसरत व मायूसी के साथ वापस होती है’ ।

बहर हाल मोमिन पाक हलवा उसके अज्जा यानी रवा मेदा घी शक्कर और मेवाजात वगेरह सब पाक और जाइज फिर उस पर कुरआने पाक कीं तिलावते पाक के बाद उसका सवाब पाक लोगों की पाक रूहों को पहुंचाया जाता है और हदीसे पाक से साबित कि रसूले पाक को हलवा पसन्द था

इस लिये पाक लोग पाकीजा हलवा पकाते भी हैं और खाते भी है’ और खिलाते भी हैं । सच फामग्या कुर’आने क़रीम ने

फिर भला बताइये इतनी पाकीजा और नफीस ‘चीज जो अगर कोई नापाक या नाजाइज़ बताये यह कहॉ का

इन्साफ़ है ? (खाना ना जाइज़ नहीं समझते)

पाकीजा चीजो और शीरीनी व्र तबरूकात को नजिस नाज़ाइज़ कहने लिखने और समझने वाले यह कहा करते हें कि सामने रखकर फ़ातिहा देना ग़लत है । तो में उनकों इल्ज़ामी जवाब देता हूँ कि सामने रखना तुम्हारे नज़दीक ग़लत है तो पीठ के पीछे रख लिया करो, लेकिन दुरूद फातिहा करो तो सही ।

खुदा हम सबको हक़ समझने, हक़ कहने औंर हक़ पर काइम रहने की तोफीक़ अता फ़रमाए । (आमीन)

shab e barat ki dua mangne ka tarika

अहले सुन्नत व जमाअत मौका ब मौका पाकीजा व मरगूब गिजाओ’ पर फातिहा देकर ईसाले सवाब करते है, यह बिहम्बिही तआला कु रआनो अहादीस से साबित है

और खास तौर पर शबे बरात मे अपने अजीजो अकारिब और दीगर बुजुर्गों क्री अरवाहे तय्यिबात को इसाले सवाब के लिये दीगर पसन्दीदा गिजाओ  के अलावा हलवे पर फातिहा देते है, यह जाइज़ व मुबाह ही नहीं बल्कि मस्नून व मुस्तहब है ।

इस सिल्सिले मे हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रजियल्लाहो तआला अन्हुमा रिवायत फरमाते है कि _ शबे बरात ने’ मुसलमानो’ की रूहे’ अपने अपने घरों पर आती है’ और कहती है’ ।

शबे बरात के नवाफ़िल –Shab E Barat Ki Nafl Namaz

(1) बाद नमाजे मग़रिब छ: रकअत नफ्ल दो-दो की नियत से पढे ! हर रकअत पर सलाम फेरने के बाद यासीन शरीफ़ तीन बार और कुल हुवल्लाहु शरीफ़ (सूरह इखलास ) इक्कीस बार पढे !

पहली मर्तबा सूरए यासीन दराजिये उम्र के लिए (लम्बी उम्र के लिए )

दूसरी मर्तबा वुसअते रिज़्क़ के लिये (रिज़्क़ में बरक़त के लिए ) और तीसरी मर्तबा बलाये दफअ होने के लिए पढे ।

(2) बाद नमाजे इशा बारह रकअत नफ्ल अदा करे । चार रकअत पर सलाम फैरे और हर रकअत में सूरए   फातिहा के बाद कुल हुवल्लाहु शरीफ़ दस मर्तबा पढे ! नमाज़ से फारिग हो कर तीसरा और चौथा कलिमा दस बार और  दरुद शरीफ सो मर्तबा पढे ।

(3) तक़र्रूब  की नियत से (अल्लाह का कुर्ब हासिल करने की नियत से ) गुस्ल करे ! फिर दो रकअत नमाज़ तहिय्यतु वुज़ु पढे ! हर रकअत मे सूरए फातिहा के बाद आयतल कुर्सी एक बार और कुल हुवल्लाहु शरीफ़ तीन बार पढे फिर उसके बाद आठ रकअत नमाज़ नफ्ल दो सलाम (यानी चार -चार रकअत की नियत से ) से पढे,

जिसकी हर रकअत में सूरए फातिहा के बाद हन्ना अन्जलनाहु एकबार और कुल हुवल्लाहु शरीफ़ पच्चीस बार पढे ।

(4) दो-दो रकअत करके सौ रकअत नफ़्ल पढे ! इसकी, बडी फ़जीलत है, (सूरए फातिहा के बाद जो सूरत याद

हो पढे ) हदीस मे आया है कि जो शख्स इस रात में सौ रकअत नफ्ल अदा करेगा तो अल्लाह तआला सौ फरिश्ते उसके लिये मुक़र्रर फरमा देगा ।

उनमें से तीस फरिश्ते उसको जन्नत की खुशखबरी सुनाते रहेंगे, तीस फरिश्ते जहन्नम से वे खोफ्री की बशारत देते रहे’गे , तीस फरिश्ते बला व आफ़त को दफा करते रहेंगे और दस फरिश्ते उस शख्स को शैतान के फ्रितनो से महफूज रखगे !

shab e barat ki dua image

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