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Rath Yatra Story in Hindi – जगन्नाथ रथ यात्रा स्टोरी – रथा यात्रा की कहानी

रथ यात्रा 2018:  रथ यात्रा का पाव भारत में मनाये जाने वाला दूसरा सबसे पुराना त्यौहार है| इस प्रथा को पौराणिक समय से भारत के लोग निभाते आ रहे है| यह त्यौहार बहुत ही भव्य त्यौहार होता है| रथ यात्रा को रथा यात्रा और जगरन्नाथ यात्रा भी कहा जाता है| यह एक सालाना पर्व है जो की इस साल 14 जुलाई को आ रहा है| इस पर्व को ज्यादातर ओरिसा, झारखंड और उत्तरी भारत में मनाया जाता है पर इस त्यौहार को सबसे भव्य तरीके से ओरिसा में मनाया जाता है| यह पर्व विदेश जैसे अमेरिका, फ्रांस, रूस, कनाडा, इंग्लैंड, आदि जैसे मुल्को में भी भव्य तरीके से मनाया जाता है| आज के इस पोस्ट में हम आपको story behind jagannath rath yatra in hindi, story behind rath yatra puri in hindi, jagannath rath yatra 2016 story in hindi , जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा स्टोरी इन हिंदी, story on ratha yatra, real story of rath yatra, रथ यात्रा की कहानी इन हिंदी, इंग्लिश, ओड़िया, ोरिया, बंगाली, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के स्पीच प्रतियोगिता, debate competition, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Jagannath Rath Yatra Story in Hindi

Jagannath Rath Yatra 2018 date:  वर्ष 2018 में रथ यात्रा 14 जुलाई 2018 की है जो की शनिवार को है| जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा 14/7/2018 को मनाई जाएगी| इस दिन शनिवार का दिन है|  यहाँ हमने हर साल 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 व 2018 के अनुसार ratha yatra story in hindi, Rath Yatra Quotes, rath yatra story in bengali , rath yatra story in oriya, रथ यात्रा पर कविता, story behind car festival, Few Lines about Rath Yatra, rath yatra ki story,  रथ यात्रा पर निबंध, rath yatra story in gujarati, Rath Yatra Drawing pictures, story of rath yatra in hindi, story on rath yatra in english, भाषण दिए हैं जो की रथ यात्रा टॉपिक पर निश्चित रूप से आयोजन समारोह या बहस प्रतियोगिता (debate competition) यानी स्कूल कार्यक्रम में स्कूल या कॉलेज में निबंध में भाग लेने में छात्रों की सहायता करेंगे। इन रथ यात्रा पर हिंदी स्पीच हिंदी में 100 words, 150 words, 200 words, 400 words जिसे आप pdf download भी कर सकते हैं| आप सभी को रथ यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं

प्रतिवर्ष उड़ीसा के पूर्वी तट पर स्थित श्री जगन्नाथ पुरी में भगवान श्री जगन्नाथ जी की रथ-यात्रा का उत्सव पारंपरिक रीति के अनुसार बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है। जगन्नाथ रथ उत्सव आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया से आरंभ करके शुक्ल एकादशी तक मनाया जाता है। इस दौरान रथ को अपने हाथों से खिंचना बेहद शुभ माना जाता है। रथ यात्रा की उत्पत्ति से संबंधित कुछ पौराणिक कहानियां मौजूद हैं जो लोगों की सामाजिक-धार्मिक सोच और मान्यताओं को दर्शाती हैं। कुछ हैं:

भगवान कृष्ण और बलराम को मारने के लिए, उनके मामा कंस ने उन्हें मथुरा को आमंत्रित किया। उन्होंने अकरूर को गोकुल के रथ के साथ भेजा। जैसा कि पूछा गया, बलराम के साथ भगवान कृष्ण, रथ पर बैठे और मथुरा के लिए चले गए। भक्त इस दिन प्रस्थान के रूप में रथ यात्रा के रूप में मनाते हैं।

उदार भक्तों ने उस दिन मनाया जब भगवान कृष्ण ने बुराई कंस को हराया, उन्हें अपने भाई बलराम के साथ एक राइट में मथुरा में दर्शन दिया।द्वारिका में भक्तों ने उस दिन मनाया जब भगवान कृष्ण, बलराम के साथ, शो में सवारी के लिए सुभद्रा – उनकी बहन को ले गए।

एक बार भगवान कृष्ण की रानियों ने मां रोहिणी से गोपी के साथ भगवान कृष्ण के कई रोचक अमृत एपिसोड (रस लिलास) का वर्णन करने का अनुरोध किया। रोहिणी – इस तरह के एपिसोड सुनने के लिए सुभद्रा के अनुचित होने पर विचार करते हुए (लीला) – उसे दूर भेज दिया फिर भी, वृजकाथा जल्द ही कृष्ण और बलराम के साथ सुभद्रा के साथ अवशोषित हो गए, जो अब दृश्य पर थे। जब वे नारद कहानियों से पूरी तरह से गड़बड़ हो गए थे भाई बहनों को एक साथ खड़े होने पर, उन्होंने प्रार्थना की, “आप में से तीन दर्शन हमेशा इस तरह से दे सकते हैं।” वरदान दिया गया था। और तीन हमेशा भगवान जगन्नाथ के पुरी मंदिर में रहते हैं|

Rath Yatra Story in English

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Lord Krishna is the eighth avatar (incarnation) of Lord Vishnu and the supreme God in Indian Hindu Mythology. Hence he is often worshipped as Jagannath. The name comes from the conjugation of two Sanskrit words – jagat (world) and natha (master). Hence, the word “Jagannath” means master (natha) of the world (jagat) and refers to Lord Krishna, who is held to be the Supreme God and creator of the Universe. It is traditionally believed that Lord Krishna appeared in his human form on earth in Dwapara yuga, on the midnight of the 8th day of the dark half of the month of Sravan of 3228 BC.

During his stay on earth, the lord performed many miraculous feats and asserted his divine identity. Lord Krishna was born to destroy the evil and protect the good. Once he declared that in Kal Yug(the age we presently live in) he would dwell in the seaside town of Puri, in the Indian state of Orissa. Therefore Puri is accepted by pious Hindus as the abode of Jagannath, the Lord of the Universe. A beautiful temple, the Jagannath temple, has long been built in the honour of the Lord.

The great sage Adi Shankaracharya I chose Puri as one of the Chaar Dham (four sacred abodes). The Char Dham is the most important Hindu pilgrimage circuit in the Indian Himalayas.The person who visits these four places is believed to attain moksha(salvation). Jagannath Puri is visited by thousands of pilgrims all the year round, but to be there at the time of the Ratha Yatra is regarded as holy as a visit to Hardwar and Kashi. That is why, elaborate arrangements are annually made by the state government and the local people on the onset of the Ratha Yatra celebrations. There are numerous dharmashalas and small hotels for the pilgrims, as well as five-star hotels. The temple of Puri is dedicated to Lord Jagannath(Lord Krishna), his elder brother Balabhadra and their sister Subhadra. The Sudarshan Chakra (the main weapon of the Lord) also becomes a deity in its own right here. The temple is a majestic structure, 65 metres high and stands on an elevated platform in the heart of the city. It was built during the twelfth century A.D. in the Kalinga style.

Rath Yatra Story in Bengali

जगन्नाथ रथ यात्रा स्टोरी

পৃথিবীতে তার থাকার সময়, প্রভু অনেক অলৌকিক কাজ সম্পাদন করেছিলেন এবং তাঁর ঐশ্বরিক পরিচয় উল্লেখ করেছিলেন। লর্ড কৃষ্ণ জন্মগ্রহণ করেন একবার তিনি ঘোষণা করেন যে যুগ (আমরা যে বয়সটি বর্তমানে বাস করি) তিনি উড়িষ্যার ভারতীয় রাজ্য পুরির সাওসাইড শহরে বাস করতেন। তাই পুরি হিন্দু জগন্নাথ, ইউনিভার্সের প্রভু প্রভু হিসাবে গৃহীত হয়। একটি সুন্দর মন্দির, জগন্নাথ মন্দির, দীর্ঘ প্রভুর প্রভুর নির্মিত হয়েছে

মহান ঋষি আদী শঙ্করাচার্য আমি পূরিকে চার ধাপ (চারটি পবিত্র আবাস) হিসাবে বেছে নিলাম। চর ধাম ভারতীয় Himalayas.The ব্যক্তি এই চারটি স্থানে পরিদর্শন মোক্ষ (পরিত্রাণের) সাধা বিশ্বাস করা হয় সবচেয়ে গুরুত্বপূর্ণ হিন্দু তীর্থযাত্রা বর্তনী হয়। জগন্নাথ পুরীর সারাবছর তীর্থযাত্রীদের হাজার হাজার দ্বারা পরিদর্শন করা হয়, কিন্তু Hardwar এবং কাশী একটি দর্শন হিসাবে পবিত্র হিসেবে গণ্য করা হয় Ratha রথযাত্রা সময় সেখানে যাবে। এ কারণে রাহা যাতারা উদ্যাপনে রাষ্ট্রীয় সরকার ও স্থানীয় জনগণের দ্বারা বার্ষিক ব্যবস্থা বিস্তৃত হয়। তীর্থযাত্রীদের জন্য অসংখ্য ধর্মশালা এবং ছোট হোটেল, সেইসাথে পাঁচ তারকা হোটেল আছে পূরির মন্দিরটি লর্ড জগন্নাথ (ভগবান কৃষ্ণ), তার বড় ভাই বালভদ্র ও তার বোন সুভূদ্রকে উৎসর্গ করা হয়। সুদর্শন চক্র (প্রভুর প্রধান অস্ত্র )ও এখানে নিজের অধিকারে একটি দেবতা হয়ে উঠেছে। মন্দিরটি একটি উজ্জ্বল কাঠামো, 65 মিটার উচ্চ এবং এটি শহরের কেন্দ্রস্থলে একটি উঁচু প্ল্যাটফর্মের উপর অবস্থিত। এটি বারো শতকের এডিডায় নির্মিত হয়েছিল। কালিং শৈলীতে

Jagannath Rath Yatra Story in Gujarati

પૃથ્વી પરના તેમના રોકાણ દરમિયાન, ભગવાન અનેક ચમત્કારિક પરાક્રમ કરે છે અને તેમની દિવ્ય ઓળખ ભારપૂર્વક જણાવે છે. ભગવાન કૃષ્ણનો જન્મ થયો એકવાર તેમણે જાહેર કર્યું કે કલ ત્રેતાયુગમાં (વય અમે હાલમાં રહેવા) માં તેમણે પુરી ના દરિયા કિનારા નગર માં રહેવું હોત ઓરિસ્સા ના ભારતીય રાજ્ય માં. તેથી પુરી જગન્નાથ બ્રહ્માંડની પ્રભુના ઘર તરીકે પવિત્ર હિન્દુઓ દ્વારા સ્વીકારવામાં આવે છે. એક સુંદર મંદિર, જગન્નાથ મંદિર, લાંબા સમયથી ભગવાનના માનમાં બનાવવામાં આવ્યું છે

મહાન ઋષિ આદિ શંકરાચાર્યે હું ચારના ધામ એક (ચાર પવિત્ર ભગવાનો વાસ) તરીકે પુરી પસંદ કરો. ચાર ધામ ભારતીય Himalayas.The જે વ્યક્તિ આ ચાર સ્થળોએ મુલાકાત મોક્ષ (મુક્તિ) પ્રાપ્ત કરવા માટે માનવામાં આવે છે સૌથી મહત્વપૂર્ણ હિન્દૂ યાત્રાધામ પરિપથ છે. જગન્નાથ પુરી આખું વર્ષ યાત્રાળુઓ હજારો દ્વારા મુલાકાત લીધી છે, પરંતુ હરદ્વાર અને કાશી મુલાકાત પવિત્ર ગણવામાં આવે છે રાઠા યાત્રા સમયે ત્યાં છે. એટલા માટે, સુવિકસિત વ્યવસ્થા વાર્ષિક રાજ્ય સરકાર અને રાઠા યાત્રા ઉજવણીના વધતા સ્થાનિક લોકો દ્વારા બનાવવામાં આવે છે. ત્યાં અસંખ્ય dharmashalas અને યાત્રાળુઓ માટે નાના હોટલ, તેમજ ફાઇવ સ્ટાર હોટલ છે. પુરી મંદિર ભગવાન જગન્નાથ (ભગવાન કૃષ્ણ), તેના મોટા ભાઇ Balabhadra અને તેમની બહેન સુભદ્રા માટે સમર્પિત છે. સુદર્શન ચક્ર (લોર્ડ ઓફ મુખ્ય શસ્ત્ર) પણ અહીંથી પોતાની એક દેવતા બની જાય છે. મંદિર જાજરમાન માળખું, 65 મીટર ઊંચી છે અને શહેરના હૃદય માં એલિવેટેડ પ્લેટફોર્મ પર રહે છે. તે બારમી સદીના એ.ડી. કલિંગ શૈલીમાં

Jagannath Puri Rath Yatra Story in Hindi

भारत भर में मनाए जाने वाले महोत्सवों में जगन्नाथपुरी की रथयात्रा सबसे महत्वपूर्ण है। यह परंपरागत रथयात्रा न सिर्फ हिन्दुस्तान, बल्कि विदेशी श्रद्धालुओं के भी आकर्षण का केंद्र है। श्रीकृष्ण के अवतार जगन्नाथ की रथयात्रा का पुण्य सौ यज्ञों के बराबर माना गया है।

पुरी का जगन्नाथ मंदिर भक्तों की आस्था केंद्र है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। जो अपनी बेहतरीन नक्काशी व भव्यता लिए प्रसिद्ध है। यहां रथोत्सव के वक्त इसकी छटा निराली होती है, जहां प्रभु जगन्नाथ को अपनी जन्मभूमि, बहन सुभद्रा को मायके का मोह यहां खींच लाता है। रथयात्रा के दौरान भक्तों को सीधे प्रतिमाओं तक पहुंचने का मौका भी मिलता है।
यह दस दिवसीय महोत्सव होता है। इस दस दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश अक्षय तृतीया को श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण से होता है और कुछ धार्मिक अनुष्ठान भी महीने भर किए जाते हैं।
जगन्नाथजी का रथ ‘गरुड़ध्वज’ या ‘कपिलध्वज’ कहलाता है। 16 पहियों वाला रथ 13.5 मीटर ऊंचा होता है जिसमें लाल व पीले रंग के कप़ड़े का इस्तेमाल होता है। विष्णु का वाहक गरुड़ इसकी हिफाजत करता है। रथ पर जो ध्वज है, उसे ‘त्रैलोक्यमोहिनी’ कहते हैं। बलराम का रथ ‘तलध्वज’ के बतौर पहचाना जाता है, जो 13.2 मीटर ऊंचा 14 पहियों का होता है। यह लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। रथ के ध्वज को उनानी कहते हैं। त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनावा इसके अश्व हैं। जिस रस्से से रथ खींचा जाता है, वह बासुकी कहलाता है।’पद्मध्वज’ यानी सुभद्रा का रथ। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। रथ की रक्षक जयदुर्गा व सारथी अर्जुन होते हैं। रथध्वज नदंबिक कहलाता है। रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता इसके अश्व होते हैं। इसे खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुडा कहते हैं।

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