Hindi Shayari

पिता पर शायरी – पिता की याद में शायरी |Pitaji ki Yaad me Shayari – Papa Yaad Shayari

दुन्या में सब माँ के त्याग और उनकी महानता की चर्चा करते है पर शायद ही कोई होगा जो पिता के त्याग और उनके कर्तव्यों के गुणगान करता है| पिता अपने परिवार के हित में अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते है| अक्सर ऐसा होता है की पिता की मोजुदगी में उनके परिश्रम का किसी को अहसास नहीं होता परन्तु उनके जाने के बाद उनकी कीमत समाजमे आती है| फिर हमें उन्हें ना सामजपाने का बहुत पछतावा होता है|

पापा की याद शायरी

तोतली जुबान से निकला पहला शब्द
उसे सारे जहाँ की खुशियाँ दे जाता है,
बच्चों में ही उसे नजर आती है जिंदगी अपनी
उनके लिए तो ‘पिता’ अपनी जिंदगी दे जाता है।

उसके लफ्जों को कभी गलत मत समझना
कि उसके हर अलफ़ाज़ में एक गहराई होती है,
न समझना उसकी हरकतों को अपने लिए परेशानियाँ तुम
तुम्हारे लिए तो ‘पिता’ ने दिल में एक दुनिया बसाई होती है।

पिता के लिए दर्द भरी शायरी

उसके हाथ की लकीरें बिगड़ गयी
अपने बच्चों की किस्मतें बनाते-बनाते,
उसी ‘पिता’ की आंखों में आज
कई आकाशों के तारे चमक रहे थे।

यूँ तो रोज़ ही छलक जाती है
चंद बूँदें इन आँखों से
जब भी आपकी याद आती है

पिता को समर्पित शायरी

परन्तु कई बार मन घुटता है
अंतर में आँखों से आँसू नहीं बहते
परन्तु मन में उमड़ आती हैं
कई यादों की धाराएँ एक साथ
बचपन से जवानी तक के
सफ़र की हर बात

तब ख़ुद को समझाने पर भी
नहीं होता है विश्वास
आज आप नहीं हैं हमारे बीच
अपने बच्चों के पास

पापा की याद में शायरी

पापा न जाने क्यूँ एक ही बात सताती है
जब भी आपकी याद आती है
क्यूँ चले गए आप अचानक
इतनी दूर
हम अभागी संतान न रह सके
अंतिम समय में भी आपके पास

आपके साथ ही जैसे चली गई है
हमारी हर ख़ुशी, हमारे चेहरों कीं रौनक
हमारा उत्साह, हमारा विश्वास

बिता देता है एक उम्र
औलाद की हर आरजू पूरी करने में,
उसी ‘पिता’ के कई सपने
बुढापे में लावारिस हो जाते हैं।

सख्त सी आवाज में कहीं प्यार छिपा सा रहता है
उसकी रगों में हिम्मत का एक दरिया सा बहता है,
कितनी भी परेशानियां और मुसीबतें पड़ती हों उस पर
हंसा कर झेल जाता है ‘पिता’ किसी से कुछ न कहता है।

पिताजी की पुण्यतिथि शायरी

Pitaji ki Yaad me Shayari

कमर झुक जाती है बुढापे में उसकी
सारी जवानी जिम्मेवारियों का बोझ ढोकर,
खुशियों की ईमारत खड़ी कर देता है ‘पिता’
अपने लिए बुने हुए सपनों को खो कर।

परिवार के चेहरे पे ये जो मुस्कान हंसती है,
‘पिता’ ही है जिसमें सबकी जान बस्ती है।

दिवंगत पिता के लिए शायरी

उसकी रातें भी जग कर कट जाती हैं
परिवार के सपनों के लिए,
कितना भी हो ‘पिता’ मजबूर ही सही
पर हमारी जिंदगी में इक ठाठ लिए रहता है।

न रात दिखाई देती है
न दिन दिखाई देते हैं,
‘पिता’ को तो बस परिवार के
हालात दिखाई देते हैं।

पिता को श्रद्धांजलि कविता

बेमतलब सी इस दुनिया में
वो ही हमारी शान है,
किसी शख्स के वजूद की
‘पिता’ ही पहली पहचान है।

जलती धूप में वो आरामदायक छाँव है
मेलों में कंधे पर लेकर चलने वाला पाँव है,
मिलती है जिंदगी में हर ख़ुशी उसके होने से
कभी भी उल्टा नहीं पड़ता ‘पिता’ वो दांव है।

पिता जी को जन्मदिन की बधाई

न मजबूरियाँ रोक सकीं
न मुसीबतें ही रोक सकीं,
आ गया ‘पिता’ जो बच्चों ने याद किया,
उसे तो मीलों की दूरी भी न रोक सकी।

हर दुःख हर दर्द को वो
हंस कर झेल जाता है,
बच्चों पर मुसीबत आती है
तो पिता मौत से भी खेल जाता है।

पापा के लिए शायरी

चट्टानों सी हिम्मत और
जज्बातों का तुफान लिए चलता है,
पूरा करने की जिद से ‘पिता’
दिल में बच्चों के अरमान लिए चलता है।

बिना उसके न इक पल भी गंवारा है,
पिता ही साथी है, पिता ही सहारा है।

पापा की याद

कैसे चुकाऊंगा कर्ज उस पिता का इस जन्म में
जिनके बूढ़े हाथों ने मेरी तकदीर बनायी थी,
अपने जीवन के सारे रंग छोड़
मेरे भविष्य की सुनहरी तस्वीर बनायीं थी।

ये वादा है कि जब तक जी रहा हूँ
आपके दिये संस्कारों पर चलना मेरा काम रहेगा,
हाँ मानता हूँ जिन्दगी में आपका साथ नहीं
मगर मरते दम तक मेरे नाम के साथ आपका नाम रहेगा।

पापा की याद में

किसी चीज की कमी न थी
आप थे तो दुनिया कितनी प्यारी थी
आज परिवार की जरूरतों में जिन्दगी कट रही है
तो अहसास होता है
आपके कन्धों पर जिम्मेवारी कितनी भारी थी।

बिन पिता के तो ये सारा जहान वीरान लगता है
ये जग भी चलते फिरते लोगों का श्मशान लगता है,
जब तक रहता है संग किसी चीज की जरूरत नहीं होती
दूर हो जाता है तो बेगाना ये सारा जहान लगता है।

पिताजी की पुण्यतिथि

जिन्दगी के अंधेरों में वो जलती मशाल थे,
मुसीबतों से बचने को वो परिवार की ढाल थे,
कहाँ जी पाये थे वो अपनी जिन्दगी अपने हिसाब से
पिता हमारे कोई आम शख्स नहीं त्याग की एक मिसाल थे।

वक़्त बीत गया लेकिन रह गयी हैं वक़्त की परछाईं
आपके जाने के बाद कुछ बची है तो बस तन्हाई
निकल पड़ते हैं आँख से आँसू और दिल बैठ जाता है
जब भी याद आती है बातें जो आपने थी बताई।

एक पिता की अहमियत क्या है
इसका जवाब वक़्त मेरे सामने लाया है,
किन हालातों से गुजरे होंगे
मुझे पालने के लिए आप
ये मुझे खुद
पिता बन कर समझ आया है।

कभी डर लगता था आपकी डांट से
आज आपकी ख़ामोशी मुझे सताती है,
मुझे मालूम है कि अब आप नहीं आने वाले
फिर भी आपकी यादें अक्सर मुझे रुलाती हैं।

जब भी कमी खलती है आपकी
आपकी यादों से मुलाकातें कर लेता हूँ,
अब आपसे मिलना मुमकिन कहाँ
इसलिए आपकी तस्वीर से बातें कर लेता हूँ।

सुधार लूँ मैं गुस्ताखियाँ जिन्दगी की
अब गलती करने पर मुझे कहाँ कोई डांटता है,
अकेले ही जूझता हूँ अब मैं जिन्दगी से
आपकी तरह मेरे दर्द कहाँ कोई बांटता है।

पिता पुत्र शायरी

गिर-गिर कर आगे बढ़ता था जब मैं बचपन में
ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया
और पढ़ा लिखा कर बड़ा किया,
याद है मुझे आपने अपनी कई ख्वाहिशें भुला कर
मेरी हर जरूरत को पूरा कर मुझे
मेरे पैरों पर खड़ा किया।

कब का बर्बाद हो गया होता मैं
इस मतलबी दुनिया में,
सफल होने में काम आये
सबक जो पिता ने पढ़ाये थे।

पिता के लिए शायरी

हाँ मैं खुश था उस बचपन में
जब आपके कंधे पर बैठा था,
मगर बहुत रोया था जब
मेरे कंधे पर आप थे।

हर पल अहसास होता है
आप यहाँ ही हों जैसे,
काश ये हो जाये मुमकिन
मगर ये मुमकिन हो कैसे?

पिता शायरी 2 लाइन

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यूँ तो दुनिया के सारे गम
हंस के मैं ढो लेता हूँ,
पर जब भी आपकी याद आती है
मैं अक्सर रो देता हूँ।

मार-मार के पत्थर को
एक जौहरी हीरा बनाता है,
आपकी डांट का मतलब हमको
आज समझ में आता है।