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2020 Phulera Dooj – Phulera Dooj Date, Time, Schedule and Significance

फूलेरादुज त्यौहार

भारत में अनेको पर्व मनाये जाते है। जिनमे से एक पर्व फुलेरा दूज भी है जिसे उत्तरी भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में हर्षो उल्लास और बड़े ही जोश के साथ भव्य उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार विशेष कर उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन, नन्द गॉव, बरसाना सहित पूरी ब्रज भूमि में इसे पूरे आनंद के साथ मनाया जाता है।

इस दिन लोग होली के आगमन का स्वागत (Welcome) करते है। आज हम आपको इस Article के माध्यम से Phulera Dooj 2020 Kab ki Hai, Phulera Dooj Puja Time और इसके Significance / importance से संबंधित जानकारियाँ प्रस्तुत कर रहे है और आपसे किसी ने कभी यह पूछा होगा कि फुलेरा दूज कब की है बताएं तो आप Internet के जरिया Choghadiya Muhurat तथा Panchang for Phulera Dooj Download करके बता सकते है।

इसके साथ ही 2020 और 2021 Mein Kab Hai ? ये जान सकते है और Phulera Dooj in Hindi में भी पढ़ सकते है। इस दिन को शादी विवाह के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है।

फुलेरा दूज कब की है ?

भारत में हर वर्ष Phoolera Duj का त्यौहार भारत के दो प्रसिद्ध त्योहारों यानि वसंत पंचमी तथा होली के मध्य आता है। फुलेरा दूज हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष के अंतिम माह यानि कि फाल्गुन माह में होती है और फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर Phulera Duj मनायी जाती है एवं दूसरी ओर Gregorian Calendar के अनुसार फुलेरा दूज को फरवरी या मार्च के महीने में मनाया जाता है। फुलेरा दूज को रंगों के त्यौहार holi के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। वही इसे कुछ लोग फुलेरा दूज को होली रखने वाले दिन का शुभ मुहूर्त के रूप में भी जानते है। इसलिए आप होली की शायरी और बधाइयाँ भी पहले से भेज सकते हैं । इस त्यौहार वाले दिन से लगभग सभी लोग गुलरियाँ बनाना शुरू कर देते है और इसके साथ ही होली के लिए सभी प्रकार की तैयारियों के कार्यो की शुरुआत कर देते है।

फुलेरा दौज का महत्व

यह पर्व भगवान श्री कृष्ण जी को समर्पित है। पुराणों के अनुसार यह माना गया है कि स्वम प्रभु श्री कृष्ण जी अनेकों रंग-बिरंगे पुष्पों के साथ खेलते है तथा इस त्यौहार की शुभ पूर्व संध्या के दौरान होली के पर्व में भाग लेते है। फुलेरा दोज का यह पर्व सभी के जीवन में हर्षो उल्लास एवं खुशियां भर देता है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा और वृंदावन के अनेकों मंदिरों में, सभी भक्तों को प्रभु श्री कृष्ण जी के सुन्दर दर्शन करने का उत्तम मौका प्राप्त हो जाता है। जहां पर सभी भक्त हर वर्ष फुलेरा दूज के उत्तम समय के दौरान होली के उत्सव में भाग लेने के लिए उपस्तिथ होते है। इस दिन अनेकों प्रकार के समारोह एवं अनुष्ठानों को आयोजित किया जाता है तथा इसके साथ ही कृष्ण जी कि प्रतिमा को होली के आने वाले त्योहार को दर्शाने हेतु रंगों से सराबोर कर दिया जाता है।

फूलेरादूज कैसे मनाते हैं

फुलेरा दूज

फूलेरादुज त्यौहार

  • इस स्पेशल दिन सभी भक्त (संगत) के द्वार भगवान श्री कृष्ण जी की सच्चे मन से पूजा और अर्चना की जाती है।
  • इस त्यौहार पर सभी भक्त अपने घर तथा मंदिर दोनों स्थान पर कृष्ण जी की मूर्ति एवं उनकी प्रतिमा को सुन्दर रूप में सजाते है।
  • सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया यह है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण जी के साथ मंदिरों में अनेको प्रकार के फूलों से होली खेली जाती है।
  • इस दिन पूरे ब्रज क्षेत्र में भगवन श्री कृष्ण तथा सभी देवताओं के सम्मान में एक भव्य उत्सव मनाया जाता है।
  • इस पर्व पर सभी मंदिरों को विभिन्न प्रकार की Light तथा flowers से सुसज्जित किया जाता है एवं भगवान श्री कृष्ण जी की प्रतिमा को भी
  • एक भव्य रूप में सजाये गए रंगीन पुष्पों के मंडप में स्थान दिया जाता है।
  • भगवान कृष्ण जी की मूर्ति कमर पर एक रंगीन कपडा बांधा जाता है उसका प्रतीक यह होता है कि भगवान श्री कृष्ण अब पुष्पों व् गुलाल से भक्तों के साथ होली खेलने के लिए उपस्थित है।
  • फुलेरा दूज वाले दिन पर विशेष भोग भगवान कृष्ण को समर्पित कर उनका भोग लगया जाता है जिसमे अनेकों प्रकार का भोजन, फ़लहार और विभिन्न फलों को शामिल किया गया है तथा भोग लगाने के पश्चात् उस भोग को प्रसाद के रूप में सभी संगत (भक्तजनो) को बांट दिया जाता है।
  • इस दिन सभी मंदिरों में अलग-अलग प्रकार के धार्मिक आयोजन, भजन कीर्तन किये जाते है जिनमें सभी भक्त भगवान श्री कृष्ण जी कि लीला नाटकों व् होली पोअम को प्रस्तुत करते है।

Phulera Dauj festival date and time

हम आपको बता दे कि फुलेरा दोज इस बार Kitni Tarikh ki Hai तो फुलेरा दूज 2020 में हिंदी महीनो व् हिन्दू पंचांग के अनुसार फुलेरा दोज की Date 25 February 2020 निर्धारित है और आपको Important Timings On Phulera Dooj के बारे में पूछने की आवश्यकता नहीं है क्यूकि इस दिन का हर एक क्षण शुभ माना जाता है।

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