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Omkareshwar Temple Indore

omkareshwar_mandir

मध्य प्रदेश(madhya pradesh ) में नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्तिथ ओंकारेश्वर एक हिन्दू मंदिर है । Omkareshwar mandir पाँच मंजिल ईमारत में बना है । यह ज्योतिर्लिंग पंचमुखी है । यह खंडवा जिले के शिवपुरी नामक टापू पर बना हुआ है । यह द्वीप ॐ के आकार का है । इस द्वीप पर 2 मंदिर बने हुए है ।

    • ॐ कारेश्वर
    • ममलेश्वर

यह भगवान शिव के 12 jyotirling में से चौथा ज्योतिर्लिंग है । ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी है । हिन्दू धरम के अनुसार सभी तीर्थ धाम की यात्रा करने  के पश्चात इस मंदिर के दर्शन करने का विशेष महत्व है लोग सभी धामों से जल लाकर यह अर्पित करते है । चाहे आप कितने भी तीर्थधाम की यात्रा कर ले लेकिन omkareshwar temple jyotirlinga के दर्शन के बिना आपकी यात्रा अधूरी ही है ।

How to Reach Omkareshwar Temple ?

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे पहुंचे  – यह तो हम जानते ही है की यह मंदिर kahan hai परन्तु आखिर ओंकारेश्वर मंदिर कैसे पहुँचे? यह मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में ही आता है । यह इंदोर (म प्र) से 80 किमी की दूरी पर है (indore to omkareshwar distance is about 80 km)। इंदौर से ओमकारेश्वर टेम्पल जाने के लिए आपको सुबह ही बसे मिल जाती है । यहाँ से खंडवा रोड से मोरटक्का होते हुए पहुँच जा सकता है । खंडवा से ओम्कारेश्वर की दूरी को लगभग ढाई से तीन घंटे में तय किया जा सकता है । और क्या आपको पता है कि उज्जैन से ओंकारेश्वर की दूरी कितनी है? उज्जैन से ओंकारेश्वर 127 km की दूरी पर है ।

ओम्कारेश्वर का इतिहास

धन पति कुबेर जो की बहुत बड़े शिव – भक्त माने जाते है उन्होंने इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी । कहा जाता है की तीन लोकों का भ्रमण करके भोलेनाथ यह विश्राम करने आते थे ।कावेरी नदी की उत्पत्ति महादेव ने अपनी जटाओं से की थी जिससे कुबेर स्नान कर सके । पर्वत की परिक्रमा लगते हुए कावेरी नदी नर्मदा नदी से मिलती है इसे नर्मदा कावेरी संगम के रूप में जाना जाता है । स्कन्द पुराण में ओमकारेश्वर की महिमा का गुणगान करते हुए लिखा गया है

देवस्थानसमं ह्येतत् मत्प्रसादाद् भविष्यति।
अन्नदानं तप: पूजा तथा प्राणविसर्जनम्।
ये कुर्वन्ति नरास्तेषां शिवलोकनिवासनम्।।

अर्थात ओम्कारेश्वर तीर्थ की महिमा अलौकिक है । भगवान शंकर की कृपा होने के कारण इसे देव स्थान का दर्जा दिया गया है । जो भी व्यक्ति यह आकेर सच्चे मन से तप , त्याग , पूजन , अर्चना आदि करता है या प्राणों का परित्याग करता है उसे सीधे शिवलोक में जगह मिलती है ।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग परिसर

मंदिर की इमारत पाँच मंजिल है ।जिसकी पहली मंजिल पर भगवान महाकालेश्वर विराजमान है । इसकी तीसरी तल  पर सिद्धनाथ महादेव तथा चौथे तल पर  गुप्तेश्वर महादेव का मदिर है । जबकि इसके पाँचवे तल पर राजेश्वर महादेव विराजमान है । तीर्थ यात्रियों के लिए एक भोजनालय भी इसी परिसर में चलाया जाता है ।

ओंकारेश्वर परिक्रमा

ॐ कारेश्वर में ॐकार पर्वत की परिक्रमा लगाई जाती है । इस परिक्रमा का मार्ग लगभग 7 km लंबा है और ये सीमेंट का बना हुआ पक्का रास्ता है । इस मार्ग पर बहुत ही सुन्दर दृश्य देखने को मिलते है । साथ ही साथ बीच में कई अन्य मंदिर और आश्रम भी पड़ते है । इस मार्ग में पड़ने वाले मंदिर कुछ इस प्रकार है –

  • ऋण मुक्तेश्वार महादेव
  • गौरी सोमनाथ मंदिर
  • रामकृष्ण मिशन साधना कुटीर
  • शिव प्रतिमा मंदिर
  • ओंकार  मठ
  • पातालीहनुमान मंदिर

Omkareshwar Temple Timings

ओम कारेश्वर मंदिर में सैकड़ों वर्षों से नियमित पूजा , अर्चना की जा रही है । वर्तमान में पूजा , दर्शन का समय इस प्रकार है ।

मंदिर के खुलने का समय :

प्रातः कालीन आरती एवं भोग : प्रातः काल 5 बजे
दर्शन प्रारंभ : प्रातः काल 5:30 बजे ।

मध्यान्ह कालीन समय :

मध्यांतर भोग: दोपहर 12:20 से 1:10 बजे
दर्शन प्रारंभ पुनः दोपहर 1:15 बजे से

सायंकालीन समय :

भगवान् के दर्शन: दोपहर 4  बजे से

भगवान की शयन आरती

  • शयन आरती रात्रि 8:30 से 9:00 बजे
    शयन दर्शन रात्रि 9:35 से 9:35 बजे

Omkareshwar Dam

मंदिर से थोड़ा दूर ओंकारेश्वर बांध है जो मन्धाता में नर्मदा नदी पर बनाया गया है । यह बांध 2003 से 2007 के बीच बनाया गया था जिसकी ऊंचाई 33 m है ।omkareshwar_dam

How far Omkareshwar to Mahakaleshwar ?

ओमकारेश्वर से महाकालेश्वर की दूरी 112 कि मी है । आप वह टैक्सी , ट्रेन , बस या कार से जा सकते है। इसकी सड़क की दूरी 134.3 km है ।

Omkareshawar Temple in Pune

omkareswar_mandir_pune

यह मंदिर पुणे के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है । पेशवाओं के आध्यात्मिक गुरु शिवराम भट्ट द्वारा 1740 से 1760 के बीच इस मंदिर का का निर्माण कराया गया। मुठा नदी के किनारे बना ये मंदिर शनिवार पेठ में स्तिथ है । बाजीराव पेशवा के भाई और पेशवा साम्राज्य के सेनापति चिमाजी अप्पा ने मंदिर के निर्माण के लिए दान दिया था । chimaji अप्पा के निधन के बाद उनकी समाधि भी इसी मंदिर में बनवा दी गई ।मंदिर पेशवा साम्राज्य के गौरव का बखान करता है । भगवान शिव के नाम पर बना ये मंदिर उनकी पत्नी देवी पार्वती को समर्पित है ।

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