Nibandh

National Energy Conservation Day Essay in Hindi & English Pdf Download | राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस निबंध 2018

विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस हर साल 14 दिसंबर को मनाया जाता है | इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को ऊर्जा के महत्व और उसके उपयोग के बारे में बताना व जागरूक करना है | ऊर्जा चाहे प्राकृतिक हो या विद्धुतीय हमे उसका उपयोग करना चाहिए न की दुरूपयोग | आज के समय में यह आम बात हो गयी है लोग विद्धुत ऊर्जा का बहुत दुरूपयोग करते हैं जैसे की मोबाइल फ़ोन चार्जिंग पर लगा कर भूल जाते हैं, पानी का उपयोग करते समय पानी बहुत फैलाते हैं | यही सब कारण हमारे ऊर्जा के स्रोतों को एक दिन अंत की कगार पर ले आएँगे | इसलिए हमे सबसे पहले खुद जागरूक होना होगा फिर लोगों को भी ऊर्जा के महत्व के बारे में बताकर व समझा कर जागरूक करना पड़ेगा |

#1 Essay

कोई भी ऊर्जा की बचत इसकी गंभीरता से देखभाल करके कर सकता है, दैनिक उपयोग के बहुत से विद्युत उपकरणों को जैसे: बिना उपयोग के चलते हुये पंखों, बल्बों, समरसेविलों, हीटर को बंद करके आदि। यह अतिरिक्त उपयोग की ऊर्जा की बचत करने का सबसे कुशल तरीका है जो ऊर्जा संरक्षण अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

जीवाश्म ईंधन, कच्चे तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि दैनिक जीवन में उपयोग के लिए पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न करते हैं लेकिन दिनों-दिन इनकी बढ़ती मांग प्राकृतिक संसाधनों के कम होने का भय पैदा करता है। ऊर्जा संरक्षण ही केवल एक ऐसा रास्ता है जो ऊर्जा के गैर- नवीनीकृत साधनों के स्थान पर नवीनीकृत साधनों को प्रतिस्थापित करता है।

ऊर्जा उपयोगकर्ताओं को ऊर्जा की कम खपत करने के साथ ही कुशल ऊर्जा संरक्षण के लिये जागरुक करने के उद्देश्य से विभिन्न देशों की सरकारों ने ऊर्जा और कार्बन के उपयोग पर कर लगा रखा है। उच्च ऊर्जा उपभोग पर कर ऊर्जा के प्रयोग को कम करने के साथ ही उपभोक्ताओं को एक सीमा के अन्दर ही ऊर्जा का प्रयोग करने के लिये प्रोत्साहित करता है।

लोगों को इस विषय पर अधिक जागरुक होना चाहिये कि, कार्यस्थलों पर तेज रोशनी विभिन्न परेशानियों (बीमारियों) को लाती है जैसे: तनाव, सिर दर्द, रक्तचाप, थकान और कार्यक्षमता को कम करता है। जबकि, प्राकृतिक प्रकाश कार्यकर्ताओं के उत्पादकता के स्तर को बढ़ाता है और ऊर्जा की खपत को कम करता है।

भारत में पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान एसोसिएशन वर्ष 1977 में भारत सरकार द्वारा भारतीय लोगों के बीच ऊर्जा संरक्षण और कुशलता को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया था। ये ऊर्जा का संरक्षण महान स्तर पर करने के लिये भारत सरकार द्वारा उठाया गया बहुत बड़ा कदम है। बेहतर ऊर्जा कुशलता और संरक्षण के लिए भारत सरकार ने एक अन्य संगठन ऊर्जा दक्षता ब्यूरों को भी 2001 में स्थापित किया गया।

ऊर्जा संरक्षण के क्या उपाय हैं?

थर्मल पर्दें, स्मार्ट खिड़कियों के अलावा खिड़कियाँ ऊर्जा का संरक्षण करने में सबसे बड़ा कारक है। ऊर्जा की एक बड़ी मात्रा को प्राकृतिक रोशनी और कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप या सीएफएल से (15W और अन्य साधनों के द्वारा ऊर्जा खपत का केवल 1/4वां भाग की खपत), फ्लोरोसेंट बल्ब, रैखिक फ्लोरोसेंट, सौर स्मार्ट टॉर्च, स्काई लाइट, खिड़कियों से प्रकाश व्यवस्था और सौर लाइट का प्रयोग करके बचाया जा सकता है।
जल संरक्षण भी बेहतर ऊर्जा संरक्षण का नेतृत्व करता है। लोगों के द्वारा हर साल लगभग हजारों गैलन पानी बर्बाद किया जाता है जिसकी विभिन्न संरक्षण के साधनों जैसे: 6 जीपीएम या कम से कम प्रवाह वाले फव्वारों, बहुत कम फ्लश वाले शौचालय, नल जलवाहक, खाद शौचालयों का प्रयोग करके बचत की जा सकती है।
पृथक्करण सर्दी के मौसम में थर्मल को कम करने के साथ ही गर्मियों में थर्मल प्राप्त करके भी ऊर्जा के संरक्षण में बहुत अहम भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिये, प्राकृतिक ऊन पृथक्करण, घर पृथक्करण, कपास पृथक्करण, रेशा पृथक्करण, थर्मल पृथक्करण आदि।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कैसे मनाया जाता है

पूरे भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण के अभियान को और प्रभावशाली और विशेष बनाने के लिये सरकार द्वारा और अन्य संगठनों द्वारा लोगों के बीच में बहुत सी ऊर्जा संरक्षण प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाता है क्योंकि वो ही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। कई जगहों पर संगठनों के छात्रों या सदस्यों द्वारा ऊर्जा संरक्षण दिवस पर स्कूल, राज्य, क्षेत्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न चित्रकला प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण अभियान भारत में ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए विद्युत मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय जागरूकता अभियान है। छात्रों के लिये कई स्तरों पर चित्रकारी प्रतियोगिताओं का आयोजन इस अभियान की मुख्य गतिविधियों में से एक है जो इस अभियान में भाग लेने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिये ऊर्जा संरक्षण के महत्व के साथ साथ शिक्षित करने में मदद करता है। ये प्रतियोगिता घरेलू क्षेत्रों के लोगों को भी जागरूक करने में मदद करती है। हर एक प्रतिभागी को एक विषय दिया जाता है जैसे: “अधिक सितारें, अधिक बचत”, “वर्तमान में ऊर्जा का अपव्यय, भविष्य में ऊर्जा की कमी” और “ऊर्जा का बचाव भविष्य का बचाव” आदि। प्रतियोगी अपने चित्रों को पेंसिल के रंगों, मोम के रंगों और पानी के रंगों आदि का प्रयोग करके अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

प्रतियोगिता में भाग लेने और जीतने वाले छात्रों को भागीदारी प्रमाण पत्र, योग्यता प्रमाण-पत्र और या नकद पुरस्कार 33,000 रुपये प्रति राज्य दिया जाता है। 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के समारोह कार्यक्रम में विद्युत मंत्रालय द्वारा सम्मानित राज्य के विजेताओं के बीच यह राशि बाँट दी जाती है।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का उद्देश्य

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस हर साल एक विशेष विषय के साथ कुछ लक्ष्यों और उद्देश्यों को ध्यान में रखकर लोगों के बीच अधिक प्रभावशाली बनाने के लिये मनाया जाता है।

यह लोगों के बीच जीवन के हर क्षेत्र में ऊर्जा संरक्षण के महत्व का संदेश भेजने के लिए मनाया जाता है।
ऊर्जा संरक्षण की प्रक्रिया को बढावा देने के लिये पूरे देश में बहुत से कार्यक्रमों जैसे: विचार विमर्श, सम्मेलनों, वाद-विवाद, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं का आयोजन करना।
अत्यधिक और फालतू ऊर्जा के उपयोग के स्थान पर कम ऊर्जा के प्रयोग के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।
ऊर्जा की खपत में कमी और कुशलता पूर्वक उपयोग करने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना।
ऊर्जा सुरक्षा में भारतीय नागरिकों की महत्वपूर्ण भूमिका

भारत के सभी और प्रत्येक नागरिक कुशलतापूर्वक ऊर्जा के उपयोग और भविष्य के लिये ऊर्जा की बचत के बहुत से तरीकों के बारे में जानते हैं। वो सभी नियमों, विनियमों और ऊर्जा दक्षता का समर्थन करने के लिये भारत सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों का पालन करते हैं। भारत के नागरिक 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान ऊर्जा के उपयोग को कम करने के अभियान में प्रत्यक्ष अंशदान का भुगतान कर रहे हैं। देश में सकारात्मक बदलाव लाने और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिये बच्चे बहुत बड़ी उम्मीद हैं।

#2 Essay

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2018 में शुक्रवार, 14 दिसम्बर को मनाया जायेगा। भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस लोगों को ऊर्जा के महत्व के साथ ही साथ बचत, और ऊर्जा की बचत के माध्यम से संरक्षण बारे में जागरुक करना है। ऊर्जा संरक्षण का सही अर्थ है ऊर्जा के अनावश्यक उपयोग को कम करके कम ऊर्जा का उपयोग कर ऊर्जा की बचत करना है। कुशलता से ऊर्जा का उपयोग भविष्य में उपयोग के लिए इसे बचाने के लिए बहुत आवश्यक है। ऊर्जा संरक्षण की योजना की दिशा में अधिक प्रभावशाली परिणाम प्राप्त करने के लिए हर इंसान के व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण निहित होना चाहिए।

आधुनिक युग विज्ञान का युग है । मनुष्य विकास के पथ पर बड़ी तेजी से अग्रसर है उसने समय के साथ स्वयं के लिए सुख के सभी साधन एकत्र कर लिए हैं । इतना होने के बाद और अधिक पा लेने की अभिलाषा में कोई कमी नहीं आई है बल्कि पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है ।

समय के साथ उसकी असंतोष की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। कल-कारखाने, मोटर-गाड़ियाँ, रेलगाड़ी, हवाई जहाज आदि सभी उसकी इसी प्रवृत्ति की देन हैं । उसके इस विस्तार से संसाधनों के समाप्त होने का खतरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है ।

प्रकृति में संसाधन सीमित हैं । दूसरे शब्दों में, प्रकृति में उपलब्ध ऊर्जा भी सीमित है। विश्व की बढ़ती जनसंख्या के साथ आवश्यकताएँ भी बढ़ती ही जा रही हैं । दिन-प्रतिदिन सड़कों पर मोटर-गाड़ियों की संख्या में अतुलनीय बुदधि हो रही है । रेलगाड़ी हो या हवाई जहाज सभी की संख्या में वृद्‌धि हो रही है । मनुष्य की मशीनों पर निर्भरता धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है ।

इन सभी मशीनों के संचालन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है । परंतु जिस गति से ऊर्जा की आवश्यकता बढ़ रही है उसे देखते हुए ऊर्जा के समस्त संसाधनों के नष्ट होने की आशंका बढ़ने लगी है । विशेषकर ऊर्जा के उन सभी साधनों की जिन्हें पुन: निर्मित नहीं किया जा सकता है । उदाहरण के लिए पेट्रोल, डीजल, कोयला तथा भोजन पकाने की गैस आदि ।

पेट्रोल अथवा डीजल जैसे संसाधनों रहित विश्व की परिकल्पना भी दुष्कर प्रतीत होती है । परंतु वास्तविकता यही है कि जिस तेजी से हम इन संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं उसे देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब धरती से ऊर्जा के हमारे ये संसाधन विलुप्त हो जाएँगे ।

अत: यह आवश्यक है कि हम ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान दें अथवा इसके प्रतिस्थापन हेतु अन्य संसाधनों को विकसित करें क्योंकि यदि समय रहते हम अपने प्रयासों में सफल नहीं होते तो संपूर्ण मानव सभ्यता ही खतरे में पड़ सकती है।

हमारे देश में भी ऊर्जा की आवश्यकता दिन पर दिन विकास व जनसंख्या वृद्‌धि के साथ बढ़ती चली जा रही है । ऊर्जा की बढ़ती माँग आने वाले वर्षो में आज से तीन या चार गुणा अधिक होगी । इन परिस्थितियों में भारत सरकार की ओर से ठोस कदम उठाने की अवश्यकता है । इस दिशा में अनेक रूपों में कई प्रयास किए गए हैं जिनस कुछ हद तक सफलता भी अर्जित हुई है । ‘बायो-गैस’ तथा अधिक वृक्ष उत्पादन आदि इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं । पृथ्वी पर ऐसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं है जो प्रदूषण रहित हैं ।

विश्व भर में ऊर्जा संरक्षण व ऊर्जा के नवीन श्रोतों को विकसित करने के महत्व को समझा जा रहा है । सभी देश सौर-ऊर्जा को अधिक महत्व दे रहे हैं तथा इसे और अधिक उपयोगी बनाने व इसके विकास हेतु विश्व भर के वैज्ञानिकों द्‌वारा अनुसंधान जारी हैं । जहाँ तक भारत की स्थिति है, हमारे देश में पेट्रोलियम ऊर्जा का एक बड़ा भाग खाड़ी के तेल उत्पादक देशों में आयात किया जाता है ।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कभी-कभी कच्चा तेल इतना महँगा हो जाता है कि इसे खरीद पाना भारतीय तेल कंपनियों के वश में नहीं होता । तब सरकार या तो तेल मूल्यों में वृद्‌धि कर इस घाटे की भरपाई करती है अथवा तेल कंपनियों को सीमा-शुल्क आदि में छूट देकर स्वयं घाटा उठाती है । दोनों ही स्थितियों में बोझ देश के उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है ।

हमें आशा है कि वैज्ञानिक ऊर्जा के नए संसाधनों की खोज व इसके विकास में समय रहते सक्षम होंगे । इसके अतिरिक्त यह आवश्यक है कि सभी नागरिक ऊर्जा के महत्व को समझें और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक बनें । यह निरंतर प्रयास करें कि ऊर्जा चाहे जिस रूप में हो उसे व्यर्थ न जाने दें ।

#3 Nibandh

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस प्रति वर्ष 14 दिसंबर को भारत में मनाया जाता है. भारत में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम वर्ष 2001 में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा लागू किया गया था. ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) भारत सरकार का एक कानूनी संगठन है जोकि भारत सरकार के अधीन कार्य करता है और ऊर्जा दक्षता और उसके इस्तेमाल के संदर्भ में भारत सरकार का सहयोग करता है ताकि ऊर्जा के उपयोग को न केवल बेहतर बनाया जा सके बल्कि उसकी दक्षता में भी सुधार किया जा सके. ऊर्जा संरक्षण अधिनियम ऊर्जा क्षमता की परियोजनाओं बेहतर संचालन, ऊर्जा, परियोजनाओं, नीति एवं अध्ययन, एवं वित्त पर चल रहे विविध कार्यों में प्रगति के क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञ, विशिष्ट और आशावादी प्रबंधकों और लेखा परीक्षकों का उपयोग करना चाहता है ताकि भारत में ऊर्जा के बेहतर भविष्य को सुरक्षित किया जा सके |
भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस को ऊर्जा के बचत एवं संरक्षण के महत्व के बारे में जनता को सचेत करने के लिए आयोजित किया जाता है. साथ ही उसके बेहतर इस्तेमाल के माध्यम से उसे भविष्य हेतु सुरक्षित करने के तरीके बनाये जाते है. इसेक अलावा ऊर्जा संरक्षण का सही अर्थ समझाने और ऊर्जा के अपव्यय को कम से कम करने के लिए सचेत किये जाते हैं. ऊर्जा के प्रभावी उपयोग को बनाये रखने के लिए किये जाने वाले उपाय अत्यंत प्रासंगिक है |
हमारे देश के सभी व्यक्तियों को प्रभावी ऊर्जा के उपयोग के बारे में पता होना चाहिए. इस सन्दर्भ में भारत के प्रत्येक व्यक्ति के लिए ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल के संदर्भ में जानकारी होनी चाहिए. साथ ही विधि के माध्यम से अपने स्वयं के भविष्य की भलाई के लिए और विभिन्न अन्य तरीकों से ऊर्जा की रक्षा के लिए तरीके अपनाये जाने पर बल दिए जाते हैं. भारत के सभी लोग प्रत्यक्ष तौर पर 11 वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में ऊर्जा अपव्यय को कम से कम करने के लिए आंदोलन कर सकते हैं. वर्त्तमान में युवा लोगों को सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए और राष्ट्र की आर्थिक स्थिति में वृद्धि करने के लिए आगे आना होगा क्योंकि वे ही इस देश के भविष्य हैं |


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कैसे मनाया जाता है?


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण आंदोलन को और अधिक कुशल और देश भर में असाधारण बनाने के क्रम में बहुत से कार्यक्रमो का आयोजन विविध संगठनो के माध्यम से आयोजित किया जाता है. इस सन्दर्भ में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा संरक्षण प्रतियोगिता का आयोजन भारत सरकार के द्वारा और आम व्यक्तियों के द्वारा भी बस्तियों के आसपास आयोजित की जाती है. इनके अंतर्गत शामिल हैं:
• चित्रकारी प्रतियोगिता
• पोस्टर मेकिंग
• नारे लेखन, आदि


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस का उद्देश्य


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस प्रत्येक वर्ष देश भर में ऊर्जा की आवश्यक के सन्दर्भ में संदेश को फैलाने के लिए महत्वपूर्ण उद्देश्यों और लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विशिष्ट विषय की मदद से हर साल मनाया जाता है. प्रासंगिक उद्देश्यों में से कुछ हैं:
• यह जीवन के हर चरण में ऊर्जा संरक्षण के महत्व के प्रसार करने के लिए मनाया जाता है.
• देश भर में चर्चा, सम्मेलनों, वाद-विवाद, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और आदि जैसे विभिन्न घटनाओं के संचालन से ऊर्जा संरक्षण प्रक्रिया की विधि की पुष्टि की जाति है.
• अपव्यय और अनावश्यक उपयोग करने से बचने के लिए कम ऊर्जा का उपयोग के लिए व्यक्तियों का समर्थन प्राप्त करना.
• ऊर्जा की खपत को कम करने और ऊर्जा नुकसान की जांच करने के लिए बेहतर माध्यमों का इस्तेमाल करना और प्रभावी ऊर्जा के उपयोग के लिए लोगों को प्रेरित करना है |

#4 National Energy Conservation Day 14th December 

National energy conservation day is celebrated every year by the people all over the India on 14th of December. The Energy Conservation Act in India was executed by the Bureau of Energy Efficiency (BEE) in the year 2001. The Bureau of Energy Efficiency is a constitutional body which comes under Government of India and helps in the development of policies and strategies in order to reduce the energy use.

National energy conservation day in India is celebrated to aware people about the importance of energy as well as saving or conserving the more energy by using less energy. The exact means of energy conservation is using less energy by avoiding the unnecessary uses of energy. Using energy efficiently is very necessary to save it for the future usage. Energy conservation should be rooted in the behavior of every human being to get more effect towards the plan of energy conservation.

One can save the energy by deeply taking care of it such as turning off the unnecessarily running fans, lights, submersible, heater, combining car trips or other electric things of daily usage. These are the more easier and efficient way to save extra uses of energy thus playing the great role towards the campaign of national energy conservation.

Fossil fuels, Crude oil, Coal, natural gas and etc generate sufficient energy for the use in daily life but increasing the demands of it day by day creates the fear of reducing or diminishing the natural resources. Energy conservation is the only way which helps in replacing the non-renewable resources of energy with the renewable energy.

In order to aware the energy users for less energy consumption as well as to make efficient energy conservation, energy or carbon taxes has been employed by the government in different countries. Tax on high energy consumption reduces the energy use by the users as well as promotes limited energy use among users.

People must aware that bright lighting at their work places leads to the variety of problems like stress, headache, blood pressure, fatigue and reduces work efficiency of workers. Whereas, natural day lighting enhances the productivity level of workers and reduces the energy consumption.

Petroleum Conservation Research Association was established by the Indian government in India in the year 1977 to promote energy efficiency and conservation among Indian people in their every walk of life. This is a big step taken by the government of India for energy conservation to a great level. Another government organization in India, Bureau of Energy Efficiency, has also been set up in 2001 for better energy efficiency and conservation.

What are the Energy Conservation Measures

Windows are the big energy conservation contributing factors other than thermal curtains, Smart windows or films.

A big amount of energy can be saved by the natural lightings and compact fluorescent lamp or CFL (15W and consumes only 1/4th of the energy consumed by other means), Fluorescent bulbs, Linear fluorescent retrofit, Solar charged flashlight, Sky lights, Smart windows, LED lighting and Solar lights.

Water conservation also leads to the better energy conservation. There is wastage of around thousands of gallons water per year by the people which can be prevented through various means of water saving solutions like 1.6 GPM or less low flow showerheads, Ultra low flush toilet, Faucet aerator, Composting toilets and etc.

Insulation also plays big role in energy conservation by decreasing the thermal losses in winter seasons as well as thermal gains in summer seasons. For example; natural wool insulation, house insulation, cotton insulation, VOCs in fiberglass insulation, thermal insulation, cellulose insulation and etc.

HOW NATIONAL ENERGY CONSERVATION DAY IS CELEBRATED

To make the campaign of national energy conservation more effective and special all over the India, variety of energy conservation competitions are organized by the government or other organizations around the living areas of normal people as they are the main target of the campaign. At many places the various painting competitions on energy conservation day is held by the student or member of the organizations at school, state, regional or national level.

The campaign of the national energy conservation is the national awareness campaign launched by the Ministry of Power to facilitate the process of energy conservation in India. Painting competitions organized for the students at many levels is one of the main activities of this campaign which helps in increasing the awareness of children about the importance of conserving energy as well as educating and involving their parents in the campaign. This competition helps the people of domestic sectors to be aware.

Every participant is provided a theme Topic such as the “More stars, more savings”, “Today’s energy wastage is tomorrow’s energy shortage”, “Energy saved is future save” and many more. Participants can make their painting more effective by using the Pencil Color, Crayons, Water Color and etc.

Students, who take part in the competition and win, get participation certificate, merit certificate or cash prizes which worth Rs 33,000 per State. This amount is distributed among all the winners of a state and awarded by the Ministry of Power at 14th of December at the celebration event of National Energy Conservation day.

OBJECTIVES OF NATIONAL ENERGY CONSERVATION DAY

National energy conservation day is celebrated every year using particular theme of the year by keeping in mind some goals and objectives to make more effective all over the country among people. Some of the important goals are:

It is celebrated to send the message of importance of conserving energy in the every walk of life among people.

Promoting the way of process of energy conservation by organizing a lot of events such as discussions, conferences, debates, workshops, competitions and etc all through the country.

Promote people for less energy usage by neglecting the excessive and wasteful uses.

Encourage people for efficient energy use in order to decrease the energy consumption and prevent the energy loss.

SIGNIFICANT ROLES OF INDIAN CITIZENS IN ENERGY SECURITY

Each and every citizens of the India must aware about how to use efficient energy, how to save the energy for their own future safety and many more ways. They should follow all the rules, regulations and policies implemented by the Government of India in order to support the energy efficiency. Citizens of India can pay their direct contribution to the campaign of reduce energy use throughout the 11th Five Year Plan period. Children are the big expectation and hope for the country to bring positive changes as well as to enhance the economic condition of the country.

World Energy Conservation Day 2018 theme :  इस बार विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस 14 दिसंबर शुक्रवार को पड़ रहा है |आइये अब हम आपको विश्व /राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस निबंध हिंदी में, World Energy Conservation Day essay, World Energy Conservation Day is celebrated on, विश्व ऊर्जा संरक्षण दिवस कब मनाया जाता है, वर्ल्ड एनर्जी कन्ज़र्वेशन डे आदि की जानकारी किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font , 100 words, 150 words, 200 words, 400 words में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|

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