Mangalvar Vrat Katha, Puja Vidhi in Hindi

मंगलवार व्रत कथा

मंगलवार व्रत कथा : भारत में अनेकों धर्म लोग रहते है और सभी धर्मों के लोग अपने-अपने धर्म व् संस्कृति के अनुसार व्रत एवं पूजा करते है। वहीं हिन्दू धर्म में मंगलवार के दिन को अति उत्तम माना जाता है और इस दिन को मंगल देवता के नाम (mangal dev) से भी जाना जाता है। वहीं दूसरी ओर Pauranik व् Dharmik कथाओं के अनुसार इसे Hanuman ka Din माना जाता है।

आज हम इस Mangalwar ke Vrat Katha के माध्यम से आपको मंगलवार व्रत का खाना (food) या Mangalwar ke Vrat Mein Kya Kehte Hain साथ ही हम आपको Mangalwar ke Din Kya Kare, या मंगलवार को क्या न करें, Vrat Samagri तथा Vrat Vidhi के साथ इस व्रत को कब से शुरू करें, आदि बारे में जानकारी प्रस्तुत कर रहे है। इस दिन mangalvar vrat katha aarti का भी आयोजन होता हैं ।

आप Internet पर बजरंग बली की व्रत कथा और व्रत विधि को Mangalwar ke Vrat ki Katha या फिर Tuesday Vrat Katha के नाम से Search कर सकते है एवं mp3 download या Mangalvar Vrat ki Katha की PDF Download भी कर सकते है और Tuesday Fast Story को in English और अन्य भाषाओं में भी पढ़ सकते है। अतः आप इस Article को पढ़ कर अपने परिवार सदस्यों, Friends को मंगलवार व्रत कथा सुनाइए जिससे उन्हें भी इस कथा का पुण्य प्राप्त हो सके। बहुत लोग आपसे यह कहते होंगे कि Mangalwar ki Katha Sunau और आज हम आपको इसकी भी जानकारी देंगे।

मंगलवार की व्रत कथा 

प्राचीन काल की बात है एक नगरी में एक ब्राह्मण पति-पत्नी रहते थे उनके पास कोई भी संतान न होन की वजह से वह बहुत दुखी रहते थे। हर बार की तरह इस बार भी ब्राह्मण वन में pooja के करने के लिए गया और वह ब्राह्मण वन में बैठकर पूजा करने लगा तथा पूजा होने के बाद वह हनुमान जी से पुत्र प्राप्ति के लिए प्राथना करने लगा और दसर ओर उस ब्राह्मण की पत्नी भी अपने घर पर पुत्र की प्राप्त करने के लिये हर मंगलवार का व्रत रखती थी और हर मंगलवार को व्रत के अंत में बजरंगबली का भोग लगाकर भोजन ग्रहण करती थी। व्रत के एक दिन वह ब्राह्मणी किसी कारण ना तो भोजन तैयार कर सकी और ना ही वह हनुमान जी को भोग लगा सकी। तभी उस दिन उस ब्राह्मणी ने प्रण लिया कि वह आने वाले अगले मंगलवार को हनुमान जी का भोग लगाकर ही अन्न ग्रहण करेगी। भूखे प्यासे छः दिन के विताने के बाद ही वह मंगलवार के दिन वह ब्राह्मणी बेहोश हो गयी। और तब उसकी इस निष्ठा, त्याग एवं सच्ची लगन व् भक्ति को देखकर हनुमान जी प्रसन्न हो गये। और उस ब्रह्माणी को दर्शन दिया और कहा कि वह उस ब्रह्माणी से बहुत प्रसन्न है और उसे पुत्र प्राप्ति का वर देते है। तथा वर स्वरूप उस ब्रह्माणी को हनुमान जी पुत्र देकर अंतर्धान हो जाते है। ब्राह्मणी पुत्र प्राप्ति से अति प्रसन्न हो जाती है और उस पुत्र का का नाम मंगल रख देती है। कुछ समय के बाद जब ब्राह्मण अपने घर वापस आया, तो वह उस बालक को देखकर पूछाता है कि यह बालक कौन है। जब उसकी पत्नी उस ब्राह्मण को पूरी कथा बताती है। वह ब्राह्मणी की बातों को छल पूर्ण जानकर उस ब्राह्मण ने अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं किया। एक दिन ब्राह्मण को जब मौका मिला तो ब्राह्मण ने उस बालक को कुएं में गिरा दिया और घर लौटने के बाद जब ब्राह्मणी ने ब्राह्मण से पूछा कि पुत्र मंगल कहां है? उसी समय पीछे से मंगल मुस्कुरा कर आ जाता है और ब्राह्मण उसे वापस देखकर चौंक जाता है। उसी रात हनुमान जी ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन देकर कहा कि वह पुत्र उन्होंने ही ब्राह्मणी को दिया है तथा सच जानकर ब्राह्मण अति प्रसन्न हिओ जाता है और वह ब्राह्मण पति-पत्नी नियमित रूप से हर मंगलवार को व्रत रखने लगते है। अतः इस प्रकार मंगलवार को व्रत रखने वाले हर मनुष्य पर हनुमान जी की असीम कृपा बानी रहती है।

मंगल देव कथा

Mangal Dev Katha

पूजन विधि

बजरंग बली का व्रत 21 मंगलवार किया जाता है। मंगलवार के दिन व्रत शुरु करने के लिए सूर्योदय से पहले उठे। प्रातःकाल नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर साफ और स्वच्य वस्त्र धारण करे तद उपरांत ईशान कोण की दिशा यानि (उत्तर-पूर्व दिशा के कोने) में किसी एक एकांत स्थान पर बजरंग बली की मूर्ति को स्थापित करें या फिर उस जगह पर हनुमान जी की फोटो की स्थापना करे। व्रत के दिन लाल वस्त्र धारण करे । व्रत को शुरु करने के लिए अपने हाथ में जल लेकर संकल्प लें और मगलवार के व्रत को सच्ची आस्था एवं भक्ति के साथ शुरू करें। अब हनुमान जी की मूर्ति के सामने गाये के शुद्ध घी का एक दीपक प्रज्वलित करे। हनुमान जी की मूर्ति पर चमेली के तेल के हलके छीटे देकर तथा पीले या लाल रंग के पुष्प की माला हनुमान जी की मूर्ति पर चढ़ाएं। उसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करे। पूजा पूर्ण होने के उपरांत हनुमान जी का भोग लगाकर सभी को प्रसाद बांटे और पूरे दिन में केवल एक बार ही भोजन ग्रहण करें एवं रात्रि में सोने से पहले बजरंग बली की पूजा करें या फिर एक शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करके हनुमान जी के आगे हाथ जोड़ें और हर मंगलवार के दिन इसी तरह हनुमान जी की पूजा करे।

मंगलवार व्रत के नियम (Rules)

  • मंगलवार का व्रत करने वाले व्यक्ति को मंगलवार के व्रत वाले दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।
  • नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर अपना शुद्धि कारण करना चाहिए।
  • मंगलवार दिन लाल रंग और नारंगी रंग के साफ़ व् स्वच्छ वस्त्र धारण करना।
  • तत्पश्चात हनुमानजी को लाल फूल, सिन्दूर, वस्त्रादि चढ़ाने चाहिए।
  • श्रद्धा- भक्ति पूर्वक हनुमान जी की मूर्ति के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ या हनुमान चालीसा पढ़नी चाहिए।
  • संध्या के समय हनुमान जी को बेसन के लड्डु या खीर का भोग लगाना चाहिए और स्वयं बिना नमक का भोजन ग्रहण करना चाहिए।
  • Mangalvar vrat ka khana पूरी तरह साफ सुथरा होना चाहिए ।
  • मंगलवार के दिन मंगलवार का व्रत करने वाले सभी मनुष्य को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

मंगलवार व्रत के फायदे (Benefits)

मंगलवार का व्रत करने वाले सभी मनुष्यों को मांगलिक दोष से मुक्ति मिल जाती है। जो व्यक्ति शनि की महादशा, साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या से ग्रस्त है उन सभी के लिए यह मंगलवार का व्रत बहुत ही कारगर होता है। उनकी सभी परेशानिया दूर हो जाती है। इस मंगलवार के व्रत से मनुष्य को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है। मंगलवार का व्रत करने वाले मनुष्य के घर में कभी भी किसी प्रकार की नकारात्मकता नहीं आती है। मंगलवार का व्रत करने से सभी व्यक्तियों का काम-काज व् रोजगार में भी वृद्धि होती है और इससे जुडी सभी समस्याएं समाप्त हो जाती है तथा उस व्यक्ति पर हनुमान जी की असीम कृपा सदा बनी रहती है।

उद्यापन विधि

व्रत के उद्यापन के दिन भी सूर्योदय से पहले उठे तथा प्रातःकाल नित्यक्रिया से निवृत होकर स्नान आदि कर साफ और स्वच्य वस्त्र धारण करे। तद उपरांत नियमित रूप से हनुमान जी की उसी प्रकार पूजा करे जैसे हर मंगलवार को की है तथा 21 मंगलवार के व्रत पूर्ण होने के उपरांत 22वें मंगलवार के दिन भी पूर्ण विधि-विधान के साथ बजरंग बली का पूजन करें और हनुमान जी को सिंदूरी रंग के वस्त्र चढ़ाएं या पहना दें। पूजा पूर्ण होने के उपरांत 21 ब्राह्मणों को उत्तम भोजन कराकर उन्हें दान व् दक्षना प्रदान कर सभी ब्राह्मणों को विदा दें।

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