कुमाऊनी होली 2022 – बैठकी होली, पहाड़ी होली, खड़ी होली – Kumaoni Holi Lyrics Song

कुमाऊनी होली 2021

कुमाऊनी होली 2022 : होली का त्योहार हमारे देश का एक प्रमुख त्योहार है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरह से इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ऐसे ही होली के त्यौहार को उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में कुमाऊं होली के नाम से जाना जाता है। यह त्यौहार कुमाऊं क्षेत्र के लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है और उसका काफी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व भी है। पहाड़ों के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए यह काफी महत्वपूर्ण पर्व है क्योंकि इस दिन सर्दियों का अंत व बुवाई के मौसम की शुरुआत भी मानी जाती है। यह त्यौहार बसंत पंचमी के दिन शुरू होता है। कुमाऊ होली के तीन प्रकार हैं खड़ी होली बैठ की होली व महिला होली। इस होली के अंतर्गत सिर्फ अबीर गुलाल का टीका ही नहीं होता बल्कि बैठकी होली एवं खड़ी होली में गायन होता है| जिसके अंतर्गत लोकगीत गाने की भी शास्त्रीय परंपरा है। बसंत पंचमी के दिन घर-घर जाकर होली के गीत गाए जाते हैं वह यह उत्सव 2 माह तक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं

कुमाऊनी बैठकी होली

बैठकी होली कुमाऊं के बड़े नगरों में मनाई जाती है। यह खासकर अल्मोड़ा और नैनीताल में खूब हर्षोल्लास के साथ बसंत पंचमी के दिन से शुरू होती है व इसमें गीत घर की बैठक में राग रागनीओं के साथ मनाई जाती है। लोग इस दिन मीराबाई से लेकर बहादुर शाह जफर तक की रचनाएं सुनते हैं। इसमें शामिल होती हैं मुबारक हो मंजरी फूलों भरी या ऐसी होली खेले जनाब अली जैसी ठुमरियाँ गाई जाती हैं।

खड़ी होली

यह होली बैठकी होली के कुछ दिनों बाद मनाई जाती है। यह होली खासकर कुमाऊं क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में मनाई जाती है। इस दिन गांव के लोग नुकीली टोपी, कुर्ता और चूड़ीदार पजामा पहनते हैं व एक जगह मिलकर गाने गाते हैं साथ ही ढोल दमाऊ और हुड़के की धुनों पर नाचते हैं। यह गाने कुमाऊनी भाषा में होते हैं व जो लोग यह गाने गाते हैं उन्हें होल्यार कहते हैं। कुमाऊनी खड़ी होली में हर घर पर जाकर होली के गीत गाए जाते हैं वह खुशियों को बांटा जाता है।

कुमाऊनी होली गीत

होली का कुमाऊं क्षेत्र के लोगों के लिए बहुत महत्व है, यह दिन बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन रंग भरे सफेद वस्त्र धारण करके एक डंडे पर नए कपड़े की धारियां या चीर बांधने के बाद स्थानीय शिवालय में होली गाई जाती है।

लाला छोरा खेलत कंकर मारि हरे.
कंकर मारी ना मरू गुन मारी मरि जावन रे,
गोरी की भीजै चुनरी पिया की मल-मल पागन रे.
इत जन बरसै मुघुला जेंह मेरो बालम लोकन रे.

ऐसा करने के बाद होल्यार देवी माता के मंदिर पहुंचते हैं जहां जगदंबा माता की पूजा करने के बाद समीपस्थ धोनी को प्रज्वलित करके उसके चारों ओर नाच कर भक्ति भाव से देवी की होली गाते हैं।

सूरत धरी मन में अम्बा दरशन को तेरे द्वार, अम्बा जन तेरे
हरियो पीपल द्वारे सोहे पिछवाड़,
अम्बा जन तेरे.
पिंहली माटी गऊ का गोबर
चौका देहू बनाय, अम्बा जन तेरे.
ब्रह्मा बेद पढ़ै तेरे द्वारे,
शंकर ध्यान लगाय, अम्बा जन तेरे.

एसएस ही इधर श्री कृष्ण भगवान की ब्रज लीला से संबंधित दूसरी होली भी गाते हैः

इत मथुरा उत गोकुल नगरी
बीच जमुना बहिजाय, सुंदर साँवरो.
पीताम्बर सिर मकुट बिराजे
गलमोतियन की माल , सुंदर साँवरो.
ताल -पखावज बाजन लागै
नाचत गोपी ग्वाल, सुंदर साँवरो.
केसर भर पिचकारिन मारै भीजि गई
ब्रज बाल, सुंदर साँवरो.
बृंदाबन की कुंजन में होरि खेलत
नन्द को लाल, सुंदर साँवरो…

‘दैंण होया सबूं हुं हो गणेश, बांणी गावै को दुब धरण लागि रयां, त्यार निभाया बिघ्नेश’, राग काफी में ‘गणपति को भज लीजै’ के साथ ‘क्यों मेरे मुख पै आवे रे भंवरा, नाही कमल यह श्याम सुंदर की सांवरी सूरत को क्यों मोहे याद दिलाए’, श्याम कल्याण राग में ‘माई के मंदिरवा में दीपक बारूं’ जंगला काफी में ‘होली खेलें पशुपतिनाथ नगर नेपाल में’ जैसी होलियां  गायी जाती हैं।

बिंदुली गई सागर पार,
बिंदुली गई मोरे साजना.
कैसत की तेरी बिंदुली रे,
कैसत को तेरी हार. बिंदुली …
एक सत की मेरी बिंदुली रे,
नौ सत को मेरो हरि. बिंदुली…

Kumaoni Holi ke Geet

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Kumaoni holi songs lyrics in hindi

कुंडलपुर के राजा भीष्म का नाम सहाय. कुंडलपुर के राजा भीष्म का नाम सहाय ता घर जन्मी कन्या रुक्मणि नाम कहाय रुक्मणि कन्या ऐसी जन्मी जेसो फूल गुलाब (2) कनक बदन तन सोहै मुख चंदा सो होई (2) कुंडल पुर के राजा भीष्म का नाम सहाय. कुंडल पुर के राजा भीष्म का नाम… Click To Tweet

Kumaoni holi geet

भलो-भलो जनम लियो श्याम राधिका भलो जनम लियो मथुरा में भर भादो की रतिया में रे, भर भादो की रतिया में रे किशना भये अवतार राधिका,भलो-जनम लियो मथुरा में रोहिणी नछत्र पड़ो है (२) जन्म लियो बुधवार राधिका, भलो जन्म लियो मथुरा में, भलो-२, जन्म लियो मथुरा में कौन… Click To Tweet

कुमाऊनी होली की किताब

शिव के मन माहि बसे काशी ।।2।
आधी काशी में बामन बनिया,
आधी काशी में सन्यासी। शिव के मन ०
काही करन को बामन बनिया,
काही करन को सन्यासी। शिव के मन ०
पूजा करन को बामन बनिया,
सेवा करन को सन्यासी। शिव के मन ०
काही को पूजे बामन बनिया,
काही को पूजे सन्यासी। शिव के मन ०
देवी को पूजे बामन बनिया,
शिव को पूजे सन्यासी। शिव के मन ०
क्या इच्छा पूजे बामन बनिया,
क्या इच्छा पूजे सन्यासी। शिव के मन ०
नव सिद्धि पूजे बामन बनिया,अष्ट सिद्धि पूजे सन्यासी। शिव के मन ०

कुमाउनी होली के समापन अवसर पर दी जाने वाली आशीषें

गावैं ,खेलैं ,देवैं असीस, हो हो हो लख रे।
बरस दिवाली बरसै फ़ाग, हो हो हो लख रे।
जो नर जीवैं, खेलें फ़ाग, हो हो हो लख रे।
आज को बसंत कृष्ण महाराज का घरा, हो हो हो लख रे।
श्री कृष्ण जीरों लाख सौ बरीस, हो हो हो लख रे।
यो गौं को भूमिया जीरों लाख सौ बरीस, हो हो हो लख रे।
यो घर की घरणी जीरों लाख सौ बरीस, हो हो हो लख रे।
गोठ की घस्यारी जीरों लाख सौ बरीस, हो हो हो लख रे।
पानै की रस्यारी जीरों लाख सौ बरीस, हो हो हो लख रे।
गावैं होली देवैं असीस, हो हो हो लख रे॥

source: navinsamachar.wordpress.com

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