जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय

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आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि , उपन्यासकार , नाटककार और कहानीकार महाकवि जयशंकर प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे । हिन्दी छायावादी युग की स्थापना करने वाले चार स्तंभों में से एक माने जाने वाले jaishankar prasad ka janm 30 जनवरी 1889 को हुआ था ।वे एक युग प्रवर्तन करने वाले लेखक थे ।उनके समय में हिन्दी साहित्य की अनेक विद्यायों (जैसे कहानी , निबंध , उपन्यास ,कविता ) को नया प्रकाश मिला ।

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय-(Jaishankar Prasad ka Jeevan Parichay)

Jaishankar Prasad ji ka Jivan Parichay विस्तार से जानने के लिए नीचे लिखी जयशंकर प्रसाद की जीवनी को पढ़ना होगा । यहाँ आपको jaishankar prasad ka jivan parichay  तथा jaishankar prasad ki jivani की पूरी जानकारी दी जाएगी ।

जयशंकर प्रसाद का जीवन काल (जयशंकर प्रसाद का जन्म कब हुआ?)

जयशंकर प्रसाद का जीवन काल 30 जनवरी 1889 से लेकर 14 नवम्बर 1937 तक माना जाता है । इन्होंने छोटी सी आयु में ही लिखने की कला में महारथ कासिल कर ली थी । प्रसाद जी को अपने पास – पड़ोस के विद्वानों के साथ रहकर कविता करने की प्रेरणा मिली ।

जयशंकर प्रसाद का परिवार

जयशंकर प्रसाद जी का जन्म बनारस के एक सुघनी साहू परिवार में हुआ था ।  मात्र 12 वर्ष की उम्र में उनके पिता सुँघनी जी का देवलोकगमन हो गया । उसके बाद तो जैसे उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा । व्यवसाय में नुकसान होने के कारण उनका पूरा परिवार कर्जे में डूब गया । जिसके कारण उनके घर में क्लेश शुरू हो गया । पिता की मृत्यु के दो से तीन वर्ष के बाद ही उनकी माँ की भी मृत्यु हो गई । इस दुखद घटना से वह अभी उभर ही नहीं पाए पाए थे की उनके जीवन का सबसे बुरा दिन तब आया जब उनके बड़े भी का स्वर्गवास हो गया । बड़े भी की मृत्यु के साथ ही पूरे घर का बोझ प्रसाद जी के कंधों पर ही या गया । मात्र 17 साल की उम्र में घर की पूरी जिम्मेदारी आने भी उन्होंने हार नहीं मानी और घर का पालन – पोषण करने के साथ साथ अपने साहित्यिक जीवन को भी बखूबी बनाए रखा ।

जयशंकर प्रसाद का साहित्यिक परिचय

बाल्यकाल से ही जयशंकर प्रसाद जी का रुझान हिन्दी साहित्य की और देखने को मिलता है । उन्होंने मात्र 9 साल की उम्र में अपने गुरु – “रसमय सिद्ध ” को एक सवैया लिख कर दिया था जिसका नाम था ‘कलाधर’ (kaladhar) ।

पहले उनके बड़े भी शंभू रत्न चाहते थे कि ये अपने पैतृक व्यवसाय को संभाले कितु काव्य रचना की तरफ उनकी रुचि को देखते हुए उन्होंने जयशंकर प्रसाद जी को पूरी छूट दे दी । अपने बड़े भी की सहमति और उनके आशीर्वाद के साथ वे पूरी तन्मयता के साथ हिन्दी साहित्य लेखन और काव्य रचना के क्षेत्र में लग गए ।

Jaishankar Prasad ki Rachnaye

जयशंकर प्रसाद जी ने अपनी विलक्षण प्रतिभा के द्वारा हिन्दी साहित्य को एक नया रूप दिया । अपनी लेखन प्रतिभा के दम पर उन्होंने कहानी , उपन्यास कविता और निबंध लेखन के क्षेत्र में  नए – नए प्रयोग किये जिस कारण उनके युग को ‘प्रसाद – युग ‘ के रूप में भी जाना जाता है ।

Jaishankar Prasad ki Rachna निम्नलिखित है –

जयशंकर प्रसाद की लोकप्रिय कहानियाँ (Jaishankar Prasad ki Kahani)

  • छाया
  • प्रतिध्वनि
  • इंद्रजाल
  • आकाशदीप
  • आंधी

इसके अलावा mamta jaishankar prasad की एक विधवा औरत पर आधारित story है । ऊपर लिखी कहानियों को हम desi kahani by jaishankar prasad के नाम से भी जान सकते है ।

जयशंकर प्रसाद की कविताएं (Jaishankar Prasad ki Kavita in Hindi)

  • झरना
  • आंसू
  • लहर
  • कामायनी
  • कानन कुसुम
  • महाराणा का महत्व
  • प्रेम पथिक
Jaishankar Prasad ki Kavyagat Visheshta

प्रसाद जी को आनंद और प्रेम रस का भी कवि माना जाता है । उनकी रचनाओं में संयोग और वियोग दोनों ही रूप देखने को मिलते है। आंसू जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध वियोग कविता है । इसके साथ ही जयशंकर प्रसाद की कामायनी को सुमित्रानंद पत्र जी ने  “हिन्दी का ताजमहल” का नाम दिया था ।

जयशंकर प्रसाद के नाटक

  • स्कंदगुप्त
  • चन्द्रगुप्त
  • ध्रुवस्वामिनी
  • जन्मेजय का नाग यज्ञ
  • राज्य श्री
  • कामना
  • एक घूंट

जयशंकर प्रसाद के उपन्यास (Upanyas Of jaishankar prasad in hindi )

जय शंकर प्रसाद जी के तीन प्रसिद्ध उपन्यास है – कंकाल , तितली , इरावती । titli jaishankar prasad का  ग्रामीण जीवन पर आधारित उपन्यास है जबकि कंकाल में नागरिक सभ्यता को दिखाया गया है ।

जयशंकर प्रसाद की भाषा शैली

जयशंकर प्रसाद जी ने अपने काव्य लेखन की शुरुआत ब्रजभाषा में की लेकिन धीरे -धीरे वे खड़ी बोली की तरफ भी अग्रसर हो गए । इनकी रचनाओ में मुख्य रूप से भावनात्मक , विचारात्मक , इतिवृत्तात्मक और चित्रात्मक भाषा शैली का प्रयोग देखने को मिलता है । इनकी शैली अत्यंत मीठी और सरल थी ।

पुरस्कार  (jaishankar prasad awards in hindi)

कामायनी जयशंकर प्रसाद ली सबसे श्रेष्ट काव्य रचना है जिसके लिए उन्हे मंगलाप्रसाद परितोषिक पुरस्कार दिया गया था।

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