Guruvar ka Vrat Kaise Kare | Guruvar Vrat Katha Aarti & Puja Vidhi

गुरुवार व्रत कथा आरती 1

हिन्दू धरम में व्रत उपवास का बहुत महत्व है । माना जाता है की ईश्वर को प्रसन्न करने और मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत रखा जाता है । व्रत रखना शरीर के लिए भी लाभकारी होता है । हफ्ते में आने वाले हर दिन का अपना महत्व होता है । हर दिन अलग – अलग देवी देवताओं के नाम से जाना जाता है और भक्त उनके लिए उपवास करते है और उनकी पूजा करते है । कुछ लोग सोमवार का व्रत रकते है कुछ गुरुवार का और कुछ Friday fast. गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है । इस दिन व्रत रखने से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर हो जाती है और परिवार में सुख समृद्धि आती है ।

आज इस लेख में हम आपको Vishnu Ji Ke Vrat ki Vidhi को विस्तार से बताएंगे जिसमे आपको Guruvar ka Vrat kaise Kare, Guruvar Vrat Kab se Shuru Kare, Brihaspati Vrat Katha Hindu Astha और Aghan Brihaspati Vrat Vidhi की जानकारी देंगे ।

Guruvar Vrat Udyapan Vidhi in Hindi

गुरुवार का व्रत कई कारणों से रखा जाता है क्युकी Guruvar Vrat ke Labh एक नहीं अनेक हो सकते है Thursday fast for Marriage in hindi के लिए भी कुवाँरी लड़कियों द्वारा रखा जाता है । Thursday fast Udyapan vidhi को जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि गुरुवार का व्रत कब से शुरू करना चाहिए ।  गुरुवार का व्रत करने के इच्छुक है और Brihaspati Vrat Udyapan vidhi in Hindi में जानना चाहते है तो आप हम इसकी सम्पूर्ण विधि को ध्यान से पढिए ।

when to start thursday fast in 2020 : हिन्दी पंचांग के अनुसार पूष या पौष महीने के अलावा किसी भी महीने में इस व्रत को शुरू कर सकते है । किसी भी अच्छे काम की शुरुआत शुक्ल पक्ष में की जाती है इसलिए हिन्दी तिथि के हिसाब से शुल्क पक्ष के पहले गुरुवार से प्रारंभ करे । इसमे 16 गुरुवार के व्रत किये जाते है और 17 वें उपवास पर उद्यापन किया जाता है ।

गुरुवार व्रत का उद्यापन करने के लिए 5 चीजों का होना आवश्यक है जो कि इस प्रकार है:- चने की दाल, गुड़, हल्दी कोई भी पीला फल केला या पपीता और पीला वस्त्र । फिर पूजा वाले दिन यथावत पूजा करे और उद्यापन करते हुए ईश्वर से प्रार्थना करे कि वो अपनी कृपा हम पर बनाए रखे । पूजा सम्पन्न होने के बाद पूजा की सामग्री और को भगवान को अर्पण कर दान में दे दें ।

बृहस्पति देव की पूजा

ये तो हम जान ही गए है कि When to start Thursday fast in 2020 in hindi अब इसकी पूजा विधि भी जान लेते है । जिसके

अनुसार आपको व्रत करना चाहिए ।

  • गुरुवार के दिन उठकर सबसे पहले स्नान करे और स्वच्छ पीले रंग है वस्त्र धारण करे ।
  • फिर मंदिर में जाकर भगवान को पीले फूल और चावल अर्पण कर गुरुवार के 16 व्रत करने का संकल्प ले और पूजन प्रारंभ करे ।
  • पूजन सामग्री में चने की दाल, गुड़ , हल्दी , पीले फूल , पीली मिठाई पीले चावल और हवन सामग्री रखे ।
  • इसके साथ ही भगवान श्री हरी विष्णु की एक तस्वीर भी अवश्य होनी चाहिए ।
  • भगवान का स्मरण करते हुए पीला वस्त्र चढ़ाएँ।
  • इसके साथ केले के पेड़ की भी पूजा की जाति है ।
  • एक लोटे में जल ले उसमे थोड़ी हल्दी डाल दे और भगवान विष्णु के साथ केले के पेड़ की जड़ को जल से स्नान कराएं ।

इसके बाद भगवान का सच्चे मन से ध्यान करे और Guruvar ki Kahani पढे इसके लिए Guruvar Vrat Katha free Download

brihaspati maharaj ki katha | व्रत-कथा

बृहस्पतिवार के उपवास को पूरे विधि विधान से करने के लिए गुरुवार व्रत कथा को पढ़ना जरूरी है ।  आप यह से brihaspativar vrat katha free download कर सकते है और अपनी सुविधनुसार brihaspati vrat katha in english, vrat katha book in hindi pdf में भी देख सकते है । कथा सुनने के लिए guruvar vrat katha mp3 download भी करके सुन सकते है ।

गुरुवार व्रत कथा आरती 3

गुरुवार व्रत की कथा

प्राचीन काल की बात है. किसी राज्य में एक बड़ा प्रतापी और दानी राजा राज करता था. वह प्रत्येक गुरुवार को व्रत रखता एवं भूखे और गरीबों को दान देकर पुण्य प्राप्त करता था, परंतु यह बात उसकी रानी को अच्छी नहीं लगती थी. वह न तो व्रत करती थी, न ही किसी को एक भी पैसा दान में देती थी और राजा को भी ऐसा करने से मना करती थी.

एक समय की बात है, राजा शिकार खेलने के लिए वन चले गए थे. घर पर रानी और दासी थी. उसी समय गुरु बृहस्पतिदेव साधु का रूप धारण कर राजा के दरवाजे पर भिक्षा मांगने आए. साधु ने जब रानी से भिक्षा मांगी तो वह कहने लगी, हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गई हूं. आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे कि सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं.

बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, तुम बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होता है. अगर अधिक धन है तो इसे शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचे का निर्माण कराओ, जिससे तुम्हारे दोनों लोक सुधरें. परंतु साधु की इन बातों से रानी को खुशी नहीं हुई. उसने कहा कि मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं और जिसे संभालने में मेरा सारा समय नष्ट हो जाए.

तब साधु ने कहा- यदि तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो मैं जैसा तुम्हें बताता हूं तुम वैसा ही करना. गुरुवार के दिन तुम घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, राजा से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस मदिरा खाना, कपड़ा धोबी के यहां धुलने डालना. इस प्रकार सात बृहस्पतिवार करने से तुम्हारा समस्त धन नष्ट हो जाएगा. इतना कहकर साधु रुपी बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए.

साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे कि उसकी समस्त धन-संपत्ति नष्ट हो गई. भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा. तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूं, क्योंकि यहां पर सभी लोग मुझे जानते हैं. इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता. ऐसा कहकर राजा परदेश चला गया. वहां वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता और शहर में बेचता. इस तरह वह अपना जीवन व्यतीत करने लगा. इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और दासी दुखी रहने लगी.

एक बार जब रानी और दासी को सात दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा- हे दासी, पास ही के नगर में मेरी बहन रहती है. वह बड़ी धनवान है. तू उसके पास जा और कुछ ले आ, ताकि थोड़ी-बहुत गुजर-बसर हो जाए. दासी रानी की बहन के पास गई.

उस दिन गुरुवार था और रानी की बहन उस समय बृहस्पतिवार व्रत की कथा सुन रही थी. दासी ने रानी की बहन को अपनी रानी का संदेश दिया, लेकिन रानी की बड़ी बहन ने कोई उत्तर नहीं दिया. जब दासी को रानी की बहन से कोई उत्तर नहीं मिला तो वह बहुत दुखी हुई और उसे क्रोध भी आया. दासी ने वापस आकर रानी को सारी बात बता दी. सुनकर रानी ने अपने भाग्य को कोसा. उधर, रानी की बहन ने सोचा कि मेरी बहन की दासी आई थी, परंतु मैं उससे नहीं बोली, इससे वह बहुत दुखी हुई होगी.

कथा सुनकर और पूजन समाप्त करके वह अपनी बहन के घर आई और कहने लगी- हे बहन, मैं बृहस्पतिवार का व्रत कर रही थी. तुम्हारी दासी मेरे घर आई थी परंतु जब तक कथा होती है, तब तक न तो उठते हैं और न ही बोलते हैं, इसलिए मैं नहीं बोली. कहो दासी क्यों गई थी.

रानी बोली- बहन, तुमसे क्या छिपाऊं, हमारे घर में खाने तक को अनाज नहीं था. ऐसा कहते-कहते रानी की आंखें भर आई. उसने दासी समेत पिछले सात दिनों से भूखे रहने तक की बात अपनी बहन को विस्तारपूर्वक सूना दी. रानी की बहन बोली- देखो बहन, भगवान बृहस्पतिदेव सबकी मनोकामना को पूर्ण करते हैं. देखो, शायद तुम्हारे घर में अनाज रखा हो.

पहले तो रानी को विश्वास नहीं हुआ पर बहन के आग्रह करने पर उसने अपनी दासी को अंदर भेजा तो उसे सचमुच अनाज से भरा एक घड़ा मिल गया. यह देखकर दासी को बड़ी हैरानी हुई. दासी रानी से कहने लगी- हे रानी, जब हमको भोजन नहीं मिलता तो हम व्रत ही तो करते हैं, इसलिए क्यों न इनसे व्रत और कथा की विधि पूछ ली जाए, ताकि हम भी व्रत कर सकें. तब रानी ने अपनी बहन से बृहस्पतिवार व्रत के बारे में पूछा.

उसकी बहन ने बताया, बृहस्पतिवार के व्रत में चने की दाल और मुनक्का से विष्णु भगवान का केले की जड़ में पूजन करें तथा दीपक जलाएं, व्रत कथा सुनें और पीला भोजन ही करें. इससे बृहस्पतिदेव प्रसन्न होते हैं. व्रत और पूजन विधि बताकर रानी की बहन अपने घर को लौट गई.

सात दिन के बाद जब गुरुवार आया, तो रानी और दासी ने व्रत रखा. घुड़साल में जाकर चना और गुड़ लेकर आईं. फिर उससे केले की जड़ तथा विष्णु भगवान का पूजन किया. अब पीला भोजन कहां से आए इस बात को लेकर दोनों बहुत दुखी थे. चूंकि उन्होंने व्रत रखा था इसलिए बृहस्पतिदेव उनसे प्रसन्न थे. इसलिए वे एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण कर दो थालों में सुन्दर पीला भोजन दासी को दे गए. भोजन पाकर दासी प्रसन्न हुई और फिर रानी के साथ मिलकर भोजन ग्रहण किया.

उसके बाद वे सभी गुरुवार को व्रत और पूजन करने लगी. बृहस्पति भगवान की कृपा से उनके पास फिर से धन-संपत्ति आ गई, परंतु रानी फिर से पहले की तरह आलस्य करने लगी. तब दासी बोली- देखो रानी, तुम पहले भी इस प्रकार आलस्य करती थी, तुम्हें धन रखने में कष्ट होता था, इस कारण सभी धन नष्ट हो गया और अब जब भगवान बृहस्पति की कृपा से धन मिला है तो तुम्हें फिर से आलस्य होता है.

रानी को समझाते हुए दासी कहती है कि बड़ी मुसीबतों के बाद हमने यह धन पाया है, इसलिए हमें दान-पुण्य करना चाहिए, भूखे मनुष्यों को भोजन कराना चाहिए, और धन को शुभ कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे तुम्हारे कुल का यश बढ़ेगा, स्वर्ग की प्राप्ति होगी और पित्र प्रसन्न होंगे. दासी की बात मानकर रानी अपना धन शुभ कार्यों में खर्च करने लगी, जिससे पूरे नगर में उसका यश फैलने लगा.

बृहस्पतिवार व्रत कथा के बाद श्रद्धा के साथ आरती की जानी चाहिए. इसके बाद प्रसाद बांटकर उसे ग्रहण करना चाहिए.

Guruvar Vrat Me Kya Khaye

बृहस्पतिवार का व्रत रखने के बाद सवाल आता है thursday fast me kya khana chahiye? गुरुवार का व्रत विष्णु जी और बृहस्पति देव के लिए रखा जाता है । इसके अलावा thursday fast sai baba को मानने वाले भक्त इच्छा पूर्ति के लिए इस दिन व्रत रखते है । इस प्रकार दोनों व्रतों में लिया जाने वाला फलाहार अलग-अलग होता है । आइए जानते है व्रतियों को इन दोनों उपवास में क्या खाना चाहिए ।

Brihaspati Vrat Food in Hindi

चने की दाल से बना हुआ भोजन:- जैसे बेसन का चीला, बेसन की पूड़ी आदि ।

खाने में ले पीले रंग की वस्तुएँ:- इसमे पीले रंग के फल , पपीता बेसन के लड्डू आदि ।

खाने में नमक का प्रयोग नहीं करे:- इस दिन व्रत के खाने में नमक का प्रयोग वर्जित किया जाता है । आहार में जो भी वस्तु ग्रहण करे वे बिना नमक की होनी चाहिए और ध्यान रखे कि दिन में एक बार ही भोजन ग्रहण करना है ।

केले का प्रयोग ना करें:- केला ब्राहस्पति देव का स्वरूप माना जाता है फलाहार में केला नहीं खाना चाहिए ।

Guruvar Vrat Food for Sai Baba

साईं बाबा के व्रत में मुख्य आहार होता है खिचड़ी । इसमे नमक वाली पीले रंग की खिचड़ी का दिन में एक बार सेवन करना होता है । इसके अलावा साबूदाने की खिचड़ी , शकरकंदी और कूटू के आटे की बनी पूड़ी और पकोड़ी दही के साथ सूखे मेवे की खीर आदि भी खा सकते है ।

Brihaspati Dev Mantra

गुरुवार व्रत कथा आरती 2

बृहस्पति महाराज का मूल मंत्र है “।। ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।” और || ॐ गुँ गुरुवे नमः || पूजन के बाद बृहस्पति देव का स्मरण करते हुए ऊपर दिए मंत्रों में से किसी का भी 9 बार,11 बार या 21 बार उच्चारण करे और अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करे । यह दिन विष्णु का दिन होता है इसलिए उनको प्रसन्न करने के लिए उनकी स्तुति का भी जाप करे :-

शान्ताकारं भुजग-शयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगन-सदृशंमेघवर्ण शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तं कमल-नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभय-हरंसर्वलोकैक-नाथम्॥

जाप मंत्र “ॐ नमो नारायणाय”

Brihaspati dev ki Aarti 

जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा.
छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा..
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी.
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी..
चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता.
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ..
तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े.
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े..
दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी.
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी..
सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो.
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी..
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे.
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे..
।। ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।

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