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ईद उल मिलाद पर निबंध – Essay on Eid ul milad in Hindi & Urdu

Essay on Eid ul milad in Hindi

Eid ul milad 2019: मिलाद अन-नबी / ईद-ए-मिलाद एक सार्वजनिक अवकाश है। यह सामान्य आबादी के लिए एक दिन की छुट्टी है, और स्कूल और अधिकांश व्यवसाय बंद हैं। 2019 में, यह रविवार को पड़ता है, और कुछ व्यवसाय रविवार खुलने के समय का पालन करने का विकल्प चुन सकते हैं..तो जो मिलाद-उन-नबी सभाओं को देखते हैं, पैगंबर मुहम्मद के जन्म और उनकी शिक्षाओं के आगमन को याद करते हैं, चर्चा करते हैं और जश्न मनाते हैं। कुछ लोग दोस्तों और परिवार को मिलाद-उन-नबी ई-कार्ड भेजते हैं। कई सुन्नी मुसलमान इस आयोजन को रबी अल-अव्वल के इस्लामी महीने के 12 वें दिन मनाते हैं, जबकि शिया समुदाय इसे 17 वीं रबी की अल-अव्वल के रूप में मनाता है।

ईद उल मिलाद पर हिंदी निबंध

ईद उल मिलाद कब है:इस वर्ष यह पर्व 9 नवंबर से लेकर 10  नवंबर तक है|

 Milad-un-Nabi मिलाद उन नबी को बारावफात Barawafat या मव्लिद Mawlid भी कहा जाता है। यह त्यौहार इस्लाम धर्म के लोग पैगंबर मुहम्मद Prophet Muhammad के जन्म दिन की ख़ुशी में मनाते हैं।

इस्लामिक कैलंडर के अनुसार पैगंबर मुहम्मद का जन्म दिन रबी’अल-अव्वल, तीसरे महीने में मनाया जाता है। मिलाद-उन-नबी का उत्सव 11वें सदी में फातिमी राजवंश या शाही घराने के समय से मनाया जा रहा है।

कहा जाता है पवित्र कुरान(Holy Kuran) के विषय में पैगंबर मुहम्मद से पता चला था और उसी दिन को पवित्र पैगंबर का जन्म दिवस मनाया जाता है।

Milad-un-Nabi मिलाद उन नबी के इस्लामिक पर्व को मौलिद Maulid भी कहते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पैगंबर मुहम्मद Prophet Muhammad के जन्म की ख़ुशी में जो गीत गया जाता है उसे मौलूद Maulud कहा जाता है। मध्य युग के समय से यह माना जाता है कि मौलूद संगीत को सुनना ना सिर्फ संसारिक है बल्कि उस व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

बारावफात Barawafat
भारत में और कुछ उपमहादेशों में Milad-un-Nabi बहुत ही लोकप्रियता से Barawafat नाम से मनाया जाता है। बारावफात Barawafat का मतलब होता है वह बारह दिन जिसमें पैगंबर का तबियर ख़राब रहा और उनकी मृत्यु हुई थी। इसीलिए यह दिन मिलाद-उन-नबी मानाने वाले लोगों के लिए शोक और ख़ुशी दोनों प्रकार का दिन होता है।

Id Ul Milad Par Nibandh in Hindi

शिया मुस्लिम समुदाय ईद त्यौहार को याद इसलिए करते हैं क्योंकि वे मानते हैं इसी दिन गाधिर-ए-खुम Gadhir-e-Khumm में पैगंबर मुहम्मद Prophet Muhammad ने हज़रत अली Hazrat Ali को अपने उत्तराधिकारी के रूप में चुना था।

यह अवसर हबिल्लाह Habillah को दर्शाता है यानि की एक चैन सिस्टम की इमामत जिसमें एक नए नेता की शुरुवात होती है। ईद-ए-मिलाद Eid-e-Milad (पैगंबर मुहम्मद का जन्म) और ईद-अल-गाधिर Eid-al-Gadhir (पैगंबर मुहम्मद का मृत्यु)दो ईएसआई चीजें हैं जो एक ही दिन में मानाये जाते हैं पर इनके मानाने का कारन अलग-अलग होता है।

ईद-अल-गाधिर Eid-al-Gadhir
कहा जाता है इस दिन पैगंबर मुहम्मद के उत्तराधिकारी होने के कारण हज़रत अली को गधिर-ए-खुम (सीरिया और यमन के बीच एक मार्ग) में सभी आध्यात्मिक वस्तुएं और ज़िम्मेदारियाँ मिली थी इसीलिए इस दिन को याद किया जाता है।

इस दिन सभी विश्वासी एक जगह जमा हो कर प्रार्थना करते हैं और अल्लाह का शुर्क्रिया करते हैं जिन्होंने उनकी सुख-शांति और लोगों को सही दिशा दिखने के लिए पैगंबर मुहम्मद को धरती पर भेजा। लोग पवित्र पैगंबर के विषय में व्याख्यान और गायन सुनने जाते हैं और गरीब दिन-दुखी लोगों को मिठाइयाँ बांटी जाती हैं।

बोहरा मुस्लिम Bohra Muslim जो की शिया मुस्लिम समुदाय का एक हिस्सा है, वे भी यह 12 दिन मस्जिदों में रबी-उल-अव्वल को प्रार्थनाओं और गीत सुनते हैं।

प्रार्थना मस्जिदों में महीने भर के लिए किये जाते हैं। 12वें दिन सुन्नी मुश्लिम समुदाय के लोग पवित्र पैगंबर और उनके द्वारा दिए गए सही मार्ग और विचारों को याद करते हैं। इस दिन वे शोक नहीं मनाते हैं क्योंकि सुन्नी मुस्लिम यह विश्वास करते हैं कि 3 दिन से ज्यादा शोक मनाने से मृत्यु हुए व्यक्ति की आत्मा को ठेंस पहुँचता है।

भारत में, इस दिन मुस्लिम समुदाय पवित्र पैगंबर और इमाम हज़रत अली का नाम लेते हुए जलूस निकालते हैं। इन जुलूसों को फलों, फूलों और अच्छी झांकियों से सजाया जाता है।

इस दिन सबसे ज्यादा घरों में खीर Kheer बनाया जाता है। हलाकि सऊदी अरब में मुस्लिम नमाज़ पढ़ते हैं और घरों में तरह-तरह की मिठाइयाँ बनाते हैं और पैगंबर के महान शब्दों को याद करते हैं।

Id-e-Milad essay in Hindi

Essay on Eid ul milad in English

पैगंबर हजरत मोहम्मद (Prophet Muhammad) साहब के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला इस्लामिक त्यौहार ईद-ए-मिलाद-उन-नबी 20 नवंबर से शुरू होकर 21 नवंबर तक मनाया जाएगा। पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्लिम धर्म के आखिरी संदेशवाहक और सबसे महान नबी माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि उनको स्वयं अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रईल के द्वारा कुरान का सन्देश दिया था। मुस्लिम धर्म के लोग इनके लिए हमेशा परम आदर भाव रखते हैं। इस्लामिक धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान ईद के दिन जरूर पढ़ा जाता है।

मुसलमानों के लिए ये बड़ा त्यौहार हैं। लेकिन इस त्यौहार को लेकर शिया और सुन्नी के अलग-अलग मत है। मुस्लिम धर्म के शिया समुदाय के लोग पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्म की खुशी में इसे मनाते है और वहीं दूसरी ओर सुन्नी समुदाय का मानना है कि ये दिन उनकी मौत का दिन है, इस कारण वो पूरे माह शोक मनाते हैं। ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन पैगंबर मोहम्मद के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थना की जाती है। रात भर जागकर मुस्लिम धर्म को मानने वाले लोग प्रार्थनाएं करते हैं। इस दिन जुलूस भी निकाले जाते हैं।

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब को पढ़ा जाता है और उन्हें याद किया जाता है। इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन जो कोई नबी को याद कर नियम से निभाता हैं। वो अल्लाह के प्यारों में शामिल हो जाता हैं। और उनपर अल्लाह की रहमत बरसती होती है।

Eid ul Milad Essay in English

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Milad un-Nabi/Id-e-Milad is a public holiday. It is a day off for the general population, and schools and most businesses are closed.

In 2019, it falls on a Sunday, and some businesses may choose to follow Sunday opening hours.

This image depicts a view of Al Madinah (Medina) in Saudi Arabia, which is where the Prophet Muhammad lived in during his final years and was buried.
This image depicts a view of Al Madinah (Medina) in Saudi Arabia, which is where the Prophet Muhammad lived in during his final years and was buried.

Those who observe Milad-un-Nabi gatherings remember, discuss and celebrate the advent of the Prophet Muhammad’s birth and his teachings. Some people send Milad-un-Nabi e-cards to friends and family. Many Sunni Muslims celebrate this event on the 12th of the Islamic month of Rabi’ al-awwal, while the Shi’a community celebrates it on the 17th of Rabi’ al-awwal.

Night-long prayer meetings.
Marches and parades involving large crowds.
Sandal rites over the symbolic footprints of the Prophet Muhammad.
Festive banners and bunting on and in homes, mosques and other buildings.
Communal meals in mosques and other community buildings.
Meetings to listen to stories and poems (nats) about Mohammad’s life, deeds and teachings.
Exhibitions featuring photos of mosques in the holy cities of Mecca and Medina in Saudi Arabia.
Many people carry green flags or banners or wear green ribbons or items of clothing when taking part in these events. The color green represents Islam and paradise. Many Kashmiri Muslims gather at the Hazratbal shrine in Srinagar, which is in the Indian province of Jammu and Kashmir. It houses a hair that is believed to have come from the Prophet Mohammad. Thousands of people attend prayers at the shrine on the night before Milad un-Nabi. The relic is displayed in the mosque after the morning prayers. It was paraded through the town in previous years.

Milad un-Nabi is a gazetted holiday in India so government offices, post offices and banks are closed on the day. Islamic stores, businesses and other organizations may be closed or have reduced opening hours. Those wishing to use public transport on the day may need to contact the local transport authorities to check on timetables.

Large prayer meetings, parades and marches may cause local disruption to traffic. This is particularly true of areas of India with a predominantly Muslim population.

This Eid festival commemorates the Prophet Muhammad’s (or Mohammad) birth and celebrates his teachings.