गाय पर निबंध – Essay on Cow in Hindi

cow essay in hindi

गाय का स्थान सर्वोपरि रखा गया है।माना जाता है की गाय के अंदर 36 करोड़ देवी देवताओं का वास होता हैं।गौपालन प्राचीन काल से ही चला आ रहा हैं।गाय का वास होने से घर के सभी वास्तु दोष  अपने आप खत्म हो जाते हैं ओर साथ ही यह भी माना गया है की घर पर आने वाले सभी संकट को भी गाय अपने ऊपर ले लेती हैं। संस्कृत में गाय को धेनु बोल जाता हैं ।

इस आर्टिकल में आपको कई प्रकार की जानकारी प्राप्त होगी जेसे गौ माता का महत्व, gaay ka nibandh, जिन्हे आप cow pe essay,Short and Long Essay,150 words में, लिख सकते है साथ ही आपको इस par lekh for class 1 से  4,  class 10, 11, 12 में भी मिल जाएगा।

गाय पर निबंध आप in marathi, in english (अंग्रेजी में), sanskrit, gujarati, nepali में 10 लाइन इंग्लिश में   best essay writing लिख सकते हैं।अगर किसी छात्र को कोई गाय के बारे में लिखकर दिखाओ बोलता है तो आप इस आर्टिकल के माध्यम से उन्हे दिखाइए भी साथ ही उनको गाय से जुड़ी सब जानकारी बताइए भी।

प्रस्तावना

गाय का दूध सभी के लिए पोषण से भरा होता हैं।यह दूध चाहे किसी नवजात शिशु को  दिया जाए य फिर किसी वृद्ध को।गाय एक पालतू पशु है।गाय को माता का दर्जा प्राप्त हैं।घर के मंगल कार्यों में गाय के ही चीजों का प्रयोग होता है जिसमे गाय के उत्सर्जी पदार्थ का भी उपयोग किया जाता है ओर इसको बहुत पवित्र माना जाता हैं।इसमे पंचगव्य जेसे दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र जेसे तत्व शामिल हैं ओर इन्ही तत्वों को औषधिय महत्व भी दिया गया है।

गाय की संरचना

गाय की शारीरिक संरचना इस प्रकार से है की इसके दो सींग,चार पैर,दो आंखे,दो कान,दो नथुने,चार थन,एक मुंह और एक बड़ी ओर लंबी सी पूँछ होती है। गाय के खुर से उन्हे चलने में मदद मिलती हैं ओर वे खुर जुते का काम भी करते है साथ ही बाहरी घाव,चोट और झटकों से बचाने में भी मदद करते हैं।गाय की प्रजातियां पूरे विश्व भर में आपको देखने को मिलेगी जिसमे से कई के सींग बाहर दिखाई नहीं देते ओर कुछ के उभरे हुए होते हैं।भारत को दूध उत्पादन के लिए विश्व भर में सबसे पहला स्थान प्राप्त हैं । यह दूध बेहद ही स्वच्छ,लाभदायक और बहुत पौष्टिक होता है।

गाय के प्रकार

पूरे भारत वर्ष में गाय कई नस्ल की पाई जाती है जेसे साहिवाल, सिंधी,नागौरी, भग्नारी, पवार, राठी,मालवी, काँकरेज, सिंधी, दज्जल, थारपारकर, अंगोल या नीलोर तथा गंगातीरी आदि इन गाय में से कुछ तो अधिक मात्र में दूध उपलब्ध करवाती हैं ओर कुछ काम मात्र में।गाय कई रंगों में देखने को मिलती है जैसे सफेद, काला, लाल, बादामी तथा चितकबरी होती है। गाय एक चौपाया जानवर है।
लेकिन सबसे पहले नंबर पर साहिवाल गाय आती है उसके बाद सिन्धी गाय।साहिवाल गाय एक दिन के भीतर 15-20 लिटर दूध देती हैं।गंगातीरी गाय आपको गंगा के मैदानों में मिलेंगी लेकिन यह दूध भी कम मात्रा में देती हैं।

उपयोगिता

गाय के दूध से कई प्रकार के पौष्टिक आहार बनते हैं।यह छोटे बच्चों ओर बीमार लोगों के लिए उपयोगी साबित होता हैं। गाय के दूध से हम कई प्रकार की चीज़े बना सकते है जेसे दही,पनीर,मक्खन और घी आदि।गाय का घी और cow का गोमूत्र अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने के काम भी काम आता है।इसका गोबर सबसे उत्तम खाद्य माना जाता हैं।गाय के मरने के बाद उसके सींग,चमड़ा,हड्डियां ओर बाकी की यंग किसी न किसी काम मे लिए जाते हैं।

गाय के दूध से बच्चों में चंचलता आती हैं।गाय एक परोपकारी पशु है क्योंकि यह अपने जीवित होने पर भी सबके काम आती है ओर मरने के बाद भी काम आती हैं। गाय का चमड़ा,सींग ओर खुर से दैनिक जीवनोपयोगी vastu तैयार की जाती है तथा इसकी हड्‍डियों से खाद खेती के काम में ली जाती हैं।

गाय का महत्त्व

गाय को भारत देश में देवी का दर्जा दिया गया है इसलिए दिवाली के दूसरे दिन में गोवर्धन पूजा के प्रमुख अवसर पर गायों की कई प्रकार से ओर विधि विधान से पूजा की जाती है ,उनको मोर पंखों से श्रृंगार करकर तैयार किया जाता हैं।
गाय को प्राचीन भारत में सुख ओर समृद्धि का प्रतीक माना गया हैं।पुराने समय में युद्ध के दौरान सोने के आभूषणों के साथ गायों को भी लूटा जाता था क्योंकि उनको स्वर्ण से लाध दिया जाता था।मान्यताएँ थी की जिस राज्य में जितनी अधिक गायें होगी उसको उतना ही सम्पन्न राज्य माना जाएगा।भगवान श्री कृष्ण भी गाय प्रेम से भी प्रचलित है जिसके कारण उनका एक नाम गोपालकृष्ण भी बुलाया गया।
Hindu Dharm के अनुसार यह माना जाता है की सबसे बड़ा दान गौ-दान होता है। इसी से सभी को मोक्ष की प्राप्ति मिलती है।हिंदुओं के सभी तीज-त्योहार पर गाय के घी के उत्पादों को शुद्ध माना जाता हैं बिना गौ के घी के उनका कार्य पूरे नहीं होता।त्योहार के दिन य उससे पहले सभी लोग घर को गौ के गोबर से लीपते हैं फिर उसके बाद देवी-देवताओं की मूर्ति को स्थापित किया जाता है।
गाय के दर्शन को कई लोग जरूरी काम को करने से पहले बड़ा शुभ मानते हैं इसके साथ ही गाय के गोबर को खेती के लिए भी बहुत उपयोगी मन गया है।धरती माता के समान गाय को पूजा जाता हैं ईसीलिए गाय को गौ-माता भी बोला जाता हैं।

उपसंहार

गाय शुद्ध ओर शाकाहारी भोजन करती हैं। यह हरी घास, चारा,अनाज, आदि का सेवन करती हैं।इसको पालने का तरीका बहुत ही सरल है।इसके दूध से हुमए निम्न प्रकार के रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती हैं।

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