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बसंत पंचमी पर भाषण 2022 – Basant Panchami Speech in Hindi, English & Punjabi PDF Download

Vasant Panchami speech in English
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बसंत पंचमी एक हिंदू और सिख त्योहार है जो वसंत ऋतु का स्वागत करता है और सर्दियों के मौसम को विदाई देता है। वसंत पंचमी को शादी के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। लोग इस दिन को सरस्वती पूजन के साथ मनाते हैं। वसंत पंचमी पर स्कूल कॉलेजों और अन्य स्थानों पर भाषण दिए जाते हैं। इस लेख में, इसलिए, हम चर्चा करेंगे- speech on Basant Panchami in Hindi, Short Speech on Vasant Panchami in Hindi, English and Punjabi

Basant Panchami 2022 speech in Hindi

short speech on Basant Panchami in Hindi

इस शुभ दिन पर शिक्षक और छात्र बसंत पंचमी भाषण देते हैं। उन्हें एक प्रासंगिक भाषण तैयार करना होगा। अगर आप  Hindi speech on Basant Panchami, or short speech on basant panchami तैयारी कर रहे हैं, हमने आपके लिए कुछ भाषणों का उल्लेख किया है जिन्हें आप अपनी तैयारी के लिए देख सकते हैं। बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनासाथ ही आप के विषय में जान सकते है|

Basant Panchami par speech in Hindi – भारत में वसंत ऋतु को सबसे सुहावना मौसम माना जाता है। प्रकृति में सब कुछ सक्रिय होता है और पृथ्वी पर नए जीवन को महसूस करते हैं। वसंत ऋतु सर्दियों के तीन महीने के लम्बे अन्तराल के बाद बहुत सी खुशियाँ और जीवन में राहत लाती है। वसंत ऋतु सर्दियों के मौसम के बाद और गर्मियों के मौसम से पहले, मार्च, अप्रैल और मई के महीने में आती है। वसंत ऋतु का आगमन सभी देशों में अलग-अलग होने के साथ ही तापमान भी अलग-अलग देशों में अलग-अलग होता है। कोयल पक्षी गाना गाना शुरु कर देती है और सभी आम खाने का आनंद लेते हैं। प्रकृति में सभी जगह फूलों की खूशबू और रोमांस से भरी हुई होती हैं, क्योंकि इस मौसम में फूल खिलना शुरु कर देते हैं, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, आसमान पर बादल छाए रहते हैं, कलकल करती हुई नदियाँ बहती है आदि। हम कह सकते हैं कि, प्रकृति आनंद के साथ घोषणा करती है कि, वसंत आ गया है: अब यह उठने का समय है। इस मौसम की सुन्दरता और चारों ओर की खुशियाँ, मस्तिष्क को कलात्मक बनाती है और आत्मविश्वास के साथ नए कार्य शुरु करने के लिए शरीर को ऊर्जा देती है। सुबह में चिड़ियों की आवाज और रात में चाँद की चाँदनी, दोनों ही बहुत सुहावने, ठंडे और शान्त हो जाते हैं। आसमान बिल्कुल साफ दिखता है और हवा बहुत ही ठंडी और तरोताजा करने वाली होती है। यह किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मौसम होता है, क्योंकि उनकी फसलें खेतों में पकने लगती हैं और यह समय उन्हें काटने का होता है। सभी आनंद और खुशियों को महसूस करते हैं क्योंकि, यह मौसम त्योहारों का मौसम है; जैसे- होली, राम नवमीं, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे, ईस्टर, बिहू, नवरोज, बैसाखी आदि

Vasant Panchami speech in English

speech on Basant Panchami in English-यदि आप वसंत पंचमी के लिए अंग्रेजी भाषण की तलाश कर रहे हैं, तो यहां है Basant Panchami speech in English जिसे आप देख सकते हैं| हमने आपकी तैयारी के लिए संक्षिप्त और सरल अंग्रेजी भाषण का उल्लेख किया है। आप बसंत पंचमी पर निबंध भी देख सकते हैं।

The Hindu festival of Basant Panchami honors Saraswati, the goddess of education, music, and art. It is a national holiday in India. According to the Hindu calendar, it is celebrated every year on the fifth day (Panchami) of the Magh month.

The winter season comes to an end with Basant Panchami. During this event, children are taught how to write their first words in Hindu tradition. At this festival, most people wear yellow clothing. Devi Saraswati, the goddess of knowledge, is worshipped all over India. Within the households, yellow desserts are enjoyed. Everyone seems to have a great time at the festival and is quite enthusiastic about it.

Basant Panchami speech in Punjabi

ਬਸੰਤ ਪੰਚਮੀ ਦੇ ਦਿਨ ਦੇਵੀ ਸਰਸਵਤੀ ਦੀ ਪੂਜਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਮਾਂ ਸਰਸਵਤੀ ਨੂੰ ਵਿੱਦਿਆ ਦੀ ਦੇਵੀ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਪੂਜਾ ਮਾਘ ਮਹੀਨੇ ਦੀ ਸ਼ੁਕਲ ਪੰਚਮੀ ਦੇ ਦਿਨ ਮਨਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਤਿਉਹਾਰ ਜਨਵਰੀ ਜਾਂ ਫਰਵਰੀ ਦੇ ਮਹੀਨੇ ਵਿੱਚ ਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਦੇ ਦਿਨ, ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਮਾਂ ਸਰਸਵਤੀ ਦੀ ਪੂਜਾ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਸਕੂਲਾਂ ਅਤੇ ਵਿਦਿਅਕ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਮਾਂ ਸਰਸਵਤੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਰੱਖੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਪੂਜਾ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਵਾਲੇ ਦਿਨ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਸਵੇਰੇ ਇਸ਼ਨਾਨ ਕਰਕੇ ਦੇਵੀ ਸਰਸਵਤੀ ਦੀ ਪੂਜਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਫਿਰ ਪ੍ਰਸ਼ਾਦ ਲੈਂਦੇ ਹਨ।
ਇਸ ਦਿਨ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਮਾਂ ਸਰਸਵਤੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਦੇ ਦਰਸ਼ਨ ਕਰਨ ਲਈ ਸਾਰੀਆਂ ਥਾਵਾਂ ‘ਤੇ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। ਸਕੂਲ ਵਿੱਚ ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਦਾ ਆਯੋਜਨ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਢੰਗ ਨਾਲ ਕੀਤਾ ਗਿਆ। ਇਸ ਵਿੱਚ ਸਮੂਹ ਅਧਿਆਪਕ ਅਤੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਉਚੇਚੇ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਸ਼ਾਮਲ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਆਈਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਸੰਗਤਾਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਸ਼ਾਦ ਵੰਡਦੇ ਹਨ। ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਵਿੱਚ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਵੱਧ ਤੋਂ ਵੱਧ ਗਿਆਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਦੇਵੀ ਸਰਸਵਤੀ ਅੱਗੇ ਅਰਦਾਸ ਕਰਦੇ ਹਨ।

ਅੱਜਕੱਲ੍ਹ ਦੇਖਣ ਵਿੱਚ ਆਇਆ ਹੈ ਕਿ ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਵਿੱਚ ਕਈ ਥਾਵਾਂ ’ਤੇ ਪੰਡਾਲ ਬਣਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਉੱਥੇ ਗੀਤ ਚਲਾਏ ਜਾਂਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਕਈ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਗੀਤਾਂ ’ਤੇ ਨੱਚਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਕਾਰਨ ਇਸ ਪੂਜਾ ਦਾ ਮਾਣ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਘਟਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ ਅਤੇ ਮਾਪਿਆਂ ਨੂੰ ਇਸ ਪੂਜਾ ਦੀ ਪਵਿੱਤਰਤਾ ਨੂੰ ਕਾਇਮ ਰੱਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

ਸਰਸਵਤੀ ਪੂਜਾ ਵਿੱਚ ਸਰਸਵਤੀ ਜੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਨੂੰ ਇੱਕ ਜਾਂ ਦੋ ਦਿਨ ਤੱਕ ਬਿਠਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਫਿਰ ਪੂਜਾ ਦੇ ਦੂਜੇ ਜਾਂ ਤੀਜੇ ਦਿਨ ਮੂਰਤੀ ਦਾ ਵਿਸਰਜਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਵਿਸਰਜਨ ਦੇ ਸਮੇਂ, ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਲੋਕ ਸੜਕਾਂ ‘ਤੇ ਜਾਂਦੇ ਸਰਸਵਤੀ ਜੀ ਦੀ ਮੂਰਤੀ ਨੂੰ ਦੇਖਦੇ ਅਤੇ ਮੱਥਾ ਟੇਕਦੇ ਹਨ। ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀ ਬੜੇ ਉਤਸ਼ਾਹ ਨਾਲ ਮੂਰਤੀ ਵਿਸਰਜਨ ਕਰਦੇ ਹਨ।

Vasant Panchami speech in English

Basant Panchami 2022 speech in Hindi – बसंत पंचमी पर स्पीच

Basant Panchami ke liye speech- वसंत ऋतु में हमारे जीवन में एक अद्भुत शक्ति लेकर आती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इसी ऋतु में ही पुराने वर्ष का अंत होता है और नए वर्ष की शुरुआत होती है। इस ऋतु के आते ही चारों तरफ हरियाली छाने लगती है। सभी पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं।

आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं हैं और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं हैं। इसी स्वाभाव के कारन इस ऋतु को ऋतुराज कहा गया है। इस ऋतु का स्वागत बसंत पंचमी या श्रीपंचमी के उत्सव से किया जाता है।
बसंत का उत्सव प्रकृति का उत्सव है। माघ महीने की शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी होती है तथा इसी दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। बसंत का अर्थ है वसंत ऋतू और पंचमी का अर्थ है शुक्ल पक्ष का पांचवां दिन। वसंत पंचमी या श्रीपंचमी यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है।

जिस प्रकार मनुष्य जीवन में यौवन आता है उसी प्रकार बसंत इस सृष्टि का यौवन है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में ‘ऋतूनां कुसुमाकरः’ कहकर ऋतुराज बसंत को अपनी विभूति माना है। बसंत ऋतु का हमारे जीवन में और भी बहुत महत्त्व है लेकिन उस से पहले आइये जान लेते हैं वसंत पंचमी या श्रीपंचमी से जुड़े कुछ पौराणिक और ऐतिहासिक तथ्य :-

पौराणिक इतिहास

कैसे हुआ देवी सरस्वती का जन्म ? क्यों की जाती है देवी सरस्वती की पूजा ?
कहा जाता है जब ब्रह्मा जी ने जिस समय भगवान् विष्णु की आज्ञा पाकर सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की उस समय चारों ओर शांति ही शांति थी। किसी भी प्रकार की कोई ध्वनि किसी भी ओर नहीं थी। बिना ध्वनि के विष्णु और ब्रह्मा जी को ये रचना कुछ अधूरी प्रतीत हुयी। उसी समय ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का।

जल छिड़कने के बाद वृक्षों के बीच एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुयी। जिन्हें हम देवी सरस्वती के नाम से जानते हैं। जिसके 4 हाथ थे। एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा जी के अनुरोध पर जैसे ही देवी सरस्वती ने वीणा बजायी सारे संसार को वाणी की प्राप्ति हो गयी।

इसी कारन ब्रह्मा जी ने देवी सरस्वती को देवी की वाणी कहा। ये सब बसंत पंचमी के दिन ही हुआ था। विद्या की देवी सरस्वती से ही हमें बुद्धि व ज्ञान की प्राप्ति होती है। हमारी चेतना का आधार देवी सरस्वती को ही माना जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने वाली देवी सरस्वती को संगीत की देवी भी कहा जाता है।

इन सब कारणों के इलावा देवी सरस्वती की पूजा का एक कारन यह भी मन जाता है कि भगवान् विष्णु ने भी देवी सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें ये वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन उनकी पूजा की जायेगी।

सबसे पहले श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती का पूजन माघ शुक्ल पंचमी को किया था, तब से बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का प्रचलन है। फलस्वरूप आज भारत के एक बड़े हिस्से में देवी सरस्वती की आराधना बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से होती है।

क्या है भगवान राम का नाता ?

ये तब की बात है जब रावण ने सीता का हरण कर लिया था और राम उनकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़ रहे थे। सीता को ढूंढते-ढूंढते वे दंडकारण्य पहुंचे। यह स्थान गुजरात में हैं। यह दिन बसंत पंचमी का ही दिन था। उसी वन में शबरी ना की भीलनी रहती थी। जो बहुत समय से भगवान् राम की प्रतीक्षा कर रही थी।

जब राम ने शबरी को दर्शन दिए तो उसके पास कुटिया में भगवान् राम को खिलाने के लिए कुछ नहीं था। थोड़े से बेर उसने रखे हुए थे। प्रभु को खट्टे बेर न खाने पड़े इसलिए वह सभी बेर चख-चख कर देने लगी। राम जिस शिला पर उस समय बैठे थे उसे आज भी यहाँ के लोग पूजते हैं। यहाँ पर माता शबरी का एक मंदिर भी है। यह घटना भी बसंत पंचमी वाले दिन ही घटित हुयी थी।

क्या है पीले रंग में रंगने का राज ? क्यों पहने जाते हैं पीले रंग के कपड़े ?

पीला रंग हिन्दुओं का शुभ रंग होता है। बसंत ऋतु के आरंभ में हर ओर पीलाही रंग नजर आता है। बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के चावल बनाये जाते है। पीले लड्डू और केसरयुक्त खीर बनायीं आती है। खेतों में सरसों के फूल पीले रंग को प्रदर्शित करते हैं। हल्दी व चन्दन का तिलक लगे जाता है। सभी लोग ज्यादातर पीले रंग के ही कपड़े पहनते हैं।

ऐतिहासिक तथ्य

मुहम्मद गौरी का अंत
पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गौरी के युद्ध के बारे में शायद ही कोई ना जानता हो। लेकिन क्या आपको पता है कि पृथ्वीराज चौहान ने 16 बार मुहम्मद गौरी को युद्ध में हराया था और उस पर दया कर उसे जीवनदान दे दिया था। इसके बाद भी मुहम्मद गौरी ने अपनी नीचता का त्याग न करते हुए 17वीं बार फिर हमला किया और पृथ्वीराज चौहान व उनके साथी कवी चंदरबरदाई को कैद कर पाने साथ अफ़ग़ानिस्तान ले गया। वहां उसने पृथ्वीराज चौहान की आँखें फोड़ दीं।

मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को मृत्युदंड दिया। किन्तु उस से पहले उसने पृथ्वीराज चौहान की शब्दभेदी बाण चलाने की कला को देखने की इच्छा जताई। उसके बाद जो हुआ उस से कोई भी अनजान नहीं है। पृथ्वीराज चौहान ने मौके का फ़ायदा उठाया और साथी कवी चंदरबरदाई के इस संकेत :-

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चूको चौहान ॥

को पाकर जरा भी देर न की और बाण सीधा मुहम्मद गौरी के सीने में उतार दिया। और फिर दोनों ने एक दूसरे के पेट में छूरा घोंप कर अपना बलिदान दे दिया। यह घटना भी बसंत पंचमी के दिन की ही है।

principal speech on Basant Panchami in English

विद्यालय के प्रधानाचार्य का भाषण हमेशा श्रेष्ठ होना चाहिए। प्रधानाचार्य की प्राथमिकता छात्रों को भारत में बसंत पंचमी के इतिहास और महत्व के बारे में सिखाया जाना चाहिए। यदि आप अंग्रेजी में बसंत पचमी पर प्रधान भाषण की तैयारी कर रहे हैं, तो आप नीचे दिए गए उदाहरण का उल्लेख कर सकते हैं।

Principal speech on Basant Panchami 2022- Basant Panchami is celebrated on the fifth day of the Magha sukla Paksha, according to the Hindu calendar. Goddess Saraswati is honored on this day. The creator Lord Brahma, according to legend, looked over his creation, the Earth. Brahma was struck by the grief in the air and felt compelled to do something about it. He poured water from his Kamandal over all the trees, and a Goddess appeared in a blinding flash. She was using both hands to play the veena. She had a book and a garland in her other two hands. Goddess Saraswati, which means “beholder of all rasas and kalas,” was given to her by Lord Brahma.

Goddess Saraswati, at Lord Brahma’s request, infused the ‘creation’ with the colours of music, dance, art, and education. Brushes are worshipped and kept beside the idol of the Goddess on ‘Basanta Panchami’ or Saraswati Puja (as it is known in the east). Yellow is the prominent colour of the day, and people, especially in North India, dress in yellow-hued clothing.