वसंत पंचमी कविता मराठी – वसंत ऋतु मराठी कविता – Poem on Vasant Panchami

वसंत पंचमी कविता मराठी
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भारत में वसंत पंचमी का त्यौहार हर साल वसंत ऋतु के आगमन पर बहुत ही वुयषाल तोर पर मनाया जाता है| बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा व सरस्वती वंदना की जाती है| इस वर्ष 22 जनवरी २०१८, सोमवार को है यानी की Monday, 22 January 2018 को Vasant Panchami 2018 पूरे देश में मनाई जाएगी | आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं वसंत पंचमी की कविता मराठी में जिससे कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 व 12 के विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं व अपने स्कूल में प्रोग्राम व फंक्शन में मराठी भाषा में सुना सकते हैं|

Marathi: भारतात वसंत पंचमीचा उत्सव दरवर्षी अत्यंत दुर्मिळ प्रसंगी साजरा केला जातो. बसंत पंचमीवर, मदर सरस्वती आणि सरस्वतीची पूजा केली जाते. 22 जानेवारी 2018 सोमवारी, सोमवार 22 एप्रिल वसंत पंचमी 2018 2018 संपूर्ण देशात साजरा केला जाईल | आज आम्ही मराठी कविता विद्यार्थी ज्ञान मिळवू शकता वसंत पंचमी समोर सादर केले आहेत, जे वर्ग 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 आणि 12 आणि आपल्या शाळेत कार्यक्रम आणि कार्ये मराठी भाषेत ऐकू शकतात.

Vasant Panchami Kavita in Marathi

आप चाहे तो बसंत पंचमी की कविता में भी देख सकते हैं| आइये देखें Marathi Poem on Spring season for class 2 & class 3 students, Marathi poetry for kids. 2018 सरस्वती पूजा व सरवती वंदन के साथ स्टूडेंट्स ये कविता भी स्कूल के प्रोग्राम में सुना सकते हैं |


'आला वसंत, वसंत आला। तनामनाचा झाला हिंदोळा
हिरवे सारे रंग दुलारे। कोकिळ गाणे, निळयांत भरे
रंगा नहाळी, गंधा जिव्हाळी। कोऱ्या फांदीला धुंद कोवळी
आला वसंत, वसंत आला। तनामनाचा झाला हिंदोळा॥'
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Basant Panchami Kavita Marathi me

Basant Panchami Kavita in Marathi इस प्रकार है:


॥ श्री ॥
‘हा वसंत रंग भरीत जगती येतसे पहा
बहरल्या दिशा दहा!
कोकीळा ही उपवनात ! अमृतमधुर गीत गात!
रम्य दिवस चांदरात , फिरत फिरत भृंग हा ॥ ‘
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सुमित्रानंदन पंत की वसंत पर कविता Marathi

धरा पे छाई है हरियाली


धरा पे छाई है हरियाली
खिल गई हर इक डाली डाली
नव पल्लव नव कोपल फुटती
मानो कुदरत भी है हँस दी
छाई हरियाली उपवन मे
और छाई मस्ती भी पवन मे
उडते पक्षी नीलगगन मे
नई उमन्ग छाई हर मन मे
लाल गुलाबी पीले फूल
खिले शीतल नदिया के कूल
हँस दी है नन्ही सी कलियाँ
भर गई है बच्चो से गलियाँदेखो नभ मे उडते पतन्ग
भरते नीलगगन मे रन्ग
देखो यह बसन्त मसतानी
आ गई है ऋतुओ की रानी
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Basant Panchami Kavita in Hindi

वसंत ऋतु आला


आला वसंत ऋतु आला
वसुंधरेला हसवायाला
सजवित नटवित लावण्याला
आला, आला वसंत ऋतु आला
रसरंगाची करीत उधळण
मधुगंधाची करीत शिंपण
चैतन्याच्या गुंफित माला रसिकराज पातला
वृक्षलतांचे देह बहरले
फुलाफुलांतून अमृत भरले
वनावनांतून गाऊ लागल्या पंचमात कोकिळा
व्याकुळ विरही युवयुवतींना
मधुर काल हा प्रेममिलना
मदनसखा हा शिकवी रसिका शृंगाराची कला
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वसंत ऋतु मराठी गाणी


हिवाळ्यासाठी निरोप द्या,
वसंत ऋतू आहे
हवा सूर्यासह आली,
कोण फुले लुटले …..
गार्डन्स बाहेर,
मोठी मधमाशी
फुलपाखरू पूर्ण आहे,
बुलबुलचा कॉल आहे …..
संपूर्ण पहा,
किती सुंदर नेव्ही मोर,
कसे कोणी भोक होईल,
जेव्हा कोक हा आवाज असतो ….
शेतात गहू हरभरा,
मोहरीचा हळद नीट ढवळून घ्यावा
मधमाशी काम …
आम्ही शरीरात झाकले,
बसंत वेशॅन परिधान करत आहे …
रंग चांगला mingling,
फॅगन रंगराजन!
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माझा आवडता ऋतू वसंत

बसंत ऋतु है आयी


देखो -देखो बसंत ऋतु है आयी ।
अपने साथ खेतों में हरियाली लायी ॥
किसानों के मन में हैं खुशियाँ छाई ।
घर-घर में हैं हरियाली छाई ॥
हरियाली बसंत ऋतु में आती है ।
गर्मी में हरियाली चली जाती है ॥
हरे रंग का उजाला हमें दे जाती है ।
यही चक्र चलता रहता है ॥
नहीं किसी को नुकसान होता है ।
देखो बसंत ऋतु है आयी ॥
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वसंत ऋतु मराठी कविता - Poem on Vasant Panchami

वसंत ऋतू मराठी माहिती


चोहीकडून तो वसंत येतो,हासत नाचत गाणे गातो
चराचरावर जादू करतो मनामनाला फुलवित येतो
पक्षीकूजन मधुर ऐकू येते , आसमंत हा गुंगुन जावा
फुलाफुलातून साद उमलते , वसंत घ्यावा वसंत घ्यावा……।
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शिशिर ऋतु मराठी

बसंत आ गया!


अंग-अंग में उमंग आज तो पिया,
बसंत आ गया!
दूर खेत मुसकरा रहे हरे-हरे,
डोलती बयार नव-सुगंध को धरे,
गा रहे विहग नवीन भावना भरे,
प्राण! आज तो विशुद्ध भाव प्यार का
हृदय समा गया!
अंग-अंग में उमंग आज तो पिया,
बसंत आ गया!
खिल गया अनेक फूल-पात से चमन,
झूम-झूम मौन गीत गा रहा गगन,
यह लजा रही उषा कि पर्व है मिलन,
आ गया समय बहार का, विहार का
नया नया नया!
अंग-अंग में उमंग आज तो पिया,
बसंत आ गया!
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ऋतूची माहिती

चलो मिल बटोर लाएँ


चलो मिल बटोर लाएँ
मौसम से वसंत
फिर मिल कर समय गुज़ारें
पीले फूलों सूर्योदय की परछाई
हवा की पदचापों में
चिडियों की चहचहाहटों के साथ
फागुनी संगीत में फिर
तितलियों से रंग और शब्द लेकर
हम गति बुनें
चलो मिल कर बटोर लाएँ
मौसम से वसंत
और देखें दुबकी धूप
कैसे खिलते गुलाबों के ऊपर
पसर कर रोशनियों की
तस्वीरें उकेरती है
उन्हीं उकेरी तस्वीरों से
ओस कण चुने
चलो मिल बटोर लाएँ||
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वसंत ऋतु निबंध मराठी

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