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रथ यात्रा पर कविता – Rath Yatra Poem in Bengali, Hindi & Odia by Rabindranath Tagore

रथ यात्रा 2018:  श्री जगन्नाथ रथ यात्रा एक बहुत ही भव्य त्यौहार है जो की भारत में ओरिसा राज्य में बड़े भव्य तरीके से मनाया जाता है| इस त्यौहार का बहुत महत्व है| यह पर्व पूरे भारत समेत विदेश में भी मनाया जाता है| इस पर्व को भगवान् जगन्नाथ के लिए समर्पित किया जाता है| इस त्यौहार को कई सदियों से मनाने की परंपरा है| रथ यात्रा भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा होती है जिसमे उन्हें एक पालकी में विराजित किया जाता है और यात्रा निकाली जाती है| आज के इस पोस्ट में हम आपको जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा, जगन्नाथ रथ यात्रा २०१८, जगन्नाथ जी की रथयात्रा, odia poem on rath yatra, rathyatra lokaranya, maha dhum dham., rath bole ami deb, rath vabe ami deb, rath yatra lokaranya, rath yatra bengali kobita, rath vabe ami deb path vabe ami, poem on rath yatra in Hindi, रथ यात्रा पर कविता इन बंगाली, हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के रथ यात्रा कविता को प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है

जगन्नाथ रथ यात्रा कविता इन हिंदी

Jagannath Rath Yatra 2018 date:  वर्ष 2018 में रथ यात्रा 14 जुलाई 2018 की है जो की शनिवार को है| जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा 14/7/2018 को मनाई जाएगी| इस दिन शनिवार का दिन है| ये poem on rath yatra, रथ यात्रा पर निबंध, rath yatra kavita in hindi, Rath Yatra Quotes in Hindi, RATHA YATRA KAVITA, Paragraph on Rath Yatra, ratha yatra poems in oriya language, Rath Yatra Wishes in Hindi का कलेक्शन class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो के लिए है जो की हर साल 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 व 2018 का collection है जिसे आप whatsapp, facebook व instagram पर अपने groups में share कर सकते हैं|

“हे प्रभु जगन्नाथ थाम मेरा हाथ,
अपने रथ में ले चल मुझे साथ।
लुभाये न मुझको अब कोई पदार्थ
मेरा तो बस अब एक ही स्वार्थ,
धर्म युद्ध हो या कर्म युद्ध हो
तू बने सारथि, मैं बनूँ पार्थ ।
मैं हूँ अन्जान बन के मेरा नाथ
अपने रथ में ले चल मुझे साथ।”

Poem on Rath Yatra

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शुक्ल पक्ष आषाढ़ द्वितीय।
रथयात्रा त्योहार अद्वितीय।

चलो चलें रथयात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में।

जगन्नाथ के मंदिर से।
भाई बहन वो सुन्दर से।

जगन्नाथ, बलभद्र हैं वो।
बहन सुभद्रा संग में जो।

मुख्य मंदिर के बाहर।
रथ खड़े हैं तीनों आकर।

कृष्ण के रथ में सोलह चक्के।
चौदह हैं बलभद्र के रथ में।
बहन के रथ में बारह चक्के॥

रथ को खींचों।
बैठो न थक के।

मौसी के घर जाएंगे।
मंदिर (गुंडिचा )हो आएंगे।

नौ दिन वहां बिताएंगे।
लौट के फिर आ जाएंगे।

बहुड़ा जात्रा नाम है इसका।
नाम सुनो अब कृष्ण के रथ का।

नंदिघोषा, कपिलध्वजा।
गरुड़ध्वजा भी कहते हैं।

लाल रंग और पीला रंग।
शोभा खूब बढ़ाते हैं।

तालध्वजा रथ सुन्दर सुन्दर।
भाई बलभद्र बैठे ऊपर।

नंगलध्वजा भी कहते हैं।
बच्चे, बूढ़े और सभी।

गीत उन्हीं के गाते हैं।
रंग-लाल, नीला और हरा।

ये त्योहार है खुशियों भरा।
देवदलन रथ आता है।

बहन सुभद्रा बैठी है।
कपड़ों के रंग काले-लाल।

दो सौ आठ किलो सोना।
तीनों पर ही सजता है।

खूब मनोहर सुन्दर झांकी।
कीमत इसकी कोई न आंकी।

दृश्य मन को भाता है।
एक झलक तो पा लूँ अब।

विचार यही बस आता है।

चलो चलें रथ यात्रा में।
पुरी में लोग बड़ी मात्रा में॥

Rath Yatra Poem by Rabindranath Tagore

यह दिन Puri, Bhubaneswar, Odisha, Orissa, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Uttarakhand, Dehradun, UP, Punjab, Bhutan, Dehradun, Kerala, Jharkhand, Karnataka, mumbai, pune, Noida, Jaipur, Maharashtra, Madhya pradesh, Mizoram, Mussorie, West Bengal, Haryana, Himachal Pradesh, Bihar, Chhattisgarh, Delhi, Gujarat, Haryana, Punjab, Rajasthan, Tamil Nadu सहित अन्य राज्यों में मनाया जाता है in Hindi, Prakrit, Urdu, sindhi, Punjabi, Marathi, Gujarati, Tamil, Telugu, Nepali, सिंधी लैंग्वेज, Kannada व Malayalam & hindi language.

“Ratha bhabe ami Dev
Patha bhabe ami
Murti bhabe ami Dev
Hnashen Antarjami”

Rath Yatra Poem in Bengali

 

রথযাত্রা

রথযাত্রার দিন কাছে।

তাই রানী রাজাকে বললে, ‘চলো, রথ দেখতে যাই।’

রাজা বললে, ‘আচ্ছা।’

ঘোড়াশাল থেকে ঘোড়া বেরোল, হাতিশাল থেকে হাতি। ময়ূরপংখি যায় সারে সারে, আর বল্লম হাতে সারে সারে সিপাইসান্ত্রি। দাসদাসী দলে দলে পিছে পিছে চলল।

কেবল বাকি রইল একজন। রাজবাড়ির ঝাঁটার কাঠি কুড়িয়ে আনা তার কাজ।

সর্দার এসে দয়া করে তাকে বললে, ‘ওরে, তুই যাবি তো আয়।’

সে হাত জোড় করে বললে, ‘আমার যাওয়া ঘটবে না।’

রাজার কানে কথা উঠল, সবাই সঙ্গে যায়, কেবল সেই দুঃখীটা যায় না।

রাজা দয়া করে মন্ত্রীকে বললে, ‘ওকেও ডেকে নিয়ো।’

রাস্তার ধারে তার বাড়ি। হাতি যখন সেইখানে পৌঁছল মন্ত্রী তাকে ডেকে বললে, ‘ওরে দুঃখী, ঠাকুর দেখবি চল্‌।’

সে হাত জোড় করে বলল, ‘কত চলব। ঠাকুরের দুয়ার পর্যন্ত পৌঁছই এমন সাধ্য কি আমার আছে।’

মন্ত্রী বললে, ‘ভয় কী রে তোর, রাজার সঙ্গে চলবি।’

সে বললে, ‘সর্বনাশ! রাজার পথ কি আমার পথ।’

মন্ত্রী বললে, ‘তবে তোর উপায়? তোর ভাগ্যে কি রথযাত্রা দেখা ঘটবে না।’

সে বললে, ‘ঘটবে বই কি। ঠাকুর তো রথে করেই আমার দুয়ারে আসেন।’

মন্ত্রী হেসে উঠল। বললে, ‘তোর দুয়ারে রথের চিহ্ন কই।’

দুঃখী বললে, ‘তাঁর রথের চিহ্ন পড়ে না।’

মন্ত্রী বললে, ‘কেন বল্‌ তো।’

দুঃখী বললে, ‘তিনি যে আসেন পুষ্পকরথে।’

মন্ত্রী বললে, ‘কই রে সেই রথ।’

দুঃখী দেখিয়ে দিলে, তার দুয়ারের দুই পাশে দুটি সূর্যমুখী ফুটে আছে।

লিপিকা,
১৯১৭-১৯১৯

Rath Yatra Poem in Bengali

Ashadhi Duj poem, ratha Yatra poem by Rabindranath Tagore

শুক্লা পার্টি আশআদ ২
রথযাত্রা উৎসব অনন্য

চল আমরা রথযাত্রায় যাই
প্রচুর পরিমাণে পুরির মানুষ

জগন্নাথ মন্দির থেকে
যে সুন্দর থেকে ভাই বোন

জগন্নাথ, বালভদ্র হায় তিনি
সুভাষ সিং সঞ্জয়ের বোন

প্রধান মন্দির বাইরে
রথ সব তিনটি দাঁড়িয়ে আছে

কৃষ্ণের রথে 16 টি চাকা
চৌধুরী বালবাহাদর রথের মধ্যে রয়েছে।
বোন এর রথ মধ্যে দ্বিগুণ চাকার

রথ টেনে আনুন
থামা না বসতে

চাচা ঘরে চলে যাবে।
মন্দিরটি (গুন্ডিচ) আসবে।

সেখানে নয় দিন ব্যয়
রিটার্ন আবার আসবে।

বাহাদ্রা যাত্রা তার নাম।
এখন কৃষ্ণের রথের নাম শুনুন

নন্দঘাশা, কাপিলাগাজা
গরুড় স্বভজকেও বলা হয়।

লাল রঙ এবং হলুদ রঙ
অনেক সুন্দর করে দাও

তন্ময় রাধা সুন্দর সুন্দর
ভাই বালাভদ্র বসা

নাঙ্গালওয়াজকেও বলা হয়।
শিশু, পুরানো এবং সব

গান তাদের গায়।
রঙিন-লাল, নীল এবং সবুজ

এই উত্সব সুখ পূর্ণ।
দেবদাঁন রথটি আসে।

বোন সুভাষ বসু
পোশাক রঙ কালো লাল

দুই শত আট কিলোগ্রাম স্বর্ণ
সমস্ত তিনটি সজ্জিত করা হয়।

সুন্দর সুন্দর টেবিল
কেউ মূল্য মূল্যায়ন।

দৃশ্য মন মনে
এখন একটি আভাস দেখুন।

ধারণা ঠিক যে।

চলুন রথ যাত্রায় যাই।
প্রচুর পরিমাণে পুরির মানুষ

Rath Yatra Poem in English

Shukla Party Ashadh II
Rath Yatra festival unique

Let’s go in the Rath Yatra.
People in Puri in large quantities

From the temple of Jagannath
Brother Sister from that beautiful

Jagannath, Balabhadra Hai He
Sister in Subhadra Sang

Outside the main temple
The chariots are standing all three.

Sixteen wheels in Krishna’s chariot
Fourteen are in the chariot of Balabhadra.
Twelve wheels in sister’s chariot

Drag the chariot
Sit not tired of

Aunt will go home.
The temple (Gundicha) will come.

Spend nine days there.
The return will come again.

Bahadra Jatra is its name.
Listen to the name of Krishna’s chariot now.

Nandighosa, Kapilagwaja
Garuda swavja is also called.

Red color and yellow color
Beautify a lot.

Tandhwaja Ratha Sundar Sundar
Brother Balabhadra sitting up

Nangalwajja is also called.
Children, old and all

The songs sing them.
Colored-red, blue and green

This festival is full of happiness.
Devadhan Chariot comes.

Sister Subhadra is sitting.
Clothing color black-red

Two hundred and eight kilos of gold.
All three are decorated.

Pretty picturesque tableaux
No one evaluated the price.

The scene pleases the mind.
Now get a glimpse.

The idea is just that.

Let’s go in the chariot journey.
People in Puri in large quantities

Poem on Rath Yatra in Odia

उसके हाथ में
कोई हथियार नहीं था
उसका चेहरा बड़ा भव्य था
वह खुली जीप में आया था

उसके आगे पीछे
लम्बा चौड़ा काफ़िला था वाहनों का
माथे पर पट्टियाँ बांधे
जोश में नारे लगाती
अनुयायियों की
उन्मादी भीड़ थी
उसके चारों ओर

वह रौंदता जा रहा था
मेहनतकशों की बनायी
उम्मीदों की सड़क

उसके आने से पहले ही
लोग दुबक चुके थे घरों में
किसी अनिष्ट की आशंका से
बंद हो गए थे बाज़ार
फैला हुआ था सन्नाटा चारों ओर
कोई नहीं देख रहा था
उसकी सवारी
अनुयायियों की उन्मादी भीड़ के सिवा

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