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महिला दिवस पर कविता – Poem on International Womens Day in Hindi – Mahila Diwas Kavita

वूमेन डे 2018: आज के समय में हर वर्ग में और हर क्षेत्र में महिलाए पुरुषो के साथ कन्धा मिलते हुए चल रही हैं| जितना वजूद पुरुषो का हैं उतना ही महिलाओ का भी हैं| हर साल 8 मार्च को विश्व महिला दिवस मनाया जाता हैं जिसमे महिलाओ को संमान दिया जाता हैं| इस पर्व की शुरुवात 1904 में यु.अस.ए के न्यू यॉर्क शहर में की गई थी| इसके बाद धीरे धीरे यह पर्व पूरे विश्व में मनाया जाने लगा| इस पर्व के उपलक्ष में हम आपके लिए महिला दिवस पर विशेष लेख, नारी पर कविता, नारी सशक्तिकरण पर कविता, विश्व महिला दिवस पर कविता, नारी शक्ति पर कविता, महिलाओं पर कविताएं, महिला अत्याचार पर कविता, हिंदी कविता फॉर वूमेन डे और स्त्री का महत्व कविता इन हिंदी, गुजरती, मराठी, बंगाली, उर्दू, तमिल, और तेलगु में लाए हैं जिसको आप अपने निबंध या भाषण में इस्तेमाल कर सकते हैं या अपने दोस्तों को शेयर कर सकते हैं|

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता

अक्सर यह पुछा जाता है की अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस कब मनाया जाता है व भारतीय महिला दिवस कब मनाया जाता है? तो हम आपको बता दें महिला दिन 8 मार्च 2018 को भारत में मनाया जाएगा|महिला सशक्तिकरण के इस महान दिवस पर आप महिला दिवस पर शायरी भी देख सकते है| अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता इस प्रकार हैं:

नारी का गुणगान ना आँको भैया
नारी तो बस नारी है।

अनंत काल से आज तक
नारी ही रही है
जिसने हर
कठिन समय में भी
कंधे से कंधा मिला
दिया पुरुषों का साथ।

फिर भी पुरुषप्रधान
इस देश में ना
मिल सका
नारी को मान…
नारी तो बस नारी है।

प्यार और दुलार की मूर्ति नारी
ममता की मूर्ति है न्यारी
बच्चों से लेकर बूढ़ों तक
सभी को सँवारती है
यह नारी।

कभी सास तो कभी बहू
कभी बेटी तो कभी माँ
बनकर हर उम्मीद पर
खरी उतरती है नारी।

नारी तो बस नारी है
उसकी महिमा जो
समझ जाएँ
वह इस दुनिया से तर जाएँ

नारी का सम्मान करो
उसे भी उड़ने दो
गगन में अपनी स्वतंत्रता से
और फिर देखो
नारी का असली रूप

जो कभी दुर्गा, तो कभी सरस्वती
कभी लक्ष्मीबाई तो कभी कालका
का रूप दिखाकर
जग को न्याय का उचित
रास्ता दिखलाती है नारी

नारी तो बस नारी है
नारी तो बस नारी है।

महिला दिवस पर हिन्दी कविता

वीमेन डे पर हिंदी एस्से के साथ ही आप महिला दिवस पर निबंध भी देख सकते हैं:

महिला दिवस पर हास्य कविता

शक्ति जो दुनिया को आप में दिखाई देती है,
मेरी नजर से देखें तो मुझे आप में दिखाई देता है समर्पण,
समर्पण प्यार का, समर्पण दुलार का, समर्पण सेवा का,
करुणा, दया, संरक्षण, परवाह, सादगी दूजे नाम हैं आपके,
आपका स्पर्श जीवन में विश्वास जगाता है,
मन को चंदन और कर्म को पानी बनाता है,
आपका वेग तपते मन को ठंडी बौछारों से भिगोता है,

कठिन राह से थकी रगों में नया रक्त दौड़ने लगता है,
अंधेरों में सिमटी जिंदगियों को आप योद्धा बनाते हैं,
नई राहें दिखाते हैं, सींचते हैं, निखारते हैं,
हम ऋणी हैं आपके प्यार के,
हम कर्जदार हैं आपके दुलार के,
हम आभारी हैं आपके समर्पण के,
आज नारी शक्ति का दिन है,
धन्यवाद है हर नारी का इस संसार में,

हर रूप में मां, बहन, बेटी, पत्नी, सखा, प्रेमिका, शिक्षिका और कई-कई रूप,
नारी जो स्वच्छ बहता पानी है, जो हर रूप में, हर स्थिति में ढल जाती है,
जिसके बिना जीवन अधूरा है, प्यासा है,
नारी जिससे यह सृष्टि तृप्त होती है, जो जीवन आधार है,
संसार में भगवान का भेजा हुआ साक्षात रूप है नारी,
प्रकृति का दूजा नाम जिसे देवों ने भी सर्वस्व स्थान दिया है,
शक्ति का मान, नारी क्यों आज तरसे है अपने ही सम्मान को?

स्वयं को पहचान, तुझ में शक्ति अपार है,
स्वयं को नमन कर और आगे बढ़ चल,
ठोकर मार उसे जो तेरा सम्मान करना न जाने,
बढ़ चल, बढ़ चल, नई राहें तेरा रस्ता तके हैं,
तेरे आंचल में हैं अपार खुशियां

Poem on International Womens Day in Hindi

महिला दिवस के उपलक्ष में पोएम, poems in hindi language & hindi font इस प्रकार हैं|

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर कविता

नारी सशक्तिकरण के नारों से,गूंज उठी है वसुंधरा,
संगोष्ठी, परिचर्चाएं सुन-सुन, अंतर्मन ये पूछ पड़ा।

वेद, पुराण, ग्रंथ सभी, नारी की महिमा दोहराते,
कोख में कन्या आ जाए, क्यूं उसकी हत्या करवाते?
कूड़े, करकट के ढेरों में, कुत्तों के मुंह से नुचवाते,
बेटे की आस में प्रतिवर्ष,बेटियां घरों में जनवाते ।

कोख जो सूनी रह जाए ,अनाथाश्रमों की फेरी लगाते,
गोद में बालक ले लेते,बालिका को हैं ठुकराते।

गुरुद्वारे, मंदिर, गिरजे, मस्जिद, जा-जा नित शीश नवाते,
पुत्र-रत्न पाने की चाहत,ईश्वर को भी भेंट चढ़ाते।

चांदी के सिक्कों के प्रलोभी, दहेज की बलि चढ़ा देते,
पदोन्नति की खातिर, सीढ़ी इसे बना लेते।

मनचले, वाणी के तीरों से, सीना छलनी कर देते,
वहशी, दरिंदे, पशु,असुर, क्यूं हवस अपनी बुझा लेते।

सरस्वती, लक्ष्मी, शीतला, नारी दुर्गा भी बन जाए,
मनमोहिनी, गणगौर सी,काली का रूप भी दिखलाए।

शक्ति को ना ललकारो, इसको नारी ही रहने दो,
करुणा, ममता की सरिता ये,कल-कल शीतल ही बहने दो ।

महिला दिवस पर कविताएँ

फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी
अपनो की हिफासत मे सबसे अव्वल नारी
दुखो को दूर कर, खूशियो को समेठे नारी
फिर लोग क्यो कहते तेरा अत्सित्व क्या नारी
जब अपने छोटे छोटे व्खाइशो को जीने लगती नारी
दुनिया दिखाती है उसे उसकी दायरे सारी
अपने धरम मे बन्धी नारी, अपने करम मे बन्धी नारी
अपनो की खूशी के लिये खुद के सपने करती कुुरबान नारी
जब भी सब्र का बाण टूटे तो सब पर भारी नारी
फूल जैसी कोमल नारी, कांटो जितनी कठोर नारी.

नारी सशक्तिकरण पर कविता

महिला दिवस पर हिन्दी कविता

माँ तू क्यों कभी थकती नही?
क्यों तू कभी अपने कर्मो से बचती नही?
तेरी थकान की पीड़ा,
क्यों मुझे होती है।
क्यों ऐसे बलिदान की शक्ति,
सिर्फ तुझ मे होती है।
संघर्ष तो हम सब भी करते है,
क्यों इतने काम के बावजूद भी,
हम तुझसे और उम्मीद करते है।
क्या इसलिए?
क्यूंकि तूने कभी किसी से कुछ कहा नही।
मानली हमेशा अपनो की बात,
जैसे होगा बस वही सही।

Mahila Diwas Par Kavita In Marathi – महिला दिन मराठी कविता

आई, तू कधी थकून का नाही?
का तू कधी आपल्या कृत्यातून पळून जात नाही?
आपल्या थकवा वेदना,
मला का करा
बलिदानाची शक्ती,
हे फक्त तुमच्यातच घडते.
आम्ही सर्व संघर्ष,
इतके सारे काम न करता,
आम्ही आपल्याकडून आणखी अपेक्षा करतो
असे का?
कारण आपण कधीही कोणालाही म्हणत नाही.
मनाली नेहमीच आपल्याबद्दल बोलत आहे,
त्यासारखेच एक योग्य असेल.

महिला दिवस पर हास्य कविता

ये किसने कहा की,
नारी कमज़ोर है।
आज भी उसके हाथ में,
अपने घर को चलाने की डोर है।
वो तो दफ्तर भी जाए,
घर भी संभाले।
ऐसे हाल में भी कर दे,
पति अपने बच्चो को भी उसके हवाले।
एक बार उस नारी की ज़िंदगी जीके तो देख,
अपने मर्द होने के घमंड,
में तू बस यू बड़ी बड़ी ना फेक.।
अब हौसला बन तू उस नारी का,
जिसने ज़ुल्म सहके भी तेरा साथ दिया।
तेरी ज़िम्मेदारियों का बोझ भी,
ख़ुशी से तेरे संग बाट लिया।
चाहती तो वो भी कह देती,
मुझसे नहीं होता।
उसके ऐसे कहने पर,
फिर तू ही अपने बोझ के तले रोता।
आज नारी शक्ति का दिन है।

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