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महाशिवरात्रि कब है 2022 ? महत्व, मुहूर्त, पूजाविधि व व्रत कथा – Maha Shivratri 2022 Date and Day

Contents1 महाशिवरात्रि कब है 20221.1 shivratri bank holiday or not 20221.2 शिवरात्रि मुहूर्त 2022 – shivratri shubh muhurat 2022 – महाशिवरात्रि कब है 20221.3 शिवयोग कब तक रहेगा? – shivratri muhurat 20222 shivratri timing 2022 in bengali3 महाशिवरात्रि कथा4 महाशिवरात्रि का महत्व5 महाशिवरात्रि पूजाविधि – shivratri pooja vidhi5.1 महाशिवरात्रि के टोटके6 शिवरात्रि के व्रत में […]

महाशिवरात्रि 2022 : भगवान शिव को समर्पित त्यौहार महाशिवरात्रि तापर मार्च माह में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाएगी , यह दिन 11 मार्च, गुरूवार को मनाया जाएगा| श्रद्धालुओं में महाशिवरात्रि की तारीख को लेकर असमंजस की स्तिथि है| लेकिन पंडितों के अनुसार 11 मार्च को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से 12 मार्च दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक शिवरात्रि का समय रहेगा | चतुर्दशी तिथि के लगते ही महाशिवरात्रि का पर्व चालू हो जाएगा यानी मंगलवार को भी आप महाशिवरात्रि व्रत रख सकते हैं| ज्योतिषाचार्य के अनुसार भी यह पूजा जो कि 4 प्रहर की है गुरूवार को ही संपन्न की जाएगी इसकी पूर्ण जानकारी हम आपको नीचे बता रहे हैं| आज हम आपको बताएंगे की maha shivratri kab ki hai, tomorrow shivratri timing व maha shivratri kab hai 2022 me.

महाशिवरात्रि कब है 2022

Maha shivratri 2022 date in India: ज्योतिषियों के अनुसार महाशिवरात्रि का यह पर्व इस बार दोनों दिन यानी कि 11 व 12 मार्च के दिन मनाया जाएगा| परंतु 1 मार्च को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट से चतुर्दशी तिथि लग जाएगी जो कि 2 मार्च दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगी| इसलिए श्रद्धालु 1 मार्च की दिनांक को व्रत रख सकते हैं वह शिवजी की पूजा व आराधना कर सकते हैं धर्म शास्त्रों के अनुसार चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का अत्यंत महत्व माना गया है| इस ख़ास दिन पर महाशिवरात्रि मंत्र का जाप अवश्य करें|

महाशिवरात्रि कथा

shivratri bank holiday or not 2022

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शिवरात्रि मुहूर्त 2022 – shivratri shubh muhurat 2022 – महाशिवरात्रि कब है 2022

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महा शिवरात्रि समय व तिथि, उज्जैन मध्य प्रदेश के अनुसार 

महा शिवरात्रि शुभ मुहूर्त:महाशिवरात्रि की जानकारी लेने के लिए आप महाशिवरात्रि पर निबंध की भी जानकारी ले सकते है| इस बार 1 मार्च के दिवस पर दोपहर में में 2 बजकर 40 मिनट से चतुर्दशी तिथि लगेगी जो मध्यरात्रि में भी रहेगी तथा 2 मार्च के दिवस को को दिन में 3 बजकर 3 मिनट पर यह समाप्त हो जाएगी। इसलिए 2 मार्च को उदय कालीन चतुर्थी होने पर भी 1 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। Mahashivratri puja time, व्रत एवं पूजा करने की पूर्ण जानकारी हम नीचे प्रदान कर रहे हैं:

शिवयोग कब तक रहेगा? – shivratri muhurat 2022

शिवयोग 1 मार्च के दिवस बार ज़्यादा समय के लिए नहीं रहेगा ऐसे में यह प्रातः 9 बजकर 24 मिनट पर ही समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही सिद्ध योग आरंभ हो जाएगा।

महाशिवरात्रि मुहूर्त ज्ञान – shivratri recipes – shivratri 2022 date and time in hindi

  • चतुर्दशी आरंभ 01 मार्च : 2 बजकर 40 मिनट
  • चतुर्दशी समाप्त 2 मार्च : 3 बजकर 3 मिनट
  • निशीथ काल 1 मार्च मध्य रात्रि के बाद 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक।
  • शिवयोग 1 मार्च सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक
  • सिद्ध योग 9 बजकर 25 मिनट से अगले दिन 8 बजकर 25 मिनट तक
  • धनिष्ठा नक्षत्र रात 9 बजकर 45 मिनट तक उपरांत शतभिषा नक्षत्र
  • पंचक आरंभ 1 मार्च सुबह 9 बजकर 21 मिनट से

shivratri timing 2022 in bengali

  • চতুর্দশী 1 মার্চ শুরু হয়: 2:40 pm
  • চতুর্দশী শেষ হবে মার্চ 12:3:3 মিনিটে
  • 1 মার্চ মধ্যরাতের পর 12.25 টা থেকে দুপুর 1:12 টা পর্যন্ত নিশীথ কাল।
  • শিব যোগ 1 মার্চ সকাল 9.24 টায়
  • সিদ্ধ যোগ সকাল 9.25 টা থেকে পরের দিন 8.25 টা পর্যন্ত
  • ধনিষ্ট নক্ষত্রের পর শতভিষা নক্ষত্র রাত ৯.৪৫ পর্যন্ত
  • 1 মার্চ সকাল 9.21 মিনিটে পঞ্চক শুরু হয়

महाशिवरात्रि पर पूजा का शुभ समय गृहस्थ और साधकों के लिए

  • महाशिवरात्रि के अवसर पर तंत्र, मंत्र साधना, तांत्रिक पूजा, रुद्राभिषेक करने के लिए 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक का समय श्रेष्ठ रहेगा।
  • सामान्य गृहस्थ को शुभ और मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह और संध्या काल में शिव की आराधना करनी चाहिए।
  • 2 बजककर 40 मिनट से चतुर्दशी लग जाने से दोपहर बाद शिवजी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।

महाशिवरात्रि कथा

महाशिवरात्रि व्रत कथा इस प्रकार है महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इस विषय में लोगों के विभिन्न मत है| कुछ ज्योतिषियों व पुराने पंडितों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शिव जी और माता पार्वती एक दूसरे के साथ विवाह सूत्र में बंध गए थे| जबकि कुछ लोगों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि शिव जी ने कालकूट नाम का इसी दिन विश किया था जो सागर मंथन के समय समुद्र से निकला था| समुद्र मंथन असुर व देवताओं ने अमर प्राप्ति के लिए करवाया था|

|महाशिवरात्रि व्रत कथा|

इससे संबंधित एक कहानी यह भी है कि एक शिकारी की इस त्यौहार से जुड़ी हुई पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उस पर असीम कृपा करी थी जिसे शिवपुराण में भी संकलित किया गया है| इस कथा के अनुसार एक बार की बात है माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ यानि कि शिव शंकर से पूछा कि ऐसा कौन सा सबसे सरल व आसान व्रत कथा है जिसे पढ़ने से मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा का आशीर्वाद आसानी से प्राप्त सकते हैं| इसके जवाब में शिवजी ने पार्वती मां को बताया कि शिवरात्रि का व्रत रखने से मेरी कृपा मेरे श्रद्धालुओं पर बनी रहती है| इसी से संबंधित महाशिवरात्रि की व्रत कथा शिवजी ने पार्वती मां को सुनाई जो कि एक शिकारी और हिरणी की कहानी है|

|| शिकारी और हिरनी की कहानी||

एक बार एक जंगल में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था वह पक्षियों का शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था| वह एक साहूकार का ऋणी था परंतु उस साहूकार का वह समय पर नहीं चुका सका था जिससे क्रोधित होकर साहूकार ने शिकारी को अपने यहाँ बंदी बना लिया| संयोग से उसी दिन शुभ रात्रि भी थी| ऐसा कहा जाता है कि शिकारी ने भोले बाबा कि सच्चे मन से पूजा अर्चना की व्रत रखा जिससे शिव जी ने प्रसन्न होकर अपनी कृपा उस पर बना दी और उसमें अपना ऋण भी चुका दिया|

महाशिवरात्रि के इस पर्व पर आप महाशिवरात्रि शायरीHappy Maha Shivratri Wishes in Hindi भी देख सकते हैं|

महाशिवरात्रि का महत्व

पुराणों के अनुसार हर चंद्रमा के 14 दिन पर अथवा हर महा पर होने वाली अमावस्या पर शिवरात्रि होती है, परंतु महाशिवरात्रि साल में सबसे महत्वपूर्ण होती है| महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और पार्वती जी के विवाह बंधन में बंधने की खुशी में मनाया जाता है| ऐसा कहा जाता है कि अगर सच्चे मन से इस दिन भोले बाबा को मनाया जाए तो वह आप की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं| जो लोग भगवान भोलेनाथ के सच्चे भक्त हैं वह इस त्यौहार का महत्व अच्छे से जानते हैं| ॐ नमः शिवाय

Maha shivratri 2018 date in India

महाशिवरात्रि पूजाविधि – shivratri pooja vidhi

mahashivratri pooja vidhi in hindi, shivratri ki puja vidhi व शिवरात्रि का व्रत कैसे खोलें ? इस प्रकार है:

अगर आप भी भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करना चाहते हैं तो हमारे द्वारा दी हुई पूजन विधि देखें|

  1. पूजन विधि करने से पहले सबसे पहले अच्छे से नहा धोकर शुद्ध आसन पर बैठकर अपना आचरण ग्रहण करें|
  2. फिर यज्ञोपवीत धारण करने के पश्चात शरीर को शुद्ध करें व साथ ही अपने आसन की भी शुद्धिकरण करें| पूजन सामग्री को उपयुक्त जगह पर रख कर दीप प्रज्वलित कर लें|
  3. इसके बाद आप स्वास्थ्य पाठ करना शुरू करें|
  4. हाथ में बिल्वपत्र व अक्षर लेकर भगवान शिव का ध्यान लगाएं भगवान शिव की आराधना करते हुए ओम नमः शिवाय बोल कर भगवान का जाप करें|
  5. इसके पश्चात आसन, दही स्नान, दही-स्नान, घी-स्नान व शहद-स्नान से भोलेनाथ की मूर्ति या तस्वीर का स्नान करवाएं|
  6. इसके बाद भगवान शिव को पंचामृत का स्नान करवाएं फिर सुगंध स्नान करने के बाद शुद्ध स्नान करवाएं|
  7. इसके पश्चात भोलेनाथ को वस्त्र व जनेऊ अर्पित करें|
  8. फिर सुगंधित इत्र व पुष्प माला चढ़ाएं विभिन्न प्रकार से पर चढ़ा कर दिया जलाएं और शिवजी का व्रत का भोग लगाएं अंत में फल-फूल दक्षिणा आदि चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की आराधना आरती करें|

महाशिवरात्रि के टोटके

हमारे द्वारा दिए हुए गए महाशिवरात्रि पर टोटके अपनाने से आप अपनी किस्मत चमका सकते हैं यह उपाय आपके लिए महाशिवरात्रि पर अत्यंत प्रभावी साबित हो सकते हैं:

  1. मन की शांति पाने के लिए: पानी में काले तिल को मिलाकर शिवलिंग का जल अभिषेक करें ओम नमः शिवाय का जाप करें इससे आपके मन को अत्यंत शांति प्राप्त होगी|
  2. अपना व्यापार व आमदनी बढ़ाने के लिए: अपने घर के मंदिर में शिवलिंग मूर्ति किसी ब्राह्मण से सलाह अनुसार लेकर स्थापना करें वह प्रतिदिन उनका पूजन करें यह आपकी आमदनी बढ़ाने में योग्य साबित होगी|
  3. संतान प्राप्ति के लिए: आटे की मदद से 11 शिवलिंग बनाए वह 11 बार इन ऑटो के शिवलिंग का जलाभिषेक करें महाशिवरात्रि पर यह उपाय अपनाने से आपकी संतान प्राप्ति के संभावनाएं बढ़ जाती हैं|
  4. जल्दी विवाह के लिए: शिवलिंग पर केसर युक्त दूध चढ़ाकर उनका दुग्ध अभिषेक करने से आपके विवाह के नक्षत्र जल्दी बनते हैं|
  5. धन प्राप्ति के लिए: आटे से बने हुए गोलियां मछली को खिलाएं इस समय भगवान शिव की आराधना करके ॐ नमः शिवाय का जाप करें|

शिवरात्रि के व्रत में क्या खाया जाता है

शिवरात्रि के पावन त्यौहार पर सुबह के समय फलाहार करना सही रहता है। फलाहार में आप सेब, संतरा, खीरा, बेर, पपीता आदि का सेवन कर सकते हैं| महाशिवरात्रि के व्रत में सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।

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