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महाशिवरात्रि पर निबंध 2018 – Essay on Mahashivratri in Hindi – Maha Shivaratri Nibandh PDF download

महाशिवरात्रि 2018: महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है जो कि 13 फरवरी 2018 को पूरे भारत में मनाया जाएगा| यह त्योहार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पूरे उत्तर भारत वापस भारत में भी मनाया जाएगा| महाशिवरात्रि का महत्व है क्योंकि इस दिन भगवान भोलेनाथ व पार्वती मां का विवाह हुआ था| अक्सर स्कूल में पढने वाले छात्रों को कहा जाता है – महाशिवरात्रि पर निबंध लिखिए, माह शिवरात्रि निबंध हिंदी में व maha Shivaratri nibandh in hindi pdf. इसलिए आज हम आपके सामने पेश कर रहे हैं महाशिवरात्रि पर हिंदी एस्से यानी essay on mahashivaratri in hindi & english.

महाशिवरात्रि पर हिन्दी निबंध

Mahshivartri par nibandh in hindi इस प्रकार हैं:

हमारा देश भारत त्योहारों का देश है | यहाँ होली, दिवाली, दशहरा, पोंगल, महाशिवरात्रि, क्रिसमस, ईद इत्यादि अनेक त्योहार मनाए जाते हैं | हम लोग यह सारे त्योहार धूमधाम से मनाते हैं | जैसा कि आप जानते हैं इस वर्ष 24 फरवरी को महाशिवरात्रि पड़ रही है | हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से यह त्योहार प्रतिवर्ष फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को अर्थात अमावस्या से एक दिन पहले वाली रात को मनाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि को भगवान शंकर रूद्र के रूप में प्रजापिता ब्रह्मा के शरीर से प्रकट हुए थे और इसी महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) को भगवान शिव तांडव नृत्य करते हुए इस सृष्टि को अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से भष्म कर देंगे | कई स्थानों पर यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह हुआ था | इन सब कारणों से महाशिवरात्रि की रात हिंदू धर्मग्रंथों में अतिमहत्त्वपूर्ण है |

महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिवमंदिर में कतारें लग जाती हैं | लोग जल से तथा दूध से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं | जहाँ तक हो सके लोग गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराते हैं | कुछ लोग दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से भी स्नान कराते हैं | फिर उन पर चंदन लगाकर उन्हें फूल, बेल के पत्ते अर्पित किये जाते हैं | धूप और दीप से भगवान शिव का पूजन किया जाता है | भगवान शिव को बेल के पत्ते अतिप्रिय है | इसलिए लोग उन्हें बेलपत्र अर्पण करते हैं | महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) को रात्री जागरण का भी विधान है | लोग शिवमंदिरों में अथवा घरों में पूरी-पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं | कई लोग इस दिन शरीर और मन को पवित्र करने के लिए उपवास भी रखते हैं | कुछ लोग निर्जल रहकर भी उपवास करते हैं | कई जगह भगवान शिव की बारात भी निकाली जाती है |

महाशिवरात्रि से संबंधित कई पौराणिक कथाएँ भी हैं जो बहुत प्रेरणादाई हैं | ऐसी ही एक कथा में चित्रभानु नामक एक शिकारी का उल्लेख मिलता है | चित्रभानु को महाशिवरात्रि के व्रत का कोई ज्ञान नहीं था | वह जंगल के जानवरों को मारकर अपना जीवन यापन करता था | एक बार महाशिवरात्रि के दिन अनजाने में उसे शिवकथा सुनने मिली | शिवकथा सुनने के बाद वह शिकार की खोज में जंगल गया | वहाँ शिकार का इंतज़ार करते-करते वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर घास के ढेर के नीचे ढँके हुए शिवलिंग पर फेंकता जाता | उसके इस कर्म से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसका ह्रदय निर्मल बना देते हैं | उसके मन से हिंसा के विचार नष्ट जाते हैं | वह जंगल शिकार करने गया था किंतु एक के बाद एक ४ हिरणों को जीवनदान देता है | उस दिन के बाद से चित्रभानु शिकारी का जीवन छोड़ देता है |

इस कहानी से हमें भगवान शिव की दयालुता का परिचय मिलता है | वे अनजाने में की हुई पूजा का भी फल प्रदान करते हैं | एक हिंसक शिकारी का ह्रदय करुणामय बना देते हैं | इस तरह महाशिवरात्रि ( Essay on Mahashivratri in Hindi ) का त्योहार प्राणिमात्र के प्रति दया और करुणा का संदेश भी देता है | धार्मिक ग्रंथों में ऐसा विधान है कि भगवान शिव की पूजा करने से सारे सांसारिक मनोरथ पूरे हो जाते हैं | नीति-नियम से न हो सके तो साधारण तरीके से पूजा करने पर या सिर्फ उन्हें स्मरण कर लेने पर भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं |

हमारे देश का हर त्योहार हमें इकट्ठा होनें, खुशियाँ बाँटने, और समाज के हित में कुछ करने का मौका देता है | हमें चाहिए कि महाशिवरात्रि के दिन भी हम समाज के हित के लिए अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ अवश्य करे | कई संस्थाएँ इस दिन रक्तदान शिविर का आयोजन करती हैं | तो कई दूसरी संस्थाएँ मुफ्त में भोजन वितरण का प्रबंध करती हैं | कई लोग गरीबों को दान देते हैं | परहित में किये गए यह सारे कर्म, हमें भगवान के ज्यादा करीब ले जाते हैं | हमें भी भगवान शिव से प्रार्थना करनी चाहिए जिस तरह उन्होंने शिकारी चित्रभानु के ह्रदय को निर्मल और पवित्र किया, हमारे ह्रदय को भी उसी तरह निर्मल और पवित्र करे |

Essay on Mahashivratri in Hindi

Essay on Mahashivratri in Hindi

महाशिवरात्र‍ि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाशिवरात्र‍ि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं।

महाशिवरात्र‍ि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रम्हा के रूद्र रूप में मध्यरात्र‍ि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रम्हांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था।

वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्र‍ि होती है, परंतु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्र‍ि का अत्यंत महत्व है, इसलिए इसे महाशिवरात्र‍ि कहा जाता है। वास्तव में महाशिवरात्र‍ि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानती है।

महाशिवरात्रि पर निबंध इन हिंदी (100 words)

यहाँ Mahashivartri day essay in Hindi language स्टूडेंट्स के लिए 100, 150, 250, 350, 400 व 450 words (शब्दों) में देख व pdf डाउनलोड कर सकते हैं| साथ ही class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चे इन्हे अपने स्कूल फंक्शन celebration व प्रोग्राम में सुना सकते हैं|

महा शिवरात्रि हिन्दुओ के प्रमुख त्योहारों में से एक हैं| इस दिन पारवती माता और भोलेनाथ का विवाह हुआ था| महाशिवरात्र‍ि के दिन शिव जी का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है और बिल्वपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर, उम्बी आदि अर्पित किया जाता है। भगवान शिव को भांग बेहद प्रिय है अत: कई लोग उन्हें भांग भी चढ़ाते हैं। दिनभर उपवास रखकर पूजन करने के बाद शाम के समय फलाहार किया जाता है।

Maha Shivaratri Nibandh in Hindi

महाशिवरात्रि कथा

महाशिवरात्रि व्रत कथा इस प्रकार है महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है इस विषय में लोगों के विभिन्न मत है| कुछ ज्योतिषियों व पुराने पंडितों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इस दिन शिव जी और माता पार्वती एक दूसरे के साथ विवाह सूत्र में बंध गए थे| जबकि कुछ लोगों के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि शिव जी ने कालकूट नाम का इसी दिन विश किया था जो सागर मंथन के समय समुद्र से निकला था| समुद्र मंथन असुर व देवताओं ने अमर प्राप्ति के लिए करवाया था|

 |महाशिवरात्रि व्रत कथा|

इससे संबंधित एक कहानी यह भी है कि एक शिकारी की इस त्यौहार से जुड़ी हुई पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उस पर असीम कृपा करी थी जिसे शिवपुराण में भी संकलित किया गया है| इस कथा के अनुसार एक बार की बात है माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ यानि कि शिव शंकर से पूछा कि ऐसा कौन सा सबसे सरल व आसान व्रत कथा है जिसे पढ़ने से मृत्युलोक के प्राणी आपकी कृपा का आशीर्वाद आसानी से प्राप्त सकते हैं| इसके जवाब में शिवजी ने पार्वती मां को बताया कि शिवरात्रि का व्रत रखने से मेरी कृपा मेरे श्रद्धालुओं पर बनी रहती है| इसी से संबंधित महाशिवरात्रि की व्रत कथा शिवजी ने पार्वती मां को सुनाई जो कि एक शिकारी और हिरणी की कहानी है|

|| शिकारी और हिरनी की कहानी||

एक बार एक जंगल में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था वह पक्षियों का शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था| वह एक साहूकार का ऋणी था परंतु उस साहूकार का वह समय पर नहीं चुका सका था जिससे क्रोधित होकर साहूकार ने शिकारी को अपने यहाँ बंदी बना लिया| संयोग से उसी दिन शुभ रात्रि भी थी| ऐसा कहा जाता है कि शिकारी ने भोले बाबा कि सच्चे मन से पूजा अर्चना की व्रत रखा जिससे शिव जी ने प्रसन्न होकर अपनी कृपा उस पर बना दी और उसमें अपना ऋण भी चुका दिया|

महाशिवरात्रि के इस पर्व पर आप महाशिवरात्रि शायरी व Maha Shivratri ki shubhkamnaye भी देख सकते हैं|

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