मदर टेरेसा पर निबंध 2018 – Mother Teresa Essay in Hindi, English & Marathi Nibandh Pdf Download

Mother Teresa Essay in Hindi

मदर टेरेसा एक महान व्यक्तित्व थी जिन्होंने गरीबों की सेवा करने में अपना पूरा जीवन बिता दिया। वह अपने महान कार्यों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। वह हमेशा हमारे दिल में जिंदा रहेंगी क्योकि वे पूरे भारतवासियो की मां की तरह ही थी। वे पूरे विश्व की हमान व्यक्तित्व की महिलाओ में से एक थी जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीब और लाचार मनुष्यो की सेवा में व्यतीत कर दिया| कुछ लोगो का यह भी मानना है की वे भगवान की भेजी हुई अवतार थी जिन्हे इस धरती पर लोगो की सहायता करने के लिए भेजा गया था| उन्होंने अपने सकारात्मक विचारो से बहुत से लोगो को प्रेरणा थी |आज के इस पोस्ट में हम आपको long essay on mother teresa, mother teresa essay pdf, 10 lines on mother teresa in english, मदर टेरेसा पर निबंध हिंदी में, short paragraph on mother teresa, contribution of mother teresa essay, essay on mother teresa in 500 words, article on mother teresa, आदि की जानकारी देंगे| ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है

Mother Teresa Essay in Hindi

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मदर टेरेसा एक बहुत ही धार्मिक और प्रसिद्ध महिला थी जो “गटरों की संत” के रुप में भी जानी जाती थी। वो पूरी दुनिया की एक महान शख्सियत थी। भारतीय समाज के जरुरतमंद और गरीब लोगों के लिये पूरी निष्ठा और प्यार के परोपकारी सेवा को उपलब्ध कराने के द्वारा एक सच्ची माँ के रुप में हमारे सामने अपने पूरे जीवन को प्रदर्शित किया। उन्हें “हमारे समय की संत” या “फरिश्ता” या “अंधेरे की दुनिया में एक प्रकाश” के रुप में भी जनसाधारण द्वारा जाना जाता है। मानव जाति की उत्कृष्ट सेवा के लिये उन्हें सितंबर 2016 में ‘संत’ की उपाधि से नवाजा जाएगा जिसकी आधिकारिक पुष्टि वेटिकन से हो गई है।

उनका जन्म के समय अग्नेसे गोंकशे बोज़ाशियु नाम था जो बाद में अपने महान कार्यों और जीवन की उपलब्धियों के बाद मदर टेरेसा के रुप में प्रसिद्ध हुयी। एक धार्मिक कैथोलिक परिवार में मेसेडोनिया के सोप्जे में 26 अगस्त 1910 को उनका जन्म हुआ था। अपने शुरुआती समय में मदर टेरेसा ने नन बनने का फैसला कर लिया था। 1928 में वो एक आश्रम से जुड़ गयी और उसके बाद भारत आयीं (दार्जिलिंग और उसके बाद कोलकाता)।

एक बार, वो अपने किसी दौरे से लौट रही थी, वो स्तंभित हो गयी और उनका दिल टूट गया जब उन्होंने कोलकाता के एक झोपड़-पट्टी के लोगों का दुख देखा। उस घटना ने उन्हें बहुत विचलित कर दिया था और इससे कई रातों तक वो सो नहीं पाई थीं। उन्होंने झोपड़-पट्टी में दुख झेल रहे लोगों को सुखी करने के तरीकों के बारे में सोचना शुरु कर दिया। अपने सामाजिक प्रतिबंधों के बारे में उन्हें अच्छे से पता था इसलिये सही पथ-प्रदर्शन और दिशा के लिये वो ईश्वर से प्रार्थना करने लगी।

10 सितंबर 1937 को दार्जिलिंग जाने के रास्ते पर ईश्वर से मदर टेरेसा को एक संदेश (आश्रम छोड़ने के लिये और जरुरतमंद लोगों की मदद करें) मिला था। उसके बाद उन्होंने कभी-भी पीछे मुड़ के नहीं देखा और गरीब लोगों की मदद करने की शुरुआत कर दी। एक साधारण नीले बाडर्र वाली सफेद साड़ी को पहनने के लिये को उन्होंने चुना। जल्द ही, निर्धन समुदाय के पीड़ित व्यक्तियों के लिये एक दयालु मदद को उपलब्ध कराने के लिये युवा लड़कियाँ उनके समूह से जुड़ने लगी। मदर टेरेसा सिस्टर्स की एक समर्पित समूह बनाने की योजना बना रही थी जो किसी भी परिस्थिति में गरीबों की सेवा के लिये हमेशा तैयार रहेगा। समर्पित सिस्टरों के समूह को बाद में “मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी” के रुप में जाना गया।

Mother Teresa in Hindi Essay

Mother Teresa in Hindi Essay

मदर टेरेसा एक महान महिला थी जिनको हमेशा उनके अद्भुत कार्यों और उपलब्धियों के लिये पूरे विश्वभर के लोगों द्वारा प्रशंसा और सम्मान दिया जाता है। वो एक ऐसी महिला थी जिन्होंने उनके जीवन में असंभव कार्य करने के लिये बहुत सारे लोगों को प्रेरित किया है। वो हमेशा हम सभी के लिये प्रेरणास्रोत रहेंगी। महान मनावता लिये हुए ये दुनिया अच्छे लोगों से भरी हुयी है लेकिन हरेक को आगे बढ़ने के लिये एक प्रेरणा की जरुरत होती है। मदर टेरेसा एक अनोखी इंसान थी जो भीड़ से अलग खड़ी दिखाई देती थी।

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को मेसेडोनिया गणराज्य के सोप्जे में हुआ था। जन्म के बाद उनका वास्तविक नाम अग्नेसे गोंकशे बोजाशियु था लेकिन अपने महान कार्यों और जीवन में मिली उपलब्धियों के बाद विश्व उन्हें एक नये नाम मदर टेरेसा के रुप में जानने लगा। उन्होंने एक माँ की तरह अपना सारा जीवन गरीब और बीमार लोगों की सेवा में लगा दिया। वो अपने माता-पिता की सबसे छोटी संतान थी। वो अपने माता-पिता के दान-परोपकार से अत्यधिक प्रेरित थी जो हमेशा समाज में जरुरतमंद लोगों की सहायता करते थे।

उनकी माँ एक साधारण गृहिणी थी जबकि पिता एक व्यापारी थे। राजनीति में जुड़ने के कारण उनके पिता की मृत्यु के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। ऐसी स्थिति में, उनके परिवार के जीवनयापन के लिये चर्च बहुत ही महत्वपूर्ण बना। 18 वर्ष की उम्र में उनको महसूस हुआ कि धार्मिक जीवन की ओर से उनके लिये बुलावा आया है और उसके बाद उन्होंने डुबलिन के लौरेटो सिस्टर से जुड़ गयी। इस तरह से गरीब लोगों की मदद के लिये उन्होंने अपने धार्मिक जीवन की शुरुआत की। मानव जाति की उत्कृष्ट सेवा के लिये उन्हें सितंबर 2016 में ‘संत’ की उपाधि से नवाजा जाएगा जिसकी आधिकारिक पुष्टि वेटिकन से हो गई है।

मदर टेरेसा निबंध

मदर टेरेसा एक महान व्यक्तित्व थी जिन्होंने अपना सारा जीवन गरीबों की सेवा में लगा दिया। वो पूरी दुनिया में अपने अच्छे कार्यों के लिये प्रसिद्ध हैं। वो हमारे दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी क्योंकि वो एक सच्ची माँ की तरह थीं। वो एक महान किंवदंती थी तथा हमारे समय की सहानुभूति और सेवा की प्रतीक के रुप में पहचानी जाती हैं। वो एक नीले बाडर्र वाली सफेद साड़ी पहनना पसंद करती थीं। वो हमेशा खुद को ईश्वर की समर्पित सेवक मानती थी जिसको धरती पर झोपड़-पट्टी समाज के गरीब, असहाय और पीड़ित लोगों की सेवा के लिये भेजा गया था। उनके चेहरे पर हमेशा एक उदार मुस्कुराहट रहती थी।

उनका जन्म मेसेडोनिया गणराज्य के सोप्जे में 26 अगस्त 1910 में हुआ था और अग्नेसे ओंकशे बोजाशियु के रुप में उनके अभिवावकों के द्वारा जन्म के समय उनका नाम रखा गया था। वो अपने माता-पिता की सबसे छोटी संतान थी। कम उम्र में उनके पिता की मृत्यु के बाद बुरी आर्थिक स्थिति के खिलाफ उनके पूरे परिवार ने बहुत संघर्ष किया था। उन्होंने चर्च में चैरिटी के कार्यों में अपने माँ की मदद करनी शुरु कर दी थी। वो ईश्वर पर गहरी आस्था, विश्वास और भरोसा रखनो वाली महिला थी। मदर टेरेसा अपने शुरुआती जीवन से ही अपने जीवन में पायी और खोयी सभी चीजों के लिये ईश्वर का धन्यवाद करती थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने नन बनने का फैसला कर लिया और जल्द ही आयरलैंड में लैरेटो ऑफ नन से जुड़ गयी। अपने बाद के जीवन में उन्होंने भारत में शिक्षा के क्षेत्र में एक शिक्षक के रुप में कई वर्षों तक सेवा की।

दार्जिलिंग के नवशिक्षित लौरेटो में एक आरंभक के रुप में उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत की जहाँ मदर टेरेसा ने अंग्रेजी और बंगाली (भारतीय भाषा के रुप में) का चयन सीखने के लिये किया इस वजह से उन्हें बंगाली टेरेसा भी कहा जाता है। दुबारा वो कोलकाता लौटी जहाँ भूगोल की शिक्षिका के रुप में सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाया। एक बार, जब वो अपने रास्ते में थी, उन्होंने मोतीझील झोपड़-पट्टी में रहने वाले लोगों की बुरी स्थिति पर ध्यान दिया। ट्रेन के द्वारा दार्जिलिंग के उनके रास्ते में ईश्वर से उन्हें एक संदेश मिला, कि जरुरतमंद लोगों की मदद करो। जल्द ही, उन्होंने आश्रम को छोड़ा और उस झोपड़-पट्टी के गरीब लोगों की मदद करनी शुरु कर दी। एक यूरोपियन महिला होने के बावजूद, वो एक हमेशा बेहद सस्ती साड़ी पहनती थी।

अपने शिक्षिका जीवन के शुरुआती समय में, उन्होंने कुछ गरीब बच्चों को इकट्ठा किया और एक छड़ी से जमीन पर बंगाली अक्षर लिखने की शुरुआत की। जल्द ही उन्हें अपनी महान सेवा के लिये कुछ शिक्षकों द्वारा प्रोत्साहित किया जाने लगा और उन्हें एक ब्लैकबोर्ड और कुर्सी उपलब्ध करायी गयी। जल्द ही, स्कूल एक सच्चाई बन गई। बाद में, एक चिकित्सालय और एक शांतिपूर्ण घर की स्थापना की जहाँ गरीब अपना इलाज करा सकें और रह सकें। अपने महान कार्यों के लिये जल्द ही वो गरीबों के बीच में मसीहा के रुप में प्रसिद्ध हो गयीं। मानव जाति की उत्कृष्ट सेवा के लिये उन्हें सितंबर 2016 में संत की उपाधि से नवाजा जाएगा जिसकी आधिकारिक पुष्टि वेटिकन से हो गई है।

Mother Teresa Par Nibandh in Hindi

दया की देवी, दीन हीनों की माँ तथा मानवता की मूर्ति मदर टेरेसा एक ऐसी सन्त महिला थीं जिनके माध्यम से हम ईश्वरीय प्रकाश को देख सकते थे । उन्होंने अपना जीवन तिरस्कृत, असहाय, पीड़ित, निर्धन तथा कमजोर लोगों की सेवा में बिता दिया था ।

वह संगठन जो उन्होंने अब से तीस वर्ष पहले अपने सहयोगी भाई बहनों की सहायता से गरीबों की भलाई के लिए नि: शुल्क शुरू किया था आज एक विश्वव्यापी संगठन बन चुका है । नोबल प्राइज फाउन्डेशन ने 1979 में मदर टेरेसा को विश्व के सर्वोच्च पुरस्कार नोबल पुरस्कार से पुरस्कृत किया था । यह पुरस्कार शान्ति के लिए उनकी प्रवीणता के लिए दिया गया था ।

मदर टेरेसा का जन्म 1910 में युगोस्लाविया में हुआ था । 12 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने ‘ नन ‘ बनने का फैसला किया और 18 वर्ष की आयु में कलकत्ता में ‘ आइरेश नौरेटो नन ‘ मिशनरी में शामिल होने का निर्णय लिया । प्रतिज्ञा लेने के बाद वह सेंट मैरी हाईस्कूल कलकत्ता में अध्यापिका बन गयीं ।

बीस साल तक अध्यापक के पद पर तथा प्रधान अध्यापक पद पर तथा प्रधान अध्यापक पद पर उन्होंने ईमानदारीपूर्वक कार्य किया । लेकिन उनका मन कहीं और था । कलकत्ता के झोपड़पट्टी में रहने वाले लोगों की पीड़ा और दर्द ने उन्हें बैचेन सा कर दिया । 10, सितम्बर 1946 की अपनी अर्न्तआत्मा की आवाज को सुनने के बाद उन्होंने कॉन्वेंट को छोड़ दिया और अति निर्धन लोगों के लिए सेवा कार्य करने का निर्णय किया ।

उन्होंने पटना के अन्दर नर्सिग का प्रशिक्षण लिया और कलकत्ता की गलियों में घूम-घूम कर दया और प्रेम का मिशन प्रारम्भ किया । वह कमजोर त्यागे हुए और मरते हुए लोगों को सहारा देती थीं । उन्होंने कलकत्ता निगम से एक जमीन का टुकड़ा माँगा और उस पर एक धर्मशाला स्थापित की । इस छोटी सी शुरूआत के बाद उन्होंने जो प्रगति की वह अपने आप में महत्त्वपूर्ण थी । उन्होंने 98 स्कूटर, 425 मोबाइल डिस्पेंसरीज, 102 कुष्ठ रोगी, दवाखाना और 48 अनाथालय और 62 ऐसे गृह बनाये जिसमें दरिद्र लोग रह सकें ।

मदर टेरेसा एक त्याग की मूर्ति थीं । वह जिस घर में रहती थीं वहाँ वह नंगे पैर चलती थीं और वहाँ भी वह एक छोटे से कमरे में रहती थीं और अतिथियों से मिला करती थीं । उस कमरे में केवल एक मेज और कुछ कुर्सियाँ होती थीं । मदर टेरेसा प्रत्येक व्यक्ति से मिला करती थीं और सभी से प्रेम भाव के साथ मिलती थीं और उनकी बात को सुनती थीं । उनके तौर तरीके बड़े ही विनम्र हुआ करते थे । उनकी आवाज में

सज्जनता और विनम्रता झलकती थी और उनकी मुस्कुराहट हृदय की गहराइयों से निकला करती थी । सुबह से लेकर शाम तक वह अपनी मिशनरी बहनों के साथ व्यस्त रहा करती थीं । काम समाप्ती के बाद वह पत्र आदि पढ़ा करती थीं जो उनके पास आया करते थे । मदर टेरेसा वास्तव में प्रेम और शांति की दूत थीं । उनका विश्वास था की दुनिया में सारी बुराईयाँ घरसे पैदा होती हैं ।

अगर घर में प्रेम होगा तो यह स्वाभाविक रूप से विश्व के सभी लोगों में शान्ति बने । उनका संदेश था हमें एक – दूसरे से इस तरह से प्रेम करना चाहिए जैसे ईश्वर हम सबसे करता है । तभी हम विश्व में, अपने देश में, अपने घर में तथा अपने हृदय में शान्ति ल सकते हैं ।

Mother Teresa Essay in English

Mother Teresa was a great personality who had spent her whole life in serving the poor people. She is well known all over the world for her great works. She would always be alive in our heart as she was the only one like a real mother. She is a great legend and highly recognizable symbol of the sympathy and care of our time. She liked to drape her in very simple white sari having blue border. She always understood herself a devoted servant of the God who had sent to the earth to serve the poor, disabled, and suffering people of slum society. She always had a kind smile on her face.

She was born on 26th of August in 1910 at Skopje, Republic of Macedonia and got her birth name by her parents as Agnes Gonxha Bajaxhin. She was the young child of her parents. Her family struggled a lot for the bad financial status after the death of her father in early age. She started helping her mother in charity works in the church. She was the woman of deep faith, confidence and trust over the God. She always praises God from the beginning of her life for everything she got and lost. She decided to be a dedicated nun in her early age and soon joined the Loreto order of nuns in the Ireland. In her later life she served for many years as a teacher in the education field in India.

She had started her life as a beginner at Loreto Novitiate, Darjeeling where she chose to learn English and Bengali (as an Indian language) that’s why she is also called as the Bengali Teresa. Again she returned to the Calcutta where she joined the St. Mary’s school as a teacher of Geography. Once, when she was on her way, she noticed the bad conditions of the people living in the Motijheel slum. She was sent a message from the God on her way to Darjeeling by train, to help the needy people. Soon, she left the convent and started helping poor of that slum. Even after being a European woman, she always wore a cheap white sari.

In the beginning of her teaching life, she just collected some poor children and started writing Bengali alphabets on the ground with sticks. Soon she was cheered up by some teachers for her great services and provided with a blackboard and a chair. Soon, the school become reality. Later, she founded a dispensary and a peaceful home where poor could die. For her great works, soon she became famous among poor.

Mother Teresa Essay in Marathi

मदर टेरेसा एक महान व्यक्तिमत्व होते ज्याने आपल्या संपूर्ण आयुष्यात गरिबांच्या सेवेत कार्य केले होते. तिने तिच्या महान कामे साठी जगभरात सर्व ओळखले जाते ती एक खरी आईसारखी एकमेव होती म्हणून ती आपल्या हृदयात नेहमीच जिवंत असते. ती एक महान आख्यायिका आहे आणि आमच्या काळातील सहानुभूती आणि काळजीचे अत्यंत ओळखण्यायोग्य प्रतीक आहे. तिला अत्यंत साध्या पांढर्या साडीत निळे बॉर्डर लावलेली आवडली. ती स्वत: ला स्वतःला देवाच्या एका समर्पित सेवकाने समजावून सांगितली होती ज्यांनी झोपडपट्टीतल्या गरीब, अपंग आणि दुःखी लोकांना सेवा देण्यासाठी पृथ्वीवर पाठवलं. तिने नेहमी तिच्या चेहऱ्यावर एक दयाळूपणे हास्य होते.

1 9 11 मध्ये मैसडोनियाच्या स्कोपा या गावात जन्मलेल्या 26 ऑगस्टला तिचा जन्मदिवस तिच्या आईवडिलांनी अगानेस गोंय्झा बाजेक्सिन असे ठेवले. ती आपल्या आईवडिलांचे लहान मुल होती. लहान वयात आपल्या वडिलांच्या मृत्यूनंतर तिचे कुटुंब वाईट आर्थिक स्थितीसाठी खूप संघर्ष करीत होते. चर्चमध्ये दान केल्याबद्दल तिने आपल्या आईची मदत करण्यास सुरुवात केली. ती देवावरील गहन विश्वास, आत्मविश्वास आणि विश्वास असलेली स्त्री होती. आपल्या जीवनाच्या सुरुवातीपासूनच ती मिळालेल्या आणि हरवलेल्या गोष्टींसाठी ती नेहमी देवाची स्तुती करते तिने लहानपणीच एक समर्पित नून ठरविण्याचा निर्णय घेतला आणि लवकरच आयर्लंडमधील नॅन्सच्या लोरेटो ऑर्डरमध्ये सामील झाला. तिच्या नंतरच्या जीवनात त्यांनी भारतात शिक्षण क्षेत्रात शिक्षक म्हणून अनेक वर्षे सेवा केली.

त्यांनी ओरिएंटल ओव्हायटीट, दार्जीलिंग येथे सुरुवातीची सुरुवात केली होती जेथे ती इंग्रजी आणि बंगाली (भारतीय भाषेप्रमाणे) शिकण्यास निवडली म्हणूनच ती बंगाली टेरेसा म्हणूनही ओळखली जाते. पुन्हा ती कलकत्ता येथे परतली आणि तेथे ते सेंट मरीय स्कूलमध्ये भूगोल विषयाचे शिक्षक म्हणून सामील झाले. एकदा, जेव्हा ती तिच्या मार्गावर होती, तेव्हा त्यांनी मॉथीली झोपडपट्टीत राहणा-या लोकांची वाईट परिस्थिती पाहिली. दार्जिलिंगला तिच्या मार्गावरुन संदेश पाठवून तिला गरजेच्या लोकांना मदत करण्यासाठी पाठवण्यात आले. लवकरच, त्यांनी कॉन्वेंटमधून बाहेर पडले आणि त्या झोपडपट्टीच्या गरीबांना मदत करण्यास सुरुवात केली. युरोपियन महिला झाल्यानंतरही ती नेहमी स्वस्त सफेद साडी घातली होती.

तिच्या शिकविण्याच्या सुरुवातीच्या काळात तिने काही गरीब मुलांना गोळा केले आणि जमिनीवर बोटांचे अक्षर लिहायला सुरुवात केली. लवकरच काही शिक्षकांनी तिच्या महान सेवांसाठी तिला प्रोत्साहन दिले आणि एक ब्लॅकबोर्ड आणि खुर्ची दिली. लवकरच, शाळा प्रत्यक्षात बनली नंतर, तिने एक दवाखाना आणि एक शांत घर बांधले जे गरीब मरण पावले. तिच्या महान कृत्यांबद्दल लवकरच ती गरीबांमध्ये प्रसिद्ध झाली.

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