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छठ पूजा पर निबंध 2018 – Essay on Chhath Puja in Hindi for Class 1-12 Pdf Download

Chhath puja 2018: छठ पूजा हिन्दू धर्म का एक मुख्य पर्व है इस दिन भगवान सूर्य और छठ माता की पूजा की जाती है | छठ पूजा का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ता है | छठ पूजा के दिन श्रद्धालु गंगा नदी के तट पर आकर पवित्र जल में स्नान करते हैं | शास्त्रों के अनुसार ऐसा भी कहा गया है की इस दिन माता छठी(सूर्य की पत्नी) की पूजा होती है | इस पूजा के जरिये हम भगवान सूर्य को धन्यवाद देते हैं और उनसे अपने अच्छे स्वास्थ्य और रोग मुक्त रहने की कामना करते है | आप ये जानकारी हिंदी, इंग्लिश, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या निबंध प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

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छठ पूजा कब है: हुत से लोग यह जानना चाहते है की छठ पूजा कब है|इस साल छठ पूजा 11 से 14 नवंबर 2018 ताऱीख तक मनाया जाएगा जो की रविवार से बुधवार तक मनाया जा रहा है| अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है छठ पूजा पर निबंध लिखें | आइये अब हम आपको छठ पूजा का निबंध, Chhath Puja Sms, छठ पूजा पर निबंध हिंदी में, छठ पूजा स्टेटस, छठ पूजा हिंदी निबंध, chhath puja nibandh in hindi, chhath puja essay in hindi, chhath puja par nibandh in hindi, chhath puja short essay, Happy Chhath Puja Images, chhath puja par essay in hindi, छठ पूजा एस्से, छठ पूजा एस्से इन हिंदी, आदि की जानकारी 100 words, 150 words, 200 words, 400 words किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|आप सभी को छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं|

‘छठ पूजा’ हिन्दुओं का प्रसिद्द त्यौहार है। यह त्यौहार हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की छठी को मनाया जाता है। यह त्यौहार चार दिन तक चलता है। छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार एवं उत्तर प्रदेश तथा भारत के अन्य भागों में मनायी जाती है। यह त्यौहार पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, असम और मॉरिशस व नेपाल में भी मनाया जाता है।

छठ पूजा को डाला छठ के नाम से भी जानते हैं। यह त्यौहार पति की दीर्घायु और संतान सुख की कामना के लिए मनाया जाता है। 36 घंटे के इस निर्जला व्रत के लिए भक्तजन पूर्व से ही तैयारियां प्रारम्भ कर देते है। भारत के पूर्वांचल हिस्से से शुरू हुए छठ पर्व की रौनक अब भारत के अनेक हिस्सों में दिखाई पड़ने लगी है। दीवाली के बाद से ही महिलाएं इस अनुष्ठान को लेकर तैयारियां शुरू कर देती है।

इस पर्व के पहले दिन व्रती महिलाएं चने की दाल, लौकी की सब्जी और रोटी का सेवन करती हैं। दूसरे दिन छोटी छठ (खरना) को रात में रसियाव (गुड़ की खीर) का सेवन करके व्रत शुरू कर देती हैं। उसके अगले दिन दिनभर व्रत रखने के साथ ही डूबते सूर्य को अर्ध्य देती हैं। उसके अगले दिन उगते सूर्य को अर्ध्य देकर व्रत का पारण करती हैं। सुख समृद्धि के प्रतीक सूर्य देव की कृपा धरती के सभी जीव-जंतुओं पर बनी रहे, इसका वरदान मांगती हैं।

छठ पर्व पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार लोग प्रसाद की व्यवस्था करते हैं। सात, ग्यारह, इक्कीस व इक्यावन प्रकार के फल-सब्जियों और अन्य पकवानों को बांस की डलिया में लेकर व्रती महिला के पति या फिर पुत्र घाट तक जाते हैं। घाट पर पंडित के माध्यम से पहले शाम को और फिर सुबह गाय के कच्चे दूध से भगवान् सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है। घाट तक जाते समय महिलाऐं छठ मइया के गीतों को गाती हैं और सूर्य उपासना के बाद घाट पर दीपावली जैसा माहौल बन जाता है।

Chhath puja essay in english

Chhath Puja is antique festival of Hindu religion which is dedicated to Sun God. Exact origin of the Chhath festival is not known. In old days Purohits were requested to perform the traditional puja of the Lord Sun, by the kings. Ancient Rigveda texts and variety of hymns for worshiping the Sun were chanted. Draupadi and the Pandavas celebrated Chhath festival for solving their problems and regaining their lost kingdom. It is believed that Chhath puja was first performed by the Surya Putra Karna.

Another story is that, Lord Rama and Sita performed Chhath Puja soon after returning to Ayodhya after their 14 years of exile. They kept fast and offer Puja to Lord Sun in Karthika month. After that it became significant and traditional Hindu festival.

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Chhath is majorly celebrated in the North India including the North East states. It is elaborately celebrated in some parts of Nepal. It is also celebrated in Mauritius, Guyana, Fiji, Trinidad and Tobago Suriname, and Jamaica. Chhath puja is celebrated on Kartika Shukla Shashthi, which is the sixth day of Kartika month in Nepali calendar. This generally comes in the month of October/November in English calendar. Chaiti Chhath is celebrated few days after Holi, but it is not that significant.

There is belief that if a family performs Chhath Puja, they should perform every year and next generations also should perform this Puja. It is performed for four days in true spirit and should sleep on floor without any blanket. On first day devotee take bath in Ganga River, and bring home some water to prepare offerings. They will have one meal in that day known as kaddu-bhat which is cooked by using the bronze or soil utensils, mango wood over the soil stove. On the second day, they fast for whole day. They offer prayers to earth after sunset and break the fast. After their meal they again fast for 36 hours without water. They offer the Sanjhiya Arghya at the ghat of riverbank on the third day. In the evening they lit the lamp on top of five sugarcane sticks which represents Panchatattva. On the fourth day they offer Bihaniya Aragh. Devotees will have Chhath prashad and end the fast and festival.

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छठ पूजा हिंदू धर्म का प्राचीन त्योहार है जो सूर्य भगवान को समर्पित है। छठ त्योहार का वास्तविक उत्पत्ति ज्ञात नहीं है। पुराने दिनों में पुरोहितों से अनुरोध था कि वे भगवान सूर्य की पारंपरिक पूजा करते हैं, राजाओं द्वारा। प्राचीन ऋग्वेद ग्रंथों और सूर्य की पूजा के लिए विभिन्न प्रकार के भजन थे। द्रौपदी और पांडव ने अपनी समस्याओं को सुलझाने और अपने खो राज्य को पुनः प्राप्त करने के लिए छठ त्योहार मनाया। यह माना जाता है कि छठ पूजा पहली बार सूर्य पिता कर्ण द्वारा की गई थी।

एक और कहानी यह है कि, भगवान राम और सीता ने 14 साल के निर्वासन के बाद अयोध्या लौटने के तुरंत बाद छठ पूजा की। उन्होंने उपवास किया और कार्तिक महीने में भगवान सूर्य को पूजा की। उसके बाद यह महत्वपूर्ण और पारंपरिक हिंदू त्योहार बन गया। उत्तर पूर्व राज्यों सहित उत्तर भारत में छठ प्रमुख रूप से मनाया जाता है। यह नेपाल के कुछ हिस्सों में विस्तृत रूप से मनाया जाता है यह मॉरीशस, गुयाना, फिजी, त्रिनिडाड और टोबैगो सूरीनाम और जमैका में भी मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ला शशथी पर छत पूजा मनाई जाती है, जो नेपाली कैलेंडर में कार्तिक महीने का छठा दिन है। यह आमतौर पर अंग्रेजी कैलेंडर में अक्टूबर / नवंबर के महीने में आता है।

होति के कुछ दिनों बाद चैती छथ का उत्सव मनाया जाता है, लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है। यह विश्वास है कि यदि कोई परिवार छत पूजा करता है, तो उन्हें हर साल प्रदर्शन करना चाहिए और अगली पीढ़ियों को भी पूजा करना चाहिए। यह वास्तविक आत्मा में चार दिनों के लिए किया जाता है और किसी कंबल के बिना फर्श पर सोना चाहिए। पहले दिन भक्त गंगा नदी में स्नान करते हैं, और प्रसाद तैयार करने के लिए कुछ पानी घर ले आते हैं। उस दिन कद्दू-भट्ट के नाम से एक भोजन होगा, जिसे मिट्टी के चूल्हे पर कांस्य या मिट्टी के बर्तन, आम की लकड़ी का उपयोग करके पकाया जाता है। दूसरे दिन, वे पूरे दिन के लिए उपवास करते थे।

वे सूर्यास्त के बाद धरती पर प्रार्थना करते हैं और उपवास तोड़ देते हैं अपने भोजन के बाद वे पानी के बिना 36 घंटों के लिए फिर से उपवास करते थे। वे तीसरे दिन नदी किनारे के घाट में संजय अर्घ्य प्रदान करते हैं। शाम में उन्होंने पांच गन्ना की छड़ के ऊपर दीपक जलाया जो पंचतंत्र का प्रतिनिधित्व करता है। चौथे दिन वे बिहोनिया अराग की पेशकश करते हैं। भक्तों की छतप्रसाद होगी और उपवास और त्योहार खत्म होगा।

छठ पूजा पर निबंध

भारत पर्वों का देश है और यहाँ पर सभी त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं। छठ पूजा हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है। मुख्य रूप से यह त्योहार बिहार में मनाया जाता है लेकिन धीरे यह भारत के सभी हिस्सों में मनाया जाने लगा है और इसके अलावा इसे विदेशों में भी मनाया जाता है। यह त्योहार कार्तीक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को विशेष रूप से मनाया जाता है। यर चार दिन तक चलने वाला त्योहार है जिसकी शुरूआत चतुर्थी से होती है और सप्तमी को इसका अंतिम दिन होता है। यह त्योहार सूर्य देव से जुड़ा हुआ है। इस पर्व पर महिलाएँ पति की लंबी आयु और संतान सुख की प्राप्ती के लिए व्रत रखती है।

इस त्योहार से जुड़ी बहुत सी प्राचीन कथाएँ है जिनमें से कोई रामायण काल की है तो कोई महाभारत काल की। इस पर्व की तैयारी दिवाली के बाद ही बड़े उत्साह से कर दी जाती है। छठ पूजा के पहले दिन महिलाएँ चने की दाल, लोकी की सब्जी और रोटी आदि खाती है। दुसरे दिन वह रात को सिर्फ गुड़ की खीर खाती है जिसे खरना कहते हैं। तीसरे दिन यानि कि षष्ठी के दिन वह निर्जला व्रत रखती है और अपनी गुँजाईश के अनुसार 11, 21 या 51 फलों का प्रसाद बाँस के डालिया में बाँधकर अपने पति या बेटे को दे देती है और नदी की तरफ चल पड़ती है। जाते जाते रास्ते में महिलाएँ छठी माता के गीत गाती हैं। नदी पर पहुँचक पंडित से पूजा करवाकर शाम को कच्चे दुध से डुबते हुए सूर्य को अर्ध्य देती हैं। अगले दिन उदय होते हुए सूर्य को भी कच्चे दुध से अर्ध्य दिया जाता है और फिर वह अपना व्रत तोड़ती है। छठ पूजा के बाद सभी लोग बहुत खुश नजर आते हैं और वहाँ पर दिवाली जैसा माहोल्ल होता है।

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