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अब्दुल कलाम की कविता – APJ Abdul Kalam Poem in Hindi & Poetry

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम है| उनका जन्म 15 ओक्टुबर 1931 में भारत के रामेश्वरम में हुआ था| उन्होंने अपने जीवन के 40 साल रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में एक वैज्ञानिक रूप में बिताए| वे एक वैज्ञानिक होने के साथ साथ एक प्रचलित राजनेता थे| वे 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप अपना योगदान दिया| उन्हें भारत में मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है| उन्होंने भारत में बैलिस्टिक मिसाइल और लॉन्च वाहन प्रौद्योगिकी के विकास के लिए अपना सर्वप्रथन योगदान दिया| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

A.P.J Abdul Kalam poem in hindi

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एक समपर्ण, एक था अर्पण
था जिनका जीवन एक दर्शन।
जन्में घर निर्धन के फिर भी पाया विशेष स्थान,
देख भेदभाव बालपन से, हुआ मन बेताब।
मानवता की सेवा करने उठाई आपने किताब।
की चेष्टा कोई जीव चोट ना पावें,
हर जन अपने हृदय, प्रेम अलख जगावें।
टिकाए पैर ज़मी पर, मन पंछी ऊँचा आसमाँ पावें।

किया निरतंर अभ्यास, न छोड़ी कभी आस,
विफलताओं से हुए, न कभी आप निराश।
किए निरंतर प्रयास पर प्रयास।
देशभक्त्ति की आप हो एक मिसाल,
जिसने जलाई देश में 2020 की मशाल।

सपनों को विचार, विचार को गति,
दी युवकों को ये संमति।
देश को दी आपने पहचान नई।
किया ‘ के-15 ‘ से मुकम्मल सुरक्षा इंतज़ाम।

आप तो कमाल हो, श्रीमान कलाम।
कर्मक्षेत्र था आपका विज्ञान,
पर गीत संगीत में थे बसे आपके प्राण।
आप बने बच्चों के हितैषी,
दिया मंत्र, वे बने स्वदेशी।

विश्व पटल पर रखी भारतीयों की मिसाल,
आपके गुणों की है, खान अति विशाल।
कलाम आप तो हैं कमाल!
हर देशवासी हो नत मस्तक, करें आपको सलाम।

ए पी जे अब्दुल कलाम कविता

बोलते-बोलते अचानक धड़ाम से
जमीन पर गिरा एक फिर वटवृक्ष
फिर कभी नही उठने की लिए
वृक्ष जो रत्न था,
वृक्ष जो शक्ति पुंज था,
वृक्ष जो न बोले तो भी
खिलखिलाहट बिखेरता था
चीर देता था हर सन्नाटे का सीना
सियासत से कोसों दूर
अन्वेषण के अनंत नशे में चूर
वृक्ष अब नही उठेगा कभी
अंकुरित होंगे उसके सपने
फिर इसी जमीन से
उगलेंगे मिसाइलें
शन्ति के दुश्मनों को
सबक सीखने के लिए
वृक्ष कभी मरते नही
अंकुरित होते हैं
नये-नये पल्लवों के साथ
वे किसी के अब्दुल होते है
किसी के कलाम.

अब्दुल कलाम पर हिंदी कविता

APJ Abdul Kalam poems in Hindi

हमारा सलाम, कलाम के नाम

आइये, एक महान आत्मा को सलाम करे,
एक ऐसी आत्मा, जिन्होंने अपना जीवन,
बलिदान कर दिया – हमारे लिए.
आइये, श्रद्धांजलि दे एक ऐसी आत्मा को,
जिन्होंने असम्भव को संभव किया हमारे लिए.
आइये , एक महान आत्मा श्रद्धांजलि दे ,
जिसने अपने देश के लिए एक सपना देखा.
आइये, हम अपने भूतपूर्व राष्ट्रपति को नमन करें,
जिन्होंने हर विद्यार्थी को प्रोत्साहित किया,
जिनके किताबों और भाषण ने हमें प्रेरणा दी.
आइये, एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो किसी भी धर्म के बीच अंतर नही करते.
एक ऐसे व्यक्ति को सलाम करे,
जो सबके दिल पर राज करते हैं .

Abdul Kalam Poetry

देश का सच्चा सपूत था वो
जात-पात से परे नेक बन्दा था वो
फ़कीराना जिन्दगी जीकर जिसने
देश को ताकतवर बनाया
सबसे चाहिता राष्ट्रपति कहलाकर
दिलों में अपनी जगह बनाया
नम आँखों को छोड़ वो
अनगिनत यादों में बस गया
मिसाइल मेन कहलाने वाल
अलविदा दोस्तों कह गया.

APJ Abdul Kalam poems in marathi

ओह! सीमा च्या डिफेंडर्स
तू माझ्या देशात महान पुत्र आहेस
जेव्हा आपण सर्व झोपलो असतो
आपण अद्याप आपल्या कार्यवाहीवर अवलंबून आहे
वारामय हवामान किंवा हिमवर्षाव दिवस
किंवा सूर्यप्रकाशाच्या वेगाने धावणारे किरण
आपण सर्व जागृत जागृत आहेत
योगी म्हणून एकमेव विस्तार करत
उंचीवर चढत किंवा खोऱ्याकडे वळणे
वाळवंटांचे रक्षण करणे किंवा दलदलांचे रक्षण करणे
समुद्रात संरक्षण आणि हवेचे संरक्षण करुन
आपल्या युवकांचा पंतप्रधान राष्ट्रांना दिला !!
माझ्या जमिनीचा वाऱ्याचा झोत तुमच्या पराक्रमाला कंपित करतो
आम्ही आपल्यासाठी बहादुर पुरुष प्रार्थना करतो !!
देव तुम्हाला सर्व आशीर्वाद देवो !!

APJ Abdul Kalam poem my mother in english

Oh! Defenders of borders
You are great sons of my land
When we are all asleep
You still hold on to your deed
Windy season or snowy days
Or scorching sun’s sweltering rays
You are there guarding all the time awake
Treading the lonely expanses as yogis
Climbing the heights or striding the valleys
Defending the deserts or guarding the marshes
Surveillance in seas and by securing the air
Prime of your youth given to the nation!!
Wind chimes of my land vibrate your feat
We pray for you brave men!!
May the Lord bless you all!!

APJ Abdul Kalam poem song of youth

जब चारो तरफ काला साया घिरके आया , मैंने जब खुद को तनहा पाया
माँ उस समय मुझे तेरा ही चेहरा नज़र आया , माँ उस समय मुझे तेरा ही चेहरा नज़र आया
खुद कष्ट सहकर तूने हमेशा मुझे उठाया , मेरे दुःख को अपना दुःख बनाया
तेरी अंचल की छाव में आज भी मैंने खुद को सबसे सुरक्षित पाया
तेरी अंचल की छाव में आज भी मैंने खुद को सबसे सुरक्षित पाया |
तू देती हज़ार खुशियां है जिनकी कीमत नहीं चूका सकता मैं कभी
पर इतना ही कह सकता हु तेरे जैसा कोई नहीं , तेरे जैसा कोई नहीं |

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