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एपीजे अब्दुल कलाम पर निबंध 2018 – Dr. A.P.J Abdul Kalam Essay in Hindi, English & Marathi for students Pdf download

मिसाइल मेन के नाम से जानें जाने वाले अवुल पकिर जैनुलअबिदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुसलमान परिवार मैं हुआ था | डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की माता आशिअम्मा एक गृहणी थीं व पिता जैनुलअबिदीन एक नाविक थे | यह भारत के 11वें राष्ट्रपति व एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक थे | इन्होने देश के महत्वपूर्ण संगठन जैसे डीआरडीओ व इसरो में कार्य किया | इन्हे बहुत से सम्मान प्राप्त हैं जैसे भारत रत्न ,पद्म विभूषण, पद्म भूषण, डॉक्टर ऑफ साइंस, भारत के सर्वोच्च नागरिक आदि | भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग, में अध्यापन कार्य के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ने के कारण उनकी मृत्यु 27 जुलाई 2015 को हो गयी | आप ये जानकारी हिंदी, इंग्लिश, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या निबंध प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

ए पी जे अब्दुल कलाम निबंध

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डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था। मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के रुप में भारतीय इतिहास में वो प्रकाशमान सितारे हैं। उनका जन्म तमिलनाडु में 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था। डॉ कलाम का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था हालांकि भारत की नयी पीढ़ी के लिये वो प्रेरणा स्वरुप हैं। वो ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत को एक विकसित देश बनाने का सपना देखा था। जिसके लिये उन्होंने कहा कि “आपके सपने के सच हो सकने के पहले आपको सपना देखना है”। एक वैमानिकी इंजीनियर होने के अपने सपने को पूरा करने के लिये जहाज में उनकी विशाल इच्छा ने उन्हें सक्षम बनाया। एक गरीब परिवार से होने के बावजूद, उन्होंने कभी-भी अपनी पढ़ाई को नहीं रोका। डॉ कलाम ने तिरुचिरापल्ली में सेंट ज़ोसेफ़ से विज्ञान में ग्रेजुएशन और 1954 में मद्रास इंस्टीट्यूट से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

1958 में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के रुप में उन्होंने डीआरडीओ ज्वॉइन किया जहाँ उनकी अगुवाई में एक छोटी टीम, एक हावरक्राफ्ट के विकास में लगी थी। हावरक्राफ्ट कार्यक्रम से उत्साहजनक परिणाम की कमी के कारण, उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) ज्वॉइन कर लिया। वो पूरे भारत भर में “भारत के मिसाइल मैन” के रुप में जाने जाते हैं क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइल और स्पेस रॉकेट टेक्नोलॉजी के विकास में उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया है। देश में रक्षा टेक्नोलॉजी के विकास के पीछे वो संचालक शक्ति थे। उनके महान योगदान ने देश को परमाणु राष्ट्रों के समूह में खड़ा होने का मौका दिया।

APJ abdul kalam nibandh

वो एक ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक और एक इंजीनियर थे जिन्होंने वर्ष 2002 से 2007 तक देश के राष्ट्रपति के रुप में भी देश की सेवा की है। 1998 के पोखरन-द्वितीय परमाणु परीक्षण में भी उनकी समर्पित भागीदारी थी। वो दूरदर्शिता पूर्ण विचारों से युक्त व्यक्ति थे जिसने हमेशा देश के विकास का लक्ष्य देखा। “भारत 2020” के शीर्षक की अपनी किताब में उन्होंने देश के विकास बारे में कार्य योजना को स्पष्ट किया। उनके अनुसार, देश की असली संपत्ति युवा है इसी वजह से वो हमेशा उनको प्रोत्साहित और प्रेरित करते रहें हैं। वो कहते थे कि “राष्ट्र को नेतृत्व में आदर्श की जरुरत है जो युवाओं को प्रेरित कर सकें”।

Essay on APJ Abdul Kalam in Hindi

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे जिसने भारत के 11वें राष्ट्रपति के रुप में वर्ष 2002 से 2007 तक देश की सेवा की। वो भारत के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्ति थे क्योंकि एक वैज्ञानिक और राष्ट्रपति के रुप में देश के लिये उन्होंने बहुत बड़ा योगदान दिया था। ‘इसरो’ के लिये दिया गया उनका योगदान अविस्मरणीय है। बहुत सारे प्रोजेक्ट को उनके द्वारा नेतृत्व किया गया जैसे रोहिणी-1 का लाँच, प्रोजेक्ट डेविल और प्रोजेक्ट वैलिएंट, मिसाइलों का विकास (अग्नि और पृथ्वी) आदि। भारत की परमाणु शक्ति को सुधारने में उनके महान योगदान के लिये उन्हें “भारत का मिसाइल मैन” कहा जाता है। अपने समर्पित कार्यों के लिये उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया। भारत के राष्ट्रपति के रुप में अपने कार्यकाल के पूरा होने के उपरान्त, डॉ कलाम ने विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एक अतिथि प्रोफेसर के रुप में देश की सेवा की।

उनका व्यवसाय और योगदान

15 अक्टूबर 1931 को जैनुल्लाब्दीन और आशियम्मा के घर में डॉ कलाम का जन्म हुआ। उनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी जिसके कारण इन्होंने बहुत कम उम्र में ही आर्थिक सहायता देने के लिये काम करना शुरु कर दिया था। हालांकि अपने काम करने के दौरान इन्होंने कभी-भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। 1954 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ़ कॉलेज से उन्होंने अपना ग्रेजुएशन और मद्रास इंस्टीट्यूट से वैमानिकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। ग्रेजुएशन के बाद कलाम एक मुख्य वैज्ञानिक के रुप में डीआरडीओ से जुड़ गये हालांकि बहुत जल्द ही ये भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपास्त्र के प्रोजेक्ट निर्देशक के रुप में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में विस्थापित हो गये। डॉ कलाम ने गाइडेड मिसाइल विकास कार्यक्रम के मुख्य कार्यकारी के रुप में भी कार्य किया जिसमें मिसाइलों के एक कंपन के एक साथ होने वाले विकास शामिल थे।

डॉ कलाम वर्ष 1992 से वर्ष 1999 तक प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के सेक्रेटरी भी बने। पोखरन द्वितीय परमाणु परीक्षण के लिये मुख्य प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर के रुप में उनके सफल योगदान के बाद उन्हें “भारत का मिसाइल मैन” कहा जाने लगा। वो पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जो बिना किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के वर्ष 2002 से 2007 वर्ष तक भारत के राष्ट्रपति थे।

उन्होंने बहुत सारी प्रेरणादायक किताबें लिखी जैसे “इंडिया 2020, इग्नाइटेड माइन्ड्स, मिशन इंडिया, द ल्यूमिनस स्पार्क, इंस्पायरिंग थॉट्स” आदि। डॉ कलाम ने देश में भ्रष्टाचार को मिटाने के लिये “वॉट कैन आई गिव मूवमेंट” नाम से युवाओं के लिये एक मिशन की शुरुआत की। देश (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद और इंदौर, आदि) के विभिन्न इंस्टीट्यूट और विश्वविद्यालयों में उन्होंने अतिथि प्रोफेसर के रुप में अपनी सेवा दी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी तिरुअनन्तपुरम् में चांसलर के रुप में, जेएसएस यूनिवर्सिटी (मैसूर), एयरोस्पेस इंजीनियरिंग ऐट अन्ना यूनिवर्सिटी (चेन्नई) आदि। उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मान से नवाज़ा गया जैसे पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत रत्न, इंदिरा गांधी अवार्ड, वीर सावरकर अवार्ड, रामानुजन अवार्ड आदि।

अब्दुल कलाम पर निबंध

डा० अब्दुल कलाम’ का जन्म 15 अक्टूबर 1931 ई० को भारत के तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम में हुआ था। इनका पूरा नाम डा० अबुल पकीर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम है। इनके पिता श्री जैनुलाबदीन मध्यमवर्गीय परिवार के थे। कलाम ने अपने पिता से ईमानदारी, आत्मानुशासन की विरासत पाई और माता से ईश्वर-विश्वास तथा करुणा का उपहार लिया।

कलाम ने 1950 में तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज से बी० एस० सी० की परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने मद्रास इंस्टीटयूट ऑफ़ टेक्नोलोजी से एरोनोटिकल इंजीनियरिंग में उपाधि प्राप्त की। 1958 ई० में कलाम डी० टी० डी० एंड पी० में तकनीकी केंद्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के पद पर नियुक्त हुए। 1963 से 1982 ई० तक कलाम ने अन्तरिक्ष अनुसंधान समिति में विभिन्न पदों पर काम किया।

सन 1981 के गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर डा० कलाम को ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। भारत सरकार द्वारा 1990 ई० में इन्हें ‘पद्म विभूषण’ और 1997 ई० में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। 25 जुलाई 2002 को डा० कलाम ने भारत के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। कलाम ‘मिसाइल मैन’ के नाम से प्रसिद्द हैं।

सोमवार दिनांक 27 जुलाई 2015 की शाम मेघालय की राजधानी शिलांग में हृदयाघात होने से डॉ कलाम का देहान्त हो गया। वे भारतीय प्रबन्ध संस्थान में एक लैक्चर दे रहे थे कि अचानक बेहोश हो गए। पूर्व राष्‍ट्रपति डॉ. कलाम का अन्तिम संस्‍कार पूरे सैन्‍य सम्‍मान के साथ गुरूवार, 30 जुलाई, 2015 को सुबह 11 बजे तमिलनाडु के रामेश्‍वरम नगर में किया गया।

डा० अब्दुल कलाम एक महान वैज्ञानिक होने के साथ-साथ गंभीर चिंतक और अच्छे इंसान भी थे। बाल-शिक्षा में विशेष रूचि रखने वाले कलाम को वीणा बजाने का भी शौक था। राजनीति से दूर रहकर भी कलाम राजनीति के सर्वोच्च शिखर पर विराजमान रहे।

APJ abdul kalam nibandh

प्रस्तावना : तमिलनाडु के मध्यमवर्गीय परिवार में डॉ0 ए0 पी0 जे0 अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 ई0 को हुआ था। जिनका पूरा नाम- अबुल पाकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम था। इनके पिता का नाम जैनुलाबदीन था जो मछुआरों को किराये पर नाव देने का काम करते थे। इनका बचपन से ही पायलट बनकर आसमान की अनन्त ऊँचाइयों को छूने का सपना था। अपने इस सपने को साकार करने के लिए इन्होंने अखबार तक बेचा तथा मुफलिसी में भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और संघर्ष करते हुए उच्च शिक्षा हासिल कर पायलट की भर्ती परीक्षा में सम्मिलित हुए। उस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बावजूद उनका चयन नहीं हो सका क्योंकि उस परीक्षा के द्वारा केवल आठ पायलटों का चयन होना था और सफल अभ्यर्थियों की सीटों में उनका नौवाँ स्थान था। इस घटना से निराशा होने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी और दृढ़-निश्चय के बल पर उन्होंने सफलता की ऐसी बुलन्दियाँ हासिल कीं जिनके सामने सामान्य पायलटों की उड़ाने अत्यन्त तुच्छ नजर आती हैं।

शैक्षिक उपलब्धियाँ : उनका व्यक्तित्व एक तपस्वी और कर्मयोगी का रहा। उन्होंने संघर्ष करते हुए प्रारंभिक शिक्षा रामेश्वरम् के प्राथमिक स्कूल से प्राप्त करने के बाद रामनाथपुरम् के शर्वाट्ज हाईस्कूल से मैट्रिकुलेशन किया। इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए तिरूचिरापल्ली चले गए। वहाँ के सेन्ट जोसेफ कॉलेज से उन्होंने बी0एस-सी0 की उपाधि प्राप्त की। बी0एस-सी0 के बाद 1950 ई0 में उन्होंने मद्रास इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इन्जीनियरिंग में डिप्लोमा किया।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ0 कलाम ने हावरक्राफ्ट परियोजना एवं
विकास संस्थान में प्रवेश किया। इसके बाद 1962 ई0 में वे भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन में आए जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी3 के निर्माण में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी प्रक्षेपण यान से जुलाई 1980 ई0 में रोहिणी उपग्रह का अन्तरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। 1982 ई0 में वे भारतीय रक्षा अनुसन्धान एवं विकास संगठन में वापस निदेशक के तौर पर आए तथा अपना सारा ध्यान गाइडेड मिसाइल के विकास पर केन्द्रित किया। अग्नि मिसाइल एवं पृथ्वी मिसाइल के सफल परीक्षण का श्रेय भी इन्हीं को जाता है। उस महान व्यक्तित्व ने भारत को अनेक मिसाइलें प्रदान कर इसके सामरिक दृष्टि से इतना सम्पन्न कर दिया कि पूरी दुनिया इन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से जानने लगी।

जीवन की सफलताएँ : जुलाई 1992 ई0 में वे भारतीय रक्षा मन्त्रालय में वैज्ञानिक सलाहकार नियुक्त हुए। उनकी देखरेख में भारत ने 1998 ई0 में पोखरण में दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया और परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ। वर्ष 1963-64 के दौरान कलाम ने अमेरिका के अन्तरिक्ष संगठन नाशा की भी यात्रा की। वैज्ञानिक के रूप में कार्य करने के दौरान अलग-अलग प्रणालियों को एकीकत रूप देना उनकी विशेषता थी। उन्होंने अन्तरिक्ष एवं सामरिक प्रौद्योगिकी का उपयोग कर नए उपकरणों का निर्माण भी किया।

डॉ0 कलाम की उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1981 ई0 पद्मभूषण और 1990 ई0 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके बाद उन्हें विश्वभर के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से विभूषित किया। 1997 ई0 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भरत रत्न’ से सम्मानित किया।

एक दिन ऐसा भी आया जब उन्होंने भारत के सर्वोच्च पद पर 26 जुलाई 2002 को ग्याहरवें राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने इस पद को 25 जुलाई 2007 तक सुशोभित किया। वे राष्ट्रपति भवन को सुशोभित करने वाले प्रथम वैज्ञानिक हैं। राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल में उन्होंने कई देशों का दौरा किया एवं भारत का शान्ति का सन्देश दुनिया भर को दिया। इस दौरान उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया एवं अपने व्याख्यानों द्वारा देश के नौजवानों का मार्गदर्शन करने एवं उन्हें प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

सीमित संसाधनों एवं कठिनाइयों के होते हुए भी उन्होंने भारत को अन्तरिक्ष अनुसन्धान एवं प्रक्षेपास्त्रों के क्षेत्र में एक ऊँचाई प्रदान की। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। कलाम जी का व्यक्तिगत जीवन बेहद अनुशासित रहा। वे शाकाहारी थे तथा कुरान एवं भगवदगीता दोनों का अध्ययन करते थे। संगीत से उनका बेहद लगाव था। कलाम ने तमिल भाषा में कविताएँ भी लिखीं। जिनका अनुवाद विश्व की कई भाषाओं में हो चुका है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कई प्रेरणास्पद पुस्तकों की भी रचना की।

भारत 2020 :नई सहस्त्राब्दी के लिए एक दृष्टि¸ ‘इग्नाइटेड माइण्ट्स : अनलीशिंग द पावर विदिन इण्डिया’¸ ‘इण्डिया माइ ड्रीम’¸ ¸‘विंग्स ऑफ फायर’ उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें हैं। उनकी पुस्तकों का कई भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उनका मानना है कि भारत तकनीकि क्षेत्र में पिछड़ जाने के कारण ही अपेक्षित उन्नति-शिखर पर नहीं पहुँच पाया है। इसलिए अपनी पुस्तक ‘भारत 2020: नई सहस्त्राब्दी के लिए एक दृष्टि के द्वारा उन्होंने भारत के विकास-स्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए देशवासियों को एक विशिष्ट दृष्टिकोण प्रदान किया। यही कारृण है कि वे देश की नई पीढ़ी के लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं।

युवाओं के लिए कलाम का विशेष संदेश था-अलग ढंग से सोचने का साहस करो आविष्कार का साहस करो अज्ञात पथ पर चलने का साहस करो असम्भव को खोजने का साहस करो और समस्याओं को जीतो और सफल बनो। ये वे महान गुण हैं जिनकी दिशा में तुम अवश्य काम करो। हमें हार नहीं माननी चाहिए और समस्याओं को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।

उपसंहार : डॉ0 कलाम के निधन से समाज को जो अपूरणीय क्षति हुई है उसे भर पाना नामुमकिन है परन्तु उनके आदर्शों पर चलकर हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि अवश्य दे सकते हैं। ऐसे युगपुरूष¸ महान वैज्ञानिक¸ दार्शनिक¸ कर्मयोगी और खुशहाल भारत के स्वप्नदृष्टा जिनके व्यक्तित्व से देश की आने वाली पीढ़ियाँ प्रेरणा लेती रहेंगी।

Abdul kalam essay in english

Dr. APJ Abdul Kalam was a scientist and he was India’s 11th President for five years, 2002 to 2007, Dr. APJ Abdul Kalam full name was Avul Pakir Jainulabdeeen Abdul Kalam.he was also called as the missile man of the India. And popularly known as the People’s President of India he was Born on 15th October 1931 at the famous temple town of Dhanushkothi, Tamil Nadu, in a poor orthodox Tamil Muslim family his fathers name was Jainulabudeen and mothers name was Ashiamma due to poverty, he was deprived of facilities , still managed to be the most remarkable scientist in the contemporary era. He came from a very poor and humble background and started working at an early age to support his family, after completing his school Dr. Abdul Kalam distributed newspaper to financially contribute to his father, who was a boat owner.

Education of the Dr. APJ Abdul Kalam
He completed his school education from Schwartz higher secondary school and then get admission at the St Joseph’s College, Tiruchirappalli where he completed his graduation in b.sc in physics in 1954 and did the aerospace engineering at the Madras Institute of Technology, Chennai in 1960.

Early career and contribution of Dr. APJ Abdul Kalam
He joined the prestigious defense research facility, Defense Research, and Development Organization (DRDO) as a scientist in the year 1958 and started working by designing a small helicopter for the Indian Army was part of the committee working under Dr. Vikram Sarabhai, the renowned space scientist. In 1969, he got transferred to the Indian Space Research Organization (ISRO) where he worked as the project director of India’s first indigenous Satellite Launch Vehicle (SLV-III) which successfully launched Rohini satellite near earth’s orbit in July 1980.

For his work on the development of ballistic missile and launch vehicle technology he was titled as the ‘Missile Man of India’, He had played a pivotal role in India’s Pokhran-II nuclear tests in 1998. He had also developed the critical technologies that made Indian defense strong and capable of developing world-class missiles like Agni, Prithvi, Akash, etc.

From 1992 to 1999 he was the Chief Scientific Adviser to the Prime Minister Rajiv Gandhi and Secretary of Defence Research and Development Organization. He was the first scientist who served the nation as the President of India from 2002 to 2007 without having any political background.

Books of the Dr. APJ Abdul Kalam
He had written many inspirational books such as “India 2020”, “Ignited Minds”, “Mission India”, “The Luminous Sparks”, “Inspiring Thoughts”, etc. to banish the corruption from the country he launched a mission for youths named “What Can I Give Movement”.

Among the many books written by Dr. Kalam, few of them are: Wings of Fire: An Autobiography in 1999, Ignited Minds: Unleashing the Power Within in 2002, Target 3 Billion in 2011 and My Journey: Transforming Dreams into Actions in 2013. Dr. Kalam advocated plans to develop India into a developed nation by 2020 in his book India 2020: A Vision for the New Millennium in 1998.

Contribution in the academics
He served as visiting the professor in various universities and technical institutes of the country like Indian Institute of Management Ahmedabad and Indore and as Chancellor of Indian Institute of Space Science and Technology Thiruvananthapuram, JSS University (Mysore), Aerospace Engineering at Anna University (Chennai), etc.

Being the 11th president of the nation
In 2002,h e was elected as the 11th president after she took a turn in his career and entered the world of politics. During his service, he focused his entire energy and caliber to impress the Indian youth to pursue a career and create innovations for the nation.

he was a mastermind behind the technology for satellite launch vehicle and ballistic weaponry development, yet he did not want to work overseas for other countries expect his motherland. He said, “Man needs difficulties in life because they are necessary to enjoy the success.”

Awards and honors to the APJ Abdul Kalam
He was awarded numerous times due to his service and caliber due to his contribution in all dimensions of the field.

In 1981 he was awarded the Padma Bhushan, in 1990 Padma Vibhushan and in 1990 he was honored with the highest civilian award Bharat Ratna Dr. Kalam was the third President to have been honoured with a Bharat Ratna, before becoming the President, the earlier two were Dr. Sarvapali Radhakrishnan (1954) and Dr. Zakir Hussain (1963). .

He has been honored with the honorary doctorates by at least 30 universities.

Last breath of APJ Abdul Kalam

He took his last breath at IIM, Meghalaya on 27 of July 2015 because of the sudden cardiac arrest. He was a great personality and inspiration to the youngsters of the country.

Being the inspirational role model
He is the perfect role model for the youth of the nation, He is not present among us physically however his great works and contributions would be with us forever and his remarkable works and words will always motivate us.

According to him, the real asset of the country is its youth that’s why he has always motivated and inspired them. He said that “The nation requires role models in leadership who can inspire youngsters”.

Dr. Kalam is known for his motivational speeches and interaction with the student community in India. Some of the inspiring quotes by him are:

“Climbing to the top demands strength, whether it is to the top of Mount Everest or to the top of your career.

”If a country is to be corruption free and become a nation of beautiful minds, I strongly feel there are three key societal members who can make a difference. They are the father, the mother and the teacher.”

”Thinking is progress. Non-thinking is stagnation of the individual, organization and the country. Thinking leads to action. Knowledge without action is useless and irrelevant. Knowledge with action converts adversity into prosperity.”

Abdul kalam nibandh in marathi

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, ज्याला ‘मिसाइल मॅन’ म्हणून ओळखले जाते, भारताचे पहिले नागरिक, भारताचे राष्ट्रपती असल्याने त्यांची उंची वाढली. ते भारताच्या एकात्मिक मिसाइल विकास कार्यक्रमाचे आर्किटेक्ट होते आणि सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न प्राप्तकर्ता होते. आजच्या जगामध्ये तो प्रामाणिकपणा आणि सामाजिक योगदानकर्त्याचा एक दुर्मिळ उदाहरण आहे, जेथे बहुतेक लोक मध्यस्थता, पाखंड आणि भ्रष्टाचाराने भटकले आहेत. अविल पकीर जैनुलबदीन अब्दुल कलाम 15 ऑक्टोबर 1 9 31 रोजी तामिळनाडुमधील रामेश्वरम येथे जन्मलेले होते. त्यांचे वडील जैनुलबदीन हे नाववाहक होते आणि स्थानिक मशिदीतील इमाम आणि त्यांची आई, असिआम्मा घराण्यातील एक निर्माता होते, कलाम त्यांच्या भावांबरोबर सर्वांत तरुण होते. शाळेच्या सुरुवातीच्या वर्षांमध्ये कलाम एक सामान्य विद्यार्थी होता परंतु दृढ आणि परिश्रम करणारा होता.

श्वार्टझ उच्च माध्यमिक शाळेतून शिक्षण पूर्ण केल्यानंतर त्यांनी 1 9 54 मध्ये सेंट जोसेफ कॉलेजमधून भौतिकशास्त्रात पदवी मिळवली. 1 9 55 मध्ये त्यांनी एरोस्पेस अभियांत्रिकीचा अभ्यास करण्यासाठी मद्रास येथे स्थलांतर केले. 1 9 60 मध्ये कलाम डिफेन्स रिसर्च अँड डेव्हलपमेंट ऑर्गनायझेशन (डीआरडीओ) च्या एरोनॉटिकल डेव्हलपमेंट एस्टॅब्लिशमेंटमध्ये सामील झाले परंतु डीआरडीओमध्ये नोकरीच्या निवडीबद्दल त्यांना काहीच शंका नव्हती. नऊ वर्षानंतर 1 9 6 9 मध्ये त्यांना भारतीय स्पेस रिसर्च ऑर्गनायझेशन (इस्रो) येथे हस्तांतरित करण्यात आले जेथे त्यांनी भारतातील प्रथम उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएलव्ही -111) तयार करण्याचे निर्देश दिले ज्याने जुलै 1 9 80 मध्ये ‘रोहिणी’ उपग्रह यशस्वीपणे तैनात केले.

बलिस्टिक मिसाइल विकसित करण्यासाठी, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन आणि अॅडव्हान्स मिसाइल प्रोग्राम्स तयार करण्यासाठी प्रकल्प निर्देशित करणे यासारख्या विविध प्रयत्नांमुळे, कलाम त्याच्या कामासाठी ‘द मिसाइल मॅन ऑफ इंडिया’ म्हणून ओळखल्या जाणार्या सर्वोत्तम ज्ञात परमाणु शास्त्रज्ञ होते. देश, महाशक्ती, अमानुषपणामुळे भरलेले, आपल्या देशावर जबरदस्तीने, जबरदस्तीने, लोकांच्या मूलभूत गरजा पूर्ण करण्यासाठी संघर्ष करीत आहेत आणि त्यांच्या सार्वभौमत्वाचे रक्षण करण्यासाठी त्यांच्यावरील शस्त्रांवर अवलंबून राहून डॉ. कलाम यांनी बुद्धिमत्ता आणि वैज्ञानिक एकत्र एकत्रित केले आहे. एकीकृत मार्गदर्शित मिसाईल कार्यक्रमाची महत्वाकांक्षा लक्षात घेता. वैज्ञानिक संशोधन आणि भारतातील संरक्षण तंत्रज्ञानाच्या आधुनिकीकरणाच्या विकासात त्यांचे योगदान त्यांना प्रतिष्ठा, विजेतेपद आणि सन्मान मिळाले. त्यांना पद्मभूषण, पद्म विभूषण, भरत रत्न, वीर सावरकर पुरस्कार आणि बरेच काही सन्मानित करण्यात आले. 40 पेक्षा जास्त विद्यापीठांच्या मानद डॉक्टरेटने सन्मानित केले असले तरी, राष्ट्रीय आणि आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार कलाम अतिशय साधे जीवन जगतात. तो अखंडता आणि स्थान प्रभावशाली वृत्तीबद्दल उल्लेखनीय होता.

2002 मध्ये, कलाम यांना सत्तारूढ पक्ष, भारतीय जनता पार्टी आणि भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस यांच्या समर्थनासह भारताचे 11 वे राष्ट्रपती म्हणून निवडण्यात आले. ‘एपीजे प्रेसिडेंट’ या नावाने ओळखले जाणारे डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हे त्यांच्या जीवनासाठी व उपक्रमांबद्दलच्या ज्ञानासाठी प्रसिद्ध आहेत जे इतर शास्त्रज्ञांना आश्चर्यचकित करतात. त्यांचा असा विश्वास होता की, “जर तुम्हाला सूर्याप्रमाणे चमकणे आवडत असेल तर प्रथम सूर्याप्रमाणे जळा.” कारण “आपल्या सहभागाशिवाय आपण यशस्वी होऊ शकत नाही. आपल्या सहभागाशिवाय आपण अयशस्वी होऊ शकत नाही”. शाश्वत वाचक, शास्त्रीय संगीत प्रेमी आणि तमिळ साहित्याचे कवी, एक महान शास्त्रज्ञ, धार्मिक धार्मिक व्यक्तिमत्व आणि जे नाही ते आपल्या वेळेचे आदर्श व्यक्ती म्हणून ओळखले जाऊ शकते.

एक अग्रगण्य स्तंभलेखक डॉ कलाम यांनी लिहिले की “भारताला प्रत्येक संस्थेत कलाम आवश्यक आहे”. आपल्या साहित्यिक उत्कर्षामध्ये डॉ. कलाम यांनी ‘विंग्स ऑफ फायर’, ‘2020-ए व्हिजन फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘माय जर्नी’, ‘इग्निटेड माइंड्स’, ‘द लामिनस स्पार्क्स’ यासारख्या अनेक पुस्तके लिहिली आहेत. ‘द लाइफ ट्री’, ‘चिल्ड्रन आस्क कलम’, ‘इन्डोमेबल स्पिरिट’, ‘प्रेरणादायक विचार’, ‘एक अधिकारित राष्ट्रांचे निरीक्षण’, ‘मिशन इंडिया’. यापैकी बरेच जण भारतात आणि परदेशात भारतीय नागरिकांमध्ये घरगुती नावे आहेत. या पुस्तकांची अनेक भारतीय भाषांमध्ये अनुवादित केलेली आहे.

डॉ. कलाम (वय 83) 27 जुलै 2015 रोजी हृदयविकाराच्या कारणास्तव इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मॅनेजमेंट (आयआयएम) शिलांग येथे व्याख्यान देत असताना निधन झाले. रामेश्वरम येथील त्यांच्या मूळ शर्यतीत पूर्ण राज्यसभेच्या सन्मानार्थ त्यांचा अंत झाला. त्यांच्या सन्मानार्थ एक स्मारक बांधण्यात येत आहे. कलाम भारतातील विद्यार्थी समुदायासह त्यांच्या प्रेरक भाषणांबद्दल आणि संवाद साधण्यासाठी प्रसिद्ध आहेत. त्याच्याकडून काही प्रेरणादायक उद्धरण आहेत:

“आम्ही आमच्या तरुण पिढीला समृद्ध आणि सुरक्षित भारत देण्याऐवजी केवळ सभ्यतेच्या वारसाच्या बरोबरीने आर्थिक समृद्धी मिळाल्यासच लक्षात ठेवू.” “एव्हरेस्टच्या वरच्या किंवा आपल्या कारकीर्दीच्या शीर्षस्थानी असला तरी तो शीर्षस्थानी चढला आहे.” एपीजे अब्दुल कलाम यांना भारत अशा ऋतूत व्यक्तिमत्त्वावर अतुलनीय मार्गाने अभिमान वाटतो आणि त्यांना अभिमान वाटतो.

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