Essay in Hindi - निबंध

World Oral Health Day Essay in Hindi & English Pdf Download | वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे पर निबंध

world oral health day 2022: मौखिक स्वच्छता और स्वास्थ्य पर संदेश फैलाने के उद्देश्य से 20 मार्च को विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। हमारा मुंह हमारे शरीर के लिए हर उस चीज के लिए एक प्रवेश द्वार है जिसे हम होशपूर्वक या अनजाने में ग्रहण करते हैं। स्वस्थ रहने के लिए ओरल हाइजीन का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है। आबादी का एक बड़ा प्रतिशत मुंह की बीमारी से पीड़ित है। इसलिए, एफडीआई वर्ल्ड डेंटल फेडरेशन दुनिया भर में जागरूकता फैलाने के लिए इस वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन करता है।

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जिस तरह पेट, ह्रदय, आंख, कान, नाक संबंधी बीमारियों के प्रति लोग जागरूकता रखते हैं, अब समय है कि लोग मौखिक स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक हो जाएं। आज भी कई सारे लोग ऐसे हैं जो अपने मुंह की सफाई नहीं करते हैं, चिकित्सक के पास नहीं जाते हैं और दिन-ब-दिन अपने मौखिक स्वास्थ्य को खराब कर लेते हैं। मुंह से आने वाली दुर्गंध के प्रति भी लोग जागरूक नहीं हैं। मौखिक सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही इस दिन की शुरुआत की गई। अगली स्लाइड्स से जानिए विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास, विषय और अन्य जानकारी।

विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास

विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस को मनाने की शुरुआत 20 मार्च 2013 को एफडीआई वर्ल्ड डेंटल फेडरेशन ने की थी। तब से लेकर आजतक हर साल यह दिन मनाया जाता है। इसके बाद अगले ही साल से इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ डेंटल स्टूडेंट्स के सहयोग से एफडीआई एक वार्षिक विश्वव्यापी प्रतियोगिता भी आयोजित करवाई जा रही है। कोरोना के कारण इस तरह की प्रतियोगिता ऑनलाइन ही हो रही हैं।

विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का विषय

वर्ष 2022 के लिए विश्व मौखिक स्वास्थ्य दिवस का विषय ‘ बी प्राइड ऑफ योर माउथ है।’ अर्थात आपको अपने मुंह पर गर्व होना चाहिए जिसका आशय यह है कि आपको अपने मौखिक स्वास्थ्य को हर परिस्थिति में बेहतर रखना है क्योंकि मौखिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं इसलिए समय-समय पर चिकित्सक के पास चेकअप के लिए जाना बहुत जरूरी है। वर्ष 2022 के लिए विषय ‘मौखिक स्वास्थ्य के लिए एक हो जाएं’ था।

इस तरह मनाया जाता है-
इस दिन विभिन्न सेमिनार का आयोजन होता है जिसमें विशेषज्ञ बताते हैं कि किस प्रकार मौखिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए और कैसे इसका संबंध अन्य बीमारियों से भी होता है। जगह- जगह डेंटल चेकअप आदि का आयोजन भी होता है। शहरी और ग्रामिण दोनों ही इलाकों में मौखिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। फिलहाल मौखिक स्वास्थ्य से जुड़ी अधिकतर परिचर्चाएं पिछले वर्ष की तरह इस साल भी ऑनलाइन ही होंगी।

हो सकती है बड़ी बीमारियां

मौखिक स्वास्थ्य यदि ठीक नहीं है तो इससे कई सारी बीमारियां हो सकती है। दांतों में सड़न, कीड़े लगना जैसी समस्या मुंह में मौजूद एसिड के कारण होती है। इस वजह से दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं और यही कारण है कि कैविटी का निर्माण होता है। इसके अलावा मुंह में मौजूद बैक्टीरिया दांतों को खराब करने लगते हैं। समय पर ध्यान न देने पर मुंह का कैंसर भी हो सकता है।

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चेहरे की सुंदरता दांत से होती है. दांतों का संबंध हमारे स्वास्थ्य और सुंदरता दोनों से होता है. दांत अगर साफ और चमकदार होते हैं, तो वो हमारी पर्सनालिटी पर चार चांद लगा देते हैं. दांतों की नियमित सफाई से कई बीमारियों से बचा जा सकता है, लेकिन सच्चाई ये है कि आमतौर पर दांतों से जुड़ी बीमारियों को हर कोई नजरअंदाज करता है. जो बड़ी बीमारियों को निमंत्रण दे देती हैं. आज पूरा विश्व वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मना रहा है. इस दिन को मनाने का मकसद लोगों में दांतों को स्वस्थ रखने के लिए जागरूकता फैलना है. इसी सोच में बदलाव के लिए हर साल 20 मार्च को अलग-अलग थीम पर वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है. लोगों को जागरुक करने के लिए जयपुर में इस बार की थीम ‘Say Ahh: Think Mouth,Think Health’ रखी गई है.

बड़ी समस्या न बन जाए दांतों की मुसीबत
ये बहुत कम लोग ये जानते हैं कि दांतों के रोग भी हमें बड़ी मुसीबत में फंसा सकते हैं. दांतों में सड़न, कीड़े लगना जैसी समस्‍या मुंह में मौजूद एसिड के कारण होती है. इस वजह से दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं और यही कारण है कि कैविटी का निर्माण होता है. इसके अलावा, मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया दांतों कि सतह पर जमा होने लगते हैं, जिसे प्लॉक कहा जाता है.

70 प्रतिशत लोग नहीं कराते जांच
जागरूकता की कमी के चलते करीब 70 फीसदी लोग ऐसे है, जो पांच सालों में एक बार भी अपने दांतों की जांच नहीं कराते हैं. करीब 90 फीसदी लोग ऐसे हैं जो दिनभर में एक बार अपने दांतों की सफाई करते हैं. जानकारी के मुताबिक, 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं दांतों की अलग-अलग बीमारियों से घिरे हुए हैं.

दांतों की लापरवाही से हो सकता है कैंसर
मुंह का कैंसर, जिसे ओरल कैंसर भी कहा जाता हैं. भारत में करीब 30 फीसदी ओरल कैंसर के मरीज होते है, जो कि एडवांस स्टेज में ही सामने आते है. लापरवाही इसका एक मात्र कारण है. यदि समय पर दातों की जांच कराई जाए तो कैंसर को प्राथमिक स्टेज पर ही रोका जा सकता है. आज हमारे आस पास बहुत ही तेज़ गति बढ़ता जा रहा है, जिसका कारण पान मसाला, तम्बाकू व गुटका जैसी चीज़ो का लगातार सेवन करना है. यह भारत की एक प्रमुख स्‍वास्‍थ्‍य संबंधित चिंता का विषय है.

world oral health day essay in hindi 10 lines

  • आज यानि कि 20 मार्च को अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे (World Oral Health Day) मनाया जाता है।
  • इस दिन को मनाने का मकसद लोगों में दंत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।
  • बहुत कम लोग ये जानते हैं कि दांतों के रोग भी हमें बड़ी शारीरिक मुसीबत में फंसा सकते हैं।
  • दांतों में सड़न, कीड़े लगना जैसी समस्‍या मुंह में मौजूद एसिड के कारण होती है।
  • इस वजह से दांतों के इनेमल खोखले होने लगते हैं, और यही कारण है कि कैविटी का निर्माण होता है।
  • इसके अलावा, मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया दांतों कि सतह पर जमा होने लगते हैं जिसे प्लॉक कहा जाता है।
  • यह प्‍लॉक में मौजूद बैक्‍टीरिया आपके खाने में मौजूद शुगर एवं कार्बोहाइडेट को अम्ल में परिवर्तित कर देता है, इसी अम्ल के कारण दांत खराब होने लगते हैं। हालांकि इसे शुरूआती दौर में उपचार किया जा सकता है।
  • हम आपको 5 ऐसे तरीके बता रहे हैं जिससे आप दांतों की इस समस्‍या से दूर रहेंगे।
  • यदि आप चाहते है कि आपका दांत स्वस्थ और कैविटी मुक्त रहे तो इसके लिए सबसे पहले मीठे पदार्थों के सेवन को कम करना होगा।
  • यह मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया दांतों में बनने वाले स्वस्थ्य तरल पदार्थ को बनने से रोकता है, और यही कारण है, कि दांतों में सड़न की समस्या उत्पन्न होती है। इस‍लिए मीठा खाने के बाद मुंह की सफाई जरूरी है।

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World Oral health Day 2022: दुनियाभर में 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे (World Oral health Day 2022) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को मुंह की स्वच्छता के प्रति जागरूक करता है। मुंह की सफाई अन्य अंगों की सफाई के तरह की बहुत जरूरी है। अगर हम दांतों और मसूड़ों की सफाई अच्छी तरह से नहीं करते हैं, तो इससे कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। उदाहरण के तौर पर दांतों की सफाई ना करने से मुंह से बदबू आना, मसूड़ों में दर्द होना, कैविटी की समस्या जैसी कई अन्य समस्याएं होने लगती हैं। इसके अवाला अगर इन छोटी-छोटी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो कई और भी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। चलिए एक बार डालते हैं उन समस्याओं (Oral Diseases) पर नजर-

हैलिटोसिस (Halitosis Disease) –
अक्सर रात का खाना खाने के बाद हम ब्रश नहीं करते हैं। इस वजह से हमारे दांतों के बीच खाना फंस जाता है। अगर आपको भी ऐसी आदत है, तो ये एक गंभीर रूप धारण कर सकता है। दांतों के बीच लंबे समय तक खाना फंसे होने की वजह से बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। दांतों में मौजूद ये बैक्टीरिया भोजन के कणों को सड़ाकर सल्फरडाइऑक्साइड पैदा करता है। इस वजह से हमारे दांतों में हैलिटोसिस की समस्या हो सकती है।

पेरियोडोंटल बीमारी (Periodontal Disease) –
दांतों की सफाई अच्छी तरह से ना करने पर पेरियोडोंटल बीमारी हो सकती है। इस बीमारी से हमारे दांतों की हड्डियां ढीली हो जाती हैं, जिसकी वजह से उम्र से पहले दांत झड़ जाते हैं।

एथरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis Disease) –
यह बीमारी मीठा अधिक खाने की वजह से होता है। मिठाई खाने के बाद हमें दांत धोना बहुत ही जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो एथरोस्क्लेरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे दांतों से शुरू होकर दिमाग पर असर डालती है। इस बीमारी में जीवाणु धमनियों की दीवारों में थक्का जमाने लगता है। इससे दिमाग में ब्लड की आपूर्ति नहीं हो पाती है। इस वजह से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

मुंह का कैंसर (Oral cancer) –
मसूड़ों और दांतों की सफाई अच्छी तरह से ना करने पर मुंह का कैंसर होने की संभावना भी हो सकती है। अगर आप अपनी छोटी-छोटी मुंह की परेशानी को अनदेखा करते हैं, तो इससे कैंसर होने की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।

world oral health day essay in hindi 2022

मुंह के स्वास्थ्य (ओरल हेल्थ) का ध्यान रखना हम सभी के लिए बहुत ही जरूरी है। हम में ज्यादातर लोगों को लगता है कि महज सुबह-शाम ब्रश कर लेना ही ओरल हेल्थ के लिए काफी है, लेकिन यह सिर्फ ओरल हेल्थ की महज एक शुरुआत है। हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है। जिसका मकसद लोगों को ओरल हेल्थ के प्रति जागरूक करना है। इसके प्रति लापरवाही और कई बड़ी समस्याओं की वजह बन सकती है। लेकिन कुछ सुझावों पर अमल करें तो आपके दांत स्वस्थ बने रह सकते हैं।

ब्रश करना

ओरल हेल्थ का ध्यान रखने का सबसे पहला कदम है ब्रश करना। यह बेहद जरूरी है कि आप रोजाना दिन में कम से कम दो बार यानि सुबह और रात को सोने से पहले ब्रश जरूर करें। इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

जरूरी है चेकअप

हममें से ज्यादातर लोग डेंटिस्ट के पास तभी जाते हैं, जब उन्हें दांतों से संबंधित किसी तरह की कोई समस्या होती है, लेकिन इसी समस्या से बचे रहने के लिए साल में कम से कम दो बार डेंटिस्ट के पास चेकअप के लिए जरूर जाएं और दांतों की क्लीनिंग भी करवा लें।

फ्लॉस

दिन में कम से कम एक बार दांतों के बीच फ्लॉस या इंटर-प्रॉक्सिमल ब्रश का इस्तेमाल करें। ऐसा इसलिए कि भोजन के कण या बैक्टीरिया दांतों के बीच जमा हो जाते हैं। फ्लॉस न करने की स्थिति में मसूड़ों में सूजन होने की आशंका होती है।

ध्रूमपान करें अवॉयड

ओरल हेल्थ को मेनटेन रखने के लिए ध्रूमपान करना अवॉयड करें। ध्रूमपान से न सिर्फ दांतों की चमक कम होती है, बल्कि इससे मसूड़ों में ब्लड सर्कुलेशन भी कम होता है। इस वजह से मसूड़ों से संबंधित बीमारियों हो जाती है। इससे बचना ही सही रहता है।

सीमित मात्रा में लें चीनी

अपनी डाइट में मीठी चीज़ों की मात्रा एकदम कम कर दें और अगर खा रहे हैं तो उसके बाद दांतों की सफाई जरूर करें। इससे भी बैक्टीरिया के पनपने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

world oral health day essay in english

World Oral Health Day is organised by FDI World Dental Federation and is celebrated across the world. This day recognise the importance of good oral hygiene practice to adults and children. It also highlights the importance of optimal oral health in maintaining general health and well-being. Every year it is celebrated with a theme and provide a message to the public regarding oral health.

It is rightly said that “Your mouth is amazing! It helps you to eat, speak and smile confidently – to enjoy life”.

World Oral Health Day: History

In 2007, it was first declared and originally was first celebrated on 12 September on the birthday of FDI founder Dr. Charles Godon. Until 2013, the campaign was not fully activated and after the date was changed to 20 March to avoid conflict with the FDI World Dental Congress that was in September.

Why 20 March date was chosen for celebrating World Oral Health Day?

– Seniors those will have 20 natural teeth at the end of their life will be considered healthy.

– Children should possess 20 baby teeth.

– Adults those are healthy should have a total 32 teeth and 0 dental cavities.

– If expressed in numerical basis the above mentioned can be translated as 3/20 therefore 20 March.

World Oral Health Day 2022 Theme

The theme of World Oral Health day 2022 is “Unite for Mouth Health”. The theme focuses on how to take care of mouth and body. FDI on World Health Oral Day wanted to take the pledge to look after their oral health and also to make efforts to reduce the burden of oral hygiene.

Reason behind celebration

Several people in the world face or suffer oral diseases but these conditions can be avoided by raising awareness, education and by providing the right knowledge. This day is also celebrated to support and provide funds for the prevention, detection and treatment program. FDI encourages all the members of National Dental Associations, organisations-government and non-government, media to participate in national and global activities and work towards improving oral health.

Oral Health: Facts

– One of the most common diseases is an oral disease. It is a non-communicable disease and affects people throughout their lifetime. It causes pain, discomfort, disfigurement and even death.

– According to the Global Burden of Disease Study 2016, half of the world’s population is affected by dental caries or tooth decay.

– Do you know that severe periodontal (gum) disease, which may also result in tooth loss, was estimated to be the 11th most prevalent disease globally?

– In some high-income countries, sever tooth loss and edentulism that is no natural tooth was one of the leading ten causes of Years Lived with Disability (YLD).

– The incidence of oral cancer in some Asian-Pacific countries is within the top 3 of all cancers.

– In most of the high-income countries, dental treatment is costly, averaging 5% of total health expenditure and 20% of out-of-pocket health expenditure.

– In most of the low and middle-income countries, oral health care demands are beyond the capacities of health care systems.

– Some of the behavioural risk factors are also associated with oral diseases and are shared with other major non-communicable diseases including an unhealthy diet high in free sugars, tobacco use and harmful use of alcohol.

– Poor oral hygiene and insufficient exposure to fluoride have negative effects on oral health.

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