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वर्ल्ड ह्यूमन राइट्स डे स्पीच 2018 – World Human Rights Day Speech in Hindi & English Pdf Download

World human rights day 2018:  मानवाधिकार मूल रूप से उन अधिकारों के अधिकार हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के पास इंसान होने के कारण होते हैं। ये नगरपालिका से अंतरराष्ट्रीय कानून तक के कानूनी अधिकारों के रूप में संरक्षित हैं। मानवाधिकार सार्वभौमिक हैं। यह कहा जाता है कि ये हर जगह और हर समय लागू होते हैं। मानवाधिकार मानदंडों का एक सेट माना जाता है जो मानव व्यवहार के कुछ मानकों को चित्रित करते हैं। नगर पालिका के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कानून में कानूनी अधिकारों के रूप में संरक्षित, इन अधिकारों को मौलिक अधिकारों के रूप में जाना जाता है कि एक व्यक्ति सिर्फ इसलिए है क्योंकि वह इंसान है।

विश्व मानवाधिकार दिवस पर भाषण

World human rights day 2018 theme: इस बार 2018 की वर्ल्ड ह्यूमन राइट डे की थीम “Inclusion and the right to participate in public life” and “Universal Declaration of Human Rights” है| आइये अब हम आपको विश्व मानवाधिकार दिवस भाषण हिंदी में, vishwa manav adhikar diwas, विश्व मानवाधिकार दिवस कब मनाया जाता है, world human rights day essay, world human rights day is celebrated on आदि की जानकारी किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font , 100 words, 150 words, 200 words, 400 words में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|


विश्व में सदियों तक मानवाधिकारों के बारे में कभी मोचा ही नहीं गया । भारतीय मनीषियों ने धार्मिक चर्चाएँ कीं, आंध्यात्म के बारे में चिंतन किया, दर्शन पर टीकाएँ कीं मगर इन सबके बीच मानव के मूलभूत अधिकारों तथा अन्य अधिकारों की बातें पूरी तरह छूट गईं ।
मनुष्यों के दु:खों का कारण व परिणाम चूँकि पूर्व जन्म से जोड़ा जाता रहा, अत: मानवाधिकारों की बात ही बेमानी थी । अन्य प्राचीन सभ्यताएँ मानवाधिकारों से कोसों दूर थीं, यूरोप में भी पुनर्जागरण के काल तक इसके बारे में कोई चिंता न थी ।
गनीमत इतनी ही थी कि लोग अपने धर्मभीरुपन के कारण कई बार ऐसे कार्यों से बचते थे जिनसे मानवाधिकारों को चोट पहुँच सकती थी । जीवों पर दया, करुणा, परोपकार, धर्म-कर्म, पाप-पुण्य, कर्मफल आदि भावनाओं का प्राबल्य था जससे समाज के सदस्य कुछ हद तक मानवाधिकारों के हनन से बचे रहते थे ।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लोकमान्य तिलक का यह उद्‌घोष कि ”स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्‌ध अधिकार है” प्रत्यक्षतया नवीन यूरोपीय विचारों की प्रतिध्वनि कही जा सकती है । विश्व में परस्पर अनेक युद्‌ध हुए, इतिहास युद्‌ध की घटनाओं का बड़ा भारी पुलिंदा बन गया, साम्राज्यवाद, उपनिवेशवाद आदि सिद्‌धांत दम तोड़ने लगे, दो विश्व-युद्‌धों के दौरान जो कुछ घटा, इन सभी बातों ने मिलकर मानवाधिकारों को एक बड़ा मुद्‌दा बना दिया ।
पिछले दो-तीन सौ वर्षों में दुनिया में बड़ी संख्या में बुद्‌धिजीवियों, चिंतकों, समाजसुधारकों तथा नास्तिक विचारधारा के लोगों ने जन्म लिया । शिक्षा का दायरा बढ़ा और इसकी परिधि में आम लोग बड़ी संख्या में आने लगे जिसने सामाजिक जाति फैलाने का काम किया । पौराणिक बातों को बुद्‌धि के पलड़े पर तोला गया तब कहीं जाकर मानवाधिकारों के प्रति संकल्प की भावना से काम हुआ ।
समानता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था लाने तथा शोषितों को उनका वाजिब हक दिलाने की कम्यूनिस्ट अवधारणा ने भी मानवाधिकारों के प्रति सम्मान करने का मार्ग प्रशस्त किया । विश्व के अनेक देशों में लोकतांत्रिक सरकारों के गठन से इस मार्ग के अवरोध दूर होने लगे क्योंकि सबों को न्याय मिल सके, लोगों को उन्नति के समान अवसर झप्त हों, यह लोकतंत्र का मूलमंत्र है ।
इस तरह जब दुनिया में शांति, स्थिरता, आत्मसम्मान आदि भावनाएँ प्रबल हुईं तो मानव के जायज अधिकारों के बारे में गंभीर चिंतन आरंभ हुआ । संयुक्त राष्ट्र संघ के गठन के तात्कालिक एवं दीर्घकालिक उद्‌देश्यों को गंभीरता से देखें तो मानवाधिकारों को तय करना, उसकी रक्षा करना जैसी बातें उसी में से निकल कर आती हैं ।
संयुक्त राष्ट्र संघ का एक अंग मानवाधिकारों के प्रति समर्पित होकर काम कर रहा है, विभिन्न देशों की सरकारों ने अपने यहाँ मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाएँ गठित की हैं । पूरी दुनिया के लोग मानवाधिकारों के बारे में जागरूक हो सकें, लोग अपने व दूसरों के अधिकारों को जानें आदि उद्‌देश्यों की पूर्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देश हर वर्ष 10 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाते हैं ।
दुनिया में विभिन्न देशों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं मौद्रिक दशाएँ अलग- अलग हैं । लोग भौतिकता की दृष्टि से जितने आधुनिक हुए हैं उतने विचारों की दृष्टि से नहीं । यह विचार-संकीर्णता हमें लोगों के अधिकारों का सम्मान करने से रोकती है । स्त्रियों के प्रति सामूहिक भेद-भाव विभिन्न समाजों एवं राष्ट्रों में आज भी हो रहा है । तानाशाही कानूनों का प्रचलन समाप्त नहीं किया जा सका है, वर्ग संघर्ष और अनावश्यक रक्तपात का दौर जारी है ।
ऐसे में जहाँ लोगों के जीने का अधिकार भी खतरे में पड़ जाता है तो वहाँ अन्य मानवाधिकारों, जैसे- समानता, विचार अभिव्यक्ति, धार्मिक स्वतंत्रता आदि के बारे में बातें करना भी व्यर्थ है । बाल मजदूरी, महिलाओं का यौन शोषण, धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न, जातिगत भेद-भाव, लूट-पाट, बलात्कार आदि सभी बातें मानवाधिकारों के खिलाफ जाती हैं ।
दंगे-फसाद, आतंक व दहशत पर आधारित सामाजिक व्यवस्था में हमारे मूलभूत अधिकारों का हनन सर्वाधिक होता है । सबल सरकारी तंत्र अपने निहत्थे नागरिकों का उत्पीड़न करता है, तो मानवाधिकारवादी फिर किससे गुहार करें । जब निर्धन और असहाय व्यक्ति को मामूली अपराध में वर्षों जेल में सड़ना पड़ता है तब मानवाधिकारों की बात बेमानी हो जाती है ।
युद्‌धबंदियों को जब अमानवीय यातनाएँ दी जाती हैं तो मानवधिकारों पर कुठारघात होता है । कानूनी दाँवपेचों में फँसकर रह जाने वाला हमारा न्यायतंत्र उचित समय पर न्याय नहीं कर पाता है तो इसका कुफल भी आम नागरिकों को ही भुगतना पड़ता है।
समस्या का एक और पहलू यह है कि लोग मानवाधिकारों की व्याख्या अपने-अपने ढंग से करते हैं । कई देशों में इसे लोगों के धार्मिक अधिकारों से जोड़कर अधिक देखा जाता है । कहीं-कहीं व्यक्तियों के अधिकार धार्मिक कानूनों की आड़ में कुचल दिए जाते हैं । जनसंख्या बहुल देशों में पुलिस तंत्र समाज के दबे-कुचलों पर अधिक कहर बरसाता है । बच्चों के अधिकार, अभिभवाकों द्‌वारा कम कर दिए जाते हैं ।
आधुनिक समाज से नैतिक भावनाओं का शनै: – शनै: लोप होना भी मानवाधिकारों के हनन के लिए जिम्मेदार तत्व बन गया है । धार्मिक कट्‌टरता, आतंकवाद जैसे कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं । विश्व मानवाधिकार दिवस हमें इन बातों पर चिंतन करने का एक अवसर प्रदान करता है ।
मानवाधिकारों के प्रति सम्मान केवल संयुक्त राष्ट्र संघ की चिंता का विषय नहीं है, विभिन्न सरकारों एवं वहाँ की आम जनता को भी इस संबंध में अपनी सक्रियता दिखानी होगी । एमनेस्टी इंटरनेशनल नामक संस्था मानवाधिकारों के मामले में प्रतिवर्ष अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करती है ।
इसकी आलोचनाओं का कुछ तो असर होता ही है । लेकिन जब हमारी आलोचना हो, तभी हम मानवाधिकारों के प्रति सजग हों, यह धारणा उचित नहीं है । विभिन्न राष्ट्रों को स्वयं अपने यहाँ की मानवाधिकारों की स्थिति की निरंतर समीक्षा करनी चाहिए तथा सुधारों के लिए तत्परता दिखानी चाहिए । हमें व्यक्तिगत स्तर पर अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी ही होगी ।

The world human rights day speech

World Human Rights Day Speech in Hindi


Human Rights Day is observed every year on 10 December – the day the United Nations General Assembly adopted, in 1948, the Universal Declaration of Human Rights. This year, Human Rights Day marks the 70th anniversary of the Universal Declaration of Human Rights, a milestone document that proclaimed the inalienable rights which everyone is inherently entitled to as a human being — regardless of race, colour, religion, sex, language, political or other opinion, national or social origin, property, birth or other status. It is the most translated document in the world, available in more than 500 languages.
Drafted by representatives of diverse legal and cultural backgrounds from all regions of the world, the Declaration sets out universal values and a common standard of achievement for all peoples and all nations. It establishes the equal dignity and worth of every person. Thanks to the Declaration, and States’ commitments to its principles, the dignity of millions has been uplifted and the foundation for a more just world has been laid. While its promise is yet to be fully realized, the very fact that it has stood the test of time is testament to the enduring universality of its perennial values of equality, justice and human dignity.
The Universal Declaration of Human Rights empowers us all. The principles enshrined in the Declaration are as relevant today as they were in 1948. We need to stand up for our own rights and those of others. We can take action in our own daily lives, to uphold the rights that protect us all and thereby promote the kinship of all human beings.
#StandUp4HumanRights
The Universal Declaration of Human Rights empowers us all.
Human rights are relevant to all of us, every day.
Our shared humanity is rooted in these universal values.
Equality, justice and freedom prevent violence and sustain peace.
Whenever and wherever humanity’s values are abandoned, we all are at greater risk.
We need to stand up for our rights and those of others.

Speech on world human right day in hindi

मानवाधिकार दिवस 2018 में सोमवार 10 दिसम्बर को मनाया जायेगा।

मानवाधिकार दिवस कैसे मनाया जाता है?
ये दिन मानव अधिकारों के सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राजनीतिक सम्मेलनों, बैठकों, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वाद-विवाद और कई और कार्यक्रमों का आयोजन करके मनाया जाता है। कई सरकारी सिविल और गैर सरकारी संगठन सक्रिय रूप से मानव अधिकार कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।

मानवाधिकार दिवस पर कार्यक्रम को अधिक प्रभावशाली और सफल करने के लिये एक विशेष विषय का निर्धारण करके इसे मनाया जाता है। किसी भी देश में मानव गरीबी सबसे बड़ी मानव अधिकार चुनौती है। मानव अधिकार दिवस मनाने का मुख्य लक्ष्य या उद्देश्य मानव जीवन से गरीबी का उन्मूलन और जीवन को अच्छी तरह से जीने में मदद करना है। विभिन्न कार्यक्रम जैसे: संगीत, नाटक, नृत्य, कला सहित आदि कार्यक्रम लोगों को अपने अधिकारों को जानने में मदद करने और ध्यान केन्द्रित करने के लिये आयोजित किये जाते हैं।

बहुत से कार्यक्रम लोगों, बच्चों के साथ ही साथ युवाओं को अपने मानवाधिकारों के बारे में सीख देने के उद्देश्य से आयोजित किये जाते हैं। कुछ विरोधी गतिविधियों का आयोजन उन क्षेत्रों के लोगों को अवगत कराने के लिये किया जाता है जहाँ मानवाधिकार गैर मान्यता प्राप्त और अपमानित है।

मानवाधिकार दिवस को मनाने के कारण और उद्देश्य
मानव अधिकार दिवस मनुष्य के लिए वास्तविक अधिकार प्राप्त करने के लिए दुनिया भर में लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में लोगों के शारीरिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भलें और कल्याण में सुधार करने के लिए मनाया जाता है। इसे मनाने के कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य और कारण निम्न है:

दुनिया भर के लोगों के बीच में मानव अधिकारों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना।
समग्र मानव अधिकारों की स्थिति में प्रगति के लिये संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रयासों पर जोर देना।
एक साथ मानव अधिकारों के विशिष्ट मुद्दों को उजागर करने के लिए सहयोग और चर्चा करना।
इस कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समूहों जैसे: महिलाओं, नाबालिगों, युवाओं, गरीबों, विकलांग व्यक्तियों और आदि अन्य को राजनीतिक निर्णय लेने में भाग लेने और मनाने के लिये प्रोत्साहित करना।

मानव अधिकार दिवस के उद्धरण
“नागरिकों को राज्य की संपत्ति बनाने के लिए संघर्ष करना हमारे लिए वास्तविक संघर्ष है।”
“हम में से बहुत से मानवाधिकारों और कलात्मक स्वतंत्रता की परवाह में रंगने के लिये प्रोत्साहित करते हैं।”
“लोगों को उनके मानव अधिकारों से वंचित करना उनके द्वारा मानवता को बहुत बड़ी चुनौती है।”
“एक व्यक्ति के अधिकार वहाँ समाप्त हो जाते हैं जब वो किसी अन्य व्यक्ति की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करते हैं।”
“युद्ध के समय में नियम शान्त होते हैं।”
“ज्ञान एक आदमी को एक गुलाम होने के लिए अयोग्य बनाता है।”
“जब भी पुरुषों और महिलाओं को उनकी जाति, धर्म, या राजनीतिक विचारों की वजह से सताया जाता है, वो जगह – उस पल में – ब्रह्मांड का केंद्र बन जाना चाहिये।”
“सबसे बड़ी त्रासदी बुरे व्यक्तियों का अत्याचार और दमन नहीं बल्कि इस पर अच्छे लोगों का मौन रहना है।”
“हम सिर्फ दो लोग हैं। ऐसा नहीं है कि हमें बहुत ज्यादा अलग करती है। जैसा मैनें सोचा था उससे ज्यादा, लगभग नहीं के बराबर।”
“कोई फर्क नहीं पड़ता कि कितना करुणाजनक या दयनीय है, हर मानव को अपने जीवन में एक पल नसीब होता है जिसमें वो अपने भाग्य को बदल सकते हैं।”
“दूसरों को बढ़ावा देने के लिए अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करें।”
“आप मानवाधिकारों को अधिकृत नहीं कर सकते हैं।”
“आज मानव अधिकारों का उल्लंघन कल के संघर्षों का कारण हो सकते हैं।”
“हम विश्वास करते हैं कि मानव अधिकार सीमाओं के पार और राज्य की संप्रभुता से अधिक प्रबल होने चाहिए।”
“किसी एक के खिलाफ अन्याय प्रतिबद्ध हर किसी के लिए एक खतरा है।”
“हम एक साथ होकर नरसंहार को फिर से होने से रोक सकते हैं। एक साथ हम अपने बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं।”
“आप एक इंसान हैं। वास्तविकता में आपको जन्मजात अधिकार प्राप्त है। आप कानून से पहले मौजूद गरिमा और श्रेय के लिए हैं।”
“याद रखें जो परिवर्तन आप दुनिया में और अपने स्कूल में देखना चाहते हैं, , वो आप से शुरू हो।”
“यदि कैदी पीटा जाता है, ये एक भय की अभिमानी अभिव्यक्ति है।”
“स्वास्थ्य एक मानवीय आवश्यकता है; स्वास्थ्य एक मानव अधिकार है।”


10 december world human rights day speech

Human Rights Day is observed every year on 10 December – the day the United Nations General Assembly adopted, in 1948, the Universal Declaration of Human Rights. This year, Human Rights Day marks the 70th anniversary of the Universal Declaration of Human Rights, a milestone document that proclaimed the inalienable rights which everyone is inherently entitled to as a human being — regardless of race, colour, religion, sex, language, political or other opinion, national or social origin, property, birth or other status. It is the most translated document in the world, available in more than 500 languages.
Drafted by representatives of diverse legal and cultural backgrounds from all regions of the world, the Declaration sets out universal values and a common standard of achievement for all peoples and all nations. It establishes the equal dignity and worth of every person. Thanks to the Declaration, and States’ commitments to its principles, the dignity of millions has been uplifted and the foundation for a more just world has been laid. While its promise is yet to be fully realized, the very fact that it has stood the test of time is testament to the enduring universality of its perennial values of equality, justice and human dignity.
The Universal Declaration of Human Rights empowers us all. The principles enshrined in the Declaration are as relevant today as they were in 1948. We need to stand up for our own rights and those of others. We can take action in our own daily lives, to uphold the rights that protect us all and thereby promote the kinship of all human beings.
#StandUp4HumanRights
The Universal Declaration of Human Rights empowers us all.
Human rights are relevant to all of us, every day.
Our shared humanity is rooted in these universal values.
Equality, justice and freedom prevent violence and sustain peace.
Whenever and wherever humanity’s values are abandoned, we all are at greater risk.
We need to stand up for our rights and those of others.

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