विश्व हेपेटाइटिस दिवस भाषण 2018 – World Hepatitis Day Speech in Hindi – 28 जुलाई वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे स्पीच

World Hepatitis Day Essay in Hindi
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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2018: विश्व हैपिटाइटिस डे का यह दिन विश्व में हैपिटाइटिस नामक बिमारी के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है| इस दिन को पूरे विश्व के लगभग सभी देशो में मनाया जाता है| इस दिन को मनाने के पीछे एक अहम् कारण है| हैपिटाइटिस बी एक लीवर को प्रभावित करने वाली एक बीमारी है जो की कभी कबार लीवर कैंसर का रूप ले लेती है| यह बीमारी पूरे विश्व के लगभग 325 मिलियन लोगो को प्रभावित करती है| हर साल इस बीमारी की वजह से लगभग 1.34 मिलियन लोगो की मौत हो जाती है| आज के इस पोस्ट में हम आपको world hepatitis day speech in hindi, विश्व हेपेटाइटिस दिवस स्पीच प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर भाषण

World hepatitis day 2018 theme: इस साल की विश्व हेपेटाइटिस डे 2018 थीम है “Eliminate Hepatitis”| आइये देखें hep c awareness day जिसमे की class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर स्पीच सुनाएं| आइये देखें speech on World Hepatitis Day, विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर निबंध, वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे भाषण, निश्चित रूप से आयोजन समारोह या बहस प्रतियोगिता (debate competition) यानी स्कूल कार्यक्रम में स्कूल या कॉलेज में स्पीच में भाग लेने में छात्रों की सहायता करेंगे। इन वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे पर हिंदी स्पीच हिंदी में 100 words, 150 words, 200 words, 400 words जिसे आप pdf download भी कर सकते हैं|

हेपेटाइटिस दुनिया का सबसे आम लिवर इन्फ़ेक्शन है. यह इन्फ़ेक्शन बैक्टीरिया, परजीवी और वायरस के कारण हो सकता है. उदाहरण के लिए अमीबीएसिस के लिए ज़िम्मेदार अमीबा यदि लिवर में चला जाए तो उससे भी हेपेटाइटिस हो सकता है. वायरस के कारण होनेवाले इन्फ़ेक्शन को वायरल हेपेटाइटिस कहते हैं. इसके वायरस पांच प्रकार के होते हैं. इनमें ए और ई के मामले सबसे अधिक देखने मिलते हैं. वहीं बी और सी को सबसे ख़तरनाक माना जाता है. ए और ई इन दोनों वायरस का संक्रमण दूषित पानी और भोजन से होता है. मानव मल में भी इनके वायरस होते हैं. और बी, सी तथा डी वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त और बॉडी फ़्लूइड से फैलते हैं.
विश्व हेपेटाइटिस डे के अवसर पर इस ‌बीमारी के बारे में हमें विस्तार से बताया जसलोक हॉस्पिटल ऐंड रिसर्च सेंटर, मुंबई की कंसल्टेंट-हेपेटोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट ऐंड थेरप्यूटिक एंडोस्कोपिस्ट डॉ जयश्री शाह ने.

वायरल इन्फ़ेक्शन के चलते लिवर में होनेवाली सूजन को हेपेटाइटिस कहते हैं. यह आमतौर पर वायरल इन्फ़ेक्शन से फैलता है. लेकिन इसके अलावा दूसरे माध्यमों से भी हेपेटाइटिस हो सकता है. जैसे-ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस (जब हमारा शरीर लिवर में ऐंटी बॉडीज़ बनाने लगता है) और मेडिकेशन, ड्रग्स, टॉक्सिन्स और अल्कोहल के चलते होनेवाला हेपेटाइटिस.

वायरल हेपेटाइटिस पांच तरह के होते हैं. लिवर के वायरल इन्फ़ेक्शन को ए, बी, सी, डी और ई में वर्गीकृत किया जाता है. हर तरह के इन्फ़ेक्शन के लिए अलग तरह के वायरस ज़िम्मेदार होते हैं.

हेपेटाइटिस ए वायरस (एचएवी) से होनेवाला यह सबसे आम हेपेटाइटिस है. इसका संक्रमण दूषित पानी और भोजन से होता है. आमतौर पर इस संक्रमण का शिकार होनेवाले लोग जल्द ही ठीक हो जाते हैं. उन्हें किसी विशेष ऐंटीवायरल मेडिसिन की ज़रूरत नहीं पड़ती.

यह ख़तरनाक होता है. इसका वायरस हेपेटाइटिस बी से संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ़्लूइड, जैसे-रक्त, वेजाइनल सीक्रेशन, सीमन इत्यादि से होता है. इंजेक्शन ड्रग यूज़, इन्फ़ेक्टेड पार्टनर के साथ सेक्स करने या संक्रमित व्यक्ति से रेज़र शेयर करने से भी हेपेटाइटिस बी का ख़तरा बढ़ जाता है.
सीडीसी (सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन, यूएस) के अनुमान के मुताबिक़ यूएस में 12 लाख तथा पूरी दुनिया में 35 करोड़ लोग इस प्राणघातक वायरस से संक्रमित हैं. भारत में क़रीब 3 करोड़ 60 लाख लोग हेपेटाइटिस बी के संक्रमण के चपेट में हैं. इसकी सबसे भयावह बात यह है कि आमतौर पर मरीज़ को पता ही नहीं होता कि वो इस वायरस से संक्रमित है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता. यदि इस वायरस का उपचार नहीं किया गया तो लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी पैदा कर सकता है.

Speech on World Hepatitis Day in Hindi

Vishwa Hepatitis Diwas Par Nibandh

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हेपेटाइटिस-बी लिवर को प्रभावित करने वाला एक गंभीर संक्रमण है। यह वायरस मरीज के लिवर को निशाना बनाता है जिसके कारण शरीर स्थायी रूप से प्रभावित होता है। इससे डायरिया, भूख कम होना, उल्टियां होना, थकान, मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, पेट दर्द, तेज बुखार और पीलिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हिपेटाइटिस-बी का संक्रमण होने के बाद मरीज़ को ठीक होने में करीब छः महीने का समय लगता है। इसके बाद भी यदि मरीज हिपेटाइटिस-बी पॉजिटिव हो तो इसका मतलब है कि बीमारी गंभीर रूप ले चुकी है और अब यह जीवनपर्यंत रहेगी। गंभीर रूप से संक्रमित होने पर रोगी के लिवर को स्थायी क्षति पहुंचती है। मरीज की लिवर कैंसर की वजह से मृत्यु भी हो सकती है।

हिपेटाइटिस-बी के इलाज से आमतौर पर 90 प्रतिशत वयस्क ठीक हो जाते हैं लेकिन 10 प्रतिशत में बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
संक्रमण की चपेट में आने वाले 90 प्रतिशत शिशुओं को गंभीर हिपेटाइटिस हो जाता है। गंभीर संक्रमण आमतौर पर ऐसे लोगों को होता है जो बचपन में हिपेटाइटिस-बी वायरस की चपेट में आ चुके हों। हिपेटाइटिस-बी वायरस से संक्रमित होने पर हो सकता है कि आपको कोई लक्षण नजर ही न आए।

संक्रमित व्यक्ति से अन्य लोगों को भी संक्रमण फैल सकता है, चाहे उनमें बीमारी के लक्षण दिखाई न भी दे रहे हों। कई दिनों या हफ्तों तक रोगी बीमार महसूस कर सकता है। उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब भी हो सकती है। यदि शरीर हिपेटाइटिस-बी वायरस से सफलतापूर्वक लड़ लेता है तब इस बीमारी के कारण सामने आए लक्षण कुछ हफ्तों या महीनों में गायब हो जाते हैं।

जब मरीज का शरीर इस संक्रमण से लड़ते-लड़ते हार जाता है तो ऐसे में यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। हिपेटाइटिस के कई मरीजों में इस बीमारी की वजह से कोई लक्षण सामने नहीं आते, न ही वे बीमार दिखाई देते हैं। लेकिन फिर भी उनके लिवर को नुकसान होना शुरू हो चुका होता है। साथ ही उनके शरीर से दूसरों तक संक्रमण भी फैल सकता है। संक्रमण होने के बाद शुरुआती संकेत ये हो सकते हैं- भूख कम होना, कम परिश्रम पर अधिक थकान मससूस करना, बार-बार बुखार होना, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द रहना, मितली आना, उल्टियां होना आदि। त्वचा पर पीलापन आना, गहरे पीले रंग का मूत्र होना आदि लक्षण भी सामने आते हैं।

वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे स्पीच

भारत में वायरल हैपेटाइटिस एक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जिसमें हेपेटाइटिस बी सबसे अधिक प्रभावित करने वाला रोग है. भारतीय जनसंख्या का तीन से पांच फीसदी हिस्सा हेपेटाइटिस बी संक्रमण से जूझ रहा है. हर साल 28 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व हेपेटाइटिस दिवस का इस साल का विषय ‘एलिमिनेट हेपेटाइटिस’ (हेपेटाइटिस को खत्म करना) रखा गया है.

विश्व हेपेटाइटिस दिवस रोग के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को शीघ्र निदान, रोकथाम और हेपेटाइटिस के उपचार के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है. हेपेटाइटिस संक्रामक बीमारियों का एक समूह है, जिसे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के रूप में जाना जाता है.

डॉ मोनिका जैन ने बताया, “भारत उन 11 देशों में से एक है, जो पूरे विश्व में हैपेटाइटिस के बोझ का लगभग 50 फीसदी भार उठाते हैं. भारत में हेपेटाइटिस फैलने का प्रमुख कारण मां से बच्चे में वायरस का संचारित होना है. इसके अलावा असुरक्षित रक्त संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित सुइयों का इस्तेमाल भी संचरण का कारण है. इस बीमारी के सबसे आम लक्षणों में त्वचा या आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ जाना, भूख न लगना, उल्टी का आना, बुखार और थकान जो सप्ताहों या महीनों तक बनी रहती है. ऐसी स्थिति में किसी विशेष चिकिस्तक के पास तुरंत जाना चाहिए क्यूंकि इस रोग में लापरवाही घातक साबित हो सकती है.

टिप्पणियां यह रोग मानसून के दौरान अधिक फैलता है, इसलिए इस मौसम में तैलीय, मसालेदार, मांसाहारी और भारी खाद्य पदार्थो के सेवन से परहेज करना चाहिए. पॉलिश किए हुए सफेद चावल, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, केक, पेस्ट्रीज, चॉकलेट्स, एल्कोहोलिक पेय पदार्थ से दूरी बनानी चाहिए और इनके स्थान पर शाकाहारी आहार, ब्राउन राइस, हरी पत्तेदार सब्जियां, पपीता, खीरा, सलाद, नारियल पानी, टमाटर, पालक, आंवला, अंगूर, मूली, नींबू, सूखे खजूर, किशमिश, बादाम और इलायची का भरपूर सेवन करना चाहिए.

World Hepatitis Day Speech in Hindi

भारत में वायरल हेपटाइटिस एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है जिसमें हेपटाइटिस बी सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बीमारी है। भारतीय जनसंख्या का 3 से 5 प्रतिशत हिस्सा हेपटाइटिस बी संक्रमण से जूझ रहा है। हर साल 28 जुलाई को मनाए जाने वाले विश्व हेपटाइटिस दिवस का इस साल का विषय ‘एलिमिनेट हेपटाइटिस’यानी हेपटाइटिस को खत्म करना रखा गया है।

वर्ल्ड हेपटाइटिस डे, इस बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को शीघ्र निदान, रोकथाम और उपचार के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। हेपटाइटिस संक्रामक बीमारियों का एक समूह है जिसे हेपटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के रूप में जाना जाता है। श्री बालाजी ऐक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में हेपटॉलजी की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ मोनिका जैन ने बताया, ‘भारत उन 11 देशों में से एक है, जो दुनियाभर में हेपटाइटिस के बोझ का लगभग 50 फीसदी भार उठाता है। भारत में हेपटाइटिस फैलने का प्रमुख कारण मां से बच्चे में वायरस का संचारित होना है। इसके अलावा असुरक्षित रक्त संक्रमण, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित सुइयों का इस्तेमाल भी बीमारी के फैलने का कारण है।’

हेपटाइटिस की वजह से हर साल 4 लाख लोगों की मौत हो जाती है। वर्ल्ड हेपटाइटिस डे की पूर्व संध्या पर दक्षिण-पूर्व एशिया की WHO की रीजनल डायरेक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में वायरल हेपटाइटिस एक बड़ी जन स्वास्थ्य समस्या है और इसके नियंत्रण और इसे खत्म करने में सभी की भागीदारी होनी चाहिए। खेत्रपाल ने कहा, ‘हेपटाइटिस, लिवर कैंसर और सिरॉसिस का भी बड़ा कारण है। समय से पहले मौत और मृत्युदर में हुई बढ़ोतरी के लिए भी यह बीमारी जिम्मेदार है। साथ ही यह आर्थिक प्रगति को भी कमजोर करती है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के इस बीमारी की चपेट में आने के बावजूद अनुमानित तौर पर केवल 10 में से एक व्यक्ति को ही बीमारी के संबंध में अपनी स्थिति का पता चल पाता है।’

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