वसंत पर कविता – वसंत ऋतु पर कविता- वसंत ऋतु पर छोटी कविता – Basant Ritu Par Kavita Hindi Mein

वसंत पर कविता
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वसंत ऋतु के आगमन पर सब लोग वसंत पंचमी का त्यौहार बना खुशिया मनाते हैं| वसंत के आने पर सर्दियों का अंत होता है और सब जगह खुशाली छा जाती है| आज हम आपके सामने वसंत पर अनेक सुंदर कविताएँ पेश करने जा रहे हैं जिनसे हम सब व Class (कक्षा) 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11 व 12 के विद्यार्थी सीख प्राप्त कर सकते हैं| आइये देखें कुछ वसंत ऋतु पर कविता, वसंत ऋतु पर कविताएं, वसंत ऋतु कविताएँ, वसंत ऋतु कविता इन हिंदी|

बसंत रितु पर कविता

बसंत ऋतु है आयी


देखो बसंत ऋतु है आयी ।
अपने साथ खेतों में हरियाली लायी ॥
किसानों के मन में हैं खुशियाँ छाई ।
घर-घर में हैं हरियाली छाई ॥
हरियाली बसंत ऋतु में आती है ।
गर्मी में हरियाली चली जाती है ॥
हरे रंग का उजाला हमें दे जाती है ।
यही चक्र चलता रहता है ॥
नहीं किसी को नुकसान होता है ।
देखो बसंत ऋतु है आयी ॥
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आया बसंत पोएम इन हिंदी


आया वसंत आया वसंत
छाई जग में शोभा अनंत।
सरसों खेतों में उठी फूल
बौरें आमों में उठीं झूल
बेलों में फूले नये फूल
पल में पतझड़ का हुआ अंत
आया वसंत आया वसंत।
लेकर सुगंध बह रहा पवन
हरियाली छाई है बन बन,
सुंदर लगता है घर आँगन
है आज मधुर सब दिग दिगंत
आया वसंत आया वसंत।
भौरे गाते हैं नया गान,
कोकिला छेड़ती कुहू तान
हैं सब जीवों के सुखी प्राण,
इस सुख का हो अब नही अंत
घर-घर में छाये नित वसंत।
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वसंत ऋतु पर कविता

Small Poem On Basant Ritu Hindi Language

आई बसंत


आई बसंत
हर जुबा पे है छाई ये कहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
दिल को छू जाये मस्त झोका पवन का।
मीठी धूप में निखर जाए रंग बदन का।।
गाये बुजुर्गो की टोली जुबानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
झूमें पंछी कोयल गाये।
सूरज की किरणे हँसती जमी नहलाये।।
लागे दोनों पहर की समां रूहानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
टिमटिमायें ख़ुशी से रातों में तारे।
पिली फसलों को नहलाये दूधिया उजाले।।
गाते जाए सब डगर पुरानी।
आई बसंत की ये ऋतू मस्तानी।।
– उत्पल पाठक
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वसंत ऋतु पर कविता इन हिंदी

Vasant ritu par kavita in hindi 


महके हर कली कली
भंवरा मंडराए रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे
नैनो में सपने सजे
मन मुस्काए
झरने की कल कल
गीत कोई गाये
खेतों में सरसों पीली
धरती को सजाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे..........
ठण्ड की मार से
सूखी हुई धरा को
प्रकृति माँ हरियाला
आँचल उड़ाए
खिली है डाली डाली
खिली हर कोंपल
प्रेम का राग कोई
वसुंधरा सुनाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे.......
मन में उमंगें जगी
होली के रंगों संग
प्यार के रंग में
जिया रँगा जाए
उपवन में बैठी पिया
तुझे ही निहारूं मैं
वसंती पवन मेरा
ह्रदय जलाये रे
देखो सजनवा
वसंत ऋतु आये रे................
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वसंत ऋतु पर छोटी कविता

आ गया बसंत


आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
खेल रही गौरैया सरसों की बाल से
मधुमाती गन्ध उठी अमवा की डाल से
अमृतरस घोल रही झुरमुट से बोल रही
बोल रही कोयलिया ...
आ गया बसंत है, छा गया बसंत है
नया-नया रंग लिए आ गया मधुमास है
आंखों से दूर है जो वह दिल के पास है
फिर से जमुना तट पर कुंज में पनघट पर
खेल रहा छलिया ...
आ गया बसंत है छा गया बसंत है
मस्ती का रंग भरा मौज भरा मौसम है
फूलों की दुनिया है गीतों का आलम है
आंखों में प्यार भरे स्नेहिल उदगार लिए
राधा की मचल रही पायलिया ...
आ गया बसन्त है छा गया बसंन्त है
– कंचन पाण्डेय
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basant ritu par kavita hindi mein – वसंत ऋतु पर कविता हिंदी में


अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।
महक उड़ी है चहके चिड़िया।
भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं।
सोलह सिंगार से क्यारी सजी है।
रस पीने को आ रहे हैं।
लगता है इस चमन बाग में।
फिर से चांदी उग आई है।।
अलौकिक आनंद अनोखी छटा।
अब बसंत ऋतु आई है।
कलिया मुस्काती हंस-हंस गाती।
पुरवा पंख डोलाई है।
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बसंत रितु पर कविता

Basant ritu par ek kavita – vasant ritu par ek kavita

वसंत पंचमी पर हिंदी कविता जानने के लिए आप वसंत पंचमी पर कविता पढ़ सकते हैं जिसमे वसंत पंचमी par kavita, big poem of basant ritu in hindi शामिल है|

यारों का बसन्ता


जब फूल का सरसों के हुआ आके खिलन्ता। और ऐश की नज़रों से निगाहों का लड़न्ता। हमने भी दिल अपने के तईं करके पुखन्ता। और हंस के कहा यार से ऐ लकड़ भवन्ता। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥1॥ एक फूल का गेंदों के मंगा यार से बजरा। दस मन का लिया हार गुंधा, आठ का गजरा। जब आंख से सूरज के ढला रात का कजरा। जा यार से मिलकर यह कहा ऐ! मेरे रजरा। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥2॥ थे अपने गले में तो कई मन के पड़े हार। और यार के गजरे भी थे एक धवन की मिक़दार। आंखों में नशे मै के उबलते थे धुआँ धार। जो सामने आता था यही कहते थे ललकार। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥3॥ पगड़ी में हमारी थे जो गेंदों के कई पेड़। हर झोंक में लगती थी बसन्तों के तईं एड़। साक़ी ने भी मटके से दिया मुंह के तईं भेड़। हर बात में होती थी इसी बात की आ छेड़। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥4॥ फिर राग बसन्ती का हुआ आन के खटका। धोंसे के बराबर वह लगा बाजने मटका। दिल खेत में सरसों के हर एक फूल से अटका। हर बात में होता था इसी बात का लटका। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥5॥ जब खेत पे सरसों के दिया जाके कदम गाड़। सब खेत उठा सर के ऊपर रख लिया झंझाड़। महबूब रंगीलों की भीा एक साथ लगी झाड़। हर झाड़ से सरसों के भी कहती थी अभी झाड़। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥6॥ साथ लगा जब तो अ़जब ऐश का दहाड़ा। जिस बाग़ में गेंदों के गए उसको उखाड़ा। देखी कभी सरसों कभी नरगिस को उजाड़ा। कहते थे इसी बात को बन, झाड़, पहाड़। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥7॥ खु़श बैठे हैं सब शाहो वजीर आज अहा हा!। दिल शाद हैं अदनाओ फ़क़ीर आज अहा हा!। बुलबुल की निकलती है सफ़ीर आज अहा हा!। कहता यही फिरता है 'नज़ीर' आज अहा हा!। सबकी तो बसन्तें हैं पै यारों का बसन्ता॥8॥
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Poems on Vasant – Basant Ritu – Season – वसंत/बसंत/बहार पर कविताएँ

Aaee basant


har juba pe hai chhaee ye kahaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
dil ko chhoo jaaye mast jhoka pavan ka.
meethee dhoop mein nikhar jae rang badan ka..
gaaye bujurgo kee tolee jubaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
jhoomen panchhee koyal gaaye.
sooraj kee kirane hansatee jamee nahalaaye..
laage donon pahar kee samaan roohaanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
timatimaayen khushee se raaton mein taare.
pilee phasalon ko nahalaaye doodhiya ujaale..
gaate jae sab dagar puraanee.
aaee basant kee ye rtoo mastaanee..
– utpal paathak
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सुमित्रानंदन पंत की वसंत पर कविता – Basant par kavita in hindi


मिटे प्रतीक्षा के दुर्वह क्षण,
अभिवादन करता भू का मन !
दीप्त दिशाओं के वातायन,
प्रीति सांस-सा मलय समीरण,
चंचल नील, नवल भू यौवन,
फिर वसंत की आत्मा आई,
आम्र मौर में गूंथ स्वर्ण कण,
किंशुक को कर ज्वाल वसन तन !
देख चुका मन कितने पतझर,ग्रीष्म शरद, हिम पावस सुंदर,
ऋतुओं की ऋतु यह कुसुमाकर,
फिर वसंत की आत्मा आई,
विरह मिलन के खुले प्रीति व्रण,
स्वप्नों से शोभा प्ररोह मन !
सब युग सब ऋतु थीं आयोजन,
तुम आओगी वे थीं साधन,
तुम्हें भूल कटते ही कब क्षण?
फिर वसंत की आत्मा आई,देव, हुआ फिर नवल युगागम,
स्वर्ग धरा का सफल समागम !
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बसंत के मौसम पर कविता

वसन्त की परी के प्रति


आओ, आओ फिर, मेरे बसन्त की परी--
छवि-विभावरी;
सिहरो, स्वर से भर भर, अम्बर की सुन्दरी-
छबि-विभावरी;
बहे फिर चपल ध्वनि-कलकल तरंग,
तरल मुक्त नव नव छल के प्रसंग,
पूरित-परिमल निर्मल सजल-अंग,
शीतल-मुख मेरे तट की निस्तल निझरी--
छबि-विभावरी;
निर्जन ज्योत्स्नाचुम्बित वन सघन,
सहज समीरण, कली निरावरण
आलिंगन दे उभार दे मन,
तिरे नृत्य करती मेरी छोटी सी तरी--
छबि-विभावरी;
आई है फिर मेरी ’बेला’ की वह बेला
’जुही की कली’ की प्रियतम से परिणय-हेला,
तुमसे मेरी निर्जन बातें--सुमिलन मेला,
कितने भावों से हर जब हो मन पर विहरी--
छबि-विभावरी;
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वसंत ऋतु कविता मराठी – basant ritu kavita in marathi

आइये देखें Marathi Poem on Spring season for class 2 & class 3 students, Marathi poetry for kids. 2018 सरस्वती पूजा व सरवती वंदना के साथ स्टूडेंट्स ये कविता भी स्कूल के प्रोग्राम में सुना सकते हैं |वसंत ऋतु मराठी कविता – vasant rutu kavita in marathi इस प्रकार है:


‘आला वसंत, वसंत आला। तनामनाचा झाला हिंदोळा
हिरवे सारे रंग दुलारे। कोकिळ गाणे, निळयांत भरे
रंगा नहाळी, गंधा जिव्हाळी। कोऱ्या फांदीला धुंद कोवळी
आला वसंत, वसंत आला। तनामनाचा झाला हिंदोळा॥’
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वसंत ऋतु पर कविता चित्र सहित

वसंत ऋतु कविता

वसंत ऋतु पर छोटी कविता - Basant Ritu Par Kavita Hindi Mein

जोशे निशातो ऐश है हर जा बसंत का


जोशे निशातो ऐश है हर जा बसंत का।
हर तरफ़ा रोज़गारे तरब जा बसंत का॥
बाग़ो में तुल्फ़ नश्बोनुमा की है कसरतें।
बज़्मों में नग़मा खु़श दिली अफ़्ज़ा बसंत का॥
फिरते हैं कर लिबास बसंती वह दिलबरां।
है जिनसे ज़र निगार सरापा बसंत का॥
जा दर पै यार के यह कहा हमने सुबह दम।
ऐ जान है अब तो हर कहीं चर्चा बसंत का॥
तशरीफ़ तुम न लाये जो कर कर बसंती पोश।
कहिये गुनाह हमने क्या किया बसंत का?
सुनते ही इस बहार से निकला कि जिसके तईं।
दिल देखते ही हो गया शैदा बसंत का॥
अपना वह खु़श लिबास बसंती दिखा 'नज़ीर'।
चमकाया हुस्न यार ने क्या-क्या बसंत का॥
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