Sri Aurobindo Ghosh poems in English & Hindi

Sri aurobindo ghosh poems_in English Hindi
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अरबिंदो घोस जिसे श्री अरबिंदो के नाम से जाना जाता है पूरी दुनिया में महान विद्वान, एक राष्ट्रीय नेता और आध्यात्मिक गुरु के रूप में जाना जाता है। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम से अपनी बुनियादी और उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनकी साहित्यिक उत्कृष्टता अनुकरणीय थी। वह बड़ौदा राज्य के महाराजा के लिए एक सिविल सेवक के रूप में भारत लौट आये। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में श्री अरबिंदो की भागीदारी कम लेकिन प्रभावशाली थी। आज के इस पोस्ट में हम आपको sri aurobindo poems pdf, sri aurobindo poem life and death, the golden light poem by sri aurobindo, who by sri aurobindo summary, savitri poem by sri aurobindo, sri aurobindo biography, sri aurobindo books, sri aurobindo कोट्स, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के अरविन्द घोष की कविता को प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Sri Aurobindo Ghosh Poems

अपने बागीचे में उंची भूरी दीवार के पास
लेटी है वह, पास खडे चांदी के बदन वाले भोजवृक्ष ने
अपना चौडा हरा साया उपर तान रखा है
मध्‍य में छाया की एक दीवार बनाता सा
कामुक सूरज उसे देखने को झुका सा है
वहां वस्‍त्र का कोई टुकडा नहीं
तभी धीमी हवा चली, एक बादल गुजरा धीरे से
सुनता पेडों को, एक पत्‍ता भी हिल नहीं रहा था
सब उस दिव्‍य गर्भ की रक्षा कर रहे थे
एक छुपी चिडिया के आगमन से रोमांचित से।

पेडों के मध्‍य से आती बुलबुल की धीमी आवाज
सन्‍नाटे का कत्‍ल करती एक उल्‍लसित आह
इस सोती रात्रि में कितनी साफ, बातूनी
और कैसी विविध जैसे मीठे जल की धार
एक नन्‍हे सुरंग में गूंजता स्‍वर
हल्‍की-भूरी दीवार के नीचे
फैली डोलती सरसों के बीच गाती है वह
ओ रात्रि की मोहिनी कब्रगाह
ओ स्‍टार्टे के संन्‍यासी
पवित्र उल्‍लास में कांपती हरेक पत्‍ती
ओह , तुम्‍हारी लोरी से खुशनुमा होता रात की हवा का एक झोंका

Sri Aurobindo Ghosh Poems in English

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Bride of the Fire, clasp me now close, –
Bride of the Fire!
I have shed the bloom of the earthly rose,
I have slain desire.

Beauty of the Light, surround my life, –
Beauty of the Light!
I have sacrificed longing and parted from grief,
I can bear thy delight.

Image of Ecstasy, thrill and enlace, –
Image of Bliss!
I would see only thy marvellous face,
Feel only thy kiss.

Voice of Infinity, sound in my heart, –
Call of the One!
Stamp there thy radiance, never to part,
O living sun.
Sri Aurobindo

Famous Poems of Sri Aurobindo Ghosh

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sri aurobindo ghosh poems

passed into a lucent still abode
And saw as in a mirror crystalline
An ancient Force ascending serpentine
The unhasting spirals of the aeonic road.

Earth was a cradle for the arriving god
And man but a half-dark half-luminous sign
Of the transition of the veiled Divine
From Matter’s sleep and the tormented load

Of ignorant life and death to the Spirit’s light.
Mind liberated swam Light’s ocean vast,
And life escaped from its grey tortured line;

I saw Matter illumining its parent Night.
The soul could feel into infinity cast
Timeless God-bliss the heart incarnadine.

Sri Aurobindo Ghosh Poem

Mystic Miracle, daughter of Delight,
Life, thou ecstasy,
Let the radius of thy flight
Be eternity.

On thy wings thou bearest high
Glory and disdain,
Godhead and mortality,
Ecstasy and pain.

Take me in thy wild embrace
Without weak reserve
Body dire and unveiled face;
Faint not, Life, nor swerve.

All thy bliss I would explore,
All thy tyranny.
Cruel like the lion’s roar,
Sweet like springtide be.

Like a Titan I would take,
Like a God enjoy,
Like a man contend and make,
Revel like a boy.

More I will not ask of thee,
Nor my fate would choose;
King or conquered let me be,
Live or lose.

Even in rags I am a god;
Fallen, I am divine;
High I triumph when down-trod,
Long I live when slain.
Sri Aurobindo

Sri Aurobindo Ghosh as a Poet

नया साल हमें कई चीजें देता है
पर पुरानी दुनिया के तोहफे तीन थे
सायप्रस के कबूतर, देवों की भेंट की गई शराब
सिसली की पैन की मीठी फोंफी
जीने के आधार प्यार, शराब और गीत
मधुर, प्राचीन और सुरीले
क्‍या आगामी दिनों में भी
जीवन इन्‍हीं से आरंभ होगा,
फिर लाजवाब होगा ?

जब से मैंने खिड़की पर तुम्‍हारा चेहरा देखा है, मधुर
प्यारा, एक जादू सा कर दिया है तूने मेरे हृदय पर, मेरे पांंवों पर
मेरा दिल तुम्हारे चेहरे के लिए , मेरे पांव तुम्‍हारी खिडकी के लिए अभी भी
जैसे कोई अदृश्‍य शक्ति मुझे बांधे हुए हो
ओ सुंदर चुडैल, ओ निगाहों के निर्दोष घेरे
तुमने अचानक मुझे अपने उच्‍छवासों के बंधन में बांध दिया है
मैं धूप को देखता हूं, जैसे तुम्‍हारा विहंसता चेहरा हो
जब मैं एक फूल खरीदता हूं, यह तुम होती हो अपनी उज्‍ज्‍वल सुंदरता में
मैंने अपनी आत्‍मा को तुम्‍हारे सौंदर्यपाश से बचाने की कोशिश की
मैं और प्रयास नहीं करूंगा , इसे अब तुममें ही स‍मर्पित होना है
अब मैं भी तुम्‍हें अपने बाहुपाश में लूंगा, ओ मेरी फाख्‍ता
और तुम्‍हारा भी प्यार की यातना और माधुर्य से परिचय कराउंगा
जब तूने अपनी खिडकी से बाहर आमद-रफत से भरे इस शहर पर निगाह डाली
तो क्‍या तुमने मेरा दिल लेने की बाबत सोचा, क्‍या दया आयी मुझ पर
लेकिन तुमने उसे देखा जिसने कभी पाप का मजाक उडाया है
और जीवन के साथ जुआ खेला है उसे पूरी तरह खो देने या पाने के लिए
मैं तुम्‍हें एक फडफडाते पक्षी की तरह तुम्‍हारे घोसले से दूर कर दूंगा
तुम प्‍यार के मजबूत घुटनों पर खडी होगी, अपने धवल उष्‍ण वक्षों के साथ घबरायी सी
तुम्‍हारी आंखें खुशी से बंद नहीं होंगी
फिर वह उज्‍ज्‍वल क्षण आएगा, खिलेगा एक और गुलाब।

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