Simon Commission – साइमन कमीशन कि जानकारी हिंदी में

simon commission

साइमन कमीशन (Simon commission)

साइमन कमीशन ब्रिटिश प्रधान मंत्री सर जॉन साइमन(John Simon ) ने शुरू किया था। साइमन कमीशन की घोषणा 8 November 1927 को की गयी। इस कमीशन में साथ ब्रिटिश सांसद के लोग थे। साइमन कमीशन को श्वेत कमीशन (White Commision ) भी कहा जाता है। इस कमीशन को बनाने का मुख्य कारण था भारत में संविधान को सुधारना।

साइमन कमीशन की नियुक्ति कब हुई?

कमीशन ki नियुक्ति 8 November 1927 को हुई।

साइमन कमीशन में किसी भी भारतीय को नहीं रखा गया था जिसका बहुत विरोध हुआ। महात्मा गाँधी जी ने इसका भारत के नेताओ का अपमान माना।

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what is साइमन कमीशन ?

Aaiye jaane साइमन कमीशन के बारे में

  • ब्रिटिश लोगों का पतन न हो
  • सांप्रदायिक भावनाओं पैदा हो जिससे लोगो के अंदर मतभेद बना रहे।
  • लोगों को यह दिखाना की ब्रिटिश सरकार भारतीयों के लिए प्रयासों में ईमानदार थे।
  • शक्तिशाली प्रांत बनाया जा सके जिससे क्षेत्रीयवाद की भावना पैदा हो।
  • राजनीतिक अधिकार बन सके।

साइमन कमीशन का विरोध क्यों?

इस कमीशन का जमकर विरोध हुआ क्योकि इसमें एक भी भारतीय नहीं था।
साइमन कमीशन से यह देखना चाहते थे की क्या अब भारत को अधिकार देने चाहिए य नहीं, अगर दिए जाये तो उसका महत्त्व क्या होगा?

दूसरा कारण 1927को मद्रास कांग्रेस के अध्यक्ष श्री एम.एन. अंसारी ने कहा कि “भारतीय जनता का अधिकार है की वह अपने संविधान का निर्णय कर सके लेकिन साइमन कमीशन के द्वारा उसे मना क्र दिया गया मुस्लिम लीग ने भी इसका बहिष्कार किया

साइमन कमीशन के सुझाव

सभी देशो में व्यवस्तिथ तथा ज़िम्मेदार सरकार बनाई जाये|
केन्द्र में उत्तरदायी सरकार के गठन का अभी समय नहीं आया|
केंद्रीय विधान सभा मण्डल को दुबारा बनाय जाए को जिसमें एक की भावना को छोड़कर संगी भावना का पालन किया जाय,साथ ही इसके सदस्य विधान सभा मण्डल द्वारा चुने जाएं|

भारत में 3 फरवरी 1928 को कमीशन आया था और इसी दिन विरोधस्वरूप पुरे देश में हड़ताल का आयोजन किया गया था |

साइमन कमीशन के सदस्यों के नाम- नेहरु, गांधी ,लाला लाजपत राय,भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त,क्लेमेंट एटली

लाला लाजपत राय की मृत्यु

चौरी चौरा की घटना के बाद भारत में साइमन कमीशन से दुबारा आंदोलन शुरू हो गया 1927 में मद्रास में कांग्रेस का सम्मेलन हुआ साइमन कमीशन के बहिष्कार का फैसला लिया गया। जिसमें नेहरु, गांधी सभी ने इसका विरोध करनेका निर्णय लिया । मुस्लिम लीग ने भी साइमन के बहिष्कार का फैसला किया। 3 फरवरी 1928 को कमीशन भारत पहुंचा। साइमन कोलकाता लाहौर लखनऊ, विजयवाड़ा और पुणे सहित जहाँ जहाँ भी पहुंचा उसे जबर्दस्त विरोध का सामना करना पड़ा और लोगों ने उसे काले झंडे दिखाए। पूरे देश में SImon go back (साइमन वापस जाओ) के नारे भारत देश में गूंजने लगे थे। पंडित जवाहर लाल नेहरू को लखनऊ में हुए लाठीचार्ज में घायल कर दिया था और गोविंद वल्लभ पंत को अपंग कर दिया था। 30 अक्टूबर 1928 को उनका देहांत हो गया|  लाला लाजपत राय के पक्ष में साइमन का विरोध कर रहे युवाओं को बेरहमी से पीटा गया। पुलिस ने लाला लाजपत राय पर लाठी बरसाई और वह झख्मी हो गए और मृत्यु से पहले उनके ये शब्द थे कि “आज मेरे उपर बरसी हर एक लाठी कि चोट अंग्रेजोंं की ताबूत की कील बनेगी” यही कारणवश 17 नवंबर 1928 को उनकी मृत्यु हो गई।

साइमन कमीशन क्यों लाया गया?

ब्रिटिश सरकार के हिसाब से यह कमीशन भारत के सविधान को सुधारने के लिए बनाया गया लेकिन इसके पीछे असली कारण कुछ और थे।
ब्रिटिश सरकार कमीशन भेजने के ज़रिये भारत के लोगो के बीच सामाजिक और राजनितिक जीवन को लेकर गलत विचार लाना चाहती थी।
स्वराज दल ने सुधार के लिए बोला तो ब्रटिश सरकार मान गयी क्योकि वह सोचती थी की इससे दाल आकर्षित हो जायगा और उसकी वास्तविकता समाप्त हो जायगी।

साइमन कमीशन भारत कब आया?

चौरी चौरा की घटना के बाद आया

साइमन वापस जाओ (SIMON GO BACK)

कांग्रेस, मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा और लिबरल फेडरेशन ने एक साथ मिलकर इस कमीशन का विरोध किया। 3 पफरवरी, 1928 को बम्बई में आकर पुरे भारत में हड़ताल रखते हुए कमीशन को बहिष्कार(boycott) किया। जगह जगह पर काले झण्डों व ‘साइमन वापस जाओ’’ के नारों का उच्चारण किया । अनेक स्थानों पर पुलिस तथा जनता में विवाद हुए। विरोध में जुलूस निकला गया । पुलिस ने लाठी चार्ज किया और उसी बीच लाला लाजपत राय पर लाठियों और डण्डों की मार पड़ी और उनकी चोट लगने क वजह से मौत हो gyi। भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने भारतीय भावनाओं को प्रकट करने के लिए केन्द्रीय व्यवस्थापिका (CentralAdministration ) में बम फेंका और लालाजी पर लाठी चार्ज के लिए सॉन्डर्स की लाहौर में हत्या कर दी गयी।

केन्द्रीय विधानसभा ने भी कमीशन का स्वागत करने से मना कर दिया. पटना, कलकत्ता, मद्रास और अन्य जगहों पर साइमन विरोधी नारे लगाये गये. सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार किये और हरेक प्रकार से इसे दबाने की कोशिश की, परन्तु लोगो ने हार नहीं मणि और जमकर विरोध किया ।

Saiman kamishan  परिणाम

कमीशन के दौरान हुए दंगो से बाहर निकलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने १९३०की रिपोर्ट में भारतीयों रायो को ध्यान रखने पर मंज़ूरी दी। 1935 में प्रांतीय स्तर पर ज़िम्मेदार सरकार की मांग की गयी ।
1937 में चुनावो का आयोजन किया और ज़्यादातर सभी देशो में सरकार वापस आ गयी और इसी की वजह से भारतीयों को स्वतंत्रता की लड़ाई में प्रोत्साहन मिला । क्लेमेंट एटली ने 1933 में अपनी रिपोर्ट में कहा की ब्रिटिश शासन भारत की प्रगति , सामाजिक सुधार लाने में सक्षम नहीं है और 1947 में क्लेमेंट एटली भारतीय स्वतंत्रता के सबसे माननिये नेता बन गए, जिन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री के रूप में भारत की स्वतंत्रता पर निर्णय लेने के लिए खुद को tyaar किया।

इस तरह से साइमन कमीशन के विरोध के चलते भारत को स्वतंत्रता मिली और भारत ने अपना खुद का संविधान भी लागू किया|

साइमन कमीशन का भारतीयों ने विरोध क्यों किया?

भारत में साइमन कमीशन का विरोध इसलिए हुआ क्योकि साइमन कमीशन के अंदर 7 सदस्य बने हुए थे जिसमे सभी अंग्रेज शामिल थे। कमिशन में एक भी भारतीय नहीं था और इसी कारण सभी भारतीयों ने अपना अपमान समझा और इस कमीशन का बहिष्कार किया। चौरा चोरी के बाद आंदोलन फिर से शुरू हो गया।
1927 में मद्रास में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमें सर्वसम्मति से साइमन कमीशन ने BOYCOTT का फैसला लिया साथ ही मुस्लिम लीग ने भी जमकर विरोध किया।

साइमन कमीशन और डॉ अम्बेडकर

डॉ. अम्बेडकर विदेश से पढ़ कर भारत लौटे और उन्होंने बड़ौदा नरेश के यहां नौकरी करने लगे तब उनके साथ कई प्रकार के जाति सम्बंधित भेदभाव होने लगे । जिसकी वजह से उन्होंने 11 दिन पर ही नौकरी छोड़ कर बडौदा वापस जाने का फैसला किया, तभी से उन्होंने अपने समाज को अधिकार दिलाने की बात ठान ली।

उन्होंने अंग्रेजी सरकार को बार-बार पत्र लिखकर depressed class की स्थिति से बारे में बतायासाथ ही उनके अधिकार की मांग की।

बाबा साहेब के लेटर में छुआछूत व भेदभाव के बारे पढ़कर में पढ़ कर अंग्रेज़ दंग रह गए कि क्या एक मानव दूसरे मानव के साथ ऐसे भी पेश आ सकता है।1927 में depressed class की स्थिति के अध्ययन के लिए साईमन की अध्यक्षता में एक कमीशन का निर्माण किया गया।

जब कांग्रेस व महत्मा गांधी को (अम्बेडकर और साइमन कमीशन)के भारत आगमन की जानकारी मिली तो उन्हें लगा कि यदि यह कमीशन भारत आकर depressed class की वास्तविक स्थिति का अध्ययन करेगा तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर अंग्रेजी हुकूमत इस वर्ग के लोगों को अधिकार दे देगी और य सभी जानकारी आप साइमन कमीशन पीडीऍफ़ के ज़रिये भी प्राप्त कर सकते है।

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