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Short Speech on Dussehra in Hindi – Vijayadashami Speech 2018 – दशहरा पर भाषण पीडीऍफ़ डाउनलोड

दशहरा 2018: दशहरा का पर्व भारत में मनाये जाने वाला एक भव्य त्यौहार है जो की हर शहर में मनाया जाता है| इस दिन का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है| यह दिन अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है| इस दिन को विजयदशमी भी कहा जाता है| यह दिन हर साल महा नवमी के अगले दिन पड़ता है| इस दिन का महत्व इसलिए भी है क्योकि इसी दिन श्री राम ने रावण का वद्ध करके देवी सीता को उसके कैद से छुड़ाया था| भारत में बहुत सी जगह रावण, मेघनाथ एवं कुम्भकर्ण की लकड़ी की प्रतिमाओं का दहन किया जाता है| ये Short Speech on Dussehra in Hindi व स्पीच कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

दशहरा पर भाषण

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दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है । यह त्योहार अशिवन महीने के शुक्ल पक्ष में दस दिनों तक मनाया जाता है । इन दिनों माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है । त्योहार का अंतिम दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है । असत्य पर सत्य की जीत इस त्योहार का मुख्य संदेश है ।

माँ दुर्गा शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं । जीवन में शक्ति का बहुत महत्त्व है, इसलिए भक्तगण माँ दुर्गा से शक्ति की याचना करते हैं । पं.बंगाल, बिहार, झारखंड आदि प्रांतों में महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है । नौ दिनों तक दुर्गासप्तशती का पाठ चलता रहता है । शंख, घड़ियाल और नगाड़े बजते हैं । पूजा-स्थलों में धूम मची रहती है । तोरणद्वार सजाए जाते हैं । नवरात्र में व्रत एवं उपवास रखे जाते हैं । मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है । प्रसाद बाँटने और लंगर चलाने के कार्यक्रम होते हैं ।

उत्तर भारत के विभिन्न प्रांतों में रामलीला का मंचन होता है । कहा जाता है कि विजयादशमी के दिन भगवान राम ने लंका नरेश अहंकारी रावण का वध किया था । रावण अत्याचारी और घमंडी राजा था । उसने राम की पत्नी सीता का छल से अपहरण कर लिया था । सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए राम ने वानरराज सुग्रीव से मैत्री की । वे वानरी सेना के साथ समुद्र पार करके लंका गए और रावण पर चढाई कर दी । भयंकर युद्ध हुआ । इस युद्ध में मेघनाद, कुंभकर्ण, रावण आदि सभी वीर योद्धा मारे गए । राम ने अपने शरण आए रावण के भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया और पत्नी सीता को लेकर अयोध्या की ओर प्रस्थान किया । रामलीला में इन घटनाओं का विस्तृत दृश्य दिखाया जाता है । इसके द्वारा श्रीराम का मर्यादा पुरुषोत्तम रूप उजागर होता है ।

रामलीलाओं के साथ-साथ अन्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं । स्थान-स्थान पर मेलों का आयोजन किया जाता है । बच्चे मेले में उत्साह के साथ भाग लेते हैं । वे झूला झूलते हैं और खेल-तमाशे देखते हैं । हर तरफ उत्साह और उमंग मचा रहता है । विजयादशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन का कार्यक्रम होता है । इसमें हजारों लोग भाग लेते हैं । पुतले जलाकर लोग बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दोहराते हैं । इस अवसर पर आकर्षक आतिशबाजी भी होती है । फिर लोग मिठाइयाँ खाते और बाँटते हैं ।

विजयादशमी के दिन माँ दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम होता है । ट्रकों और ट्रॉलियों पर प्रतिमाएँ लाद कर लोग गाजे-बाजे के साथ चलते हैं । लोग भारी संख्या में इस जलूस में शामिल होते हैं । प्रतिमाएं विभिन्न मार्गों से होते हुए किसी नदी या सरोवर के तट पर ले जायी जाती हैं । वहाँ इनका विसर्जन कर दिया जाता है । इस तरह दस दिनों तक चलनेवाला उत्सव समाप्त हो जाता है ।

दशहरा भक्ति और समर्पण का त्योहार है । भक्त भक्ति- भाव से दुर्गा माता की आराधना करते हैं । नवरात्र में दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा होती है । दुर्गा ही आवश्यकता के अनुसार काली, शैलपुत्री, ब्रह्‌मचारिणी ,कुष्मांडा आदि विभिन्न रूप धारण करती हैं और आसुरी शक्तियों का संहार करती हैं । वे आदि शक्ति हैं । वे ही शिव पत्नी पार्वती हैं । संसार उन्हें पूजकर अपने अंदर की आसुरी शक्ति को नष्ट होने की आकांक्षा रखता है । दुर्गा रूप जय यश देती हैं तथा द्वेष समाप्त करती हैं । वे मनुष्य को धन- धान्य से संपन्न कर देती हैं ।

भारत में हिमाचल प्रदेश में कुच्छू घाटी का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है । यहाँ का दशहरा देखने देश-विदेश के लोग आते हैं । यहाँ श्रद्‌धा, भक्ति और उल्लास की त्रिवेणी देखने को मिलती है ।

इस तरह दशहरा हर वर्ष आता है और लोगों में भक्तिभाव भर जाता है । पर्व-त्योहारों के माध्यम से लोग अपनी ऊब मिटाते हैं और अपने भीतर कार्य करने का नया उत्साह उत्पन्न करते हैं ।

Dussehra speech in hindi

अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है दशहरा पर भाषण लिखे| जिसके लिए हम पेश कर रहे हैं दशहरा त्योहार पर भाषण इन हिंदी.

प्रस्तावना

दशहरा हिन्दू धर्म के लोगों का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इसे पूरे उत्साह के साथ पूरे देश में हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा लगातार दस दिन तक मनाया जाता है। इसलिये इसे दशहरा कहते है। पहले नौ दिन तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है , दसवें दिन लोग असुर राजा रावण का पुतला जला कर मनाते है। दशहरा का ये पर्व सितंबर और अक्तूबर के महीने में दीवाली के दो या तीन हफ्ते पहले पड़ता है।

हिन्दू देवी दुर्गा की पूजा के द्वारा इस त्यौहार को मनाया जाता है तथा इसमें प्रभु राम और देवी दुर्गा के भक्त पहले या आखिरी दिन या फिर पूरे नौ दिन तक पूजा-पाठ या व्रत रखते है। नवरात्र को दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है जब देवी दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है।

क्यों ना हम पहले आपने अन्दर के रावण को मारें।

“रावण पर विजय पाने के लिए पहले खुद राम बनना पड़ता है”

हम बाहर रावण का पुतला तो जलाते है लेकिन अंदर उसे पोषित करते है। वो तो सतयुग था जिसमें केवल एक रावण था जिसपर भगवान राम ने विजय प्राप्त की। यह तो कलयुग है जिसमे हर घर में रावण है। इतने रावण पर विजय प्राप्त करना मुश्किल है। विजयादशमी बहुत ही शुभ और ऐतिहासिक पर्व है। लोगो को इस दिन अपने अंदर के रावण पर विजय प्राप्त कर हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाना चाहिए। जिस प्रकार एक अंधकार का नाश करने के लिए एक दीपक ही काफी होता है वैसे ही अपने अंदर के रावण नाश करने के लिए एक सोच ही काफी है।

ना जाने कई सालों सदियों से पूरे देश में रावण का पुतला हर साल जलाकर दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है। अगर रावण की मृत्यु सालों पहले हो गयी थी तो फिर वो आज भी हमारे बीच जीवित कैसे है? आज तो कई रावण हैं। उस रावण के दस सिर थे लेकिन हर सिर का एक ही चेहरा था जबकि आज के रावण का सिर एक है पर चेहरे अनेक हैं, चेहरों पर चेहरे हैं जो नकाबों के पीछे छिपे हैं। इसलिए इनको ख़त्म करने के लिए साल में एक दिन काफी नहीं है इन्हें रोज मारना हमें अपनी दिनचर्या में शामिल करना होगा। उस रावण को प्रभु श्रीराम ने धनुष से मारा था, आज हम सभी को राम बनकर उसे संस्कारों से, ज्ञान से और अपनी इच्छा शक्ति से मारना होगा।

निष्कर्ष

ये 10 दिन लंबा उत्सव होता है, जिसमें से नौ दिन देवी दुर्गा की पूजा के लिये और दसवाँ दिन विजयादशमी के रुप में मनाया जाता है ये असुर राजा रावण पर भगवान राम की जीत के अवसर के रुप में भी मनाया जाता है। इसके आने से पहले ही लोगों द्वारा बड़ी तैयारी शुरु हो जाती है। ये 10 दिनों का या एक महीने का उत्सव या मेले के रुप में होता है जिसमें एक क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्रों में जाकर दुकान और स्टॉल लगाते है।

दशहरा पर स्पीच

Short Speech on Dussehra in Hindi

दशहरा या विजयदशमी या आयुध-पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है।

भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है।

प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है।

दशहरा या दसेरा शब्द ‘दश'(दस) एवं ‘अहन्‌‌’ से बना है। दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है। भारत कृषि प्रधान देश है।

जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना हमें नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। तो कुछ लोगों के मत के अनुसार यह रणयात्रा का द्योतक है, क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाते हैं, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि सहेज कर में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

इस उत्सव का सम्बन्ध नवरात्रि से भी है क्योंकि नवरात्रि के उपरांत ही यह उत्सव होता है और इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कार्यों का भी उल्लेख मिलता है।

Speech on dussehra in english

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Dussehra festival is one of the most significant and longest festivals of the India. It is celebrated every year with full enthusiasm, faith, love and honour by the people of Hindu religion all over the country. It is really the great time to enjoy by all. Students also get holidays for many days from their schools and colleges to fully enjoy the festival of Dussehra. This festival falls two or three weeks earlier to the Diwali every year in the month of September or October. People wait for this festival to occur with huge patience.

India is a country which is very famous for its culture and tradition, fair and festivals. It is a country of fairs and festivals where people celebrate and enjoy every festival with great joy and faith. The festival of Dussehra has been declared by the government of India as the gazetted holiday to allow people to fully enjoy this festival as well as giving importance to the Hindu festival. The meaning of Dussehra is the victory of Lord Rama over the ten headed demon king Ravana. The real meaning of the word Dussehra is the defeat of ten headed (Dus head) demon on tenth day of this festival. Tenth day of this festival is celebrated by burning the Ravana clones by the people all over the country.

There are many myths related to this festival according to the customs and traditions of the people in many regions of the country. This festival was started celebrating by the people of Hindu religion from the day Lord Rama had killed the demon king Ravana on the day of Dussehra (means 10th day of Ashwayuja month of Hindu calendar). Lord Rama had killed Ravana because he had kidnapped the Mata Seeta and was not agree to return her to the Lord Rama. Lord Rama had won the war with Ravana by the help of younger brother Lakshman and Vanar soldier of Hanuman.

According to the Hindu Scripture, Ramayana, it is mentioned that Lord Ram had performed Chandi Hom to make goddess Durga happy and get blessings. In this way Lord Rama, got victory by knowing the secret of Ravana’s killing on 10th day of the war. Finally, he retained his wife Seeta safely after killing the Ravana. Dussehra festival is also known as the Durgotsav because it is considered that on the same day another demon called Mahishasura was killed by the Mata Durga on the tenth day. A huge fair of Ramlila takes place in the Ram-Lila ground where people from nearby regions come to see the fair and dramatic representation of the ramlila.

Vijayadashami speech in Hindi

हमारे पर्व हमारी संस्कृति व सभ्यता की पहचान हैं । देश में वर्ष भर में अनेकों त्योहार होते हैं और इन सभी त्योहारों को मनाने की एक अपनी ही परंपरा व विधि है ।

सभी त्योहार मानवता के लिए कोई न कोई संदेश लेकर आते हैं । हमारे त्योहार लोगों में परस्पर प्रेम व सद्‌भावना का संदेश देते हैं तथा जीवन में नवीन खुशियों व उल्लास का संचार करते हैं । होली, रक्षाबंधन, दीपावली व विजयादशमी हिंदुओं के प्रमुख त्योहार हैं ।

विजयादशमी अथवा दशहरा पर्व का हिंदुओं के लिए विशेष महत्व है । प्रतिवर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाने वाले यह त्योहार जनमानस में खुशी, उत्साह व नवीनता का संचार करता है । यह पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन अयोध्या के राजा राम ने लंका के आततायी राक्षस राजा रावण का वध किया था । तब से लोग भगवान राम की इस विजय स्मृति को विजयादशमी के पर्व के रूप में मनाते चले आ रहे हैं ।

विजयादशमी का यह पर्व अच्छाई की बुराई पर, सत्य की असत्य पर विजय का प्रतीक है । यह त्योहार हमें संदेश देता है कि बुरा व्यक्ति चाहे कितना ही बलवान व प्रभावशाली क्यों न हो उसका अंत सुनिश्चित है । मृत्यु पर भी विजय पाने वाले रावण का अंत कर मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अधर्म पर धर्म की विजय दिलाई ।

विजयादशमी के पर्व को मनाने के लिए उक्त मान्यता के अतिरिक्त भी अनेक मत प्रचलित हैं । बंगाल में उलर-पूर्वी भारत की मान्यताओं से भिन्न यह त्योहार महाशक्तिशालिनी माँ दुर्गा को सम्मान व उन्हें श्रद्‌धासुमन अर्पित करने के लिए मनाया जाता है । इस अवसर पर व्रत, पूजा, उपासना, दुर्गा-पाठ आदि के कार्यक्रम होते हैं । इसके अतिरिक्त जगह-जगह पर माँ की सुंदर-सुसज्जित झाँकियाँ निकाली जाती हैं ।

Short speech on dussehra

प्रस्तावना

पूरे देश में मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है दशहरा। ये हर साल सितंबर या अक्टूबर के महीने में दीपावली के पर्व से 20 दिन पहले आता है। लंका के असुर राजा रावण पर भगवान राम की जीत को दिखाता है दशहरा। भगवान राम सच्चाई के प्रतीक है और रावण बुराई की शक्ति का। देवी दुर्गा के पूजा के साथ हिन्दू लोगों के द्वारा ये महान धार्मिक उत्सव और दस्तूर मनाया जाता है। इस पर्व को पूरे देश में मनाने की परंपरा और संस्कार क्षेत्र दर क्षेत्र अलग-अलग है। ये पर्व बच्चों के मन में काफी खुशियां लाता है।

रामलीला मंचन

हर तरफ जगमगाती रोशनी और पटाखों की शोर से गूँजता माहौल। बच्चे और बाकी सभी लोग रामलीला को पूरी रात देखते है। रामलीला मंचन के द्वारा वास्तविक लोग रामायण के पात्रों और उनके इतिहास को बताते है। हजारों की संख्या में आदमी, औरत और बच्चे रामलीला मैदान में अपने पास के क्षेत्रों से इस उत्सव का आनन्द उठाते है। राम, सीता और लक्ष्मण के किरदार के लिये वास्तविक कलाकार होते है वहीं रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के कागज के पुतले बनाये जाते है।

निष्कर्ष

विजयादशमी एक ऐसा पर्व है, जिसे लोगों के मन में नई ऊर्जा, बुराई पर अच्छाई की जित और लोगों के मन में नई चाह और सात्विक ऊर्जा भी ले आता है। भगवान राम ने कैसे बुराई का अंत कर रावण पर विजय प्राप्त की। और माँ दुर्गा ने महिषासुर को मारकर बुराई का अंत किया। 9 दिन देवी माँ के पूजा अर्चना के बाद यह विजयादशमी आती है। इस दिन पकवान आदि सबके घरों में बनाये जाते है।

Dussehra speech in marathi

दशहरा हा हिंदू धर्माचा सर्वात महत्वाचा उत्सव देशभरात साजरा केला जातो. दरवर्षी सप्टेंबर किंवा ऑक्टोबर महिन्यात दिवाळीच्या उत्सवात ते दरवर्षी येते. दुश्हराचा उत्सव राक्षस राजा रावणवर भगवान रामचा विजय दर्शवितो. भगवान राम सत्याचे प्रतीक आहेत आणि रावण दुष्ट शक्तीचे प्रतिनिधित्व करतात. हा दुर्गा देवीच्या उपासनेत हिंदू लोकांचा उत्सव साजरा केला जातो. हा उत्सव साजरा करण्याची परंपरा आणि संस्कृती देशाच्या क्षेत्रामध्ये बदलली जाते.

दहा दिवसांचा मोठा उत्सव आहे, त्यापैकी नऊ दिवस देवी दुर्गाची पूजा करून आणि दहाव्या दिवशी विजय दशमी म्हणून राक्षस राजा रावण या दिवशी भगवान रामचा विजय साजरा करतात. या उत्सवासाठी एक मोठी तयारी होती जी काही दिवसांपूर्वीच अचूक तारखेपासून सुरू होते. संपूर्ण दहा दिवस किंवा संपूर्ण महिनाभर एक मोठा मेळा आयोजित केला जातो जेथे दूरच्या प्रदेशांतील लोक लोक आणि लोकांच्या आवश्यक गोष्टींच्या दुकाने आणतात. हे प्रत्येक समाजातील किंवा समाजातील राम-लीला मैदानावर होते जेथे सर्व दिवस दशेराच्या नाट्यपूर्ण नाट्यपूर्ण नाट्यपूर्ण नाट्यपूर्ण नाट्यपूर्ण समारंभाचे आयोजन केले जाते. रावण, कुंभकर्ण आणि मेघनाथ यांचे पेपर मॉडेल राम लीला मैदानात तयार आहेत आणि वास्तविक लोक राम, सेता आणि लक्ष्मण यांची भूमिका बजावतात.

सर्वत्र दिवे चालू आहेत आणि संपूर्ण वातावरण फटाकेच्या आवाजाने भरलेले आहे. संपूर्ण रात्री राम-लीलासह मेळावा पाहण्यासाठी लोक आणि मुले वापरत असत. राम लीलातील खर्या लोकांद्वारे भगवान रामच्या जीवनातील महत्वाच्या घटना दर्शविल्या जातात. जवळील प्रदेशातील हजारो पुरुष, महिला आणि मुले राम लीला ग्राउंडमध्ये शोचा आनंद घेण्यासाठी एकत्र येतात.

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