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Speech on Diwali in Hindi – Diwali Speech 2018 – दीपावली पर भाषण पीडीऍफ़ डाउनलोड

Diwali 2018: दिवाली भारत में मनाए जाने वाला एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है| यह पर्व ज्यादातर हिन्दू धर्म के अनुयाई का त्यौहार है| इस पर्व को दीपावली के नाम से भी जाना जाता है| यह पर्व अन्धकार पर प्रकाश का प्रतीक है| कहा जाता है की इसी दिन भगवान् राम सीता माता एवं लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस आये थे| इस दिन पर भारत में विभिन्न जगह घर को साफ़ किया जाता है और अच्छे से सजाया जाता है | माना जाता है जिसके घर साफ़ होते है उन्ही के घर में माँ लक्ष्मी विराजती है|

Diwali speech in Hindi Pdf

दीपावली 2018 कब है: दिवाली उजाले का त्यौहार है| इस वर्ष २०१८ की दिवाली 7 नवंबर बुधवार के दिन है| अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है दिवाली पर भाषण लिखे| आइये अब हम आपको diwali speech in hindi, दिवाली पर निबंध, diwali in hindi speech, Diwali kavita in hindi, दिवाली स्पीच इन हिंदी, दिवाली का भाषण, Diwali Quotes in Hindi, दीपावली भाषण, Diwali Quotes in Hindi, दिवाली भाषण, diwali speech in hindi for school, diwali speech in office, diwali speech in telugu, आदि की जानकारी किसी भी भाषा जैसे Hindi, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection है

दीवाली एक बहुत ही सुंदर पर्व है जो अपने साथ बहुत सारे खुशयों को ले के आता है | ये रौशनी का त्यौहार है और इससे दीपोत्सव भी कहा जाता है | दीपावली अन्धकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है और इसी तरह ये हमारे जीवन में भी खुशियों का उजाला भर देता है| ये त्यौहार हमारे आपसी रिश्तों को मजबूत करता है और छोटी मोती मन-मुटाव को दूर करके हमारे रिश्तों में मिठास भर देता है |

दीवाली न केवल भारत में पर भारत से बहार भी कई देशों में मनाया जाता है | इस त्यौहार को एक सरकारी अवकाश का दिन होता है जिसमें सारे सरकारी कार्यालय जैसे स्कूल, कॉलेज ,बैंक आदि सब बंद रहते है |दीपावली अनेक धर्मों के लोगों द्वारा मनाया जाता है और ये पर्व की उत्त्पति से अनेक कहानियाँ जुडी है | पर वे सब कहानियां बुराई पर अच्छाई की जीत को, अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाते हैं |

दीवाली खासकर इसीलिए मनाई जाती है क्यूंकि उस दिन भगवान् श्री रामचंद्र ने लंकापति रावण का वध करके अपनी धर्मपत्नी सीता को उस राक्षस के चंगुल से छुड़ा कर वापस अपने राज्य अयोध्या पहुंचे थे| भगवान् ने रावण का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत पायी थी इसलिए अयोध्यावासी उनके भव्य भाव से स्वागत करने के लिए पुरे अयोध्या में घी का दीपक जला कर उस अमावास की काली रात्री को दीयों की रौशनी से प्रकाशित कर दिया था |तब से दीपावली त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक माना जाता है और तभी से दशहरा पर्व के 20 दिन बाद ये महान पर्व दीवाली को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है |

दीपावली त्यौहार का हम सबको बहुत बेसब्री से इंतज़ार रहता है |इसलिए ये त्यौहार आने से करीब 1 महिना पहले से ही हम इसके तैयारियों में जुट जाते हैं |लक्ष्मीजी हमेशा स्वच्छ और साफ़ जगह पर निवास करते हैं इसलिए हम सबसे पहले सफाई से शुरुआत करते हैं | हम अपने पुरे घर, आँगन, और दूकान के अछे से सफाई करके ,उनमें सफेदी और नए रंग भी लगाये जाते हैं |

दीवाली के 4-5 दिन पहले नए कपडे और साथ में घर के लिए अनेक चीजों जैसे पूजा सामान ,दिया बत्ती,सोना चांदी के सामान, दोस्तों और रिश्तेदारों में बांटने के लिए उपहार आदि ख़रीदे जाते हैं |साथ ही में स्वादिस्ट मिठाइयों का भी प्रबंध किया जाता है |दीवाली के दिन सुबह घर को अछे से धोया जाता है और पुरे घर को फुलून की माला और आम के पत्तों के साथ सजाया जाता है |घर के मुख्या द्वार को केला के पेड़ और पदम् फूलों से सजाया जाता है|

दिवाली पर भाषण

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प्रस्तावना

दीवाली को रोशनी का त्योहार के रुप में जाना जाता है जो भरोसा और उन्नति लेकर आता है। हिन्दू, सिक्ख और जैन धर्म के लोगों के लिये इसके कई सारे प्रभाव और महत्तम है। ये पाँच दिनों का उत्सव है जो हर साल दशहरा के 21 दिनों बाद आता है। इसके पीछे कई सारी सांस्कृतिक आस्था है जो भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अपने राज्य के आगमन पर मनाया जाता है। इस दिन अयोध्या वासियों ने भगवान राम के आने पर आतिशबाजी और रोशनी से उनका स्वागत किया। हिन्दुओं के सभी पर्वों में दीपावली का महत्व व लोकप्रियता सर्वाधिक है। दीपावली का अर्थ है दीपों की माला।

महालक्ष्मी पूजा

यह पर्व प्रारम्भ में महालक्ष्मी पूजा के नाम से मनाया जाता था । दीपावली के पहले दिन को धनतेरस या धन त्रेयोंदशी कहते है जिसे माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ मनाया जाता है। इसमें लोग देवी को खुश करने के लिये भक्ति गीत, आरती और मंत्र उच्चारण करते है। दूसरे दिन को नारक चतुर्दशी या छोटी दीपावली कहते है जिसमें भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। ऐसी धार्मिक धारणा है कि सुबह जल्दी तेल से स्नान कर देवी काली की पूजा करते है और उन्हें कुमकुम लगाते है। कार्तिक अमावस्या के दिन समुद्र मंथन में महालक्ष्मी का जन्म हुआ। लक्ष्मी धन की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण धन के प्रतीक स्वरूप इसको महालक्ष्मी पूजा के रूप में मनाते आये। आज भी इस दिन घर में महालक्ष्मी की पूजा होती है।

तीसरा दिन मुख्य दीपावली का होता है जिसमें माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है, अपने मित्रों और परिवारजन में मिठाई और उपहार बाँटे जाते है साथ ही शाम को जमके आतिशबाजी की जाती है।

चौथा दिन गोवर्धन पूजा के लिये होता है जिसमें भगवान कृष्ण की आराधना की जाती है। लोग गायों के गोबर से अपनी दहलीज पर गोवर्धन बनाकर पूजा करते है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर अचानक आयी वर्षा से गोकुल के लोगों को बारिश के देवता इन्द्रराज से बचाया था। पाँचवें दिन को हम लोग जामा द्वितीय या भैया दूज के नाम से जानते है। ये भाई-बहनों का त्योहार होता है।

दीवाली भारत का एक राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पर्व है। इस त्यौहार को हिन्दू, मुस्लिम ,सिख और ईसाई सभी मिलकर मनाते हैं। दीपावली के दौरान लोग अपने घर और कार्य स्थली की साफ-सफाई और रंगाई-पुताई करते है। आमजन की ऐसी मान्यता है कि हर तरफ रोशनी और खुले खिड़की दरवाजों से देवी लक्ष्मी उनके लिये ढेर सारा आशीर्वाद, सुख, संपत्ति और यश लेकर आएंगी। इस त्योहार में लोग अपने घरों को सजाने के साथ रंगोली से अपने प्रियजनों का स्वागत करते है। नये कपड़ों, खुशबूदार पकवानों, मिठाइयों और पटाखों से पाँच दिन का ये उत्सव और चमकदार हो जाता है।

स्वच्छता का प्रतीक

दीपावली जहाँ रौनक और ज्ञान का प्रतीक है वही स्वच्छता का प्रतीक भी है। घरों में पिम्स, मच्छर, खटमल, आदि विषैले किटाणु धीरे-धीरे अपना घर बना लेते हैं। मकड़ी के जाले लग जाते है लोग इनकी सफाई करा देते है और घर की रंगाई फर्श की सफाई सब कर देते है। इस दिन हर जगह स्वच्छता ही दिखाई देती है। सबके घरों का एक-एक कोना साफ़ होता है। और रौनक जगमगा उठती है। घी के दिए की खुशबू पूरे वातावरण में फैली होती है। सबके मन में नई ऊर्जा और नया उत्साह जन्म लेता है। लोग अपनी बुराइयों को त्याग कर अच्छे और सच्चे राह पर चलने की कामना करते है।

निष्कर्ष

गणेश को शुभ शुरुआत के देवता और लक्ष्मी को धन की देवी कहा गया है। इस अवसर पर पटाखे मुख्य आकर्षण हैं। पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को घरों और मिठाई वितरण में पकाया स्वादिष्ट भोजन दीवाली उत्सव का हिस्सा हैं। लोग सड़कों, बाजारों, घरों और परिवेश में समृद्धि और कल्याण की इच्छा के लिए तेल से भरे प्रकाश की मिट्टी के साथ दीवाली का स्वागत करते हैं। दीवाली की रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुल गए क्योंकि वे देवी लक्ष्मी की यात्रा की उम्मीद करते हैं।

Diwali bhashan in hindi

Diwali speech in hindi pdf

प्रस्तावना

भारत एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा त्योहार मनाये जाते है, यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग अपने-अपने उत्सव और पर्व को अपने परंपरा और संस्कृति के अनुसार मनाते है। दीवाली हिन्दू धर्म के लिये सबसे महत्वपूर्ण, पारंपरिक, और सांस्कृतिक त्योहार है जिसको सभी अपने परिवार, मित्र और पड़ोसियों के साथ पूरे उत्साह से मनाते है। दीपावली को रोशनी का त्योहार भी कहा जाता है। दीपावली, भारत में हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है।

दीपावली कब और क्यों आता है?

ये बेहद खुशी का पर्व है जो हर साल अक्तूबर या नवंबर के महीने में आता है। हर साल आने वाली दीवाली के पीछे भी कई कहानीयाँ है जिसके बारे में हमें अपने बच्चों को जरूर बताना चाहिये। दीवाली मनाने का एक बड़ा कारण भगवान राम का अपने राज्य अयोध्या लौटना भी है, जब उन्होंने लंका के असुर राजा रावण को हराया था। इसके इतिहास को हर साल बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रुप में याद किया जाता है।

अपनी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल का वनवास काट कर लौटे अयोध्या के महान राजा राम का अयोध्या वासियों ने जोरदार स्वागत किया था। अयोध्या वासियों ने अपने राजा के प्रति अपार स्नेह और लगाव को दिल से किये स्वागत के द्वारा प्रकट किया। उन्होंने अपने घर और पूरे राज्य को रोशनी से जगमगा दिया साथ ही राजा राम के स्वागत के लिये आतिशबाजी भी बजाए।

दीपावली का अर्थ

रोशनी का उत्सव ‘दीपावली’ असल में दो शब्दों से मिलकर बना है- दीप+आवली। जिसका वास्तविक अर्थ है, दीपों की पंक्ति। वैसे तो दीपावली मनाने के पीछे कई सारी पौराणिक कथाएं कही जाती है लेकिन जो मुख्य रुप से प्रचलित मान्यता है वो है असुर राजा रावण पर विजय और भगवान राम का चौदह साल का वनवास काटकर अपने राज्य अयोध्या लौटना।

इस दिन को हम बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये भी जानते है। चार दिनों के इस पर्व का हर दिन किसी खास परंपरा और मान्यता से जुड़ा हुआ है जिसमें पहला दिन धनतेरस का होता है इसमें हमलोग सोने-चाँदी के आभूषण या बर्तन खरीदते है, दूसरे दिन छोटी दीपावली होती है जिसमें हमलोग शरीर के सारे रोग और बुराई मिटाने के लिये सरसों का उबटन लगाते है, तीसरे दिन मुख्य दीपावली होती है इस दिन लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है जिससे घर में सुख और संपत्ति का प्रवेश हो, चौथे दिन हिन्दू कैलंडर के अनुसार नए साल का शुभारम्भ होता है और अंत में पाँचवां दिन भाई-बहन का होता है अर्थात् इस दिन को भैया दूज कहते है।

बच्चों की दीवाली

बच्चे इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते है और पर्व आने और बहुत खुश और उत्तेजित हो जाते है अपने भगवान को प्रसन्न करने के लिये लोगों ने लजीज पकवान बनाये, हर कोई एक दूसरे को बधाई दे रहा था, बच्चे भी खूब खुश थे और इधर-उधर घूमकर अपनी प्रसन्नता जाहिर कर रहे थे। हिन्दू कैलंडर के अनुसार सूरज डूबने के बाद लोग इसी दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते है।

जहाँ एक ओर लोग ईश्वर की पूजा कर सुख, समृद्धि और अच्छे भविष्य की कामना करते है वहीं दूसरी ओर पाँच दिनों के इस पर्व पर सभी अपने घर में स्वादिष्ट भोजन और मिठाइयां भी बनाते है। इस दिन लोग पशा, पत्ता आदि कई प्रकार के खेल भी खेलना पसंद करते है। इसको मनाने वाले अच्छे क्रियाकलापों में भाग लेते है और बुराई पर अच्छाई की जीत के लिये गलत आदतों का त्याग करते हैं। इनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ, समृद्धि, संपत्ति और प्रगति आयेगी। इस अवसर पर सभी अपने मित्र, परिवार और रिश्तेदारों को बधाई संदेश और उपहार देते है।

आर्थिक महत्व

दीवाली का त्यौहार भारत में खरीद के अवधि का पर्व है। यह पर्व नए कपड़े घर के सामान, उपहार, सोने, आभूषण और अन्य बड़ी खरीदारियों का समय है। इस पर्व पर खरीदारी और खर्च को काफी शुभ माना जाता है। क्योंकि लक्ष्मी को, धन, समृद्धि, और निवेश की देवी माना जाता है। दीवाली भारत में सोने और आभूषणों की खरीद का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। आतिशबाजी की खरीद भी इस दौरान अपने चरम सीमा पर रहती है। प्रत्येक वर्ष दीवाली के दौरान पांच हज़ार करोड़ रुपए के पटाखों अदि की खपत होती है।

निष्कर्ष

दीपावली पर्व है अपने अंदर के अंधकार को मिटा के समूचे वातावरण को प्रकाशमय बनाना। दीपावली हिंदूओं का प्रमुख पर्व है। यह पर्व समूचे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। दीपावली के दिन घरों में दिए, दुकानों तथा प्रतिष्ठानों पर बहुत सारे सजावट और दिए जलाये जाते है। बाजारों में खूब चहल-पहल होती है। मिठाई तथा पटाखों की दुकानें खूब सजी होती हैं। इस दिन पकवानों तथा मिठाइयों की खूब बिक्री होती है। बच्चे अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियां तथा अन्य पटाखे खरीदते हैं और बड़े बच्चों द्वारा किये गए आतिशबाजी का आनंद उठाते है।

दीपावली का भाषण

प्रस्तावना

दीपावली एक महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध उत्सव है जिसे हर साल देश और देश के बाहर विदेश में भी मनाया जाता है। इसे भगवान राम के चौदह साल के वनवास से अयोध्या वापसी के बाद और लंका के राक्षस राजा रावण को पराजित करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

भगवान राम की वापसी के बाद, भगवान राम के स्वागत के लिये सभी अयोध्या वासियों ने पूरे उत्साह से अपने घरों और रास्तों को सजा दिया। ये एक पावन हिन्दू पर्व है जो बुराई पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के रुप में है। इसे सिक्खों के छठवें गुरु श्रीहरगोविन्द जी के रिहाई की खुशी में भी मनाया जाता है, जब उनको ग्वालियर के जेल से जहाँगीर द्वारा छोड़ा गया।

दीपावली कब-क्यों मनाई जाती है?

ये पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। अमावस्या के दिन बहुत ही अँधेरी रात होती है जिसमें दीवाली पर्व रोशनी फ़ैला ने का काम करती है। वैसे तो इस पर्व को लेकर कई कथाये है लेकिन कहते हैं भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्या वासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था।

बाजारों को दुल्हन की तरह शानदार तरीके से सजा दिया जाता है। इस दिन बाजारों में खासा भीड़ रहती है खासतौर से मिठाइयों की दुकानों पर, बच्चों के लिये ये दिन मानो नए कपड़े, खिलौने, पटाखे और उपहारों की सौगात लेकर आता है। दीवाली आने के कुछ दिन पहले ही लोग अपने घरों की साफ-सफाई के साथ बिजली की लड़ियों से रोशन कर देते है।

दीवाली उत्सव की तैयारी

दीवाली के दिन सब बहुत खुश रहते है एक दूसरे को बधाइयां देते है। बच्चे खिलौने और पटाके खरीदते है, दीवाली के कुछ दिन पहले से ही घर में साफ़ सफाई शुरू हो जाती है। लोग अपने घर का सज-सज्जा करते है। लोग इस अवसर पर नए कपड़े, बर्तन, मिठाइयां आदि खरीदते है।

देवी लक्ष्मी की पूजा के बाद आतिशबाजी का दौर शुरु होता है। इसी दिन लोग बुरी आदतों को छोड़कर अच्छी आदतों को अपनाते है। भारत के कुछ जगहों पर दीवाली को नया साल की शुरुआत माना जाता है साथ ही व्यापारी लोग अपने नया बही खाता से शुरुआत करते है।

निष्कर्ष

दीपावली, हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्योहार है। दीपों का खास पर्व होने के कारण इसे दीपावली या दीवाली नाम दिया गया। कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह महा पर्व, अंधेरी रात को असंख्य दीपों की रौनक से प्रकाशमय कर देता है। दीवाली सभी के लिये एक खास उत्सव है क्योंकि ये लोगों के लिये खुशी और आशीर्वाद लेकर आता है। इससे बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ ही नया सत्र की शुरुआत भी होती है।

Diwali speech in gujarati

દિવાળી તરીકે પણ દિવાળી તરીકે ઓળખાય છે. દીપાવલી હિન્દુઓના મુખ્ય તહેવારોમાંનું એક છે. તે કાર્તિક મહિનાના નવા ચંદ્ર દિવસે ઉજવવામાં આવે છે. આ પ્રકાશનો તહેવાર છે. આ દિવસે, ઘર-ઘરની પ્રકાશ શાઇન્સ.

દિવાળી તહેવાર એક દિવસ નથી, પરંતુ જે કાર્તિક કૃષ્ણના તેજસ્વી પખવાડિયામાં dooj માટે ઉત્સાહ ઘણો વિચારથી સંપન્ન હોય છે અનેક Pvon એક જૂથ thrayodashi. આ તહેવારો છે – ધન ત્રોડાદી, હેલ ચતુર્દશી, દીપાવલી, ગોવર્ધન પૂજા અને ભાઈ દુજ.

દિવાળી રાત્રિનો સમય દેવતા લક્ષ્મી અને Vignvinashk અને Mngldata ગણેશની સંપત્તિ પૂજા થાય છે. દરિયાઈ મરચાંમાંથી મેળવેલા ચૌદ રત્નોમાં લક્ષ્મી પણ એક મણિ હતો. લક્ષ્મી રત્નનો જન્મ કાર્તિક મહિનાના નવા ચંદ્ર પર થયો હતો. તે દિવસથી, કાર્તિકના અમાવ્ય લક્ષ્મી પૂજાના તહેવાર બન્યા. ગણેશ લક્ષ્મી સાથે ઉપાસના કરે છે કારણ કે ગણેશ સંપત્તિનું રક્ષણ કરે છે અને તમામ પ્રકારનાં ઘૃણાસ્પદ આનંદો નાશ કરે છે અને સમૃદ્ધિ લાવે છે.

દિવાળીની ઉજવણી પાછળ એક વાર્તા છે કે ભગવાન રામ જ દિવસે તેની પત્ની પરત સીતા અને ભાઈ લક્ષ્મણ રાવણ હત્યા બાદ અયોધ્યા સામેલ છે. વસાહતમાંથી 14 વર્ષ પાછા ફરવાના ઉત્સાહમાં, અયોધ્યાએ તેમના મકાનોને શણગાર્યા હતા અને રાતના ઘરોમાં ખાસ લાઇટ બનાવ્યાં હતા. ત્યારથી દીપાવલી પર, લોકો તેમના સુશોભિત મકાનમાં દીવો પ્રગટતા અને પ્રકાશ ગોઠવણ કરે છે.

આ તહેવાર પણ પાકથી સંબંધિત છે. આ સમયે ખેતરમાં નવી પાક વધવાની શરૂઆત થાય છે. ખેડૂતો ધન-લક્ષ્મીમાં સ્વાગતના રૂપમાં નવી પાક ઉજવે છે. પાક રાખવા માટે, બાર્ન અને ઘરો લીપિંગ દ્વારા તૈયાર કરવામાં આવે છે. તે વરસાદને કારણે નુકસાનને પણ વળતર આપે છે. રાત્રે રાત પ્રગટાવવામાં આવે છે, જેમાં જંતુઓ-મોથ અને મચ્છર નાશ પામે છે. ઘરનો આંગણા સુઘડ દેખાય છે. શહેરોમાં પણ, લોકો તેમના ઘરોમાંથી કચરો કાઢે છે અને દિવાલો પેઇન્ટ કરે છે. વેપારીઓ તેમના જૂના ખાતાઓને સ્થાયી કરીને નવા ખાતાઓ તૈયાર કરે છે.

દિવાળી પહેલેથી જ બજારમાં છે. લોકો નવા કપડાં ખરીદે છે વેપારીઓ દુકાનો શણગારે છે. ગ્રાહકોના ટ્રાફિકની ઝડપમાં વધારો કરે છે. કન્ફેક્શનરો તેમને બનાવવા દ્વારા સ્વાદિષ્ટ મીઠાઈ બનાવે છે. પોટરીની માટી લઈને પોટર બજારમાં આવે છે. કપાસ અને મગફળી વેચનારા લોકોની સંખ્યામાં વધારો થયો છે. કેટલાક લોકો ચાંદીના સિક્કા, પછી કેટલાક ઝવેરાત ખરીદે છે. અન્ય લોકોને ભેટો ઓફર કરવાની માંગ વધે છે. ત્યાં આનંદ અને આનંદ છે. ખરીદનાર અને વિક્રેતા બંને ખુશ છે. પોલીસ પેટ્રોલિંગ વધે છે કારણ કે તેને સલામતીની ખાસ વ્યવસ્થા કરવી પડે છે.

દીપાવલીના દિવસે વ્યસ્ત લાગે છે. ગૃહકાર્ય ઘરમાં વિશિષ્ટ વાનગી બનાવે છે. બાળકો સૂર્યમાં બૉમ્બ અને ફટાકડાને સૂકવે છે. કાર્યકારી લોકો ઓફિસમાંથી ભેટ પ્રાપ્ત કરવાથી ખુશ છે. Shopkeepers દુકાનમાં પૂજા માટે તૈયાર વ્યસ્ત છે. લોકો એકબીજાને શુભેચ્છાઓ આપે છે અને દીપાવલીની ભેટ આપે છે. લોકો માળાના નાના ટુકડાઓ, પૂજાના અન્ય વસ્તુઓ, મીણબત્તી અને લક્ષ્મી-ગણેશ ખરીદે છે. દુકાન-દુકાન, ઘર-ઘરની ઉપાસનામાં શ્રદ્ધાંજલિ અર્થે પંડિતજી મહેમાનો કામ કરવા બહાર આવ્યા છે. બાળકો સાંજે રાહ જોતા રાહ જુએ છે જેથી તેઓ ફટાકડાનો આનંદ માણી શકે.

સાંજનો સમય આવે છે. ઘરેલુ ઉગાડેલા દીવા, મીણબત્તીઓ અને વીજળી રંગબેરંગી બલ્બ્સ અને પીછાથી શાઇન્સ થાય છે. એવું લાગે છે કે આકાશમાંના બધા તારાઓ પૃથ્વી પર નીચે આવ્યા છે. તે એક મહાન અદ્ભુત દ્રશ્ય છે. ભારત- સ્વર્ગનો સ્વર્ગ જમીન સુધી મર્યાદિત છે. આ ઉપરાંત, બૉમ્બ-ફટાકડા અને સ્પાર્ક્સના અવાજો અને ચમત્કારો થાય છે. સમગ્ર દેશમાં કલાકથી અબજો એક દંપતિ માં ફૂંકાય છે કારણ કે દિવાળીના હવેથી પ્રકાશ તહેવાર છે, આ અવાજ તહેવાર બની ગયો છે. આ ધ્વનિ તહેવારને લીધે, પ્રદૂષણનું સ્તર મોટા પ્રમાણમાં વધી ગયું છે.

ઊંડા બર્ન, ક્રેકરો ફાટી નીકળ્યાં અને લક્ષ્મી-ગણેશ પૂજા શરૂ થઈ. કોન પૂજા સમાપ્ત થઈ ત્યારે પ્રસાદ વિભાજિત થયો હતો. પાડોશી એકબીજાને ભેટો અને ભેટો આપવા ગયા. ભાઈબહેનોની ભાવના મજબૂત થઈ. ઘર-ઘરના આનંદની સુખદ ક્ષણો લોકોએ મીઠાઈ ખાવાનું શરૂ કર્યું એક બાજુથી વાનગી ખાવા અને ખવડાવવાની એક સતત પ્રક્રિયા હતી. પરિવારના બધા લોકો એકસાથે ભેગા થયા અને સ્પાર્ક છોડવાનું શરૂ કર્યું. કેટલાક લોકો છત પર ચઢી જાય છે અને શહેરની સુશોભનને જુએ છે. કેટલાક વ્યભિચારી સંવેદના લોકો પોતાની જાતને વ્યસ્ત રાખતા ગેમિંગ અને પીવાની તૈયારીમાં ભેગા થયા છે.

Diwali speech in marathi

दीपावली याला दिवाळी असेही म्हणतात. दीपावली हे हिंदूंच्या मुख्य उत्सवांपैकी एक आहे. कार्तिक महिन्याच्या नवीन चंद्र दिवशी हा उत्सव साजरा केला जातो. हा प्रकाशचा उत्सव आहे. या दिवशी, घरोघरच्या प्रकाशात प्रकाश पडतो.

दीपावली हा एक-दिवसीय उत्सव नाही, परंतु शुक्ल पक्ष दुजपासून कार्तिक कृष्ण त्रयदशीचा आनंद घेतलेल्या लोकांचा हा समूह आहे. हे सण – धन त्रोदशी, नर्क चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा आणि भाऊ दुज आहेत.

दीपावलीच्या रात्री, देवी लक्ष्मी जी, संपत्ती व संपत्ती देवी, आणि भगवान विष्णवनाशक आणि मांगलदार गणेशाची मूर्ती यांची पूजा केली जाते. लक्ष्मी समुद्राच्या मंथन पासून प्राप्त चौदा रत्न एक मणी होते. कार्तिक महिन्याच्या नवीन चंद्रावर लक्ष्मी रत्न यांचा जन्म झाला. त्या दिवसापासून कार्तिक अमावस्या लक्ष्मी पूजाचा उत्सव बनला. लक्ष्मीने गणेशची पूजा केली कारण गणेश संपत्तीचे रक्षण करते आणि सर्व प्रकारचे घृणास्पद सुख नष्ट करते आणि समृद्धी आणते.

रावणच्या मृत्यू, पत्नी सीता आणि अनुज लक्ष्मण यांच्या नंतर या दिवशी राम राम अयोध्याकडे परत आले की दीपावलीच्या उत्सवाची एक कथा आहे. निर्वासन पासून चौदा वर्षे परत येणे च्या उत्साहात, रात्री त्यांच्या घरे सजवणे आणि घरे विशेष दिवे तयार केले. तेव्हापासून दीपावली येथे लोकांनी दीपवृंद घरात त्यांच्या दिवा लावून प्रकाश व्यवस्था केली.

हा सण देखील पिकाशी संबंधित आहे. यावेळी शेतात नवीन पीक वाढू लागतात. धन-लक्ष्मीमध्ये स्वागत म्हणून शेतकरी नवीन पीक साजरा करतात. पीक ठेवण्यासाठी बांबू आणि घरे उडी मारून तयार करतात. पावसामुळे होणारी तोटा देखील भरपाई देतो. रात्री रात्री प्रकाशात येतात, ज्यामध्ये किडे-मॉथ आणि डास नष्ट होतात. घराचा आंगठ स्वच्छ दिसू लागतो. शहरातही लोक घरे कचरा घेतात आणि भिंती रंगवतात. व्यापारी जुन्या खात्याची पुर्तता करून नवीन खाती तयार करतात.

दिवाळी आधीच बाजारात आहे. लोक नवीन कपडे खरेदी करतात व्यापारी दुकाने सजवा. ग्राहकांच्या रहदारीची गती वाढवते. कन्फेक्शनर्स त्यांना सादर करून मधुर मिठाई बनवतात. मातीच्या भांड्यात माती घेऊन पोटर बाजारात येतो. कापूस आणि शेंगदाणे विकणारे लोक वाढले आहेत. काही लोक चांदीची नाणी विकत घेतात, नंतर काही दागिने खरेदी करतात. इतरांना भेटी अर्पण करणार्या गोष्टींची मागणी वाढते. आनंद आणि उत्साह आहे. खरेदीदार आणि विक्रेता दोघेही आनंदी आहेत. पोलीस गस्त वाढते कारण त्याला सुरक्षाची खास व्यवस्था करावी लागते.

दीपावलीच्या दिवशी प्रत्येकजण व्यस्त असतो. घरामध्ये घरगुती खास डिश बनवते. मुले सूर्यामध्ये बॉम्ब आणि फायरक्रॅक कोरतात. ऑफिसमधून भेटवस्तू मिळविण्यास कार्यरत लोक आनंदी आहेत. दुकानात दुकानदारांची पूजा करण्यास व्यस्त आहेत. लोक एकमेकांना अभिवादन करतात आणि दीपावलीचे भेटी देतात. लोक पुष्पगुच्छ, पूजा इतर गोष्टी, मेणबत्त्या आणि लक्ष्मी गणेश विकत घेतात. दुकानदारी, घरगुती पूजेची पूजा केल्यानंतर पंडितजी घराबाहेर काम करायला बाहेर पडले. संध्याकाळी वाट पाहत मुलांनी प्रतीक्षा केली की ते आतिशबाजीचा आनंद घेऊ शकतील.

संध्याकाळी वेळ येतो. घरगुती उगवलेली दिवे, मेणबत्त्या आणि बॅटरी रंगीत बल्ब आणि पंखांनी चमकते. असे दिसते की आकाशातील सर्व तारे पृथ्वीवर उतरल्या आहेत. तो एक चांगला विस्मयकारक दृष्टीकोन आहे. भारत- स्वर्गाचे स्वर्ग देशातच मर्यादित आहे. यासह, बॉम्ब-फटाके आणि स्पार्कचे आवाज आणि चमत्कार घडणे सुरू होते. संपूर्ण देशात, या दोन-चार तासांमध्ये कोट्यावधी रुपये फेकले जात आहेत कारण दिवाळी आता उत्सव नाही, हा उत्सवांचा उत्सव बनला आहे. या ध्वनी उत्सवामुळे प्रदूषण पातळी मोठ्या प्रमाणावर वाढली आहे.

गळती, क्रॅकर्स फोडू लागले आणि लक्ष्मी-गणेशची पूजा सुरू झाली. कॉंच पूजा संपल्यावर प्रसाद विभाजित झाला. शेजारी एकमेकांना भेटी आणि भेटवस्तू देण्यासाठी गेले. बंधुत्वाची भावना बळकट झाली. घरोघरच्या आनंदात आनंददायक क्षण लोकांनी मिठाई खाल्ले एका बाजूला एक डिश खाणे आणि खाणे ही एक सतत प्रक्रिया होती. कुटुंबातील सर्व लोक एकत्र आले आणि त्यांनी स्पार्क सोडले. काही लोक छप्पर चढतात आणि शहरात सजावट पाहतात. काही भयानक प्रवृत्तीचे लोक गेममध्ये व्यस्त असताना, गेमिंग आणि पिण्याच्या तयारीमध्ये एकत्र आले आहेत.

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