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गणतंत्र दिवस पर कविता 2019 – 26 जनवरी पर कवितायें – Poem on Republic day in Hindi

गणतंत्र दिवस पर कविता 2018

26 january 2019|गणतंत्र दिवस पर कवितायें: भारत अपना गणतनत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाता है | यह दिन हमारे लिए अत्यंत गर्व का दिन है क्योंकि इस दिन हमारे भारत का संविधान लागु हुआ था| इस बार भारत का 69th Republic Day है | आज हम आपके सामने रिपब्लिक डे पर कविता इन हिंदी पेश करने वाले हैं | यहाँ से आप Republic day poems in Hindi language & Hindi Font स्टूडेंट्स के लिए (शब्दों) में देख व pdf डाउनलोड कर सकते हैं| साथ ही class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चे इन्हे अपने स्कूल फंक्शन celebration व प्रोग्राम में सुना सकते हैं| गणतंत्र दिवस पर कविताएँ इन हिंदी – गणतंत्र दिवस परेड पर पोएम इस प्रकार हैं|

गणतंत्र दिवस पर कविता 2019

26 जनवरी क्यों मनाई जाती है: भारत में गणतंत्र और संविधान की स्थापना के उपलक्ष में यह दिन मनाया जाता है |

आओ तिरंगा लहराये

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये; अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये। अपना 67वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे; देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे। 26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था, भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था, मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था, थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी, था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा। विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है, पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है। इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये, थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये, आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये, अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।|

Republic day poem| 26 जनवरी कवितायें -26 जनवरी के ऊपर कविता

26 जनवरी पर कविता इस प्रकार हैं:

पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान।
भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥
वक्ता चतुर सुजान, देश का गौरव गाओ।
श्रोताओं का मान करो नारे लगवाओ॥
इसी रीति से बनो सुनेता ‘रामसुहावन’।
कीर्ति-लाभ का समय सुहाना यह दिन पावन॥
भाई तुमको यदि लगा, जन सेवा का रोग।
प्रजातंत्र की ओट में, राजतंत्र को भोग॥
राजतंत्र को भोग, मजे से कूटनीति कर।
झण्डे-पण्डे देख, संभलकर राजनीति कर॥
लाभ जहां हो वहीं, करो परमार्थ भलाई।
चखो मलाई मस्त, देह के हित में भाई॥
कथनी-करनी भिन्नता, कूटनीति का अंग।
घोलो भाषण में चटक, देश-भक्ति का रंग॥
देश-भक्ति का रंग, उलीचो श्रोताओं पर।
स्वार्थ छिपाओ प्रबल, हृदय में संयम धरकर॥
अगले दिन से तुम्हें, वहीं फिर मन की करनी।
स्वार्थ-साधना सधे, भिन्न जब करनी-कथनी॥
बोलो भ्रष्टाचार का, होवे सत्यानाश।
भ्रष्टाचारी को मगर, सदा बिठाओ पास॥
सदा बिठाओ पास, आंच उस पर न आए।
करे ना कोई भूल, जांच उसकी करवाए॥
करे आपकी मदद, पोल उसकी मत खोलो।
है गणतंत्र महान, प्रेम से जय जय बोलो॥
कर लो भ्रष्टाचार का, सामाजिक सम्मान।
सुलभ कहां हैं आजकल, सदाचरण-ईमान॥
सदाचरण-ईमान मिले तो खोट उछालो।
बन जाओ विद्वान, बाल की खाल निकालो॥
रखो सोच में लोच, उगाही दौलत भर लो।
प्रजातंत्र को नोच, कामना पूरी कर लो॥

Republic day in hindi poem | Gantantra diwas par kavita

26 जनवरी पर कवितायें - Poem on Republic day in Hindi

Republic day Poem – गणतंत्र दिवस कविता

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नहीं सिर्फ जश्न मनाना, नहीं सिर्फ झंडे लहराना, ये काफी नहीं है वतन पर, यादों को नहीं भुलाना, जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना, खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना, हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के….|| आज शहीदों ने है तुमको, अहले वतन ललकारा, तोड़ो गुलामी की जंजीरें, बरसाओ अंगारा, हिन्दू-मुस्लिम-सिख हमारा, भाई-भाई प्यारा, यह है आजादी का झंडा, इसे सलाम हमारा || Indian Republic day 2019 की शुभकामनाये. सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा || तैरना है तो समंदर में तैरो नदी नालों में क्या रखा है, प्यार करना है तो वतन से करो इस बेवफ़ा लोगों में क्या रखा है || गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कविता

गणतंत्र दिवस पर हास्य कविता – कविताकोश  इस प्रकार हैं:

देखो 26 जनवरी है आयी, गणतंत्र की सौगात है लायी। अधिकार दिये हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध। हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन, लाला किले पर होता है जब प्रधानमंत्री का भाषन, नयी उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन, अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन, 2 मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन। सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है, आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है, संविधान इसका संचालक है, हम सब का वो पालक है, लोकतंत्र जिसकी पहचान है, हम सबकी ये शान है, गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान है।

रिपब्लिक डे पोएम इन हिंदी

26 january ke liye kavita: साथ ही आप चाहे तो  गणतंत्र दिवस पर निबंध भी देख सकते हैं जो की हमने हिंदी लैंग्वेज में दिए हुए हैं |

माह जनवरी छब्बीस को हम सब गणतंत्र मनाते |
और तिरंगे को फहरा कर, गीत ख़ुशी के गाते ||
संविधान आजादी वाला, बच्चो ! इस दिन आया |
इसने दुनिया में भारत को, नव गणतंत्र बनाया ||
क्या करना है और नही क्या ? संविधान बतलाता |
भारत में रहने वालों का, इससे गहरा नाता ||
यह अधिकार हमें देता है, उन्नति करने वाला |
ऊँच-नीच का भेद न करता, पण्डित हो या लाला ||
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सब हैं भाई-भाई |
सबसे पहले संविधान ने, बात यही बतलाई ||
इसके बाद बतायी बातें, जन-जन के हित वाली |
पढ़ने में ये सब लगती हैं, बातें बड़ी निराली ||
लेकर शिक्षा कहीं, कभी भी, ऊँचे पद पा सकते |
और बढ़ा व्यापार नियम से, दुनिया में छा सकते ||
देश हमारा, रहें कहीं हम, काम सभी कर सकते |
पंचायत से एम.पी. तक का, हम चुनाव लड़ सकते ||
लेकर सत्ता संविधान से, शक्तिमान हो सकते |
और देश की इस धरती पर, जो चाहे कर सकते ||
लेकिन संविधान को पढ़कर, मानवता को जाने |
अधिकारों के साथ जुड़ें, कर्तव्यों को पहचानो ||

गणतंत्र दिवस पर छोटी कविता – Short Poem on Republic Day in Hindi

साथ ही आप गणतंत्र दिवस पर शेर भी देख सकते हैं |

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी !! है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना; न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी !! एक तरफ विदेशी हमलों की मार, दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात !! पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी, विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी !! एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात, छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस !! 1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी, जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी !!

gantantra diwas ki kavita in hindi

गणतंत्र दिवस कविताकोश  इस प्रकार हैं:

आज नई सज-धज से गणतंत्र दिवस फिर आया है। नव परिधान बसंती रंग का माता ने पहनाया है। भीड़ बढ़ी स्वागत करने को बादल झड़ी लगाते हैं। रंग-बिरंगे फूलों में ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं। धरती मां ने धानी साड़ी पहन श्रृंगार सजाया है। गणतंत्र दिवस फिर आया है। भारत की इस अखंडता को तिलभर आंच न आने पाए। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं। युवा वर्ग सक्षम हाथों से आगे इसको सदा बढ़ाएं। इसकी रक्षा में वीरों ने अपना रक्त बहाया है। गणतंत्र दिवस फिर आया है।

kavita on gantantra divas in marathi

केवळ ध्वज फडफडत नाही,
आठवणी विसरून विसरू नका,
आठवणी विसरू नका,
त्यांच्या चूक पुढे जाण्यासाठी,
जीवनासाठी नाही,
आयुष्यासाठी लूटण्याकरिता,
आम्ही वादळ पासून कसं काय बाहेर आणले आहे,
माझ्या मुलांवर नियंत्रण ठेवण्यासाठी हा देश ठेवा ….

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