सावित्रीबाई फुले कविता इन हिंदी व मराठी – सावित्रीबाई फुले कविता संग्रह – Poems on Savitribai Phule in Marathi

भारत के इतिहास में कई ऐसे कवी थे जिन्होंने अपनी कविताओं और रचनाओं से भारत के समाज को प्रोत्साहित किआ था| सावित्रीबाई फूले इन्ही कवी में से एक थी| उनका जन्म 3 जनवरी 1831 में महारष्ट्र में हुआ था| वह मराठी कविताओं की प्रथम कवित्री थी| आज के इस आर्टिकल में हम आपको सावित्रीबाई फूले कविता, सावित्रीबाई फूले काव्य इन मराठी, मराठी कविता ऑफ़ सावित्रीबाई फूले, सावित्रीबाई हिंदी कविता आदि की जानकारी देंगे|

सावित्रीबाई फुले यांच्या कविता

सुन रही हो बिटिया मलाला?
सारी आवाम रोते हुए कह रहा है
‘ओ प्यारी मलाला,
हम बड़े रंज में हैं
सुनो, बिटिया मलाला!
तुम्हारे जैसी हजारों बच्चियाँ
तुम्हारे लिए निकाल रही हैं
कैंडल मार्च
और सुनो, बिटिया मलाला!
मौलवी भी कर रहे हैं
तुम्हारे लिए दुआ की बरसात,
देश की सीमाओं से परे
उठ रहे हैं हाथ
तुम्हारी सलामती के लिए।
सुन रही हो, बिटिया मलाला!
अभी-अभी हमसे दूर गयी है
‘आरफा करीम रंधावा’
नहीं खो सकते हम तुम्हें
सुनो, मलाला बिटिया!
इन जंगली गिद्धों ने जबरन
बंद कराये थे
जो चार सौ स्कूल
उनकी नई चाभी खोजनी है तुम्हें
क्योंकि ये फ़क़त स्कूल नही
ये रोशनी की वे मीनारें है
जिस पर चढ़ना है
तुम्हारी नन्हीं सहेलियों को
जहाँ से नीचे झांकने पर
दुनिया के तमाम बदनुमा धब्बे
और ज्यादा साफ दिखायी देने लगते हैं
और उनसे लड़ना
ज्यादा आसान हो जाता है
सुनो, मलाला,
तुम भारत की नन्हीं
सावित्रीबाई फुले हो
वह भी चौदह साल की उम्र में
निकल पड़ी थी
दबी कुचली औरतों के लिए
उन स्कूलों के ताले खोलने
जिन्हें जड़ रखा था
धर्म, जाति की सत्ता में चूर
सिरफिरों ने
सुनो मलाला, सुनो सावित्री!
कितने नीचे गिर गए है
वो लोग
जो स्कूल जाती लड़कियों के
सिरों पर गोली मारकर
उन्हें हमेशा के लिए
फना करना चाहते हैं
कितने क्रूर हैं वो लोग
जो आगे बढ़ती स्त्री को
गोबर पत्थर लाठी डंडे
कोडों से मार रहे हैं
पर सुनो गिद्धों!
तुम्हारे कहर के बावजूद चिड़िया
जरूर उड़ेगी
और हर बार उसकी उड़ान
पहली उड़ान से ऊंची होगी…

सावित्रीबाई फुले वर कविता

जाओ जाकर पढ़ो-लिखो
बनो आत्मनिर्भर, बनो मेहनती
काम करो-ज्ञान और धन इकट्ठा करो
ज्ञान के बिना सब खो जाता है
ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है
इसलिए, खाली ना बैठो,जाओ, जाकर शिक्षा लो
दमितों और त्याग दिए गयों के दुखों का अंत करो
तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है
इसलिए सीखो और जाति के बंधन तोड़ दो
ब्राह्मणों के ग्रंथ जल्दी से जल्दी फेंक दो

सावित्रीबाई फुले यांची समग्र कविता

ज्ञान नही विद्या नही उसे अर्जित करने की जिज्ञासा नही
बुद्धि होकर भी उस पर जो चले नही उसे इंसान कहे क्या ?
दे दो ईश्र बिना काम किए बैठे बिठाए खाट पर
ढोर ड़गर भी ऐसा कभी करता नही
जिसका कोई विचार – अस्वार नही, उसे इंसान कहे क्या ?
पत्नी बिचारी काम करती रहे और पति फोकट में मौज उड़ाए
पशु पंछी में यह बात होती नही ऐसो को इंसान कहे क्या ?
दूसरों की मदद ना करे सेवा त्याग दया माया ममता आदि
जिसके पास यह सदगुण नही उसे इंसान कहे क्या ?
पशु पंछी, बंदर आदमी जन्म मृत्यु सब को ही
इस बात का ज्ञान जिसे नही उसे इंसान कहे क्या ?

सावित्रीबाई फुले कविता हिंदी

सावित्रीबाई फुले कविता संग्रह

जो वाणी से उच्चार करे
वैसा ही बर्ताव करे
वे ही नर नारी पूजनीय
सेवा परमार्थ
पालन करे व्रत यथार्थ
और होवे कृतार्थ
वे सब वंदनीय।
सुख हो दुख
कुछ स्वार्थ नही
जो जतन से कर अन्यो का हित
वे ही ऊँचे,
मानवता का रिश्ता जो जानते है वे सब
सावित्री कहे सच्चे संत ।

सावित्रीबाई फुले पर कविता

Weak and oppressed! Rise my brother
Come out of living in slavery.
Manu-follower Peshwas are dead and gone
Manu’s the one who barred us from education.
Givers of knowledge– the English have come
Learn, you’ve had no chance in a millennium.
We’ll teach our children and ourselves to learn
Receive knowledge, become wise to discern.
An upsurge of jealousy in my soul
Crying out for knowledge to be whole.
This festering wound, mark of caste
I’ll blot out from my life at last.
In Baliraja’s kingdom, let’s beware
Our glorious mast, unfurl and flare.
Let all say, “Misery go and kingdom come!”
Awake, arise and educate
Smash traditions-liberate!
We’ll come together and learn
Policy-righteousness-religion.
Slumber not but blow the trumpet
O Brahman, dare not you upset.
Give a war cry, rise fast
Rise, to learn and act.

सावित्रीबाई फुले माहिती

सावित्रीबाई फुले यांची एक फार छान कविता…
तयास मानव म्हणावे का?
ज्ञान नाही विद्या नाही
ते घेणेची गोडी नाही
बुद्धी असुनि चालत नाही
तयास मानव म्हणावे का?
दे रे हरी पलंगी काही
पशूही एेसे बोलत नाही
विचार ना आचार नाही
तयास मानव म्हणावे का?
पोरे घरात कमी नाहीत
तयांच्या खाण्यासाठीही
ना करी तो उद्योग काही
तयास मानव म्हणावे का?
सहानुभूती मिळत नाही
मदत न मिळे कोणाचीही
पर्वा न करी कशाचीही
तयास मानव म्हणावे का?
दुसऱ्यास मदत नाही
सेवा त्याग दया माया नाही
जयापाशी सदगुण नाही
तयास मानव म्हणावे का?
ज्योतिष रमल सामुद्रीकही
स्वर्ग नरकाच्या कल्पनाही
पशुत नाही त्या जो पाही
तयास मानव म्हणावे का?
बाईल काम करीत राही
एेतोबा हा खात राही
पशू पक्षात एेसे नाही
तयास मानव म्हणावे का?
पशु-पक्षी माकड माणुसही
जन्ममृत्यु सर्वा नाही
याचे ज्ञान जराही नाही
तयास मानव म्हणावे का?
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