Biography of Sarojini Naidu in Hindi | सरोजिनी नायडू की जीवनी

सरोजिनी नायडू का जीवन परिचय

भारत कोकिला सरोजिनी नायडू बायोग्राफी: द नाइटिंगेल ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध सरोजिनी नायडू (Sarojini Naidu) एक स्वतंत्रता सेनानी थी। हम इनको Nightingale of India के नाम से जानते जो कि एक कवयित्री के रूप में प्रख्यात हुई और उन्होंने देश की पहली गवर्नर महिला के रूप में भी अपनी अहम् भूमिका निभाई थी। सरोजिनी नायडू ने देश को आज़ाद करने के लिए अनेक स्वतंत्रता आंदोलनों में भाग लिया जिस कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा था।

आज हम इस लेख के द्वारा Sarojini Naidu History के बारे में जानकारी विस्तार से दे रहे हैं। यहां आपको Autobiography of Sarojini Naidu से सम्बंधित जानकारी in Hindi Language, in English, in Kannada इत्यादि भाषाओँ में प्राप्त होगी। इसके साथ ही आपके लिए pdf, about Sarojini Naidu Biography in short in 100 words उपलब्ध है।

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10 points on Sarojini Naidu in Hindi

  1. सरोजिनी नायडू एक प्रसिद्ध गायिका ओर कवयित्री थी
  2. उनका जन्म 13 फ़रवरी 1879 हैदराबाद में हुआ था।
  3. उनको नाइटिंगगैल ऑफ इंडिया (Nightingale of India) के नाम से भी जाना जाता था।
  4. उनके पिता का नाम चटोपाध्ये ओर माता का नाम बरदा सुंदरी देवी था।
  5. उन्होंने 12 साल की उम्र में ही दस्वी कक्षा उत्तीर्ण कर ली थी।
  6. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में गांधी जी का साथ दिया ओर साथ ही इंडियन नैशनल काँग्रेस के हित में रहीं।
  7. उन्होंने महिलाओं को प्रेरित किया
  8. उन्होंने कई सभाओं में विद्यार्थियों पर भाषण भी दिए ओर उन्हे प्रोत्साहित भी किया।
  9. वह अपने भाषण में हिन्दी, बंगाली,गुजराती,ओर इंग्लिश भाषा का उपयोग करती थी।
  10. उनकी मृत्यु 2 मार्च 1949 में Heart Attack के कारण हो गई थी।

 

सरोजिनी नायडू की जानकारी (Information)- सरोजिनी नायडू कौन थी?

सरोजिनी नायडू देश के किसी भी राज्य के गवर्नर और Indian National Congress के अध्यक्ष पद पर बैठने वाली पहली महिला थी। बंगाली परिवार में जन्मी सरोजिनी नायडू को भारत की बुलबुल के नाम से भी जाना जाता है। उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु निम्नलिखित है

मुख्य बिंदुसम्बंधित जानकारी
नामसरोजनी चटोपाध्य
जन्म-तिथि13 फरवरी 1879
जन्म का स्थानहैदराबाद
माता का नामवारद सुन्दरी देवी
पिता का नामडॉ अघोरनाथ चटोपाध्या
पति का नामडॉ गोविन्द राजुलू नायडू (1897)
बेटे का नामजयसूर्या नायडू, रणधीर नायडू, निलावर नायडू
बेटी का नामपद्मजा नायडू, लिलामानी नायडू
मृत्यु की तिथि व् स्थान2 मार्च 1949 लखनऊ

सरोजिनी नायडू का जीवन इतिहास (History)

देश के लिए सरोजिनी नायडू महात्मा गाँधी जी के साथ मिलकर अनेको सत्याग्रहों में हिस्सा लिया था तथा उन्होंने “भारत छोड़ो आंदोलन” में भाग लिया था। इस “भारत छोड़ो आंदोलन” के दौरान उन्हें जेल भी हुयी थी। उन्होंने सन् 1930 के प्रसिद्ध नमक सत्याग्रह में चलने वाले स्वयंसेवकों के रूप में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह महात्मा गांधी जी की गिरफ्तारी के उपरांत भी गुजरात के धरासणा में लवण-पटल की Picketing धरना देती रही। जब तक वह खुद Arrested नही हुई तब तक उन्होंने उस आंदोलन का संचालन किया था धरासणा वो जगह थी जहाँ पर पुलिस ने अहिंसक सत्याग्रहियों और शान्तिमय पर बहुत अत्याचार किए थे।

सरोजिनी नायडू शिक्षा (Education)

सरोजिनी नायडू ने मद्रास प्रेसीडेंसी में 12 साल की उम्र में दसवीं कक्षा पास की थी और उसमे प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उसके बाद की शिक्षा उन्होंने लंदन के ‘किंग्ज़ कॉलेज’ और ‘कैम्ब्रिज के गर्टन कॉलेज’ जाकर प्राप्त की लेकिन वहा के ठन्डे तापमान की वजह से उनका ज़्यादा समय लंदन में नहीं बीत सका और वो वापस स्वदेश लौट आयी साथ ही उनकी वहा पर शिक्षा में रूचि भी नहीं थी।

सरोजिनी नायडू का योगदान (Contribution)

सरोजिनी नायडू का देश के प्रति अत्याधिक योगदान रहा है। सरोजिनी नायडू ने उन सभी कठिन स्तिथियों में अपनी बड़ी हिम्मत और साहस के साथ सामना किया था अपने न टूटने वाले स्वभाव को जिन्दा बनाये रखा था उनके द्वारा नमक सत्याग्रह आन्दोलन को खत्म कर दिया गया था। और सरोजिनी नायडू ने महिलाओं को संगठित कर रॉलेट एक्ट का विरोध करने में भी अपना योगदान दिया।

भारत कोकिला सरोजिनी नायडू की उपलब्धियां (Achievements)

सरोजनी नायडू ने सिर्फ Great Revolutionary तथा अच्छी राजनीति के रूप में एक अच्छी Reputation हासिल की और साथ ही वह एक अच्छी कवियत्री के रुप में प्रसिद्ध हुईं थी। भारत सरकार के द्वारा सरोजिनी नायडू की जयंती के अवसर पर उनका सम्मान करते हुए 13 February 1964 को 15 नए पैसे का डाक टिकट चलाये गए थे। उन्हें एक देशभक्त के रूप में भी देश से बहुत सम्मान प्राप्त हुआ।

राजनीतिक जीवन (Political Career)

सरोजिनी नायडू ने देश की राजनितिक जीवन के लिए साउथ अफ्रीका में गाँधी जी के साथ काम किया। उन्होंने स्वयं सेवक के रूप में गाँधी जी के साथ जातीय सरकार के विरुद्ध संघर्ष किया। उन्होंने अपने राजनितिक जीवन में शुरुआत से ही गाँधी जी का साथ दिया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के हित में रही उन्होंने गांव की महिलाओं और अन्य सभाओं को प्रोत्साहित किया जिसमे विद्यार्थी और युवाओं की सभाएं भी शामिल थी।

साहित्यिक ज़िंदगी (Literary Life)

सरोजिनी नायडू अपनी शिक्षा प्राप्त करने हेतु England में 2 साल तक रहीं और वहाँ के माननीय Litterateurs और मित्रो ने उनकी पढाई से सम्बंधित काफी तारीफ की जिसमे उनके एक मित्र का नाम एडमंड गॉस एवं दूसरे मित्र का नाम आर्थर सिमन्स’ था साथ ही उन्होंने सरोजिनी जी को यह राय दी की उन्हें अपनी कविताओं में और भी ज़्यादा गंभीरता लाने की ज़रूरत हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में 20 वर्ष तक कविताएं लिखी जिसमे उनकी तीन कविताएं प्रकाशित हुई जिसमे ‘बर्ड ऑफ़ टाइम’ और ‘ब्रोकन विंग’ कविता-संग्रह के माधयम से उनकी एक अच्छी लेखीखा कवियित्री के रूप में प्रसिद्धि मिली।

व्यक्तिगत जीवन और मृत्यु (Personal life and Death)

सरोजिनी नायडू का व्यक्तिगत जीवन बहुत ही सरल था। वह अपने जीवन काल में कविताओं के प्रति जागरूक रहती थी। सरोजिनी नायडू कई प्रकार की भाषाएं जानती थी और वह अपने भाषण में अंग्रेजी,बांग्ला,गुजराती और हिंदी भाषा का प्रयोग करती थी। सरोजिनी नायडू की मृत्यु वर्ष 2 मार्च 1949 को हार्टअटैक आने कारण हुई थी।

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