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प्रदूषण पर निबंध – Pollution / Pradushan Essay in Hindi Pdf Download

Pradushan Essay in Hindi

प्रदूषण तब होता है जब पर्यावरण में कुछ जीवित चीजों को हानिकारक या जहरीला तत्त्व आ जाते है। जल निकायों में प्रदूषित पानी या कचरा प्रदूषण का एक प्रकार है। दूसरे शब्दों में, प्रदूषण का मतलब कार्बन मोनोऑक्साइड आदि जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन के कारण पर्यावरण में अचानक परिवर्तन होता है। पीने के पानी में सीवेज एक और प्रकार का प्रदूषण है, जिसमें रोगाणु होते हैं और वायरस। 3 प्रकार के प्रदूषण हैं: जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, और शोर प्रदूषण। अगर आपको भी pradushan par nibandh in hindi, प्लास्टिक प्रदूषण पर निबंध, पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध इन हिंदी, आदि की जानकारी देंगे|

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में

प्रस्तावना : विज्ञान के इस युग में मानव को जहां कुछ वरदान मिले है, वहां कुछ अभिशाप भी मिले हैं। प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप हैं जो विज्ञान की कोख में से जन्मा हैं और जिसे सहने के लिए अधिकांश जनता मजबूर हैं।
प्रदूषण का अर्थ : प्रदूषण का अर्थ है -प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना।
प्रदूषण कई प्रकार का होता है! प्रमुख प्रदूषण हैं – वायु-प्रदूषण, जल-प्रदूषण और ध्वनि-प्रदूषण ।
वायु-प्रदूषण : महानगरों में यह प्रदूषण अधिक फैला है। वहां चौबीसों घंटे कल-कारखानों का धुआं, मोटर-वाहनों का काला धुआं इस तरह फैल गया है कि स्वस्थ वायु में सांस लेना दूभर हो गया है। मुंबई की महिलाएं धोए हुए वस्त्र छत से उतारने जाती है तो उन पर काले-काले कण जमे हुए पाती है। ये कण सांस के साथ मनुष्य के फेफड़ों में चले जाते हैं और असाध्य रोगों को जन्म देते हैं! यह समस्या वहां अधिक होती हैं जहां सघन आबादी होती है, वृक्षों का अभाव होता है और वातावरण तंग होता है।
जल-प्रदूषण : कल-कारखानों का दूषित जल नदी-नालों में मिलकर भयंकर जल-प्रदूषण पैदा करता है। बाढ़ के समय तो कारखानों का दुर्गंधित जल सब नाली-नालों में घुल मिल जाता है। इससे अनेक बीमारियां पैदा होती है।
ध्वनि-प्रदूषण : मनुष्य को रहने के लिए शांत वातावरण चाहिए। परन्तु आजकल कल-कारखानों का शोर, यातायात का शोर, मोटर-गाड़ियों की चिल्ल-पों, लाउड स्पीकरों की कर्णभेदक ध्वनि ने बहरेपन और तनाव को जन्म दिया है।
प्रदूषणों के दुष्परिणाम: उपर्युक्त प्रदूषणों के कारण मानव के स्वस्थ जीवन को खतरा पैदा हो गया है। खुली हवा में लम्बी सांस लेने तक को तरस गया है आदमी। गंदे जल के कारण कई बीमारियां फसलों में चली जाती हैं जो मनुष्य के शरीर में पहुंचकर घातक बीमारियां पैदा करती हैं। भोपाल गैस कारखाने से रिसी गैस के कारण हजारों लोग मर गए, कितने ही अपंग हो गए। पर्यावरण-प्रदूषण के कारण न समय पर वर्षा आती है, न सर्दी-गर्मी का चक्र ठीक चलता है। सुखा, बाढ़, ओला आदि प्राकृतिक प्रकोपों का कारण भी प्रदूषण है।
प्रदूषण के कारण : प्रदूषण को बढ़ाने में कल-कारखाने, वैज्ञानिक साधनों का अधिक उपयोग, फ्रिज, कूलर, वातानुकूलन, ऊर्जा संयंत्र आदि दोषी हैं। प्राकृतिक संतुलन का बिगड़ना भी मुख्य कारण है। वृक्षों को अंधा-धुंध काटने से मौसम का चक्र बिगड़ा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली न होने से भी प्रदूषण बढ़ा है।
सुधार के उपाय : विभिन्न प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए चाहिए कि अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं, हरियाली की मात्रा अधिक हो। सड़कों के किनारे घने वृक्ष हों। आबादी वाले क्षेत्र खुले हों, हवादार हों, हरियाली से ओतप्रोत हों। कल-कारखानों को आबादी से दूर रखना चाहिए और उनसे निकले प्रदूषित मल को नष्ट करने के उपाय सोचना चाहिए।

निबंध in hindi

प्रस्तावना
वर्तमान युग में तरक्की के कारण पृथ्वी वह मुख्य समस्या बनकर उभरा है जो पृथ्वी के वातावरण को प्रभावित कर रहा है। इसमें कोई शक नही है कि प्रदूषण हमारे पर्यावरण और समान्य जीवन स्तर को प्रभावित कर रहा है। हमारा प्राकृतिक पर्यावरण हमारे मूर्खतापूर्ण कार्यों के कारण दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है, जिससे हम खुद भी प्रभावित हो रहे है।
प्रदूषण के प्रकार
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, भूमि प्रदूषण कुछ ऐसे मुख्य प्रदूषण है, जिनके कारण पर्यावरण दिन-प्रतिदिन प्रभावित होता जा रहा है। इन्हीं मुख्य प्रदूषणों के विषय में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है।
जल प्रदूषण
जल प्रदूषण वह बड़ी समस्या है जो प्रत्यक्ष रुप से जलीय जीवन को प्रभावित करता है क्योंकि जलीय जीव अपने आहार तथा पोषण के लिए पूर्ण रुप से पानी पर निर्भर करते है। लगातार जलीय जीवों के विलुप्त होने कारण मनुष्यों के रोजगार और भोजना श्रृंखला पर भी खतरा मंडराने लगा है। कारखानों से निकला हानिकारक रसायन, सीवेज, फार्म से निकले कचरों को सीधे तौर पर नदियों, झीलों और समुद्र जैसे जल स्त्रोंतों में निस्तारित कर दिया जाता है। जिससे यह पानी दूषित हो जाता है और कई तरह की बीमारियां उत्पन्न करता।
भूमि प्रदूषण
भूमि प्रदूषण काफी ज्यादे मात्रा में कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण होता है। इनके उपयोग से पैदा होने वाली फसलों का सेवन करने से सेहत पर कई तरह के हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते है।
ध्वनि प्रदूषण
हैवी मशीनरी, टेलीवीजन, रेडियों और स्पीकर आदि ध्वनि प्रदूषण के मुख्य स्त्रोत है। जिसके कारण बहरेपन की भी समस्या हो सकती है, ध्वनि प्रदूषण के कारण बुजुर्ग व्यक्ति सबसे अधिक प्रभावित होते है और इसके कारण उनमें हृदयघात और तनाव जैसी बीमारियां भी उत्पन्न हो जाती है।
निष्कर्ष
हर प्रकार का प्रदूषण हमारे लिए काफी खतरनाक होता है और हमें इसके काफी गंभीर परिणाम भुगतने होते है। इसके अलावा हमें पर्यावरण का ध्यान रखने की आवश्यकता है ताकि हम प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बनाये रख सके। इस समस्या से निपटने के लिए हम सबको संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है, जिससे हम पृथ्वी पर स्वच्छ और अप्रदूषित वातावरण बनाये रख सके। इस प्रदूषण को रोककर हम अपने ग्रह पर निवास करने वाले कई सारे मासूम जीवों के लिए वातावरण को उनके अनुकूल बनाकर उन्हें बचा पायेंगे।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध

The environmental pollution essay

प्रस्तावना
आज के समय में प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन चुका है। इसने हमारे पृथ्वी को पूर्ण रुप से बदल कर रख दिया है और दिन-प्रतिदिन पर्यावरण को क्षति पहुंचाते जा रहे है, जोकी हमारे जीवन को और भी ज्यादे मुश्किल बनाते जा रहा है। कई तरह के जीव और प्रजातियां प्रदूषण के इन्हीं हानिकारक प्रभवों के कारण धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहीं है।
प्रदूषण को इसके प्रकृति के आधार पर कई वर्गों में बांटा गया है, विभिन्न प्रकार के प्रदूषण हमारे ग्रह को विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचा रहे है। इन्हीं प्रदूषणों के प्रकार, इनके कारणों, प्रभावों और रोकथाम के विषय में नीचे चर्चा कि गयी है।
प्रदूषण के प्रकार
यह है मुख्य प्रकार के प्रदूषण उनके कारण तथा उनके द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभाव, जोकि हमारे पर्यावरण और दैनिक जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है।
1.वायु प्रदूषण
वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है। दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।
वायु प्रदूषण का प्रभाव सिर्फ मानव स्वास्थ्य तक ही सीमित नही है बल्कि की पर्यावरण पर भी इसके काफी विपरीत प्रभाव होते है, जिससे की ग्लोबल वार्मिंग जैसी भयावह समास्याएं उत्पन्न हो जाती है।
2.जल प्रदूषण
उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है। यह प्रदूषक पानी में मिलकर हमारे स्वास्थ्य को भी खराब करते है। इसके साथ ही जल प्रदूषण की यह समस्या जलीय जीवन के लिए भी एक गंभीर समस्या बन गयी है, जिसके कारण प्रत्येक दिन कई सारे जलीय जीवों की मृत्यु हो जाती है।
3.भूमि प्रदूषण
वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।
इसके साथ ही भारी मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे से भूमि विषाक्त भी हो जाती है। लगातार कीटनाशकों और दूसरे रसायनों का इस्तेमाल करने के कारण भी भूमि प्रदूषण में वृद्धि होती है। इस तरह के प्रदूषण को भूमि प्रदूषण के नाम से जाना जाता है।
4.ध्वनि प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।
5.प्रकाश प्रदूषण
प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।
6.रेडियोएक्टिव प्रदूषण
रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है। रेडियोएक्टिव तत्व पर्यावरण को काफी हानिकारक रुप से नुकसान पहुंचाते है, यह प्रदूषक जल स्त्रोतों में मिलकर उन्हें प्रदूषित कर देते हैं, जिससे यह हमारे उपयोग योग्य नही रह जाते है।
7.थर्मल प्रदूषण
थर्मल प्रदूषण का तात्पर्य जल स्त्रोतों के तापमान में एकाएक होने वाले परिवर्तन से है। यह कोई मामूली परिवर्तन नही है क्योंकि यह पूरे पर्यावरण तंत्र का संतुलन बिगाड़ने की क्षमता रखता है। कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। शीतलक के रुप में इस्तेमाल किया गया यह पानी जब एकाएक जल स्त्रोतों में वापस छोड़ा जाता है, तब यह पानी में मौजूद आक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है क्योंकि गैसे गरम पानी में कम घुलनशील होती है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।
8.दृश्य प्रदूषण
मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि। दृष्य प्रदूषण के लगातार संपर्क में आने से आंखों की थकान, तनाव, अवसाद जैसी स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। इसी अनियोजित और अनियमित निर्माण के कारण दृश्य प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
विश्व के सर्वाधिक प्रदूषण वाले शहर
एक तरफ जहां विश्व के कई शहरों ने प्रदूषण के स्तर को कम करने में सफलता प्राप्त कर ली है, वही कुछ शहरों में यह स्तर काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व के सबसे अधिक प्रदूषण वाले शहरों की सूची में कानपुर, दिल्ली, वाराणसी, पटना, पेशावर, कराची, सिजीज़हुआन्ग, हेजे, चेर्नोबिल, बेमेन्डा, बीजिंग और मास्को जैसे शहर शामिल है।
इन शहरों में वायु की गुणवत्ता का स्तर काफी खराब है और इसके साथ ही इन शहरों में जल और भूमि प्रदूषण की समस्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे इन शहरों में जीवन स्तर काफी दयनीय हो गया है। यह वह समय है जब लोगों को शहरों का विकास करने के साथ ही प्रदूषण स्तर को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

The environmental pollution essay

Introduction
In the modern world of technological advancement, pollution has become a serious environmental issue affecting the lives on earth. Pollution is undoubtedly affecting the whole environment and ecosystem and thus the normal quality of life. Our naturally beautiful environment on the earth is deteriorating day by day just by the foolish acts of human beings and the irony is that they themselves are getting affected by their deeds.
Types of Pollution
Some of the most important types of the pollution are air pollution, water pollution, soil pollution and noise pollution. Major types of pollution are given as below:
Air Pollution
The main cause of air pollution is the heavy emissions of harmful and poisonous gases coming from the increasing number of vehicles, factories and open burning. Most of the air pollution is carried out by the transportation system on daily basis. Carbon dioxide and carbon monoxide are the toxic gases polluting the air and reducing the oxygen level in the environment.
Some other habits like open burning of household garbage and leftovers of crops etc are also worsening the air quality. Air pollution causes respiratory disorders including lung cancer among human beings.
Water Pollution
Water pollution is also a big issue directly affecting the marine life as they only depend on the nutrients found in the water for their survival. Gradual disappearance of the marine life would really affect the livelihood of human beings and animals. Harmful wastes from factories, industries, sewage systems, farms etc are directly dumped into the main sources of water like rivers, lakes and oceans making the water contaminated. Drinking contaminated water can cause various water borne diseases.
Soil Pollution
Soil pollution is caused by the excessive use of fertilizers, fungicides, herbicides, insecticides and other chemical compounds. This contaminates the crop produced on the soil and this when consumed can cause severe health hazards.
Noise Pollution
The source of noise pollution is the noise created from the heavy machinery, vehicles, radio, TV, speakers etc which causes hearing problems and sometimes deafness. Noise pollution highly affects the elderly people and might also lead to heart attacks and depression.
Conclusion
Each and every type of pollution is dangerous and might result in a very serious consequence. We should take care of our environment to maintain the natural ecosystem. It requires a joint effort from everyone to get control over the issue of pollution so that we can get a healthy and unpolluted environment. Preventing pollution is also very important to save other innocent species on earth and make the environment suitable for them.

Pollution essay in english

Environmental pollution occurs when pollutants contaminate the natural surroundings. Pollution disturbs the balance of our ecosystems, affect our normal lifestyles and gives rise to human illnesses and global warming. Pollution has reached its peak due to the development and modernization in our lives. With the development of science and technology, there has been a huge growth of human potentials. People have become prisoners of their own creations.
We waste the bounties of our nature without a thought that our actions cause serious problems. We must deepen our knowledge of nature`s laws and broaden our understanding of the laws of the human behavior in order to deal with pollution problems. So, it is very important to know different types of pollutions, their effects and causes on humanity and the environment we live in.
Types, causes, and effects of pollution
Air pollution is one of the most dangerous forms of pollution. A biological, chemical, and physical alteration of the air occurs when smoke, dust, and any harmful gases enter into the atmosphere and make it difficult for all living beings to survive as the air becomes contaminated. Burning of fossil fuels, agriculture related activities, mining operations, exhaust from industries and factories, and household cleaning products entail air pollution. People release a huge amount of chemical substances in the air every day. The effects of air pollution are alarming. It causes global warming, acid rains, respiratory and heart problems, and eutrophication. A lot of wildlife species are forced to change their habitat in order to survive.
Soil pollution occurs when the presence of pollutants, contaminants, and toxic chemicals in the soil is in high concentration that has negative effect on wildlife, plants, humans, and ground water. Industrial activity, waste disposal, agricultural activities, acid rain, and accidental oil spill are the main causes of soil pollution. This type of contamination influence health of humans, affects the growth of plants, decreases soil fertility, and changes the soil structure.
Water pollution is able to lead our world on a path of destruction. Water is one of the greatest natural resources of the whole humanity. Nothing will be able to live without water. However, we do not appreciate this gift of nature and pollute it without thinking. The key causes of the water pollution are: industrial waste, mining activities, sewage and waste water, accidental oil leakage, marine dumping, chemical pesticides and fertilizers, burning of fossil fuels, animal waste, urban development, global warming, radioactive waste, and leakage from sewer lines. There is less water available for drinking, cooking, irrigating crops, and washing.
Light pollution
Light pollution occurs because of the prominent excess illumination in some areas. Artificial lights disrupt the world`s ecosystems. They have deadly effects on many creatures including mammals, plants, amphibians, insects, and birds. Every year many bird species die colliding with needlessly illuminated buildings. Moreover, artificial lights can lead baby sea turtles to their demise.
Noise pollution takes place when noise and unpleasant sounds cause temporary disruption in the natural balance. It is usually caused by industrialization, social events, poor urban planning, household chores, transportation, and construction activities. Noise pollution leads to hearing problems, health issues, cardiovascular issues, sleeping disorders, and trouble communicating. Moreover, it affects wildlife a lot. Some animals may suffer from hearing loss while others become inefficient at hunting. It is very important to understand noise pollution in order to lower its impact on the environment.
Radioactive pollution is the presence of radioactive substances in the environment. It is highly dangerous when it occurs. Radioactive contamination can be caused by breaches at nuclear power plants or improper transport of radioactive chemicals. Radioactive material should be handled with great care as radiation destroys cells in living organisms that can result in illness or even death.

जल प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण आज की दुनिया की एक गंभीर समस्या है । प्रकृति और पर्यावरण के प्रेमियों के लिए यह भारी चिंता का विषय बन गया है । इसकी चपेट में मानव-समुदाय ही नहीं, समस्त जीव-समुदाय आ गया है । इसके दुष्प्रभाव चारों ओर दिखाई दे रहे हैं ।
प्रदूषण का शाब्दिक अर्थ है-गंदगी । वह गंदगी जो हमारे चारों ओर फैल गई है और जिसकी गिरफ्त में पृथ्वी के सभी निवासी हैं उसे प्रदूषण कहा जाता है । प्रदूषण को मोटे तौर पर तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है-वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण । ये तीनों ही प्रकार के प्रदूषण मानव के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो रहे हैं।
वायु और जल प्रकृति-प्रदत्त जीवनदायी वस्तुएँ हैं । जीवों की उत्पत्ति और जीवन को बनाए रखने में इन दोनों वस्तुओं का बहुत बड़ा हाथ है । वायु में जहाँ सभी जीवधारी साँस लेते हैं वहीं जल को पीने के काम में लाते हैं । लेकिन ये दोनों ही वस्तुएं आजकल बहुत गंदी हो गई हैं ।
वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण इसमें अनेक प्रकार की अशुद्ध गैसों का मिल जाना है । वायु में मानवीय गतिविधियों के कारण कार्बन डायऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे प्रदूषित तत्व भारी मात्रा में मिलते जा रहे हैं । जल में नगरों का कूड़ा-कचरा रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदा पानी प्रवाहित किया जाता रहा है । इससे जल के भंडार; जैसे-तालाब, नदियाँ,झीलें और समुद्र का जल निरंतर प्रदूषित हो रहा है ।
ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण है – बढ़ती आबादी के कारण निरंतर होनेवाला शोरगुल । घर के बरतनों की खट-पट, मशीनों की खट-पट और वाद्‌य-यंत्रों की झन-झन दिनों-दिन बढ़ती ही जा रही है । वाहनों का शोर, उपकरणों की चीख और चारों दिशाओं से आनेवाली विभिन्न प्रकार की आवाजें ध्वनि प्रदूषण को जन्म दे रही हैं । महानगरों में तो ध्वनि-प्रदूषण अपनी ऊँचाई पर है ।
प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में विचार करें तो ये बड़े गंभीर नजर आते हैं । प्रदूषित वायु में साँस लेने से फेफड़ों और श्वास-संबंधी अनेक रोग उत्पन्न होते हैं । प्रदूषित जल पीने से पेट संबंधी रोग फैलते हैं । गंदा जल, जल में निवास करने वाले जीवों के लिए भी बहुत हानिकारक होता है । ध्वनि प्रदूषण मानसिक तनाव उत्पन्न करता है । इससे बहरापन, चिंता, अशांति जैसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है ।
आधुनिक वैज्ञानिक युग में प्रदूषण को पूरी तरह समाप्त करना टेढ़ी खीर हो गई है । अनेक प्रकार के सरकारी और गैर-सरकारी प्रयास अब तक नाकाफी सिद्ध हुए हैं । अत: स्पष्ट है कि जब तक जन-समूह निजी स्तर पर इस कार्य में सक्रिय भागीदारी नहीं करता, तब तक इस समस्या से निबटना असंभव है । हरेक को चाहिए कि वे आस-पास कूड़े का ढेर व गंदगी इकट्‌ठा न होने दें ।
जलाशयों में प्रदूषित जल का शुद्धिकरण होना चाहिए । कोयला तथा पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग घटा कर सौर-ऊर्जा, पवन-ऊर्जा, बायो गैस, सी.एन.जी, एल.पी.जी, जल-विद्‌युत जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों का अधिकाधिक दोहन करना चाहिए । हमें जंगलों को कटने से बचाना चाहिए तथा रिहायशी क्षेत्रों में नए पेड़ लगाने चाहिए । इन सभी उपायों को अपनाने से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण को घटाने में काफी मदद मिलेगी ।
ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए कुछ ठोस एवं सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है । रेडियो, टी.वी. , ध्वनि विस्तारक यंत्रों आदि को कम आवाज में बजाना चाहिए । लाउडस्पीकरों के आम उपयोग को प्रतिबंधित कर देना चाहिए । वाहनों में हल्के आवाज वाले ध्वनि-संकेतकों का प्रयोग करना चाहिए । घरेलू उपकरणों को इस तरह प्रयोग में लाना चाहिए जिससे कम से कम ध्वनि उत्पन्न हो ।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि प्रदूषण को कम करने का एकमात्र उपाय सामाजिक जागरूकता है । प्रचार माध्यमों के द्वारा इस संबंध में लोगों तक संदेश पहुँचाने की आवश्यकता है । सामूहिक प्रयास से ही प्रदूषण की विश्वव्यापी समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है ।

वायु प्रदूषण पर निबंध

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भूमिका : मनुष्य प्रकृति की एक सर्वश्रेष्ठ रचना है। जब तक मनुष्य प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं करता है तब तक उसका जीवन सभी और सहज बना रहता है। लेकिन विज्ञान के इस युग में मानव को जहाँ पर कुछ वरदान मिले हैं वहीं पर अभिशाप भी दिए हैं।
प्रदुषण प्राणी के लिए एक ऐसा अभिशाप है जो विज्ञान की कोख से जन्मा है जिसे सहने के लिए ज्यादातर लोग मजबूर हैं। प्रदुषण आज के समय की एक गंभीर समस्या बन चुकी है। जो लोग प्रकृति और पर्यावरण प्रेमी हैं उनके लिए यह बहुत ही चिंता का विषय है।
प्रदुषण से केवल मनुष्य समुदाय ही नहीं बल्कि पूरा जीव समुदाय प्रभावित हुआ है। इसके दुष्प्रभावों को चारो तरफ देखा जा सकता है। पिछले कुछ सालों से प्रदुषण बहुत अधिक मात्रा में बढ़ा है कि भविष्य में मनुष्य जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल हो जायेगा।
प्रदुषण का अर्थ एवं स्वरूप : प्रदुषण का अर्थ होता है – गंदगी या प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। स्वच्छ वातावरण में ही जीवन का विकास संभव होता है। जब हमारे वातावरण में कुछ खतरनाक तत्व आ जाते हैं तो वे वातावरण को दूषित कर देते हैं। यह गंदा वातावरण हमारे स्वास्थ्य के लिए अनेक तरह से हानिकारक होता है। इस तरह से ही वातावरण के दूषित होने को ही प्रदुषण कहते हैं। औद्योगिक क्रांति की वजह से पैदा होने वाले कूड़े-कचरे के ढेर से प्रथ्वी की हवा और जल प्रदूषित हो रहे हैं।
वायु प्रदुषण :- वायु हमारे जीवन के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्त्रोत होती है। जब वायु में हानिकारक गैसें जैसे कार्बन-डाई-आक्साइड और कार्बन-मोनो-आक्साइड मिलते हैं तो वायु को प्रदूषित कर देते हैं इसे ही वायु प्रदुषण कहते हैं। बहुत से कारणों से जैसे- पेड़ों का काटा जाना , फैक्ट्रियों और वाहनों से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदुषण होता है।
वायुप्रदुषण की वजह से अनेक तरह की बीमारियाँ भी हो जाती हैं जैसे – अस्थमा , एलर्जी , साँस लेने में समस्या होना आदि। जब मुम्बई की औरतें धुले हुए कपड़ों को छत से उतारने के लिए जाती हैं तो उन पर काले-काले कणों को जमा हुआ देखती हैं। जब ये कण साँस के साथ मनुष्य के फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं जिसकी वजह से मनुष्य को असाध्य रोग हो जाते हैं। वायु प्रदुषण को रोकना बहुत ही आवश्यक है।
जल प्रदुषण : जल के बिना किसी भी प्रकार से जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जब इस जल में बाहरी अशुद्धियों की वजह से दूषित हो जाता है इसे ही जल प्रदुषण कहते हैं। जब बड़े-बड़े नगरो और शहरों के गंदे नालों और सीवरों के पानी को नदियों में बहा दिया जाता है और यही पानी हम पीते हैं तो हमें हैजा, टाइफाइड , दस्त जैसे रोग हो जाते हैं।

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