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Parshuram Jayanti Speech in Hindi – Short Essay on Parshuram Jayanti – जय परशुराम जयंती स्पीच इन हिंदी

परशुराम जयंती 2018: बाबा परशुराम ब्राह्मण समाज के भगवान् है|उन्हें सब उनकी वीरता और पराक्रम के कारण जानते है|उनका शास्त्र एक फरसा था जो की महादेव द्वारा उन्हें वरदान में मिला था| वे त्रेता युग के ऋषि थे जो की विष्णु भगवान् के अवतार थे| परशुराम जयंती का पर्व ज्यादातर ब्राह्मण और पंडित धर्म के लोगो द्वारा बहुत ही श्रद्धा से मनाया जाता है| परशुराम जयंती का यह पर्व हर साल 18 अप्रैल को मनाया जाता है| इस पावन पर्व के उपलक्ष में इस आर्टिकल में हम आपके लिए परशुराम जयंती स्पीच इन हिंदी फॉण्ट, परशुराम जयंती स्पीच माहिती, आदि की जानकारी देंगे|अगर आपको भी Parshuram Jayanti Speech in Hindi, Short Essay on Parshuram Jayanti, जय परशुराम जयंती स्पीच इन हिंदी, परशुराम जयंती स्पीच इन हिंदी फॉण्ट, आदि की जानकारी चाहिए तो इस पोस्ट की मदद ले सकते है|

Jai Parshuram Jayanti Speech 2018

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परशु’ प्रतीक है पराक्रम का। ‘राम’ पर्याय है सत्य सनातन का। इस प्रकार परशुराम का अर्थ हुआ पराक्रम के कारक और सत्य के धारक। शास्त्रोक्त मान्यता तो यह है कि परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं, अतः उनमें आपादमस्तक विष्णु ही प्रतिबिंबित होते हैं, परंतु मेरी मौलिक और विनम्र व्याख्या यह है कि ‘परशु’ में भगवान शिव समाहित हैं और ‘राम’ में भगवान विष्णु। इसलिए परशुराम अवतार भले ही विष्णु के हों, किंतु व्यवहार में समन्वित स्वरूप शिव और विष्णु का है। इसलिए मेरे मत में परशुराम दरअसल ‘शिवहरि’ हैं।

पिता जमदग्नि और माता रेणुका ने तो अपने पाँचवें पुत्र का नाम ‘राम’ ही रखा था, लेकिन तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्ना करके उनके दिव्य अस्त्र ‘परशु’ (फरसा या कुठार) प्राप्त करने के कारण वे राम से परशुराम हो गए। ‘परशु’ प्राप्त किया गया शिव से। शिव संहार के देवता हैं। परशु संहारक है, क्योंकि परशु ‘शस्त्र’ है। राम प्रतीक हैं विष्णु के।

विष्णु पोषण के देवता हैं अर्थात्‌ राम यानी पोषण/रक्षण का शास्त्र। शस्त्र से ध्वनित होती है शक्ति। शास्त्र से प्रतिबिंबित होती है शांति। शस्त्र की शक्ति यानी संहार। शास्त्र की शांति अर्थात्‌ संस्कार। मेरे मत में परशुराम दरअसल ‘परशु’ के रूप में शस्त्र और ‘राम’ के रूप में शास्त्र का प्रतीक हैं। एक वाक्य में कहूँ तो परशुराम शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का नाम है, संतुलन जिसका पैगाम है।

अक्षय तृतीया को जन्मे हैं, इसलिए परशुराम की शस्त्रशक्ति भी अक्षय है और शास्त्र संपदा भी अनंत है। विश्वकर्मा के अभिमंत्रित दो दिव्य धनुषों की प्रत्यंचा पर केवल परशुराम ही बाण चढ़ा सकते थे। यह उनकी अक्षय शक्ति का प्रतीक था, यानी शस्त्रशक्ति का। पिता जमदग्नि की आज्ञा से अपनी माता रेणुका का उन्होंने वध किया। यह पढ़कर, सुनकर हम अचकचा जाते हैं, अनमने हो जाते हैं, लेकिन इसके मूल में छिपे रहस्य को/सत्य को जानने की कोशिश नहीं करते।

परशुराम जयंती’ हिंदुओं का एक प्रसिद्द त्यौहार है। यह पर्व हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन (तृतीया) को मनाया जाता है। यह त्यौहार पुरे भारत में धूम-धाम से मनाया जाता है। अक्षय तृतीया का प्रसिद्द पर्व भी इसी दिन मनाया जाता है।

परशुराम ऋषि जमादग्नि और रेणुका के पुत्र थे। ऋषि जमादग्नि सप्तऋषि में से एक ऋषि थे। परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में अवतरित हुए थे। परशुराम दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘परशु’ अर्थात कुल्हाड़ी एवं ‘राम’। इस प्रकार परशुराम का अर्थ निकलता है- ‘कुल्हाड़ी के साथ राम’।

परशुराम जयंती के दिन उपवास के साथ-साथ सर्वब्राह्मण का जुलूस एवं सत्संग आदि का आयोजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किये गए पुण्य का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन शोभा यात्रा निकाली जाती हैं तथा जगह-जगह पूजा-अर्चना का आयोजन होता है।

parshuram ka jeevan parichay

Short Essay on Parshuram Jayanti

अक्सर छोटे बच्चो Kids को स्कूलों में परशुराम जयंती के बारे में लिखना होता है (परशुराम जयंती के ऊपर दस लाइन लिखें ) पढ़ाया जाता है तथा उसमे हर क्लास के बच्चे परशुराम जयंती पर निबंध, व परशुराम जयंती पर कविता in hindi for class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11 और class 12 इस तरह से इंटरनेट पर सर्च करते है व स्कूलों के प्रोग्राम व कम्पटीशन में भाग लेते है|

अगर आप ब्राह्मण दादा परशुराम की स्पीच के लिए हर साल 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 के लिए दादा परशुराम स्टेटस, Message, SMS, Quotes, परशूयराम बाबा इमेज, Whatsapp Status, भगवान परशुराम पर शायरी,Sayings, bhagwan parshuram images, Slogans, 120 Words Character तथा भाषा Hindi, English, Urdu, Punjabi, Bengali, Malayalam, Kannada, English, Marathi, Nepali, Tamil, Telugu, के Language Font के 3D Image, HD Wallpaper, Photos, Pictures, Pics, Greetings, Free Download जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

भगवान परशुराम वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन अवतरित हुए भगवान विष्णु के छठे अवतार थे। इन्हें विष्णु का आवेशावतार भी कहा जाता है क्योंकि इनके क्रोध की कोई सीमा नहीं थी। अपने पिता की हत्या के प्रतिशोध स्वरूप इन्हें हैहय वंशी क्षत्रियों के साथ 21 बार युद्ध करने व उनका समूल नाश करने के लिये जाना जाता है। अपने पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये इन्होंने अपनी माता सहित अपने सभी भाईयों का शीष धड़ से अलग कर दिया था। हालांकि उन्हें पुनर्जीवित करने का वरदान भी बाद में पिता जमदग्नि से मांगा। इन्हीं परशुराम को भगवान विष्णु के दसवें अवतार जो कि कल्कि के रूप में अवतरित होंगे का गुरु भी माना जाता है। भगवान रामायण से लेकर महाभारत तक भगवान परशुराम के शौर्य की गाथा बहुत ही रोमांचक है। परशुराम जयंती पर आइये जानते हैं उनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं।

सदियों नहीं युगों पुरानी बात है कि कन्नौज में गाधि नाम के राजा राज्य किया करते थे। उनकी कन्या रूपगुण से संपन्न थी जिसका नाम था सत्यवती। विवाहयोग्य होने पर सत्यवती का विवाह भृगु ऋषि के पुत्र ऋषिक के साथ हुआ। विवाहोपरांत जब ऋषि भृगु ने अपनी पुत्रवधु को वरदान मांगने के लिये कहा तो सत्यवती ने अपनी माता के लिये पुत्र की कामना की। भृगु ऋषि ने दो चरु पात्र देते हुए कहा कि इन दोनों पात्रों में से एक तुम्हारे लिये है और दूसरा तुम्हारी माता के लिये जब तुम दोनों ऋतु स्नान कर लो तो पुत्र इच्छा लेकर पीपल के वृक्ष से तुम्हारी मां आलिंगन करें और तुम गूलर के वृक्ष से। तत्पश्चात अपने-अपने चरु पात्र का सावधानी से सेवन करना। तुम्हारी कामना पूर्ण होगी। सत्यवती की मां को जब पता चला कि उत्तम संतान प्राप्ति के लिये भृगु ने सत्यवती को चरु पात्र दिये हैं तो उसके मन में पाप आ गया और उसने सत्यवती के पात्र से अपना पात्र बदल दिया। समय आने पर दोनों ने उनका सेवन भी कर लिया लेकिन सेवन करते ही अपनी योगमाया से भृगु सारा मामला जान गये। इसमें सत्यवती का कोई दोष नहीं था उन्होंने सत्यवती से कहा कि हे पुत्री तुम्हारी माता ने तुमसे छल कर तुम्हारे चरु पात्र का सेवन कर लिया तुम्हारी माता वाले पात्र को तुमने ग्रहण किया। अब तुम्हारी संतान जन्म से भले ब्राह्मण हो लेकिन उसका आचरण एक क्षत्रिय जैसा होगा।

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