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International Anti-Corruption Day Speech in Hindi & English – अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक दिवस पर भाषण

International anti corruption day 2018: भ्रष्टाचार से ज्यादातर गरीब व आम लोगों को परेशानी होती है | भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस पूरी दुनिया में 9 दिसंबर को मनाया जाता है | भ्रष्टाचार एक ऐसी समस्या है जिससे आज के समय में हर कोई व्यक्ति कहीं न कहीं ग्रस्त है | यह समस्या पूरे विश्व में फैली हुई है | भ्रष्टाचार की गतिविधियों में दोनों ही तरह के लोग चाहे वो बड़े स्तर के राजनेता हों या फिर छोटे स्तर पर अलग-अलग विभाग में काम कर रहे रहे डॉक्टर, पुलिस कर्मचारी, वकील आदि शामिल होते हैं | इसी समस्या के चलते देश का आर्थिक व सामाजिक विकास नहीं हो पाता है | इस समस्या से निजात पाने के लिए हर किसी को प्रयास करना होगा की न तो वह खुद भ्रष्टाचार में शामिल हो न ही किसी को होने दे |

International anti-corruption day speech

International anti corruption day 2018 theme: इस साल की अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस की थीम है – “Say No to Corruption-Every No Counts” | आइये अब हम आपको वर्ल्ड एंटी करप्शन डे स्पीच, Speech on anti-corruption day, international anti-corruption speech किसी भी भाषा जैसे Hindi, भारतीय नौसेना दिवस पर निबंध, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language Font , 100 words, 150 words, 200 words, 400 words में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|

जैसा कि हम सभी जानते है कि भ्रष्टाचार बहुत बुरी समस्या है। इससे व्यक्ति के साथ-साथ देश का भी विकास और प्रगति रुक जाता है। ये एक सामाजिक बुराई है जो इंसान की सामाजिक, आर्थिक और बौद्धिक क्षमता के साथ खेल रहा है। पद, पैसा और ताकत के लालच की वजह से ये लगातार अपनी जड़े गहरी करते जा रहा है। अपनी व्यक्तिगत संतुष्टि के लिये शक्ति, सत्ता, पद, और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग है भ्रष्टाचार। सूत्रों के मुताबिक, पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार के मामले में भारत का स्थान 85वाँ है।

भ्रष्टाचार सबसे अधिक सिविल सेवा, राजनीति, व्यापार और दूसरे गैर कानूनी क्षेत्रों में फैला है। भारत विश्व में अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिये प्रसिद्ध है लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से इसको क्षति पहुँच रही है। इसके लिये सबसे ज्यादा जिम्मेदार हमारे यहाँ के राजनीतिज्ञ है जिनको हम अपनी ढ़ेरों उम्मीदों के साथ वोट देते है, चुनाव के दौरान ये भी हमें बड़े-बड़े सपने दिखाते है लेकिन चुनाव बीतते ही ये अपने असली रंग में आ जाते है। हमे यकीन है कि जिस दिन ये राजनीतिज्ञ अपने लालच को छोड़ देंगे उसी दिन से हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगा।

हमें अपने देश के लिये पटेल और शास्त्री जैसे ईमानदार और भरोसेमंद नेता को चुनना चाहिए क्योंकि केवल उन्हीं जैसे नेताओं ने ही भारत में भ्रष्टाचार को खत्म करने का काम किया। हमारे देश के युवाओं को भी भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये आगे आना चाहिये साथ ही बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिये किसी ठोस कदम की आवश्यकता है।

भ्रष्टाचार निरोधक दिवस हिंदी भाषण

भ्रष्टाचार एक जहर है जो देश, संप्रदाय, और समाज के गलत लोगों के दिमाग में फैला होता है। इसमें केवल छोटी सी इच्छा और अनुचित लाभ के लिये सामान्य जन के संसाधनों की बरबादी की जाती है। इसका संबंध किसी के द्वारा अपनी ताकत और पद का गैरजरुरी और गलत इस्तेमाल करना है, फिर चाहे वो सरकारी या गैर-सरकारी संस्था हो। इसका प्रभाव व्यक्ति के विकास के साथ ही राष्ट्र पर भी पड़ रहा है और यही समाज और समुदायों के बीच असमानता का बड़ा कारण है। साथ ही ये राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक रुप से राष्ट्र के प्रगति और विकास में बाधा भी है।

International anti-corruption day speech

हम सभी भ्रष्टाचार से अच्छे तरह वाकिफ है और ये अपने देश में नई बात नहीं है। इसने अपनी जड़ें गहराई से लोगों के दिमाग में बना ली है। ये एक धीमे जहर के रुप में प्राचीन काल से ही समाज में रहा है। ये मुगल साम्राज्य के समय से ही मौजूद रहा है और ये रोज अपनी नई ऊँचाई पर पहुँच रहा है साथ ही बड़े पैमाने पर लोगों के दिमाग पर हावी हो रहा है। समाज में सामान्य होता भ्रष्टाचार एक ऐसा लालच है जो इंसान के दिमाग को भ्रष्ट कर रहा है और लोगों के दिलों से इंसानियत और स्वाभाविकता को खत्म कर रहा है।

भ्रष्टाचार कई प्रकार का होता है जिससे अब कोई भी क्षेत्र छुटा नहीं है चाहे वो शिक्षा, खेल, या राजनीति कुछ भी हो। इसकी वजह से लोग अपनी जिम्मेदारियों को नहीं समझते। चोरी, बेईमानी, सार्वजनिक संपत्तियों की बरबादी, शोषण, घोटाला, और अनैतिक आचरण आदि सभी भ्रष्टाचार की ही ईकाई है। इसकी जड़े विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में व्याप्त है। समाज में समानता के लिये अपने देश से भ्रष्टाचार को पूरी तरह से मिटाने की जरुरत है। हमें अपनी जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठावान होना चाहिये और किसी भी प्रकार के लालच में नहीं पड़ना चाहिये।

Short speech on 9 december international anti-corruption day

There have been many factors that led to the formation of a common international platform to fight corruption and observe a day dedicated to the cause to create awareness among the members of government and general public. Corruption is the most potent threat to the United Nations sustainable development goals of 2030. The total amount of money that is lost due to corruption is disturbing and requires immediate preventive measures if the sustainable development goal is to be achieved. According to an annual estimate by the United Nations, 3.6 trillion dollars are paid in bribe and stolen globally through corruption; which equals to more than 5% of global GDP. The effects of corruption are long lasting as generations after generations face poverty, deprivation, unemployment and illiteracy; which have been the results of corruption. Corruption drains the economy of a nation, making the poor getting poorer and vulnerable in the absence of basic amenities like health, education, water, electricity etc.

Corruption is the major hindrance to the growth of a developing or a developed nation. Corruption restrains growth and also deteriorates law and order situation. The money shunted by illegal means results in deteriorating health, education and falling general economy of a nation. It also restricts the industrial growth by discouraging new startups; which find it impossible to do business because of increased cost due to corruption.

If left unnoticed the corruption turns the bureaucracy of a state into the breeding ground for corrupt and illegal practices; where the whole motive behind the existence of bureaucracy becomes to solicit bribe by providing individual benefits. Initially, only bribery and bureaucratic favors were considered as corruption; but, lately a broader perspective has been adopted. Today along with giving and taking bribe, influencing electoral process, disturbing law and order, drug trafficking, human trafficking, giving unjust favor even without money and influencing the judicial process are also considered as crime.

A common unison of nations against international corruption was much needed, mainly in the cases of high level corruption; where, money or assets thus collected through corrupt practices are kept in a foreign nation where the law of the land permits it. The UNCAC provides an agreement for the recovery of such asset and its return to the parent nation.

The international anti-corruption day speech in Hindi

सारी दुनिया जानती है कि भ्रष्टाचार अपने देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. लेकिन सबको यह भी मालूम है कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना बहुत आसान नहीं है. सरकार ने बहुत सारे ऐसे विभाग बना रखे हैं जिनका काम भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है लेकिन देखा यह गया है कि भ्रष्टाचार को रोकने की कोशिश करने वाले विभागों के अफसर उसी भ्रष्टाचार के आशीर्वाद से बहुत ही संपन्न हो जाते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि लगभग सभी भ्रष्टाचारी अपनी अपनी छतों पर खड़े हो कर बांग देते रहते हैं कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करना ज़रूरी है लेकिन उनकी पूरी कोशिश यही रहती है कि चोरी-बे ईमानी का धंधा चलता रहे. एक बात और भी बहुत सच है कि सभी अफसर भ्रष्ट नहीं होते, कुछ बहुत ही ईमान दार होते हैं. उत्तर प्रदेश जैसे भ्रष्ट अफसर शाही वाले राज्य में भी कुछ ऐसे ईमानदार अफसर हैं कि कि वे दामन निचोड़ दें तो अमृत हो जाए. लेकिन वे संख्या में बहुत कम हैं लेकिन हैं ज़रूर |

उत्तर प्रदेश के इन्हीं ईमानदार अफसरों ने अपने ही बीच के भ्रष्ट अफसरों की लिस्ट बनायी थी, लेकिन कुछ कर नहीं सके क्योंकि उन्हीं भ्रष्टतम अफसरों में से कुछ तो मुख्य सचिव की गद्दी तक पंहुच गए. राज्य में भ्रष्टाचार कम करने की कोशिश कर रहे ऐसे ही एक अफसर, विजय शंकर पाण्डेय ने अपने एक ताज़ा लेख में लिखा है कि आई ए एस अफसर की संपत्ति के हर पैसे का हिसाब होना चाहिए. निजी जीवन में भी श्री पाण्डेय ईमान दार हैं. लेकिन कुछ नहीं कर पा रहे हैं |

बहर हाल एक खुशी की खबर है कि कुछ अवकाश प्राप्त सिविल, पुलिस और न्यायपालिका के अधिकारियों ने एक नयी पहल शुरू की है जिसके तहत सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार को ख़त्म करने में मदद मिलेगी. इन अधिकारियों ने एक सार्वजनिक अपील भी जारी की है और आम जनता से कहा है कि अगर सब चौकन्ना रहें तो अपने देश की संपत्ति को बे-ईमान अफसरों और नेताओं से बचाया जा सकता है |

अपील में कहा गया है कि मौजूदा सिस्टम बिलकुल बेकार हो चुका है. क्योंकि भ्रष्टाचार से लड़ने की अपनी विश्वसनीयता गंवा चुका है. जिन लोगों को ज़िम्मेदारी के पदों पर बैठाया गया है ,उनमें बहुत सारे लोग भ्रष्ट राजनीतिक नेताओं के सामने गिडगिडाने लगते हैं. यह बिलकुल गलत बात है. इस पर भी रोक लगानी चाहिए. भ्रष्टाचार और अपराध के बीच बहुत ही गहरा सम्बन्ध है. और दोनों ही एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं. इन दोनों के घाल मेल की वजह से ही फासिज्म का जन्म होता है जिसमें लोक तंत्र को पूरी तरह से दफ़न कर देने की ताक़त होती है. इन ईमानदार अफसरों का कहना है कि अगर अपने मुल्क में लोक तंत्र को जिंदा रखना है कि भ्रष्टाचार को जड़ से तबाह करना होगा |

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