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वाल्मीकि जयंती श्लोक 2018 – Maharishi Valmiki Jayanti Shloka in Hindi, Sanskrit & Marathi with Images for WhatsApp & Facebook

Valmiki jayanti 2018 : वाल्मीकि जी रामायण जैसे पावन ग्रन्थ के रचियता थे | संस्कृत का पहला श्लोक इन्ही के द्वारा लिखा गए था | 24 अक्टूबर की आश्विन मॉस की पूर्णिमा को इनका जन्म हुआ था जिसे हिन्दू धर्म केलिन्डर के अनुसार वाल्मीकि जयंती कहा जाता है | वाल्मीकि जी को श्लोक का जन्मदाता भी कहा जाता है | इनके जीवन से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है | यह जानकारी हिंदी में, संस, साहरी, स्टेटस, एसएमएस हिंदी फॉण्ट व मराठी आदि जिन्हे आप फेसबुक, व्हाट्सप्प पर अपने दोस्त व परिवार के लोगो के साथ साझा कर सकते हैं|

वाल्मीकि जयंती श्लोक

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उत्साह बड़ा बलवान होता है;
उत्साह से बढ़कर कोई बल नहीं है । उत्साही
पुरुष के लिए संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं है ।
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मनुष्य जैसा भी अच्छा या बुरा कर्म करता है,
उसे वैसा ही फल मिलता है । कर्त्ता को अपने कर्म का फल
अवश्य भोगना पड़ता है ।
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Valmiki Jayanti Shloka


सत्य ही संसार में ईश्वर है;
धर्म भी सत्य के ही आश्रित है; सत्य ही समस्त
भव - विभव का मूल है; सत्य से बढ़कर और कुछ नहीं है ।
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उत्साह हीन, दीन और शोकाकुल मनुष्य
के सभी काम बिगड़ जाते हैं , वह घोर विपत्ति में फंस जाता है ।
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Valmiki Jayanti Slokas in Hindi

Valmiki Jayanti Shlok


क्रोध की दशा में मनुष्य को कहने और न कहने
योग्य बातों का विवेक नहीं रहता । क्रुद्ध मनुष्य कुछ भी कह
सकता है और कुछ भी बक सकता है । उसके लिए कुछ भी
अकार्य और अवाच्य नहीं है ।
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पराया मनुष्य भले ही गुणवान् हो तथा स्वजन सर्वथा
गुणहीन ही क्यों न हो, लेकिन गुणी परजन से गुणहीन स्वजन ही
भला होता है । अपना तो अपना है और पराया पराया ही रहता है ।
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Valmiki Jayanti Slokas


किसी को जब बहुत दिनों तक अत्यधिक दुःख भोगने
के बाद महान सुख मिलता है तो उसे विश्वामित्र मुनि की भांति समय
का ज्ञान नहीं रहता - सुख का अधिक समय भी थोड़ा ही जान पड़ता है ।
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धर्म से ही धन, सुख तथा सब कुछ प्राप्त
होता है । इस संसार में धर्म ही सार वस्तु है ।
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Valmiki Jayanti Shloka in Marathi


त्रासदायक डीन मित्राला समर्थन देणारा आणि
चांगला खरा एकमात्र चांगला आहे जो कुमगगामी बंधूला मदत करतो.
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श्रीमंत असो किंवा गरीब, दुःखी किंवा आनंदी,
निष्पाप किंवा निष्पाप - मित्रांमुळे मित्रांना सर्वात मोठा आधार असतो.
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Valmiki Jayanti Slokas in Hindi


मित्रता करना सहज है लेकिन उसको निभाना कठिन है ।
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स्वभाव का अतिक्रमण कठिन है ।
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Valmiki Jayanti Slokas in Sanskrit


धर्म-धर्मादर्थः प्रभवति धर्मात्प्रभवते सुखम् ।
धर्मण लभते सर्वं धर्मप्रसारमिदं जगत् ॥
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सत्य -सत्यमेवेश्वरो लोके सत्ये धर्मः सदाश्रितः ।
सत्यमूलनि सर्वाणि सत्यान्नास्ति परं पदम् ॥
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Valmiki Jayanti Slokas in Tamil


துக்கம் மனிதனின் துணிச்சலை அழிக்கிறது.
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மகிழ்ச்சி எப்போதும் நீடிக்கும்.
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Valmiki Jayanti Slokas in English


Happiness does not increase happily.
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Happiness does not last forever.
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Valmiki Jayanti Shloka in Sanskrit


अपना-पराया-गुणगान् व परजनः स्वजनो निर्गुणोऽपि वा ।
निर्गणः स्वजनः श्रेयान् यः परः पर एव सः ॥
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उत्साह-उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम् ।
सोत्साहस्य हि लोकेषु न किञ्चदपि दुर्लभम् ॥
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